Mon Oct 26, 2026 | 03:07 PM IST

Medically Reviewed by Dr Padmaja , Senior Consultant – Dermatology

गर्दन की त्वचा काली और मोटी हो रही है? इसे सिर्फ गंदगी समझकर न छोड़ें, डॉक्टर से जानें इसके पीछे की वजह

गर्दन की स्किन काली और मोटी होना एकेंथोसिस निग्रिकन्स का संकेत हो सकता है, जिसका संबंध इंसुलिन रेजिस्टेंस से भी हो सकता है। यहां डॉक्टर से जानिए, गर्दन पर ऐसा क्यों होता है और इस समस्या में क्या करना चाहिए।
गर्दन की त्वचा काली और मोटी हो रही है? इसे सिर्फ गंदगी समझकर न छोड़ें, डॉक्टर से जानें इसके पीछे की वजहगर्दन की त्वचा काली और मोटी हो रही है? इसे सिर्फ गंदगी समझकर न छोड़ें, डॉक्टर से जानें इसके पीछे की वजह

गर्दन की स्किन का रंग काला पड़ना और उसका मोटा या खुरदरा होना कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। अक्सर लोग इसे धूप, पसीने, गंदगी या ठीक से सफाई न करने का नतीजा मानते हैं। ऐसे में वे गर्दन को बार-बार रगड़कर साफ करते हैं या स्किन का रंग हल्का करने के लिए तरह-तरह के घरेलू नुस्खे और स्किनकेयर प्रोडक्ट इस्तेमाल करने लगते हैं लेकिन यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद की सीनियर कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. पद्मजा के मुताबिक, गर्दन की स्किन में इस तरह के बदलाव के पीछे एकेंथोसिस निग्रिकन्स (Acanthosis Nigricans) और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर जब गर्दन पर कालापन धीरे-धीरे बढ़ने लगे, स्किन ज्यादा मोटी महसूस हो या बगल और शरीर के दूसरे हिस्सों में भी ऐसे निशान दिखाई देने लगें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

गर्दन की स्किन काली और मोटी होने के कारण

डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. पद्मजा के अनुसार, गर्दन की त्वचा यानी स्किन का रंग गहरा होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ मामलों में यह धूप में ज्यादा रहने, स्किन में जलन, रगड़ या किसी स्किन प्रॉब्लम के कारण हो सकता है। वहीं, कुछ लोगों में इसके पीछे हार्मोन और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।

अगर गर्दन का कालापन लंबे समय तक बना रहता है और स्किन धीरे-धीरे मोटी, खुरदरी या मखमल जैसी महसूस होने लगती है, तो यह एकेंथोसिस निग्रिकन्स का संकेत हो सकता है। यह स्किन की एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्दन, बगल और शरीर की सिलवटों में स्किन का रंग गहरा पड़ने लगता है। कई बार प्रभावित हिस्से की स्किन पर उभरे हुए निशान भी दिखाई देते हैं। इस स्थिति को केवल गंदगी या सफाई की कमी समझना सही नहीं है। इसके पीछे की वजह पहचानने के लिए डॉक्टर से जांच कराना जरूरी हो सकता है।

इसे भी पढ़ें: गर्दन पर मस्से क्यों होते हैं? जानें मस्सों को दूर करने के उपाय

इंसुलिन रेजिस्टेंस और गर्दन के कालेपन का संबंध

डॉक्टर पद्मजा के अनुसार, गर्दन की स्किन का काला और मोटा होना इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्या से जुड़ा हो सकता है। जब शरीर की सेल्स इंसुलिन के प्रति सही रिएक्शन नहीं देतीं, तो इस स्थिति को इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। ऐसी स्थिति में शरीर को ब्लड शुगर कंट्रोल रखने के लिए ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ सकता है। इंसुलिन का बढ़ा हुआ लेवल स्किन की सेल्स में बदलाव से जुड़ा हो सकता है, जिससे एकेंथोसिस निग्रिकन्स की समस्या हो सकती है।

हालांकि, गर्दन पर कालापन होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को इंसुलिन रेजिस्टेंस या डायबिटीज है। इसकी पहचान केवल स्किन देखकर नहीं की जा सकती। डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड शुगर और अन्य चेकअप कराने की सलाह दे सकते हैं।

गर्दन पर कालेपन के साथ दिखें ये संकेत, तो न करें नजरअंदाज

डॉक्टर पद्मजा सलाह देती हैं कि अगर गर्दन की स्किन का रंग गहरा होने के साथ कुछ अन्य बदलाव भी दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

