Fri Sep 11, 2026 | 09:50 PM IST

माइग्रेन

सिरदर्द की समस्या तनाव, नींद पूरी न होना और लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन देखने की वजह से हो सकती है, लेकिन सिरदर्द बार-बार हो, कई घंटों या कई दिनों तक बना रहे, उसके साथ मतली, उल्टी, तेज रोशनी या आवाज से परेशानी होने लगे, तो यह सामान्य सिरदर्द नहीं, बल्कि माइग्रेन हो सकता है।

भारत में लाखों लोग माइग्रेन से जूझ रहे हैं और इसी से जुड़ी The Journal of Headache and Pain के एक शोध के अनुसार, पूरी दुनिया के मुकाबले भारत में माइग्रेन का असर ज्यादा होता है। 2025 Scoping Review के अनुसार, जहां दुनिया भर में करीब 14.7% लोग माइग्रेन से पीड़ित हैं, वहीं भारत में यह आंकड़ा 25% है। महिलाओं में खासतौर पर रिप्रोडक्टिव उम्र के दौरान माइग्रेन की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। माइग्रेन के बढ़ते मामलों को देखते हुए हमने ग्रेटर नोएडा स्थित सर्वोदय अस्पताल में Neurology विभाग के Director Dr. Abhinav Gupta से बात की।

माइग्रेन क्या है?

Dr. Abhinav Gupta कहते हैं, “माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें बार-बार सिरदर्द का अटैक महसूस होता है। अक्सर दर्द सिर के एक हिस्से में होता है। हालांकि, कुछ लोगों को माइग्रेन का दर्द सिर के दोनों हिस्सों में भी हो सकता है। इसमें ऐसा लगता है कि सिर में धड़कन महसूस हो रही है। इसके साथ मतली, उल्टी, चक्कर, रोशनी, तेज आवाज या तेज गंध से परेशानी भी हो सकती है।”

Dr. Abhinav Gupta ने बताया कि अगर सिरदर्द महीने में 15 दिनों से ज्यादा रहे और उसमें कम से कम 8 दिनों तक माइग्रेन के लक्षण रहे, तो इसे क्रोनिक माइग्रेन की कैटेगरी में रखा जा सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, माइग्रेन दिमाग और नसों से जुड़ी बीमारी है। साल 2021 में माइग्रेन से होने वाले Disability-Adjusted Life Years के मामले में यह दुनिया में तीसरे स्थान पर था।

माइग्रेन के लक्षण

Dr. Abhinav Gupta ने बताया कि पहले माना जाता था कि माइग्रेन सिर्फ दिमाग के ब्लड वेसल्स के फैलने या सिकुड़ने के कारण होता है, लेकिन अब वैज्ञानिकों का मानना है कि यह दिमाग, नसों और कुछ खास केमिकल रिएक्शन के कारण होता है।
Mayo Clinic के अनुसार, माइग्रेन को चार स्टेज में बांटा गया है और इसी के अनुसार उनके लक्षण हो सकते हैं।

1. प्रोड्रोम

माइग्रेन अटैक एक या दो दिन पहले शुरू हो जाता है और मरीजों को कुछ बदलाव महसूस हो सकते हैं।

  • कब्ज होना
  • मूड बदलना
  • किसी खास खाने-पीने की चीज की बहुत ज्यादा इच्छा होना
  • गर्दन में अकड़न होना
  • बार-बार पेशाब आना
  • शरीर में पानी का जमाव होना
  • बार-बार उबासी आना

2. ऑरा

इसमें कुछ लोगों को सिरदर्द से ठीक पहले या इसके दौरान ऑरा महसूस हो सकता है। इसमें देखने की क्षमता में बदलाव होने लगता है। ये लक्षण धीरे-धीरे शुरू होकर 5 मिनट से 1 घंटे तक बने रह सकते हैं।

  • देखने में चमकीले धब्बे या रोशनी की चमक दिखना
  • आंखों के आगे अंधेरा छा जाना या दिखना बंद हो जाना
  • हाथ या पैर में सूइयां चुभने जैसा महसूस होना
  • चेहरे या शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना
  • बोलने या बात करने में दिक्कत होना

3. अटैक

अगर माइग्रेन का समय पर इलाज न किया जाए, तो इसका अटैक 4 घंटे से लेकर 3 दिनों तक बना रह सकता है। इस दौरान ये लक्षण दिखाई देते हैं।

