क्या है नेजल एंडोस्कोपी? कोरोना मरीजों को कब पड़ती है इसकी जरूरत

कोरोना मरीजों में ब्लैक फंगस का पता लगाने के लिए नेजल एंडोस्कोपी की जाती है। जानें कब पड़ती है इसकी जरूरत 

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: May 24, 2021Updated at: May 24, 2021
क्या है नेजल एंडोस्कोपी? कोरोना मरीजों को कब पड़ती है इसकी जरूरत

देश में कोरोना की दूसरी लहर ने अपनी कमर टोड़ना शुरू कर दिया है। पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना के ढाई लाख से भी कम मामले सामने आए है। लेकिन कोरोना मरीजों को होने वाले ब्लैक फंगस के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही हैं। देश में अभी तक लगभग 5 हजार से ज्यादा लोग ब्लैक फंगस से संक्रमित हो चुके हैं और 100 से ज्यादा लोगों की इसकी वजह से जान जा चुकी हैं। राजस्थान और उत्तराखंड समेत कुछ राज्यों ने ब्लैक फंगस को भी कोरोना वायरस की तरह ही महामारी घोषित कर दिया है। ब्लैक फंगस की जांच करने के लिए नेजल एंडोस्कोपी किया जाता है, जिससे पता चलता है कि व्यक्ति ब्लैक फंगस से संक्रमित है या नहीं। 

दरअसल, म्यूकोरमाइकोसिस (Mucormycosis) यानी ब्लैक फंगस कोरोना मरीजों को होने वाली एक बीमारी है। लेकिन यह सभी कोरोना मरीजों को नहीं होता है, कुछ मरीजों में ही इसके लक्षण नजर आ रहे हैं। यह ज्यादातर कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को अपना शिकार बनाता है। ब्लैक फंगस नाक या मुंह से शरीर में प्रवेश करता है। इसके बाद यह आंखों को प्रभावित करता है और फिर दिमाग पर अटैक करता है। जिसकी वजह से मरीज को अपनी प्रभावित आंख तक निकलवानी पड़ जाती है। कई केसेज में ब्लैक फंगस के मरीजों की जान चली जाती है। ऐसे में अगर शुरुआती लक्षणों से ही इसका पता लगाया जाए, तो इसे ठीक किया जा सकता है। इसका पता लगाने के लिए नेजल एंडोस्कोपी की जाती है। 

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क्या है नेजल एंडोस्कोपी (What is Nasal Endoscopy)

फैमिली फिजिशियंस ऑफ इंडिया, ग्रेटर नोएडा के अध्यक्ष डॉक्टर रमन कुमार बताते हैं कि (Dr. Raman Kumar, President, Family Physicians of India, Greater Noida) जब किसी व्यक्ति के शरीर के अंदुरुनी अंगों की जांच दूरबीन से की जाती है, तो उसे एंडोस्कोपी कहा जाता है। जब नाक के अंदर दूरबीन डालकर जांच की जाती है, तो उसे नेजल एंडोस्कोपी कहते हैं। नाक के अंदर किसी भी तरह की परेशानी को देखने के लिए नेजल एंडोस्कोपी करवाई जाती है। इन दिनों ब्लैक फंगस की जांच करने के लिए नेजल एंडोस्कोपी का सहारा लिया जा रहा है। इससे पता चलता है व्यक्ति ब्लैक फंगस का शिकार हुआ है या नहीं। 

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नेजल एंडोस्कोपी करने से दूरबीन से नाक में इंफेक्शन का पता चल जाता है। डॉक्टर रमन बताते हैं कि ज्यादातर मामलों में ब्लैक फंगस के लक्षण तब सामने आ रहे हैं, जब यह व्यक्ति के आंख, साइनस और ब्रेन में पूरी तरह से फैल चुका होता है। ऐसे में नेजल एंडोस्कोपी ब्लैक फंगस की पहचान करने में मददगार हो सकता है। डॉक्टर रमन कहते हैं कि सभी कोरोना मरीजों को नेजल एंडोस्कोपी की जरूरत नहीं पड़ती है। कुछ ही मामलों में इसकी जरूरत पड़ती है। 

कब करवाएं नेजल एंडोस्कोपी (When Do Nasal Endoscopy)

नानावटी मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट और ईएनटी विशेषज्ञ डॉक्टर अमोल पाटिल (Dr Amol Patil, Senior Consultant and ENT Specialist, Nanavati Max Super Speciality Hospital) बताते हैं कि कोरोना के सभी मरीजों को नेजल एंडोस्कोपी करवाने की जरूरत नहीं होती है। जिन लोगों में म्यूकोरमाइकोसिस (Mucormycosis) यानी ब्लैक फंगस के लक्षण नजर आते हैं, उन्हें ही नेजल एंडोस्कोपी करवानी चाहिए। नाक की एंडोस्कोपी सिर्फ इन लक्षणों के दिखने पर ही करवानी चाहिए। डॉक्टर के कहने पर भी आपको नेजल एंडोस्कोपी करवानी चाहिए। 

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  • - सिरदर्द
  • - नाक में कालापन या कोई दिक्कत महसूस होना
  • - चेहरे में सूजन या एक हिस्से में दर्द होना
  • - गालों पर सुन्नता
  • - चेहरे का रंग बदला नजर आना
  • - दांतों का ढीला होना

डॉक्टर अमोल पाटिल कहते हैं कि अगर आपको भी ये लक्षण नजर आते हैं, तो आपको नेजल एंडोस्कोपी करवाने की जरूरत होती है। डॉक्टर अमोल पाटिल बताते हैं कि नाक की एंडोस्कोपी के माध्यम से हम साइनस और नाक की गुहा की जांच करते हैं। इससे पता चलता है कि नाक में कोई काला कवक जमा है या नहीं। इससे यह भी पता चल सकता है कि संक्रमण आस-पास की संरचना में फैल रहा है या नहीं। डॉक्टर अमोल पाटिल कहते हैं कि कोरोना के सभी मरीजों को नेजल एंडोस्कोपी की जरूरत नहीं होती है। जिन मरीजों में ब्लैक फंगस के शुरुआती लक्षण नजर आते हैं, उन्हें ही नेजल एंडोस्कोपी करवानी चाहिए। इससे ब्लैक फंगस का समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है और उसे फैलने से रोका जा सकता है। 

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अगर आप में भी ये लक्षण नजर आते हैं, तो आपको इन्हें नजरअंदाज बिल्कुल नहीं करना चाहिए। क्योंकि ये सभी लक्षण ब्लैक फंगस के हो सकते हैं, शुरुआत में इन पर ध्यान न देने से ये धीरे-धीरे दिमाग और आंखों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए अगर आपको ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण नजर आए, तो ब्लैक फंगस की जांच के लिए डॉक्टर की सलाह पर नेजल एंडोस्कोपी जरूर करवा लें।

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