Fri Nov 6, 2026 | 07:26 PM IST

Medically Reviewed by Dr Sharadhi C , Consultant – Psychiatrist

दिवाली पर पटाखों के तेज धमाकों से सहम जाता है बच्चा? डॉक्टर से जानें पेरेंट्स के लिए 5 टिप्स

दिवाली पर कुछ बच्चे पटाखों की आवाज से डरने लगते हैं और इतना सहम जाते हैं कि इसका असर दिवाली के बाद तक रहता है। क्या इससे बच्चों की मेंटल हेल्थ पर असर पड़ सकता है? ऐसे में पेरेंट्स को क्या करना चाहिए? जानने के लिए यह लेख जरूर पढ़ें।
दिवाली पर पटाखों के तेज धमाकों से सहम जाता है बच्चा? डॉक्टर से जानें पेरेंट्स के लिए 5 टिप्सदिवाली पर पटाखों के तेज धमाकों से सहम जाता है बच्चा? डॉक्टर से जानें पेरेंट्स के लिए 5 टिप्स

दिवाली के त्योहार पर पटाखों की गूंज से न सिर्फ हवा में प्रदूषण फैलता है, बल्कि ध्वनि प्रदूषण भी गंभीर रूप हो जाता है। कई बार तेज आवाज के पटाखे जलने से आस-पास के बच्चे तेज रोने लगते हैं या फिर कान पर हाथ रख लेते हैं। ऐसे में कुछ बच्चे तो इतना सहम जाते हैं कि उन्हें समझाना तक मुश्किल हो जाता है। ऐसे में कई बार पेरेंट्स के मन में सवाल उठता है कि आखिर बच्चा पटाखों की आवाज से इतना क्यों डरता है? क्या तेज आवाज का उसकी मेंटल हेल्थ पर असर पड़ सकता है? इस बारे में जानने के लिए हमने Dr. Sharadhi C, Consultant, Psychiatry, Aster CMI Hospital, Bangalore से बात की। उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों का तेज और अचानक आने वाली आवाजों से डरना एक नेचुरल प्रतिक्रिया हो सकती है। ऐसे में उन्हें डांटने के बजाय प्यार से समझाएं।

बच्चे पटाखों की तेज आवाज से क्यों डरते हैं?

Dr. Sharadhi C कहती हैं, “छोटे बच्चों का दिमाग और उनकी इमोशनल समझ अभी ग्रो ही कर रही होती है। ऐसे में जब उन्हें पटाखों की तेज आवाज अचानक सुनाई देती हैं, तो उन्हें समझ नहीं आता कि आवाज कहां से आ रही है और ऐसा क्यों हो रहा है। इस वजह से बच्चा घबरा जाता है और कुछ बच्चे रोने लगते हैं, कान बंद कर लेते हैं, माता-पिता से चिपक जाते हैं या घर के अंदर कही छिपने की कोशिश करते हैं। जो बच्चे आवाज के प्रति ज्यादा सेंसिटिव होते हैं, उन्हें पटाखों की आवाज से ज्यादा परेशानी हो सकती है। ऐसे में पेरेंट्स को यह समझना चाहिए कि बच्चे का डर कोई जिद नहीं है।”

पटाखों की तेज आवाज का बच्चों पर क्या असर हो सकता है?

Dr. Sharadhi C का कहना है कि पटाखों की तेज आवाज से बच्चों की सुनने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। कई बार बच्चों को कान में सीटी जैसी आवाज सुनाई देने लगती है और वह आवाज के प्रति बहुत ज्यादा सेंसिटिव हो जाते हैं। कुछ बच्चे तेज आवाज के कारण एंग्जाइटी महसूस करने लगते हैं और इससे उनकी नींद पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। कुछ बच्चे बाद में भी घर में किसी तेज आवाज से घबरा जाते हैं। इसलिए दिवाली के तेज पटाखों के बीच छोटे बच्चों को समझाना और प्यार से समझाना जरूरी हो जाता है।

CDC के मुताबिक, अगर सुनने की क्षमता में थोड़ी भी कमी आती है, तो बच्चों को बोलने, भाषा को समझने, बातचीत करने और क्लास में सीखने पर नेगेटिव असर पड़ सकता है। अगर बहुत ज्यादा शोर या तेज धमाका होता है, तो इससे बच्चे की सुनने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।

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दिवाली से पहले बच्चे को पटाखों की आवाज के लिए कैसे तैयार करें?