  • सिर के एक हिस्से (दाएं या बाएं) या फिर कभी-कभी दोनों हिस्सों में दर्द होना
  • सिर में धड़कन जैसा महसूस होना
  • रोशनी, आवाज और गंध से दिक्कत होना
  • चिड़चिड़ापन, जी मिचलाना और उल्टी आना

4. पोस्टड्रोम

इसमें मरीज को सिरदर्द खत्म होने के बाद भी शारीरिक और मानसिक रूप से थकान महसूस हो सकती है। पोस्टड्रोम स्टेज पर सिर को अचानक हिलाने पर कुछ देर के लिए मरीज को दर्द दोबारा दर्द महसूस हो सकता है।

माइग्रेन होने की वजह

Dr. Abhinav Gupta ने बताया कि माइग्रेन होने का एक कारण नहीं होता। इसलिए लोगों को इन वजहों पर ध्यान देना चाहिए।

  • जेनेटिक कारण
  • दिमाग में CGRP जैसे केमिकल्स का बढ़ना
  • ट्राइजेमिनल नर्व का एक्टिव होना
  • हार्मोनल बदलाव
  • एंडोमेट्रियोसिस
  • स्ट्रेस
  • नींद की कमी
  • कुछ फूड्स और ड्रिंक्स से एलर्जी
  • तेज रोशनी या शोर
  • मौसम में बदलाव
  • लंबे समय तक स्क्रीन देखना
  • समय पर भोजन न करना
  • शरीर में पानी की कमी

माइग्रेन कितने प्रकार के होते हैं?

Migraine Trust के अनुसार, माइग्रेन के कई प्रकार हो सकते हैं।

1. ऑरा के बिना माइग्रेन

यह सबसे आम माइग्रेन है, जिसमें मरीज को माइग्रेन होने की कोई चेतावनी के लक्षण नहीं मिलते। इस तरह के माइग्रेन में आमतौर पर मरीज को सिर में धक-धक करने वाला तेज सिरदर्द हो सकता है, जो चलने-फिरने या सीढ़ियां चढ़ने पर बढ़ सकता है। मरीज का जी मिचलाना शुरू हो सकता है या उल्टी भी हो सकती है। ऑरा के बिना माइग्रेन में मरीज रोशनी, आवाज या गंध के प्रति ज्यादा सेंसिटिव हो जाते हैं।

2. ऑरा के साथ माइग्रेन

करीब एक तिहाई लोगों में यह माइग्रेन पाया जाता है। इसमें माइग्रेन शुरू होने से पहले नर्व सिस्टम में कुछ अस्थायी लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इस दौरान मरीज को आंखों के सामने धुंधलापन, चमकीले धब्बे, रोशनी की चमक या टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएं दिखने लगती हैं। इसके अलावा, हाथों व पैरों में सुन्नता या सुइयां चुभने जैसा महसूस हो सकता है।
इसके भी दो प्रकार हो सकते हैं।

  1. रेटिनल या ऑक्यूलर माइग्रेन - यह दुर्लभ प्रकार है, जिसमें आंखों की रोशनी पर असर पड़ सकता है। अगर आंखों से अचानक दिखना बंद हो जाए, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
  2. साइलेंट माइग्रेन - इसमें सिरदर्द नहीं होता, लेकिन आंखों के सामने चमक या सुन्नपन महसूस हो सकता है।

3. क्रोनिक माइग्रेन

जब किसी व्यक्ति को कम से कम तीन महीने तक, हर महीने15 दिन या इससे ज्यादा सिरदर्द रहे, तो क्रोनिक माइग्रेन कहा जाता है। इस तरह का माइग्रेन समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ता है। साथ ही पेनकिलर दवाओं का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने से स्थिति बिगड़ सकती है। डिप्रेशन, एंग्जायटी और स्लीप एपनिया जैसी मेडिकल स्थितियां माइग्रेन को बढ़ा सकती हैं।

4. ब्रेनस्टेम ऑरा माइग्रेन

इसमें दिमाग के निचले हिस्से से जुड़े लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसमें बोलने में तुतलाहट, चक्कर आना, कानों में घंटी बजना या एक की जगह दो दिखना, चलने में असंतुलन होना और अस्थायी तौर पर बेहोश होना शामिल है। आमतौर पर यह माइग्रेन ऑरा के साथ ही शुरू होता है और यह वयस्कों में ज्यादा होने का रिस्क रहता है। अगर किसी को 50 साल की उम्र के बाद हो, तो MRI जरूर कराना चाहिए।

