Fri Sep 11, 2026 | 06:50 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vidya Tickoo , Consultant Endocrinologist & Diabetologist

एक नहीं हैं एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी, डॉक्‍टर से जानें क्‍या है अंतर?

पाचन तंत्र की जांच के ल‍िए दो टेस्‍ट क‍िए जाते हैं पहला है एंडोस्कोपी और दूसरा है कोलोनोस्कोपी। डॉक्‍टर से जानते हैं इन दोनों में क्‍या अंतर होता है?

पाचन तंंत्र की जांच के ल‍िए क‍िए जाने वाली दो जांच एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी दोनों ही एक-दूसरे से काफी अलग हैं। इन दो जांच और मरीज के लक्षण के आधार पर पता चलता है क‍ि मरीज को कौन सी बीमारी है। दोनों जांच भले ही पाचन तंत्र की समस्‍याओंं को देखने के ल‍िए की जाती है, लेक‍िन दोनों में शरीर के अलग-अलग अंगों पर जांच होती है। एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी के बीच का अंतर जानने के ल‍िए हमने Dr. Vidya Tickoo, Consultant Endocrinologist & Diabetologist At Yashoda Hospitals, Hitech City Hyderabad से बात की।

लक्षणों के आधार पर समझें अंतर

endoscopy-and-colonoscopy

एंडोस्कोपी तब की जाती है जब एस‍िड‍िटी, खाना न‍िगलने में परेशानी, जी म‍िचलाना या अपर एब्‍डॉम‍िनल यानी पेट दर्द जैसे लक्षण नजर आते हैं। वहीं कोलोनोस्कोपी बाउल-संबंध‍ित लक्षण लैसे रेक्‍टल (मलाशय) ब्‍लीड‍िंंग, कोलन कैंसर जैसे लक्षण नजर आने पर क‍ी जाती है।

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क‍िस अंग के ल‍िए कौन सी जांच होती है?

एंडोस्‍कोपी, पाचन तंत्र के ऊपरी हि‍स्‍से की जांच के ल‍िए होती है। वहीं कोलोनोस्‍कोपी तब की जाती है जब बड़ी आंत, मलाशय या रेक्‍टम और न‍िचली आंत की जांच करनी होती है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताब‍िक, कोलोनोस्‍कोपी के जर‍िए डॉक्‍टर रेक्‍टम और पूरी कोलन के अंदर पॉलीप्‍स या कैंसर की जांच करके उसे हटा सकते हैं।

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कैसे होती है जांच?

एंडोस्‍कोपी में कैमरे वाली एक पतली और लचीली ट्यूब को मुंह के जर‍िए शरीर के अंदर डालकर फूड पाइप, पेट और छोटी आंत के ऊपरी ह‍िस्‍से की जांच की जाती है। वहीं कोलोनोस्‍कोपी में गुदा (Anus) के जरिए जांच की जाती है।

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एंडोस्‍कोपी से क्‍या पता लगाया जाता है?

  • अल्‍सर का पता लगाने में मदद म‍िलती है।
  • पित्त की पथरी का पता लगाया जा सकता है।
  • गांठों और ट्यूमर की पहचान होती है।
  • पेट और भोजन नली की जानकारी म‍िलती है।
  • जीईआरडी, सीलि‍एक रोग, क्रोहन रोग (Crohn's Disease) का पता चलता है।

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कोलोनोस्‍कोपी से क्‍या मदद म‍िलती है?

  • कोलन कैंसर का पता लगाने में मदद म‍िलती है।
  • कोलन कैंसर से बचाव के ल‍िए यह जांंच जरूरी है।
  • कोलन और रेक्‍टम जैसे अंगों के स्‍वास्‍थ्‍य की बेहतर जानकारी म‍िलती है।
  • क्रॉन‍िक डायर‍िया और पेट दर्द के पीछे का कारण पता करने में भी मदद म‍िलती है।

एंडोस्कोपी और कोलोनोस्‍कोपी के नुकसान क्‍या हैं?

एंडोस्कोपी में कुछ मरीजों को-

  • ब्‍लीड‍िंग या इंफेक्‍शन हो सकता है।
  • बुखार या सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
  • चेस्‍ट पेन, उल्‍टी या पेट में दर्द जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।

कोलोनोस्‍कोपी होने पर कुछ मरीजोंं को-

  • पेट के ह‍िस्‍से का सख्‍त होना।
  • बुखार, चक्‍कर और उल्‍टी आना।
  • पेट की गैस पास करने में समस्‍या होना।
  • ब्‍लीड‍िंंग होना।

न‍िष्‍कर्ष:

एंडोस्कोपी और कोलोनोस्‍कोपी दोनों का ही इस्‍तेमाल पेट की समस्‍याओं का पता लगाने के ल‍िए क‍िया जाता है। जहां एक तरह एंडोस्‍कोपी में जीईआरडी, सीलि‍एक रोग जैसी बीमार‍ियों का पता चलता है वहीं कोलोनोस्‍कोपी के जर‍िए कोलन कैंसर, कोलन और रेक्‍टम से संबंध‍ित अन्‍य समस्‍याओं का पता लगाने में मदद म‍िलती है।

FAQ

  • एंडोस्कोपी और कोलोनोस्‍कोपी दोनों से कैंसर का पता चलता है?

    हां, कोलोनोस्‍कोपी से कोलोरेक्टल कैंसर और एंडोस्कोपी से पेट के ऊपरी ह‍िस्‍से के कैंसर का पता लगाने में मदद मि‍लती है।
  • एंडोस्कोपी और कोलोनोस्‍कोपी में मुख्‍य अंतर क्‍या है?

    एंडोस्कोपी से पेट के ऊपरी ह‍िस्‍से की जांच की जाती है वहीं कोलोनोस्‍कोपी से मलाशय और कोलन की जांच होती है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jun 30, 2026 11:18 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jun 30, 2026 11:18 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Vidya Tickoo

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