‘आज तो मैं डिप्रेशन में चला गया…’ ‘मुझे बहुत डिप्रेशन हो रहा है..’ ऐसी बातें कई बार सुनने को मिल जाते हैं। दरअसल, अगर कोई काम या बात मन मुताबिक नहीं होती, तो मन कुछ समय के लिए उदास हो जाता है या कुछ दिनों तक मन उदास हो सकता है। ऐसे समय में अकेले रहने का मन करता है और कई बार रोना भी आ जाता है। उस समय की उदासी को लोग डिप्रेशन मान लेते हैं लेकिन इसका मतलब हर बार डिप्रेशन नहीं होता। इस बारे में हमने माइंडवेल काउंसल की संस्थापक, काउंसलर और फैमिली थेरेपिस्ट अर्चना सिंघल (Archana Singhal, Counsellor & Family Therapist and Founder of Mindwell Counsel) से बात की। उन्होंने बताया कि हर उदासी डिप्रेशन नहीं होती, वरना हर सोमवार की सुबह काम पर जाने से पहले हम सभी डिप्रेशन के ही शिकार होते। उदासी किसी घटना की वजह से होती है, जो कुछ समय बाद चली जाती है।
मन उदास होना
Archana Singhal का कहना हैं, “उदासी किसी घटना या परिस्थिति के कारण आती है, जो समय बीतने के साथ या हालात बेहतर होने पर ठीक हो जाती है। ऐसे समय में अक्सर लोग अकेला रहना पसंद करते हैं, लेकिन समझने वाली बात यह है कि उदासी बस कुछ दिन की होती है।”
NCBI के मुताबिक, अगर निराशा, लाचारी या दुख जताना है, तो उदासी भावनात्मक अभिव्यक्ति है। इसके लक्षण और कारण कुछ ऐसे महसूस किए जा सकते हैं।
- लक्षण - अगर भौंहों का अंदरूनी हिस्सा ऊपर और पास आने लगे, होंठों के कोनों का नीचे की ओर झुकना, ठुड्डी का ऊपर उठना और कभी-कभी आंखों से आंसू आना।
- कारण - जीवन आए बदलावों या तनाव के साथ तालमेल न बिठा पाना, किसी के जाने का दुख या किसी शारीरिक बीमारी के कारण परेशान होना।
- असर - हालांकि, उदासी एक नकारात्मक भाव है, लेकिन यह दूसरों में सहानुभूति जगा सकता है।
Difference between sadness and depression
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डिप्रेशन
Archana Singhal कहती हैं, “डिप्रेशन एक क्लिनिकल कंडीश है, जिसमें किसी का काम में मन लगता, मोटिवेशन कम हो जाती है, नींद और पाचन में बदलाव, फोकस की परेशानी और रोजमर्रा के काम होने लगते हैं।”
CDC के अनुसार, अगर उदासी दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक बना रहता है और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी होती है, तो ये डिप्रेशन का संकेत हो सकता है। इसके लक्षणों की पहचान ऐसे की जा सकती है, लेकिन सभी में यही लक्षण हो, यह जरूरी नहीं है।
- लगातार उदासी या खालीपन महसूस होना - अगर लगभग सारा दिन मन उदास, खाली या निराशा महसूस हो रहा है और स्थिति लगातार बनी रही है, तो यह डिप्रेशन का लक्षण हो सकता है।
- पसंद की चीजें करने का मन न करना - जो काम पहले अच्छे लगते थे, उनमें अब मन नहीं लगता। दोस्तों से मिलना और कोई शौक पूरा करना बोझ लगने लगे, तो यह बदलाव डिप्रेशन में दिखाई दे सकता है।
- नींद का पैटर्न बदलना - कुछ लोगों को डिप्रेशन के दौरान नींद आने में परेशानी होती है। वहीं कुछ लोगों को जरूरत से ज्यादा नींद आने लगती हैं।
- भूख या वजन में बदलाव होना - डिप्रेशन का असर खाने पर भी पड़ सकता है। कुछ लोगों को बिल्कुल भूख नहीं लगती, जबकि कुछ लोग पहले से ज्यादा खाने लग सकता है। इससे वजन कम या बढ़ना हो सकता है।
- हर समय थकान और एनर्जी की कमी - पूरी रात सोने के बाद भी एनर्जी महसूस नहीं होती या थकान लगने लगे, तो डिप्रेशन से जुड़े लक्षण शामिल हो सकता है।
- ध्यान लगाने और फैसले लेने में परेशानी - डिप्रेशन के मरीज काम पर फोकस नहीं कर पाते, चीजें याद नहीं रख पाते या छोटे-छोटे फैसले लेने में भी परेशानी हो सकती है।
डॉक्टर से कब बात करना जरूरी है?
Archana Singhal कहती हैं कि अगर करीब दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय से कई लक्षण दिखाई दें और उसका असर काम, पढ़ाई, रिश्तों या रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है, तो एक्सपर्ट से जरूर बात करनी चाहिए। अगर कोई खुद को नुकसान पहुंचाने या आत्महत्या से जुड़े विचार आने लगे, तो इसे बिल्कुल हल्के में न लें। ऐसी कंडीशन में तुरंत एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए और उस व्यक्ति को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।
निष्कर्ष
अगर व्यक्ति को कुछ दिन की उदासी हो, तो उन परिस्थितियों को ठीक करने की कोशिश करनी चाहिए, जबकि डिप्रेशन में व्यक्ति के रोजमर्रा के काम प्रभावित हो सकते हैं। अगर लगातार यही स्थिति बनी रहे, तो एक्सपर्ट से जरूर मदद लेनी चाहिए, ताकि डिप्रेशन का समय पर इलाज हो सके।
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FAQ
क्या बिना किसी बुरे हादसे या नुकसान के भी अचानक डिप्रेशन हो सकता है?
उदासी के पीछे हमेशा कोई न कोई वजह होती है, लेकिन डिप्रेशन बिना किसी बाहरी कारण के भी न्यूरोट्रांसमीटर के असंतुलन या जेनेटिक कारणों से शुरू हो सकता है।क्या वर्कआउट या एक्सरसाइज करने से डिप्रेशन में राहत मिल सकती है?
नियमित वॉक, योग या एक्सरसाइज से दिमाग में एंडोर्फिन और सेरोटोनिन हार्मोंस का लेवल बढ़ता है। यह हल्के से मध्यम डिप्रेशन में रिकवरी को तेज करने में मदद करता है।
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Oct 08, 2026 19:02 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Archana Singhal
