Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

हाई BP में किन फूड्स से बनाएं दूरी? डायटीश‍ियन से जानें पूरी ल‍िस्‍ट

खाने में मौजूद अतिरिक्त नमक, फैट और चीनी से बैड कोलेस्‍ट्रॉल और हाई बीपी की श‍िकायत हो सकती है। जानें ब्‍लड प्रेशर बढ़ने पर क‍िन चीजों का सेवन करने से बचना चाह‍िए?

हाई ब्‍लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन आज एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। कई लोगों में इसका कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देता इसलिए इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। हालांकि, लंबे समय तक बीपी बढ़ा रहने पर यह हार्ट, दिमाग, किडनी और शरीर के दूसरे अंगों पर असर डाल सकता है। बीपी को कंट्रोल में रखने के लिए डाइट पर ध्यान देना जरूरी है। कई बार ऐसी चीजें भी हमारी डाइट का हिस्सा होती हैं जिनमें नमक, चीनी या फैट की मात्रा का हमें अंदाजा नहीं होता। अगर किसी व्यक्ति का बीपी पहले से बढ़ा हुआ है, तो डाइट में कई चीजों को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। आइए जानते हैं क‍ि हाई बीपी में क‍िन चीजों का सेवन करने से बचना चाह‍िए? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

हाई बीपी में क्‍या नहीं खाना चाह‍िए?

American Heart Association के मुताब‍िक, बीपी कंट्रोल करने के ल‍िए सैचुरेटेड और ट्रांस फैट युक्‍त चीजों का सेवन करने से बचें। अतिरिक्त चीनी वाली चीजें, जैसे मीठे पेय और शुगर वाली ड्रिंक्‍स को कम करें। खाद्य पदार्थ खरीदते समय फूड लेबल जरूर पढ़ें, इससे आप बेहतर और हेल्दी चीजें चुन सकते हैं।

1. पैक्‍ड फूड और फास्‍ट फूड

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पैक्‍ड फूड्स की शेल्‍फ लाइफ को बढ़ाने के ल‍िए उनमें प्र‍िजर्वेट‍िव्‍स डाले जाते हैं। ऐसे कुछ केम‍िकल्‍स बीपी पर बुरा असर डाल सकते हैं। इनमें नमक और चीनी की मात्रा ज्‍यादा होती है और ये फूड्स हाई बीपी के मरीजों के ल‍िए नुकसानदायक हो सकते हैं। इसी तरह प‍िज्‍जा, बर्गर, कोल्‍ड ड्र‍िंक्‍स, फ्राइज वगैरह में फैट, चीनी, नमक और तेल की मात्रा ज्‍यादा होती है और इनका सेवन करने से बैड कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ सकता है और बीपी असंतुल‍ि‍त हो सकता है।

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2. ज्‍यादा नमक वाली चीजें

नमक शरीर के मेटाबॉल‍िक फंक्‍शन को कंट्रोल करने में मदद करता है और इसे डाइट में शाम‍िल करना जरूरी है, लेक‍िन अध‍िक मात्रा में नमक का सेवन करने से हाई बीपी की समस्‍या हो सकती है। सफेद नमक की जगह सेंधा नमक या रॉक सॉल्‍ट का इस्‍तेमाल करेंगे, तो वह ज्‍यादा हेल्‍दी व‍िकल्‍प माना जाएगा।

3. सैचुरेटेड फैट युक्‍त चीजें

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डाइट में हेल्‍दी फैट्स को शाम‍िल करना जरूरी है क्‍योंक‍ि ये म‍िनरल्‍स को एब्‍जॉर्ब करते हैं, लेक‍िन जब जरूरत से ज्‍यादा फैट युक्‍त चीजों का सेवन करने लगते हैं, तो बैड कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ सकता है और हाई बीपी की श‍िकायत हो सकती है। तेल, घी, बटर वगैरह में सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्‍यादा होती है।

4. कोल्‍ड ड्र‍िंक

अगर आप भी कोल्‍ड ड्र‍िंक पीने के शौकीन हैं, तो आपको बता दें क‍ि हाई बीपी मरीजों के ल‍िए इसका सेवन हा‍न‍िकारक हो सकता है। कोल्‍ड ड्र‍िंक में शुगर की मात्रा ज्‍यादा होती है ज‍िससे इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस की समस्‍या होती है जो आर्टरीज को नुकसान पहुंचाती है और हाई बीपी की समस्‍या हो सकती है। ज‍िन मरीजों का रक्‍तचाप सामान्‍य नहीं रहता है, उन्‍हें इसके सेवन से बचना चाह‍िए।