5. हेमिप्लेजिक माइग्रेन

इसमें शरीर के एक हिस्से में लकवा जैसा महसूस हो सकता है। हेमिप्लेजिक माइग्रेन में लक्षण स्ट्रोक जैसे लगते हैं और कमजोरी एक घंटे से लेकर कई दिनों तक रह सकती है। यह भी दो तरह का हो सकता है, जिसमें फैमिलियन जो परिवार से चलता है और दूसरा स्पोरैडिक जो बिना फैमिली हिस्ट्री के नए जीन म्यूटेशन से होता है।

6. मेंस्ट्रुअल माइग्रेन

यह महिलाओं से जुड़ा हुआ है, जो करीब दो-तिहाई महिलाओं में हो सकता है। पीरियड्स शुरू होने से पहले एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल कम होने लगता है और प्रोस्टाग्लैंडिंस का स्तर बढ़ने से भी माइग्रेन हो सकता है। इसमें पीरियड्स शुरू होने से दो दिन पहले से लेकर पीरियड के तीसरे दिन तक रह सकता है। इसमें काफी महिलाओं को पीरियड के दौरान और महीने के अन्य दिनों में भी माइग्रेन हो सकता है।

7. वेस्टिबुलर माइग्रेन

इसे माइग्रेन विद प्रोमिनेंट वर्टिगो भी कहा जाता है, जिसमें माइग्रेन के अन्य लक्षणों के साथ-साथ चक्कर आना, सिर घूमना या संतुलन बनाने में परेशानी हो सकती है। वेस्टिबुलर माइग्रेन में चक्कर आने या शरीर हिलने जैसा महसूस होता है, सिर या चेहरा छूने पर दर्द या सेंसिटिविटी महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में बिना सिरदर्द के भी चक्कर आ सकते हैं।

8. पेट का माइग्रेन

यह माइग्रेन 100 में से लगभग 4 बच्चों को हो सकता है और इससे कुछ वयस्क भी प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इससे जुड़ी जानकारी कम है, लेकिन इसमें आमतौर पर पेट में मध्यम से तेज दर्द के अटैक पड़ सकते हैं, जो करीब 2 घंटे से लेकर तीन दिन तक बने रह सकते हैं। इसमें सिरदर्द बिल्कुल नहीं होता। इसके कारण अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं।

9. साइक्लिकल वोमिटिंग सिंड्रोम (Cyclical Vomiting Syndrome)

यह माइग्रेन से जुड़ी एक कंडीशन है, जिसमें अक्सर अनुमान लगाना संभव होता है कि व्यक्ति को अगला अटैक कब आएगा, क्योंकि इसके अटैक बहुत नियमित अंतराल पर होते हैं। यह अटैक एक घंटे से लेकर 10 दिनों तक चल सकता है। अटैक के बीच के समय में मरीज को कई बार पूरी तरह से सेहतमंद महसूस होता है। इस दौरान लगातार जी मिचलाना या उल्टी हो सकती है।

10. दवाओं के ज्यादा इस्तेमाल से सिरदर्द

जो लोग पेनकिलर, सूजन कम करने वाली दवाएं या पैरासिटामोल का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उन्हें ये माइग्रेन हो सकता है। यह आमतौर पर उन लोगों को ज्यादा होता है, जिनके परिवार में माइग्रेन की हिस्ट्री हो, या फिर कई बार दवा खुद ही सिरदर्द पैदा करने लगती है। इसे रिबाउंड हेडेक कहा जाता है।

माइग्रेन और सिरदर्द में अंतर

Dr. Abhinav Gupta ने कहा, “अक्सर लोग तेज सिरदर्द को माइग्रेन समझ लेते हैं और कई बार मेरे पास ऐसे केस आते हैं, जो सिरदर्द को माइग्रेन समझकर खुद ही दवाएं लेने लगते हैं। इसलिए बार-बार सिरदर्द होने पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए, क्योंकि सिरदर्द और माइग्रेन में बहुत अंतर होता है।”

