Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vikash Goyal , Cardiologist

Blood Thinners के साइड इफेक्ट्स क्या हैं? इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

ब्लड थिनर्स खून के थक्के बनने से रोकते हैं, लेकिन इनके कारण तेज ब्लीडिंग और अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं। कभी भी ब्लड थिनर का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए।

हार्ट अटैक, स्ट्रोक, डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) और पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए दुनियाभर में लाखों लोग ब्लड थिनर (Blood Thinners) दवाओं का सेवन करते हैं। ये दवाएं शरीर में खून के थक्के बनने की प्रोसेस को धीमा करके जानलेवा समस्याओं के जोखिम को कम करने में अहम भूमिका निभाती हैं। यही वजह है कि हार्ट डिजीज, अनियमित धड़कन (Atrial Fibrillation), हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट या पहले से ब्लड क्लॉट की समस्या से जूझ रहे मरीजों को डॉक्टर अक्सर इन दवाओं की सलाह देते हैं। इस लेख में गुरुग्राम के पारस हेल्थ के कार्डियोलॉजी के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. विकास गोयल से जानिए, ब्लड थिनर के क्या साइड इफेक्ट होते हैं?

ब्लड थिनर के क्या साइड इफेक्ट होते हैं?

डॉ. विकास गोयल बताते हैं कि ब्लड थिनर दवाएं खून को पूरी तरह पतला नहीं करतीं, बल्कि खून के थक्के बनने की प्रक्रिया को धीमा करती हैं। इसी वजह से अगर किसी व्यक्ति को चोट लग जाए या शरीर के अंदर कहीं ब्लीडिंग शुरू हो जाए तो उसे रोकने में सामान्य से ज्यादा समय लग सकता है। कई मरीजों में मामूली ब्लीडिंग जैसे शरीर पर जल्दी-जल्दी नीले निशान पड़ना, नाक से खून आना या छोटे कट लगने पर लंबे समय तक खून बहना देखने को मिलता है। हालांकि ये लक्षण अक्सर गंभीर नहीं होते, लेकिन इन्हें नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए।

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कुछ मामलों में ब्लड थिनर के कारण होने वाली ब्लीडिंग गंभीर रूप ले सकती है। यदि मल या पेशाब में खून दिखाई दे, उल्टी में खून आए, पेट के अंदर ब्लीडिंग के कारण काले रंग का मल आए या किसी चोट के बाद लंबे समय तक खून बहता रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सबसे गंभीर स्थिति तब होती है जब दिमाग के अंदर ब्लीडिंग हो जाए। इसके लक्षणों में अचानक तेज सिरदर्द, बोलने में परेशानी, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, बेहोशी या कंफ्यूजन की स्थिति शामिल हो सकती है। यह मेडिकल इमरजेंसी होती है और ऐसी स्थिति में बिना देरी किए अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है।

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blood thinners side effects

डॉक्टर की सलाह

डॉ. विकास गोयल के अनुसार, कई मरीज ब्लीडिंग का डर होने पर अपनी मर्जी से दवा बंद कर देते हैं, जो बेहद खतरनाक हो सकता है। ब्लड थिनर अचानक बंद करने से स्ट्रोक, हार्ट अटैक या जानलेवा ब्लड क्लॉट बनने का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। इसलिए दवा हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लें। साथ ही, यदि आप कोई नई दवा, आयुर्वेदिक औषधि, हर्बल सप्लीमेंट या विटामिन लेना शुरू कर रहे हैं, तो इसकी जानकारी डॉक्टर को जरूर दें क्योंकि कुछ दवाएं ब्लड थिनर के असर को बढ़ा या घटा सकती हैं। नियमित फॉलो-अप और जरूरी ब्लड टेस्ट भी समय-समय पर कराते रहना चाहिए।

निष्कर्ष

ब्लड थिनर दवाएं लाखों लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित होती हैं और हार्ट अटैक, स्ट्रोक तथा खतरनाक ब्लड क्लॉट्स से बचाने में अहम भूमिका निभाती हैं। हालांकि, इनके उपयोग के दौरान ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए मरीजों को सतर्क रहना चाहिए और किसी भी असामान्य ब्लीडिंग या गंभीर लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि ब्लड थिनर दवा कभी भी अपनी मर्जी से बंद न करें। डॉक्टर की निगरानी में सही खुराक, नियमित जांच और सावधानी के साथ इन दवाओं के फायदे इनके जोखिमों की तुलना में कहीं ज्यादा होते हैं।

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FAQ

  • ब्लड थिनर दवाएं किसलिए दी जाती हैं?

    ब्लड थिनर दवाएं हार्ट अटैक, स्ट्रोक, डीवीटी और पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी स्थितियों में खून के थक्के बनने से रोकने के लिए दी जाती हैं।
  • क्या ब्लड थिनर दवा अपनी मर्जी से बंद कर सकते हैं?

    बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद करने से स्ट्रोक और ब्लड क्लॉट का खतरा बढ़ सकता है।
  • खून ज्यादा पतला होने के क्या नुकसान हैं? 

    खून जरूरत से ज्यादा पतला होने पर शरीर में ज्यादा ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है। छोटी चोट लगने पर भी लंबे समय तक खून बह सकता है।

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Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jun 30, 2026 11:57 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Jun 30, 2026 11:57 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Vikash Goyal

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