Migraine Relief: स्ट्रेस और खराब लाइफस्टाइल के कारण माइग्रेन की समस्या होना बहुत ही आम हो गया है। हालांकि, माइग्रेन एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल कंडीशन है, जिसमें रोगी को सिर के आधे हिस्से में बहुत तेज दर्द होता है और साथ ही मतली और उल्टी जैसी फीलिंग आती है। माइग्रेन में अक्सर मरीज लाइट या साउंड के प्रति भी काफी सेंसेटिव हो जाते हैं। स्ट्रेस, हार्मोनल बदलाव और नींद की कमी जैसे (causes of migraine) कारणों के चलते माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है। इसलिए लोग अक्सर इन ट्रिगर्स से बचने की कोशिश करते हैं। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा था। माइग्रेन के कारण मेरा पूरा रूटीन ही खराब हो जाता था। ऐसे में मुझे दालचीनी के लेप ने काफी फायदा दिया और साथ ही भीगी किशमिश और बादाम बहुत मददगार साबित हुए। इस बारे में मैंने हरियाणा के सिरसा स्थित रामहंस चैरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा से बात की। उन्होंने बताया कि दालचीनी का लेप और बादाम-किशमिश ब्रेन की कमजोरी को कम करने में मदद करते हैं।
माइग्रेन के चलते परेशानी
मुझे माइग्रेन की समस्या नौवीं क्लास से शुरू हुई थी। शुरुआत में लगा कि नॉर्मल सिरदर्द है, लेकिन दसवीं के बोर्ड के दौरान स्ट्रेस के कारण यह दर्द करीब हर दूसरे हफ्ते होने लगा और दो-तीन दिन मैं कुछ भी नहीं कर पाती थी। माइग्रेन के कारण पढ़ाई तो दूर की बात थी, मेरे लिए खाना खाना भी दूभर हो जाता था। जब भी मुझे माइग्रेन होता था, तो ऐसा लगता था कि आधा सिर फट जाएगा और पूरे दिन मुझे मतली जैसी फीलिंग रहती थी। कई बार उल्टी तक कर देती थी, यहां तक कि दवाइयां भी आराम नहीं देती थीं।

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पीरियड्स में माइग्रेन होना आम हो गया
जब माइग्रेन काफी ज्यादा बढ़ गया, तो पापा ने डॉक्टर से चेक कराया और उन्होंने ही लक्षण देखकर माइग्रेन डायग्नोज किया था। उन्होंने माइग्रेन से जुड़ी कुछ दवाइयां दी और बताया कि मुझे अपने ट्रिगर की पहचान करनी होगी ताकि उससे बचाव कर सकूं। फिर मैंने रोजाना अपने खाने पर ध्यान देना शुरू किया, तो पता चला कि मुझे चॉकलेट, कॉफी, चीज, चाइनीज, लहसुन जैसी चीजों से एलर्जी है। यह सब मैंने लगभग खाना बंद कर दिया, लेकिन मैंने यह भी नोटिस किया कि पीरियड के कुछ दिन पहले मुझे माइग्रेन ट्रिगर होता है और अगर मैं पेनकिलर ले लेती हूं, तो पीरियड का फ्लो कम हो जाता था। इससे मैं काफी परेशान रहने लगी थी।
माइग्रेन में दालचीनी के लेप ने दिया फायदा
पीरियड में माइग्रेन होना लगभग हर महीने की कहानी हो गई थी और मैं काफी परेशान भी थी। एक दिन बड़ी बुआ घर आईं, तो उनके साथ मैंने यह समस्या शेयर की, तो उन्होंने मुझे दालचीनी का लेप लगाने की सलाह दी। दालचीनी को सिलबट्टे पर घिसकर उसका लेप बनाकर मेरे सिर पर लगाया। पहली बार मुझे माइग्रेन में काफी राहत महसूस हुई और साथ ही मैंने थोड़ा दालचीनी का पेस्ट पानी में डालकर भी पी लिया। इसके बाद मुझे दवाई लेने की जरूरत महसूस नहीं हुई। जब भी मुझे माइग्रेन की समस्या होती, तो मैं दालचीनी का लेप और थोड़ा पानी में डालकर पी लेती हूं। ऐसा ही JNS Journal में पुष्टि हुई है। जर्नल के मुताबिक, दालचीनी में एंटी-इंफ्लेमेटरी (Anti-inflammatory) और न्यूरोप्रोटेक्टिव (Neuroprotective) गुण होते हैं, जिससे माइग्रेन अटैक कम हो जाता है और सूजन के लक्षणों को घटाने में मदद मिलती है।