सामान्य सिरदर्द

माइग्रेन

हल्का या मध्यम दर्द

धड़कन जैसा तेज दर्द

दोनों तरफ दर्द

अक्सर सिर के एक तरफ, लेकिन दोनों तरफ भी हो सकता है

मतली या उल्टी न होना 

मतली और उल्टी आम लक्षण है

रोशनी और आवाज से ज्यादा फर्क नहीं

तेज रोशनी, आवाज और गंध से परेशानी

कुछ घंटों में ठीक हो जाता है

4 से 72 घंटे तक रह सकता है

दर्द की सामान्य दवा से राहत

कई बार विशेष माइग्रेन दवाओं की जरूरत पड़ती है

बच्चों में माइग्रेन

StatPearls Publishing के मुताबिक, बच्चों और टीनएजर्स में माइग्रेन सिरदर्द के सबसे आम कारणों में से एक है और करीब 10 में से 1 बच्चा माइग्रेन का शिकार होता है। इससे उसकी स्कूल की पढ़ाई और जीवन की क्वालिटी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।

इस जर्नल में बताया गया है कि पीडियाट्रिक इमरजेंसी में आने वाले लगभग 18% बच्चों में माइग्रेन पाया जाता है। हालांकि, बच्चों में माइग्रेन वयस्कों की तुलना में अलग होता है, क्योंकि यह सिर्फ सिरदर्द तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अन्य लक्षणों से भी जुड़ा होता है।

बच्चों में माइग्रेन साइक्लिकल वोमिटिंग और पेट के माइग्रेन के रूप में आ सकता है और गलती से इसे डाइजेशन सिस्टम से जोड़कर देखा जाता है।

बच्चों में माइग्रेन होने के कारण

Dr. Abhinav Gupta कहते हैं, "बच्चों में माइग्रेन होने के कई कारण हो सकते हैं।

  • स्ट्रेस, थकान, कुछ खास फूड्स
  • फैमिली हिस्ट्री
  • जीन म्यूटेशन
  • गलत खान-पान
  • नींद पूरी न होना
  • डिहाइड्रेशन
  • फिजिकल एक्टिविटी न करना
  • हार्मोनल बदलाव

Dr. Abhinav Gupta कहते हैं, "अगर किसी बच्चे को माइग्रेन एक हफ्ते में दो बार होने लगे, नजर कमजोर होना, हाथ-पांव का सुन्न होना, चक्कर आना या गर्दन में अकड़न आने लगे, तो पेरेंट्स को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

महिलाओं में माइग्रेन

American Migraine Foundation के मुताबिक, महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले माइग्रेन की संभावना तीन गुना ज्यादा हो सकती है। इसमें हार्मोन्स में बदलाव होना महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस वजह से महिलाओं में पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलावों के साथ माइग्रेन के लक्षण या अटैक में बदलाव देखा जा सकता है।

  • प्रेग्नेंसी के दौरान कई बार महिलाओं को माइग्रेन के कम अटैक आ सकते हैं।
  • कई बार महिलाओं को माइग्रेन की शुरुआत उनके पहले पीरियड्स के समय हो सकती है।
  • कुछ मामलों में देखा गया है कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं में माइग्रेन अटैक कम आए हैं। 

Dr. Abhinav Gupta ने कहा, “महिलाओं में माइग्रेन होने का कारण कई बार जेनेटिक भी हो सकता है। अगर परिवार में किसी को माइग्रेन की समस्या होती है, तो हो सकता है कि महिला में माइग्रेन के लक्षण दिखाई दें। इसलिए अगर सिर में एक तरफ तेज दर्द या माइग्रेन के अन्य लक्षण दिखाई दें, तो पेनकिलर लेने के बजाय डॉक्टर से जांच कराएं। आमतौर पर डॉक्टर लक्षणों के आधार पर दवा दे सकते हैं।”

माइग्रेन और PMOS का कनेक्शन

Dr. Abhinav Gupta ने बताया, हालांकि, PMOS से माइग्रेन का सीधा संबंध तो अभी तक किसी रिसर्च में सामने नहीं आया है, लेकिन PMOS में एंड्रोजन हार्मोन का असंतुलन होता है। हालांकि, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन माइग्रेन के दर्द को बढ़ा सकते हैं या इसका कारण बन सकते हैं। PMOS से पीड़ित महिलाओं में माइग्रेन ज्यादा होने का कारण इंसुलिन रेसिस्टेंस, मोटापा और स्ट्रेस हो सकता है।

