Thu Oct 15, 2026 | 01:45 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shibal Bhartiya , Clinical Director – Ophthalmology, Marengo Asia Hospitals, Gurugram

ऑक्युलर हाइपरटेंशन क्या है और हाई बीपी से कितना अलग है? डॉक्टर से जानें इसके कारण, लक्षण और इलाज

बीपी बढ़ने का असर सिर्फ आपके दिल पर नहीं होता बल्कि, यह आपके ब्रेन और आंखों की सेहत को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में जानते हैं ऑक्युलर हाइपरटेंशन क्या है और यह हाई बीपी से कितना अलग है?
ऑक्युलर हाइपरटेंशन क्या है और हाई बीपी से कितना अलग है? डॉक्टर से जानें इसके कारण, लक्षण और इलाजऑक्युलर हाइपरटेंशन क्या है और हाई बीपी से कितना अलग है? डॉक्टर से जानें इसके कारण, लक्षण और इलाज

हाई बीपी शरीर के लिए समस्या है। जब ब्लड प्रेशर 130/80 mmHg या उससे अधिक हो जाता है तो सबसे पहले यह आपके ब्लड वेसेल्स पर प्रेशर डालता है। इसके अलावा यह सिरदर्द पैदा करता है, जिसके साथ आपको चक्कर आ सकते हैं, धुंधला नजर आ सकता है और सांस फूलने की समस्या हो सकती है, लेकिन आज हम बात करेंगे ऑक्यूलर हाइपरटेंशन की, जिसे लोग हाई बीपी से जोड़कर देखते हैं, जबकि दोनों में काफी अंतर है। क्या है यह अंतर और ऑक्यूलर हाइपरटेंशन क्यों होता है? कारण, लक्षण और इलाज, तमाम सवालों के जवाब जानते हैं Dr. Shibal Bhartiya, Clinical Director of Ophthalmology, Marengo Asia Hospitals, Gurugram से।

ऑक्युलर हाइपरटेंशन क्या है?

Dr. Shibal Bhartiya कहती हैं कि ऑक्यूलर हाइपरटेंशन का मतलब है कि आंख के अंदर का दबाव जिसे इंट्राऑक्यूलर प्रेशर (intraocular pressure) कहा जाता है। हालांकि, इंट्राऑक्यूलर प्रेशर की वजह से आंखों के ऑप्टिक नर्व की संरचना प्रभावित नहीं होती है। आमतौर पर, सामान्य स्थिति में यह दबाव 21 mmHg से कम होता है।

हाई बीपी से कैसे अलग है ऑक्युलर हाइपरटेंशन?

यह सिस्टमिक हाइपरटेंशन, हाई ब्लड प्रेशर से अलग है, जो आपकी रक्त वाहिकाओं (blood vessels) के अंदर का दबाव होता है। ये दोनों स्थितियां एक साथ हो सकती हैं, लेकिन यह न समझें कि बीपी नॉर्मल है तो इसका मतलब यह है कि आपको ऑक्युलर हाइपरटेंशन की समस्या नहीं है या भविष्य में नहीं होगी।

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ऑक्युलर हाइपरटेंशन से आंखों को क्या दिक्कत होती है?

Dr. Shibal Bhartiya कहती हैं कि ऑक्यूलर हाइपरटेंशन को लेकर सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि आमतौर पर इसमें मरीजों को खास लक्षण महसूस नहीं होते जैसे आंखों में दर्द, रेडनेस या धुंधली दृष्टि जैसी समस्याएं। इसका पता केवल व्यापक नेत्र परीक्षण से ही लगाया जा सकता है।

हालांकि, American Academy of Ophthalmology की मानें तो इस समस्या में फ्लूइड डायनामिक्स में असंतुलन हो सकता है, जिसकी वजह से आंख के अंदर मौजूद तरल पदार्थ (aqueous humor) तेजी से बाहर निकलता है, उससे कहीं ज्यादा तेजी से बनने लगता है।

ऑक्युलर हाइपरटेंशन का कारण क्या है?

डॉ. शिबल बताती हैं कि ऑक्यूलर हाइपरटेंशन के पीछे कुछ ऐसे कारक हैं जो इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा सकते हैं जैसे-

  • बढ़ती उम्र खासकर कि 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में यह दिक्कत हो सकती है।
  • ग्लूकोमा का पारिवारिक इतिहास होने की वजह से
  • लंबे समय तक स्टेरॉयड का उपयोग करने की वजह से
  • डायबिटीज की बीमारी वाले लोगों में यह दिक्कत हो सकती है
  • आंख में पहले से लगी किसी चोट के कारण
  • कुछ शारीरिक बनावट संबंधी कारणों की वजह से हो सकता है।

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ऑक्युलर हाइपरटेंशन का इलाज

ऑक्युलर हाइपरटेंशन ट्रीटमेंट स्टडी (Ocular Hypertension Treatment Study) में बताया गया है कि ऑक्युलर हाइपरटेंशन वाले व्यक्तियों में आंखों का दबाव कम करने वाली आई ड्रॉप्स, शुरुआती प्राथमिक उपचार में मददगार साबित हो सकते हैं। इसके अलावा यह आई ड्रॉप्स ओपन-एंगल ग्लूकोमा के विकास के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं। हालांकि, ऑक्युलर हाइपरटेंशन वाले सभी लोगों को ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं होती है।

हालांकि, इस बीमारी के होने का खतरा हर किसी के लिए अलग हो सकता है। यह आंखों के दबाव के स्तर और व्यक्ति के ग्लूकोमा विकसित होने के समग्र जोखिम पर निर्भर करता है। कुछ रोगियों को नियमित निगरानी की जरूरत होती है, जबकि अन्य को इस जोखिम को कम करने के लिए दबाव कम करने वाली आई ड्रॉप्स से मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष:

अंत में डॉ. शिबल कहती हैं कि मैं रेगुलर आई टेस्ट की सलाह देती हूं, विशेष रूप से 40 वर्ष की आयु के बाद। हालांकि, जिन लोगों के परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास रहा है उन्हें 40 की उम्र से पहले भी हर कुछ दिनों पर आई टेस्ट करवाते रहना चाहिए। शुरुआती पहचान और सही सलाह किसी भी बीमारी को बढ़ने से रोक सकती है इसलिए रेगुलर आई टेस्ट करवाते रहें और आंखों की बीमारी से बचे रहें।

FAQ

  • हाई बीपी को तुरंत कम करने के लिए क्या करें?

    हाई बीपी को तुरंत कम करने के लिए आप सबसे पहले तो शांत होकर लंबी सांस लें और फिर 1 गिलास नॉर्मल पानी पिएं। इसके अलावा आप नींबू पानी पी सकते हैं जो कि इस स्थिति में मददगार साबित हो सकता है।
  • बीपी बढ़ने पर क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए?

    बीपी बढ़ने पर सबसे पहले तो आपको ज्यादा नमक वाली चीजों के सेवन से परहेज करना चाहिए। प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन कम करें और डाइट में फल और सब्जियों को ज्यादा शामिल करें। इसके अलावा हाइड्रेशन का खास ख्याल रखें।

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Pallavi Kumari

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पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 15, 2026 12:11 IST

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    Reviewed By : Dr Shibal Bhartiya