ब्लड थिनर (Blood Thinner) यानी खून को पतला करने वाली दवाओं के फायदे-नुकसान

ब्लड थिनर यानी खून को पतला करने वाली दवाओं का गलत इस्तेमाल नुकसानदायक भी हो सकता है, कारण जानें डॉक्टर से।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: May 23, 2021
ब्लड थिनर (Blood Thinner) यानी खून को पतला करने वाली दवाओं के फायदे-नुकसान

दिल (Heart) और खून से जुड़ी तमाम समस्याओं में चिकित्सक ब्लड थिनर (Blood Thinner) यानी कि खून को पतला करने वाली दवाएं लेने की सलाह देते हैं। खासकर हार्ट से जुड़ी सर्जरी जैसे एंजियोप्लास्टी या हार्ट वॉल्व सर्जरी के बाद डॉक्टर्स इन दवाओं के लेने कि सलाह देते हैं। ब्लड थिनर्स या एंटीप्लेटलेट (Antiplatelet) और एंटीथ्रॉम्बोटिक (Antithrombotic) एजेंट आमतौर पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल किये जाते हैं। आसान भाषा में कहें तो खून को पतला करने वाली दवाएं हृदय, मस्तिष्क या फेफड़ों में खून का संचार बंद होने या खून के थक्के जमने पर इस्तेमाल की जाती है। ब्लड थिनर्स एथेरोस्क्लोरोटिक या वस्कुलर डिजीज में उपयोगी होते हैं। ब्लड थिनर या खून को पतला करने वाली दवाओं के कई साइड इफेक्ट्स भी होते हैं और जरूरत पड़ने पर इन्हें नजरअंदाज करने से भी काफी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ सकता है। ब्लड थिनर के इस्तेमाल और इनके प्रयोग से होने वाले फायदे और नुकसान के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमने बात की बैंगलोर के फोर्टिस ला फेम अस्पताल के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के निदेशक डॉ राजपाल सिंह से, आइए जानते हैं इस विषय पर उन्होंने क्या जानकारी साझा की।

आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले ब्लड थिनर्स (Commonly used Blood Thinners)

एस्पिरिन (Aspirin)

एस्पिरिन या एकोस्पिरिन सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले ब्लड थिनर्स में से एक है। एस्पिरिन या एकोस्पिरिन का इस्तेमाल दिल के दौरे और दिमागी स्ट्रोक से होने वाली मौत के जोखिम को कम करने के लिए किया जाता है। इसका इस्तेमाल कोरोनरी धमनी रोग (Coronary Artery Disease) या पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज (Peripheral Vascular Disease) और अधिक जोखिम वाले मरीजों के इलाज के लिए भी किया जाता है।

blood thinners

क्लोपिडोग्रेल (Clopidogrel)

Clopidogrel को आसान भाषा में 'सुपरएस्पिरिन' भी कहा जाता है। एस्पिरिन कि जगह पर इसक इस्तेमाल कुछ खास लक्षण वाले मरीजों के उपचार में किया जाता है, यह खून के थक्कों को जमने से रोकता (Prevention of Blood Clots) है। वे मरीज जो कोरोनरी स्टेंट से गुजर चुके हैं या एक स्ट्रोक आदि से पीड़ित हैं उनके लिए क्लोपिडोग्रेल सुपरएस्पिरिन का इस्तेमाल किया जाता है।

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प्रसुगल और टिकैगरेल (Prasugrel and Ticagrelor)

Prasugrel and Ticagrelor शक्तिशाली ब्लड थिनर माने जाते हैं। एस्पिरिन और सुपर एस्पिरिन की जगह पर गंभीर स्थितियों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। कोरोनरी स्टेंट से गुजर चुके लोगों के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। Prasugrel and Ticagrelor का इस्तेमाल केवल हृदय रोग विशेषज्ञों की निगरानी में ही किया जाना चाहिए।

वारफेरिन (Warfarin)

वारफेरिन सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली एंटी-कोआगुलेंट मेडिसिन है, यह दवा खून के थक्कों को जमने से से रोकती है। वारफेरिन का इस्तेमाल अनियमित दिल की धड़कन, मेटालिक हार्ट वाल्व, स्ट्रोक और गंभीर पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज से जूझ रहे मरीजों के उपचार के लिए किया जाता है। वारफेरिन का इस्तेमाल विशेषज्ञों की निगरानी में किया जाना चाहिए और इसके इस्तेमाल के लिए नियमित रूप से INR जांच की जानी जरूरी होती है।

इन सभी दवाओं का इस्तेमाल ब्लीडिंग के खतरे से भरा होता है ऐसे में विशेष सावधानी के साथ इनका इस्तेमाल किया जाना चाहिए। बिना हृदय रोग विशेषज्ञ की सलाह के इन दवाओं का सेवन खतरों से भरा होता है।