माइग्रेन और गर्भनिरोधक दवाओं का कनेक्शन

Dr. Abhinav Gupta कहते हैं, "गर्भनिरोधक दवाएं माइग्रेन को बढ़ा सकती हैं, क्योंकि इससे महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं। हालांकि, इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि महिला कितनी सेंसिटिव है और वह कितने समय से दवा का इस्तेमाल कर रही है। जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान माइग्रेन होता है, उन्हें फायदा हो सकता है, क्योंकि ये दवाएं शरीर में एस्ट्रोजन के लेवल को बैलेंस रखती हैं। अगर किसी महिला को पहले से माइग्रेन की समस्या है, तो उसे डॉक्टर को जानकारी देकर ही गर्भनिरोधक दवा का इस्तेमाल करना चाहिए।"

जांच की सलाह कब दी जाती है?

Dr. Abhinav Gupta ने बताया कि आमतौर पर माइग्रेन की जांच की सलाह देते समय इन बातों का ख्याल रखा जाता है।

  • पहली बार बहुत तेज सिरदर्द हुआ हो
  • 50 साल के बाद नया सिरदर्द शुरू हुआ हो
  • सिरदर्द का पैटर्न अचानक बदल गया हो
  • शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी हो
  • बोलने में परेशानी हो
  • अटैक आ रहे हों
  • कैंसर हो चुका हो
  • किसी गंभीर संक्रमण की हिस्ट्री हो

माइग्रेन की जांच कैसे होती है?

Cleveland Clinic के मुताबिक, माइग्रेन की जांच के लिए फिजिकल और न्यूरोलॉजिकल चेकअप किए जा सकते हैं। इसमें डॉक्टर मरीज से कई सवाल कर सकते हैं।

  • मरीज को कौन-कौन से लक्षण महसूस होते हैं?
  • लक्षण कितने गंभीर हैं?
  • जो लक्षण महसूस होते हैं, वे कितने समय तक रहते हैं?
  • क्या किसी खास चीज या एक्टिविटी के कारण सिरदर्द होता है या ज्यादा बढ़ जाता है?

Dr. Abhinav Gupta कहते हैं, “माइग्रेन की पहचान का कोई निश्चित टेस्ट नहीं है, लेकिन दिमाग से जुड़ी अन्य बीमारियों को चेक करने के लिए ये टेस्ट किए जाते हैं।”

  • MRI ब्रेन
  • CT Scan
  • ब्लड शुगर
  • थायराइड प्रोफाइल
  • विटामिन B12
  • विटामिन D
  • CBC
  • ESR/CRP
  • आंखों का चेकअप

माइग्रेन का इलाज कैसे किया जाता है?

Dr. Abhinav Gupta ने बताया कि माइग्रेन का इलाज सिर्फ दर्द कम करने के लिए नहीं किया जाता, बल्कि यह भी ध्यान रखा जाता है कि मरीज की रोजाना की जिंदगी भी प्रभावित न हो। हालांकि, हर मरीज का इलाज उसके लक्षण, उम्र, अटैक कितनी बार हुआ और अन्य बीमारियों के आधार पर किया जाता है। आमतौर पर इलाज के दो भाग हो सकते हैं।

1. माइग्रेन अटैक के दौरान इलाज

Dr. Abhinav Gupta ने कहा, “अगर माइग्रेन का दर्द शुरू हो जाए, तो हमेशा सबसे पहले इसके लक्षणों को मैनेज करने की कोशिश की जाती है। आमतौर पर माइग्रेन का दर्द शुरू होते ही दवा लेने से असर बेहतर हो सकता है। इसके लिए मरीज की स्थिति के अनुसार दवाएं जैसे पेनकिलर, NSAIDs और एंटी-नॉजिया दवाओं की सलाह दी जा सकती है।”

2. बचाव के लिए दवाएं

Dr. Abhinav Gupta ने बताया कि अगर महीने में कई बार माइग्रेन अटैक आता है या दर्द बहुत ज्यादा गंभीर होता है, तो बीटा ब्लॉकर्स, कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स और एंटीडिप्रेसेंट्स जैसी दवाएं दी जा सकती हैं। इन दवाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेना चाहिए।

माइग्रेन से बचने के लिए क्या करें?