भीगे बादाम-किशमिश से मिली राहत
मुझे माइग्रेन का इलाज कॉलेज में मेरी सहेली की मां ने भी दिया, जो बहुत ही कारगर सिद्ध हुआ। एक दिन कॉलेज में मुझे माइग्रेन ट्रिगर हो गया, तो मेरी सहेली ने अपनी मां से जब मेरे माइग्रेन को लेकर बात की, तो उन्होंने भीगी किशमिश और बादाम खाने की बात कही। अगले ही दिन से मैं बादाम और किशमिश भिगोकर खाने लगी। इससे भी मुझे माइग्रेन में काफी राहत मिली और मैं आज भी रेगुलर 5 बादाम और 5-6 किशमिश रोजाना लेती हूं। इससे माइग्रेन होना काफी कम भी हुआ है। मुझे दालचीनी और भीगी किशमिश-बादाम से फायदा मिला है।
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माइग्रेन में दालचीनी और भीगे बादाम-किशमिश से मिलता है आराम - डॉ. श्रेय
डॉ. श्रेय के अनुसार, “दालचीनी ब्लड सर्कुलेशन को इंप्रूव करती है। अगर इसका लेप सिर पर लगाया जाए, तो इससे सूजन कम करने में मदद मिलती है क्योंकि दालचीनी की तासीर उष्ण होती है। इसके अलावा, किशमिश पित्तशामक है जो सिर और पेट की समान वायु को ठीक करती है। मैं खुद अपने पैशेंट्स को किशमिश एडवाइस करता हूं। बादाम में शीत वीर्य होता है, जिसे आयुर्वेद में ब्रेन टॉनिक माना जाता है। ब्रेन की कमजोरी को दूर करता है, इसलिए इसे किशमिश के साथ लेना अच्छा कॉम्बिनेशन माना जाता है। तीनों ही चीजें ब्रेन के लिए बहुत बेहतर हैं और माइग्रेन में मदद कर सकती है।
निष्कर्ष
बहरहाल, मुझे दालचीनी, बादाम और किशमिश से बहुत आराम मिला है, लेकिन दालचीनी का लेप ट्राई करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए। भीगे हुए बादाम तो वैसे भी ब्रेन के लिए अच्छे माने जाते हैं और किशमिश खाने से पहले आयुर्वेदाचार्य या एक्सपर्ट से जरूर सलाह लें क्योंकि ज्यादा मात्रा में किशमिश खाने से नुकसान हो सकते हैं। डायबिटीज के पैशेंट्स को किशमिश खाने से पहले डॉक्टर से पूछना चाहिए। डॉ. श्रेय ने भी बताया कि दालचीनी या किशमिश खाना सेहतमंद है, लेकिन ज्यादा मात्रा में लेना डाइजेशन की समस्या बढ़ा सकता है। यह लेख पूरी तरह से मेरा पर्सनल एक्सपीरियंस है, इसलिए जरूरी नहीं कि हर किसी को माइग्रेन में ये सभी चीजें राहत दें। माइग्रेन से राहत पाने के लिए डॉक्टर से सलाह लें।
FAQ
किशमिश किन लोगों को नहीं खानी चाहिए?
डाइजेशन से जुड़ी बीमारियों में किशमिश नहीं खानी चाहिए। जिन लोगों को किडनी में पथरी की समस्या है, उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए।रोज बादाम खाने से क्या फायदे होते हैं?
भीगे बादाम खाने से डाइजेशन में मदद मिलती है, वजन कम करने में सहायक होता है और ब्रेन को मजबूत करता है। इसलिए एक्सपर्ट रोजाना 5 से 7 बादाम खाने की सलाह देते हैं।दालचीनी का काढ़ा पीने के क्या फायदे हैं?
अगर अर्जुन की छाल और दालचीनी का काढ़ा पिया जाए, तो ब्लड सर्कुलेशन बेहतर किया जा सकता है।
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Feb 19, 2026 18:30 IST
Modified By : Aneesh Rawat Feb 19, 2026 18:30 IST
Modified By : Aneesh RawatFeb 19, 2026 18:30 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Shrey Sharma