पाचन तंंत्र की जांच के लिए किए जाने वाली दो जांच एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी दोनों ही एक-दूसरे से काफी अलग हैं। इन दो जांच और मरीज के लक्षण के आधार पर पता चलता है कि मरीज को कौन सी बीमारी है। दोनों जांच भले ही पाचन तंत्र की समस्याओंं को देखने के लिए की जाती है, लेकिन दोनों में शरीर के अलग-अलग अंगों पर जांच होती है। एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी के बीच का अंतर जानने के लिए हमने Dr. Vidya Tickoo, Consultant Endocrinologist & Diabetologist At Yashoda Hospitals, Hitech City Hyderabad से बात की।
लक्षणों के आधार पर समझें अंतर

एंडोस्कोपी तब की जाती है जब एसिडिटी, खाना निगलने में परेशानी, जी मिचलाना या अपर एब्डॉमिनल यानी पेट दर्द जैसे लक्षण नजर आते हैं। वहीं कोलोनोस्कोपी बाउल-संबंधित लक्षण लैसे रेक्टल (मलाशय) ब्लीडिंंग, कोलन कैंसर जैसे लक्षण नजर आने पर की जाती है।
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किस अंग के लिए कौन सी जांच होती है?
एंडोस्कोपी, पाचन तंत्र के ऊपरी हिस्से की जांच के लिए होती है। वहीं कोलोनोस्कोपी तब की जाती है जब बड़ी आंत, मलाशय या रेक्टम और निचली आंत की जांच करनी होती है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक, कोलोनोस्कोपी के जरिए डॉक्टर रेक्टम और पूरी कोलन के अंदर पॉलीप्स या कैंसर की जांच करके उसे हटा सकते हैं।
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कैसे होती है जांच?
एंडोस्कोपी में कैमरे वाली एक पतली और लचीली ट्यूब को मुंह के जरिए शरीर के अंदर डालकर फूड पाइप, पेट और छोटी आंत के ऊपरी हिस्से की जांच की जाती है। वहीं कोलोनोस्कोपी में गुदा (Anus) के जरिए जांच की जाती है।
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एंडोस्कोपी से क्या पता लगाया जाता है?
- अल्सर का पता लगाने में मदद मिलती है।
- पित्त की पथरी का पता लगाया जा सकता है।
- गांठों और ट्यूमर की पहचान होती है।
- पेट और भोजन नली की जानकारी मिलती है।
- जीईआरडी, सीलिएक रोग, क्रोहन रोग (Crohn's Disease) का पता चलता है।
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कोलोनोस्कोपी से क्या मदद मिलती है?
- कोलन कैंसर का पता लगाने में मदद मिलती है।
- कोलन कैंसर से बचाव के लिए यह जांंच जरूरी है।
- कोलन और रेक्टम जैसे अंगों के स्वास्थ्य की बेहतर जानकारी मिलती है।
- क्रॉनिक डायरिया और पेट दर्द के पीछे का कारण पता करने में भी मदद मिलती है।
एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी के नुकसान क्या हैं?
एंडोस्कोपी में कुछ मरीजों को-
- ब्लीडिंग या इंफेक्शन हो सकता है।
- बुखार या सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
- चेस्ट पेन, उल्टी या पेट में दर्द जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।
कोलोनोस्कोपी होने पर कुछ मरीजोंं को-
- पेट के हिस्से का सख्त होना।
- बुखार, चक्कर और उल्टी आना।
- पेट की गैस पास करने में समस्या होना।
- ब्लीडिंंग होना।
निष्कर्ष:
एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी दोनों का ही इस्तेमाल पेट की समस्याओं का पता लगाने के लिए किया जाता है। जहां एक तरह एंडोस्कोपी में जीईआरडी, सीलिएक रोग जैसी बीमारियों का पता चलता है वहीं कोलोनोस्कोपी के जरिए कोलन कैंसर, कोलन और रेक्टम से संबंधित अन्य समस्याओं का पता लगाने में मदद मिलती है।
FAQ
एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी दोनों से कैंसर का पता चलता है?
हां, कोलोनोस्कोपी से कोलोरेक्टल कैंसर और एंडोस्कोपी से पेट के ऊपरी हिस्से के कैंसर का पता लगाने में मदद मिलती है।एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी में मुख्य अंतर क्या है?
एंडोस्कोपी से पेट के ऊपरी हिस्से की जांच की जाती है वहीं कोलोनोस्कोपी से मलाशय और कोलन की जांच होती है।
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Jun 30, 2026 11:18 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Jun 30, 2026 11:18 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Vidya Tickoo