Dr. Abhinav Gupta ने माइग्रेन के मरीजों को सलाह दी है कि इसे पूरी तरह से रोकना तो संभव नहीं होता, लेकिन कुछ आदतों में बदलाव करके माइग्रेन अटैक काफी हद तक कम किए जा सकते हैं।

  1. नींद पूरी करें - सोने और जागने का समय नियमित रखें। बहुत देर तक जागने से भी माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है।
  2. समय पर खाना खाएं - लंबे समय तक भूखे रहने से भी माइग्रेन होने का रिस्क हो सकता है।
  3. पर्याप्त पानी पिएं - कुछ लोगों को डिहाइड्रेशन की वजह से भी माइग्रेन हो सकता है।
  4. रेगुलर एक्सरसाइज करें - रोजाना कम से कम 30-40 मिनट की वॉक, योग या एक्सरसाइज करना माइग्रेन मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
  5. स्ट्रेस कम करें - मेडिटेशन या प्राणायाम करने से स्ट्रेस कम करने में मदद मिल सकती है।
  6. ट्रिगर फूड्स पहचानें - कुछ मरीजों को खास फूड्स खाने से एलर्जी हो सकती है, तो कुछ मरीजों को वही फूड्स खाने से माइग्रेन कम हो सकता है। इसलिए फूड डायरी बनाना बहुत जरूरी है।
  7. स्क्रीन टाइम कम करें - लगातार मोबाइल या लैपटॉप देखने से आंखों पर प्रेशर पड़ सकता है। इसलिए स्क्रीन टाइम सीमित रखें।
  8. तेज रोशनी और तेज आवाज से बचें - तेज धूप या आवाज से दूर रहें। इससे माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है।

माइग्रेन डायरी क्या है?

Mayo Clinic के मुताबिक, माइग्रेन डायरी बनाने से मरीज को यह समझने में मदद मिलती है कि माइग्रेन को कौन-कौन सी चीजें ट्रिगर कर सकती हैं। इस डायरी में मरीज माइग्रेन से जुड़ी कई बातों को लिख सकते हैं। इससे डॉक्टर को लक्षण समझने और इलाज करने में मदद मिलती है।

  • माइग्रेन कब शुरू हुआ?
  • सिरदर्द कितना तेज था और दर्द सिर के किस हिस्से में हुआ?
  • कितने समय तक रहा?
  • किस चीज को खाने से ट्रिगर हुआ?
  • क्या नींद की वजह से माइग्रेन हुआ?
  • क्या स्ट्रेस इसकी वजह थी?
  • कौन सी दवा लेने से राहत मिली?

आमतौर पर पूछे जाने वाले सवाल

Dr. Abhinav Gupta ने कहा कि जब भी मरीज माइग्रेन का इलाज कराने आता है, तो आमतौर पर उनके ये सवाल होते हैं, जो सभी को जानने चाहिए।

1. सवाल - क्या माइग्रेन पूरी तरह ठीक हो सकता है?

जवाब - इसे पूरी तरह से ठीक करना संभव नहीं है, लेकिन सही इलाज और लाइफस्टाइल में बदलाव करके इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

2. सवाल - क्या माइग्रेन से जान भी जा सकती है?

जवाब - ज्यादातर मामलों में माइग्रेन से जान को खतरा नहीं होता, लेकिन अगर सिरदर्द तेज हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

3. सवाल - क्या माइग्रेन में चाय पी सकते हैं?

जवाब - कई मरीजों को चाय पीने से आराम मिल सकता है, लेकिन कुछ के लिए यह ट्रिगर बन सकता है। इसलिए अपने ट्रिगर के अनुसार ही कैफीन सीमित मात्रा में लें।

4. सवाल - क्या माइग्रेन में एक्सरसाइज कर सकते हैं?

जवाब - हल्की रेगुलर एक्सरसाइज से आराम मिल सकता है, लेकिन अगर माइग्रेन अटैक आया है, तो इस दौरान मरीज को आराम ही करना चाहिए।

5. सवाल - क्या मोबाइल माइग्रेन बढ़ाता है?

जवाब - कुछ लोगों को लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन देखने से माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है।

निष्कर्ष

माइग्रेन को सामान्य सिरदर्द समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर सिर के एक हिस्से में दर्द है, मतली या उल्टी जैसा महसूस हो रहा है, बार-बार अटैक आ रहा है, रोशनी या आवाज से परेशानी होना, माइग्रेन के लक्षण हो सकते हैं। इसलिए समय पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए और न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह पर सही दवाएं, ट्रिगर्स की पहचान और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर माइग्रेन को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

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