Dr. Sharadhi C कहती हैं कि अगर बच्चे आवाज प्रति संवेदनशील है, तो पेरेंट्स को कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1. बच्चे को पहले ही पटाखों की आवाज के बारे में बताएं

दिवाली शुरू होने से पहले बच्चे को प्यार से बताएं कि त्योहार के दौरान पटाखों की तेज आवाज सुनाई दे सकती हैं। ऐसे में उन्हें घबराने के बजाय उनके पास आ सकते हैं। इससे बच्चे को सहज महसूस हो सकता है। बच्चे को भरोसा दिलाना जरूरी है कि वह तेज आवाज के बीच भी सेफ है और आप उसके साथ हैं।

2. पटाखों की तेज आवाज में बच्चे को घर के अंदर रखें

अगर आस-पास बहुत ज्यादा पटाखे जलाए जा रहे हैं, तो छोटे बच्चों को बाहर ले जाने से बचें। घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखने से बाहर की आवाज कुछ कम हो सकती है। ऐसे समय में बच्चे को घर के किसी शांत कमरे में रखें और उसे कुछ क्रिएटिव चीजें या उसकी मनपसंद चीज करने दें। इससे उसका ध्यान भटक सकता है।

3. जरूरत पड़ने पर कानों पर हियर प्रोटेक्शन लगाएं

अगर बच्चे को पटाखों की आवाज से ज्यादा परेशानी होती है, तो उम्र के अनुसार सही फिटिंग वाले कानों को ढकने वाले हियरिंग प्रोटेक्शन का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें। इसके साथ यह भी ध्यान रखें कि ईयर प्रोटेक्शन लगाने के बाद उसे पटाखों के पास न लेकर जाएं। ऐसे में भी तेज आवाज से दूरी बनाए रखना जरूरी है।

4. बच्चे के रूटीन को न बदलें

दिवाली के दौरान घर में देर रात तक फेस्टिव माहौल होने के कारण बच्चों की नींद पूरी नहीं होती। अगर बच्चे आवाज के प्रति बहुत ज्यादा सेंसिटिव है, तो उनकी नींद पूरी करने दें। इसलिए बच्चे को समय पर सुलाएं। इससे उसे सेफ महसूस होगा। इससे आंखें थकी हुई महसूस नहीं होगी और न ही चिड़चिड़ापन रहेगा। 

5. बच्चे के साथ जबरदस्ती न करें

कुछ पेरेंट्स बच्चों को जबरदस्ती तेज पटाखों के बीच लेकर जाते हैं, ताकि वे आवाज से न डरें, लेकिन इससे बच्चा और ज्यादा सहम सकता है। इससे बच्चे में एंग्जायटी बढ़ सकती है और बाद भी बच्चे को इससे परेशानी हो सकती है। कई बच्चे काफी सालों तक तेज आवाज सुनते ही डरने लगते हैं।

निष्कर्ष
दिवाली पर पटाखों की तेज आवाज से बच्चे डरने लगे, तो उसे न तो डांटें और न ही उसे जबरदस्ती पटाखों के बीच लेकर जाएं। दिवाली के समय पटाखों से बचाव के लिए बच्चे को प्यार से समझाएं। कई बार डांटने से बच्चे में एंग्जायटी बढ़ सकती है। इसलिए दिवाली के पटाखों के शोर के बीच बच्चे को प्यार से संभालें।

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FAQ

  •  क्या घबराए हुए बच्चे को शांत करने के लिए कोई कफ सिरप या नींद की दवा दी जा सकती है?

    डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चे को किसी भी प्रकार की सेडेटिव, एंटी-एलर्जिक या नींद की दवा देना जानलेवा हो सकता है। 
  • क्या नवजात शिशु के कमरे में खिड़की के शीशे के वाइब्रेशन से भी नुकसान हो सकता है?

    इससे शिशु गहरी नींद से अचानक चौंककर उठ सकता है और जोर-जोर से रोने लग सकता है। 

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Nov 06, 2026 19:23 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Sharadhi C