  • गर्दन की स्किन का धीरे-धीरे मोटा और खुरदरा होना।
  • बगल, जांघों के बीच या शरीर की अन्य सिलवटों में कालापन दिखाई देना।
  • गर्दन के आस-पास स्किन पर छोटे-छोटे उभरे हुए निशान नजर आना।
  • स्किन के बदलाव के साथ वजन बढ़ना।

इन लक्षणों का होना किसी एक बीमारी की पहचान नहीं करता, लेकिन इनके आधार पर डॉक्टर यह तय कर सकते हैं कि आगे किन चेकअप की जरूरत है। अगर स्किन का कालापन अचानक तेजी से बढ़ने लगे या शरीर के कई हिस्सों में असामान्य बदलाव दिखाई दें, तो जल्द डॉक्टर से सलाह लें।

Dark And Thick Skin On NeckDark And Thick Skin On Neck

गर्दन का कालापन दूर करने के लिए क्या करें?

डॉक्टर पद्मजा सलाह देती हैं कि गर्दन की स्किन का रंग हल्का करने के लिए सबसे पहले इसके पीछे की वजह समझना जरूरी है। अगर कालापन एकेंथोसिस निग्रिकन्स या किसी मेटाबोलिक समस्या से जुड़ा है, तो केवल स्किनकेयर प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से समस्या पूरी तरह ठीक नहीं हो सकती।

इसे भी पढ़ें: गर्दन घुमाने पर सिर में दर्द क्यों महसूस होता है? डॉक्टर से जानें

  • अगर वजन ज्यादा है, तो बैलेंस डाइट, नियमित फिजिकल एक्टिविट और वजन को हेल्दी लिमिट में रखने से मेटाबोलिक हेल्थ में मदद मिल सकती है।
  • स्किन की देखभाल के लिए गर्दन को हल्के क्लींजर से साफ करें और मॉइश्चराइजर लगाएं। धूप में निकलते समय गर्दन पर भी सनस्क्रीन लगाना न भूलें।
  • स्किन को जोर-जोर से रगड़ने, हार्श स्क्रब इस्तेमाल करने या नींबू और बेकिंग सोडा जैसी चीजें लगाने से बचें, क्योंकि इनसे जलन बढ़ सकती है और कालापन ज्यादा नजर आ सकता है।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के स्किन को गोरा करने वाली क्रीम या स्टेरॉयड युक्त क्रीम का इस्तेमाल भी न करें।

साल 2023 में NIH की Bookshelf में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, एकेंथोसिस निग्रिकन्स का कोई एक निश्चित इलाज नहीं है, लेकिन इसके मुख्य कारण जैसे इंसुलिन प्रतिरोध (insulin resistance) और मोटापे को ठीक करके इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए बैलेंस डाइट, एक्सरसाइज और डॉक्टर की सलाह से दवाइयों का उपयोग करना जरूरी है। स्किन के रंग को हल्का करने के लिए डॉक्टर कुछ खास क्रीम या लेजर इलाज की सलाह भी दे सकते हैं। सही लाइफस्टाइल अपनाकर इस समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है।

निष्कर्ष

गर्दन की स्किन का काला और मोटा होना हमेशा गंदगी या सफाई की कमी के कारण नहीं होता है। कई बार यह एकेंथोसिस निग्रिकन्स जैसी स्किन की स्थिति या इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ा हो सकता है। डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर पद्मजा की सलाह के अनुसार, ऐसे बदलावों को नजरअंदाज करने के बजाय उनकी वजह जानना जरूरी है। गर्दन को बार-बार रगड़ने या घरेलू नुस्खों से कालापन मिटाने की कोशिश करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।

All Image Credit- magnific

FAQ

  • क्या गर्दन का कालापन दूर करने के लिए ब्लीच का इस्तेमाल करना चाहिए?

    बिना एक्सपर्ट की सलाह के ब्लीच का इस्तेमाल करना सही नहीं है। इससे स्किन में जलन, एलर्जी और पिग्मेंटेशन बढ़ने का खतरा हो सकता है।
  • क्या गर्दन का कालापन आनुवंशिक होता है?

    कुछ लोगों में स्किन के रंग और पिग्मेंटेशन की प्रवृत्ति आनुवंशिक हो सकती है लेकिन अगर स्किन मोटी होने लगे या कालापन तेजी से बढ़े, तो इसकी जांच कराना जरूरी है।

Read Next

→ बाथरूम में रखे गीले कपड़े कैसे बढ़ा सकते हैं फंगल इंफेक्शन, डॉक्टर से जानें नमी कम करने के तरीके

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Oct 26, 2026 12:51 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Oct 26, 2026 12:51 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Padmaja