ब्लड थिनर्स के इस्तेमाल से फायदे (Blood Thinners Benefits)

  • इकोस्प्रिन या क्लोपिडोग्रेल का उपयोग खून को पतला रखने के लिए लंबे समय तक किया जा सकता है, इसका इस्तेमाल कोरोनरी स्टेंट, बाईपास सर्जरी या स्ट्रोक की स्थिति में किया जाता है।
  • क्लोपिडोग्रेल या प्रसूगल या टिकैग्रेलर के साथ इको एस्पिरिन का इस्तेमाल केवल कोरोनरी स्टेंट के मामलों में किया जाता है, ज्यादातर मामलों में इसका इस्तेमाल 6 महीने से लेकर 1 साल तक के लिए किया जाता है। इन दवाओं को एक साथ आमतौर पर सफल बाईपास सर्जरी के बाद ही किया जाता है।
  • इन दवाओं का सेवन बहुत कम ही लोगों को कुछ समय के लिए करने की सलाह दी जाती है। व्यक्तिगत रूप से सभी फायदे और जोखिम को ध्यान में रखते हुए चिकित्सक इन दवाओं के इस्तेमाल की इजाजत देते हैं।
  • ये दवाएं हृदय या खून की समस्या में बेहद उपयोगी मानी जाती हैं। रक्त वाहिकाओं में खून के थक्कों को बनने से रोकने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।
side effects of blood thinners

ब्लड थिनर्स के जोखिम या नुकसान (Side Effects of Blood Thinners)

सभी प्रकार कि दवाओं का सेवन फायदे के साथ नुकसानदायक भी होता है। खून को पतला करने वाली दवाओं के सेवन का सबसे बड़ा नुकसान ब्लीडिंग के जोखिम को बढ़ाना माना जाता है। ब्लड थिनर्स कि वजह से होने वाले प्रमुख जोखिम कुछ इस प्रकार से हैं।

  • गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रक्तस्राव और अल्सरेशन, यह स्थिति गंभीर भी हो सकती है
  • मस्तिष्क के भीतर रक्तस्राव, स्ट्रोक
  • मसूड़ों से खून बहना
  • कटने या चोट लगने पर अधिक समय तक ब्लीडिंग
  • सिर चकराना
  • मांसपेशियों में कमजोरी
  • बाल झड़ना

ब्लड थिनर लेने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें ये सवाल (Questions to Ask Your Doctor Prior to Taking Blood Thinners)

  • 1. इस दवा को लेने से मुझे क्या लाभ होगा?
  • 2. मुझे इसे कब तक लेना चाहिए?
  • 3. इस दवा को लेते वक़्त कौन-कौन सी जांच जरूरी है और कितने समय पर इसे कराना चाहिए?
  • 4. इस दवा के क्या जोखिम हो सकते हैं जिनका ध्यान रखना जरूरी है?

ब्लड थिनर लेते समय इन बातों का जरूर रखें ध्यान (Precautions When Taking Blood Thinners)

ब्लड थिनर का इस्तेमाल करते समय बेहद सतर्क होने कि जरूरत होती है। खून को पतला करने वाली दवाओं के सेवन से रक्तस्राव (Bleeding) का खतरा बढ़ जाता है। इन दवाओं के सेवन के समय खुद को किसी भी प्रकार कि चोट आदि से बचाना चाहिए। किसी भी प्रकार की ब्लीडिंग होने या चोट लगने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर की अनुमति के बिना कोई भी काम इस दौरान नहीं करना चाहिए। अगर आप भी ब्लड थिनर्स का इस्तेमाल कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें।

  • ऐसी गतिविधियों और खेलों से बचें जिसमें चोट लगने का खतरा हो
  • टूथब्रश का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतें
  • चाकू और कैंची के इस्तेमाल से बचें
  • टूथपिक का इस्तेमाल न करें
  • जूतों का प्रयोग हमेशा करें
  • शेविंग ब्लेड या रेजर की जगह इलेक्ट्रिक रेजर का प्रयोग करें
  • बाइक या स्कूटर चलाते समय हेलमेट जरूर पहने

यह लेख एंटीप्लेटलेट और एंटी-थ्रोम्बोटिक दवाओं के उपयोग से जुडी सामान्य जानकारी के लिए है। हृदय रोग से जुडी ये दवाएं बेहद कामगर मानी जाती हैं लेकिन इनका लंबे समय तक उपयोग कई जोखिम भी पैदा कर सकता है। इन दवाओं के सेवन से पहले इनके फायदे और नुकसान से जुड़ी अहम जानकारी होना जरूरी है, जानकारी होने से इसके सेवन से होने वाले दुष्परिणामों से बचा जा सकता है। यदि आप वर्तमान में इन दवाओं का सेवन कर रहे हैं, तो आपका इलाज करने वाले विशेषज्ञ की सलाह के बिना किसी भी दवा को बंद न करें।

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