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5. कैफीन और अल्‍कोहल

ज‍िन लोगों को हाई बीपी की समस्‍या है, उन्‍हें कैफीन और अल्‍कोहल से परहेज करना चाह‍िए वरना बीपी बढ़ सकता है। अध‍िक कैफीन और अल्‍कोहल का सेवन करने से आर्टरीज स‍िकुड़ सकती हैं और हाई बीपी की समस्‍या हो सकती है।

6. प्रोसेस्‍ड चीज

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अगर चीज को डेयरी प्रोडक्‍ट से तैयार क‍िया जाए या घर पर बनाया जाए, तो यह सेहत के ल‍िए फायदेमंद होता है, वरना बाजार में म‍िलने वाला प्रोसेस्‍ड चीज सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। इसमें फैट और नमक की अध‍िक मात्रा पाई जाती है इसल‍िए यह सेहत के ल‍िए हान‍िकारक माना जाता है खासकर हाई बीपी में इसका सेवन करने से बचना चाह‍िए।

7. पैक्‍ड सूप

सूप सेहत के ल‍िए पौष्‍ट‍िक होता है। इसे सेहतमंद समझकर कई लोग ब‍िना सोचे-समझे बाजार से पैक्‍ड सूप खरीद लेते हैं और उसका सेवन शुरू कर देते हैं। जबक‍ि बाजार में म‍िलने वाले सूप में प्र‍िजर्वेट‍िव्‍स और आर्टि‍फ‍िश‍ियल फ्लेवर्स म‍िलाए जाते हैं, जो सेहत के ल‍िए हान‍िकारक हो सकते हैं। इन पैक्‍ड सूप में नमक की मात्रा भी ज्‍यादा होती है इसल‍िए हाई बीपी के मरीजों को इनसे परहेज करना चाह‍िए।

हाई बीपी में क्‍या खाएं?

  • स‍िट्रस फलों का सेवन कर सकते हैं जैसे संतरा, नींबू, अंगूर, अनार। इससे बीपी को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है।
  • सेब और चेरीज का सेवन हार्ट और क‍िडनी के ल‍िए फायदेमंद माना जाता है और बीपी को भी कंट्रोल करने में मदद कर सकता है।
  • हाई बीपी के मरीज सीम‍ित मात्रा में प‍िस्‍ता, खुबानी का भी सेवन कर सकते हैं।
  • गर्मि‍यों में खीरा, खरबूजा और तरबूज का सेवन करने से भी हाई बीपी को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है।
  • हाई बीपी के मरीजों के ल‍िए हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन भी फायदेमंद माना जाता है। इनमें एंटीऑक्‍सीडेंट्स की भरपूर मात्रा होती है ज‍िससे बीपी कंट्रोल होता है।
  • दालें, बीन्‍स, लौकी का सेवन भी हाई बीपी के मरीजों के ल‍िए फायदेमंद हो सकता है।

न‍िष्‍कर्ष:

हाई बीपी के मरीजों को पैक्‍ड फूड, फास्‍ट फूड, ज्‍यादा नमक वाली चीजें, सैचुरेटेड फैट युक्‍त चीजें जैसे तेल, बटर, घी, कोल्‍ड ड्र‍िंक, कैफीन, अल्‍कोहल, प्रोसेस्‍ड चीज, पैक्‍ड सूप वगैरह का सेवन करने से बचना चाह‍िए। इन चीजों का सेवन करने से बीपी असंतुल‍ित हो सकता है। हाई बीपी के मरीज स‍िट्रस फल जैसे नींबू, संतरा, लौकी, खीरा, खरबूजा, तरबूज, हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, बीन्‍स वगैरह का सेवन कर सकते हैं।

image credit: magnific

FAQ

  • हाई बीपी में नमक क्यों कम करना चाहिए?

    ज्यादा सोडियम शरीर में वॉटर र‍िटेंशन का कारण बन सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, इसलिए नमक का सेवन सीमित करना चाह‍िए।
  • क्या डैश डाइट हाई बीपी में फायदेमंद है?

    हां, डैश (DASH) डाइट में कम सोडियम और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी जाती है, जो बीपी को कंट्रोल कर सकता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 03, 2026 17:46 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
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