क्या आपके साथ भी ऐसा होता है, जब पूरा दिन काम करने के बाद जब थककर बिस्तर पर जाते हैं या फोन हाथ में लेते हैं, तो सिर्फ रील स्क्रॉल करते रहते हैं? या फिर परिवार के सदस्यों के कुछ कहने पर चिढ़ होने लगती हैं, गुस्सा आता है, तो मान लिया जाता है कि शारीरिक थकावट के कारण ऐसा हो रहा है, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। कई बार थकान शरीर से ज्यादा दिमाग पर हावी होती है। World Mental Health Day के मौके पर हमने माइंडवेल काउंसल की संस्थापक, काउंसलर और फैमिली थेरेपिस्ट अर्चना सिंघल (Archana Singhal, Counsellor & Family Therapist and Founder of Mindwell Counsel) से बात की। उन्होंने बताया कि शरीर की थकान और दिमाग की थकान को पहचानना जरूरी है, क्योंकि दोनों में आराम की जरूरत अलग हो सकती है।
शरीर में थकान के लक्षण
Archana Singhal समझाती है कि जब शरीर थकता है, तो आराम करने की जरूरत होती है। जब शारीरिक थकावट होती है, तो शरीर में ये लक्षण दिखाई दे सकते है।
- लगातार कमजोरी और एनर्जी की कमी होना
- मांसपेशियों में दर्द और पीड़ा होना
- पैर और आंखों का थकना
- बार-बार सुस्ती महसूस होना और उबासी आना
- रोजाना के काम करते समय जल्दी सांस फूलना और कमजोरी महसूस होना
मानसिक थकावट के लक्षण
Archana Singhal कहती हैं कि मानसिक थकान में ध्यान लगाने, फैसले लेने और अपने इमोशंस को संभालने में दिक्कत हो सकती है। ऐसे में ऑफिस या काम से जुड़ी बातें सोचने या याद करने के बजाय दिमाग को फोन में उलझा लेते हैं और सोचते हैं कि आराम कर रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं होता। इसलिए इन लक्षणों पर ध्यान देने की जरूरत है।
- ध्यान लगाने में परेशानी होना - अगर किताब पढ़ते समय एक ही बात को दोबारा पढ़ना पड़े या एक ही काम को दोबारा करना पड़े, तो हो सकता है कि यह मानसिक थकावट हो।
- छोटी बातों पर चिढ़ जाना - पहले जिन बातों से खास फर्क नहीं पड़ता था, वही अब परेशान करने लगें, तो स्ट्रेस और थकान पर ध्यान देने की जरूरत है। चिड़चिड़ापन, बेचैनी और काम करने का मन न होना मानसिक थकान के साथ दिख सकते हैं।
- काम टालते रहना - अगर कोई जरूरी काम को भी बार-बार टालता रहे या फिर काम करने का मन ही न करे और ऐसा लगातार हो रहा हो, तो यह दिमाग की थकने का संकेत हो।
- दिमाग का भारी महसूस होना - अगर सोचने की रफ्तार धीमा हो गई हो, किसी समस्या का हल निकालने या फैसला लेने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही हो, तो यह दिमाग की थकावट हो सकती है।
- नींद और भूख में बदलाव - जब दिमाग थका होता है, तो नींद आने में परेशानी हो सकती है या रात में बार-बार आंख खुल जाती है। कई लोग बहुत ज्यादा खाने लगते हैं, तो कुछ कम खाना शुरू कर देते हैं। अगर खाने की आदतों और नींद के पैटर्न में बदलाव हो, तो मानसिक थकान का संकेत हो सकता है।
mental stress or physical stress
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मानसिक थकान के कारण
NHS के अनुसार, मानसिक थकावट के कई कारण हो सकते हैं।
- पर्याप्त नींद न लेना
- बैलेंस्ड डाइट न लेना
- स्ट्रेस या डिप्रेशन होना
- हार्मोनल बदलाव जैसे प्रेग्नेंसी, प्यूबर्टी या मेनोपॉज होना
- कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी कुछ समय के लिए मेंटल थकान महसूस हो सकती है।
मानसिक और शारीरिक थकान में क्या फर्क है?
Archana Singhal बताती हैं कि कई लोग मानसिक थकावट को शरीर की थकान समझ लेते हैं, क्योंकि इन दोनों में बहुत छोटा सा अंतर है। शरीर की थकान मांसपेशियों और ताकत से जुड़ी होती है। इसे आराम करके कम किया जा सकता है। वहीं, मानसिक थकान में फोकस की कमी और काम में मन न लगना जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसके लिए व्यक्ति को सिर्फ आराम करने की जरूरत नहीं होती, बल्कि उसे स्ट्रेस के कारणों को दूर करना जरूरी है।
मानसिक थकान से राहत पाने के तरीके
NHS के मुताबिक, अगर लगातार मानसिक थकान हो रही है, तो अपने रोजाना के कामों पर भी ध्यान देना जरूरी होता है।
- बहुत देर तक भूखे रहने या दिनभर अनियमित तरीके से खाने से बचना चाहिए।
- थकान होने पर एक्सरसाइज करने का मन न करे, तो भी हल्का वॉक करना फायदेमंद हो सकता है।
- रोजाना लगभग एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करें।
- स्ट्रेस को कम करने के लिए म्यूजिक सुनना, किताब पढ़ना, योग करना या फिर दोस्तों के साथ बिताना मददगार हो सकता है।
- चाय, कॉफी और एनर्जी ड्रिंक्स की मात्रा को कम करने की कोशिश करें।
- शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है। इसलिए दिनभर फ्लूड लेते रहें।
- अगर स्ट्रेस या एंग्जायटी हो रही है, तो एक्सपर्ट से काउंसलिंग लें।
निष्कर्ष
कभी-कभी थकान होना सामान्य है, लेकिन अगर यह कई हफ्तों से बनी हुई है और रोजाना के काम पर असर डालने लगे, तो इसे नजरअंदाज न करें। लगातार थकान का कारण दिमाग को आराम न देना हो सकता है। इसलिए फोकस करने में परेशानी हो या फैसले लेने में दिक्कत हो, तो अपनी मेंटल हेल्थ पर जरूर ध्यान दें।
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FAQ
क्या शारीरिक थकान आगे चलकर मानसिक थकान में बदल सकती है?
जब शरीर लगातार बहुत ज्यादा थकावट या दर्द से गुजरता है, तो दिमाग पर दबाव पड़ता है। लंबे समय तक बना शारीरिक तनाव दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन के संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे मानसिक थकान और चिड़चिड़ापन शुरू हो जाता है।दिमागी थकान और मांसपेशियों की थकान में से किसे ठीक होने में ज्यादा समय लगता है?
मांसपेशियों की थकान आमतौर पर 24 से 48 घंटे के आराम से ठीक हो जाती है। वहीं दिमागी थकान को ठीक होने में अधिक समय लगता है, क्योंकि इसके लिए जीवनशैली में बदलाव, स्ट्रेस मैनेजमेंट, डिजिटल डिटॉक्स और माइंडफुलनेस रिसेट की जरूरत होती है।
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Current Version
Oct 09, 2026 20:12 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Archana Singhal
