क्या है ब्लैक फंगस और कोविड मरीजों में क्यों बढ़ रहे हैं इसके मामले? देखें वीडियो

कोरोना वायरस महामारी के बीच ब्लैक फंगस का प्रकोप पूरे देश को प्रभावित कर रहा है। वीडियो से जानिए इससे जुड़ी सभी जानकारी।

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: May 21, 2021Updated at: May 21, 2021
क्या है ब्लैक फंगस और कोविड मरीजों में क्यों बढ़ रहे हैं इसके मामले? देखें वीडियो

कोविड-19 महामारी के बीच अब देश में ब्लैक फंगस के बढ़ते मामले चिंता का सबब बन रहे हैं। भारत में ब्लैक फंगस के मामले महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात सहित कई राज्यों में देखे गए हैं। देश में अबतक ब्लैक फंगस के कुल 7,251 मामले  सामने आ चुके हैं। इनमें से करीब 219 मरीजों की मौत हो चुकी है। महाराष्ट्र में ब्लैक फंगस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ब्लैक फंगस से जुड़े कई सवाल लोगों के मन में हैं। ओनलीमाईहेल्‍थ (Onlymyhealth) कोरोना से जुड़ी स्‍पष्‍ट जानकारी आप तक पहुंचाने के लिए न्यूजवर्दी (Newsworthy) के साथ मिलकर खास वीडियो सीरीज चला है, जिसका नाम है 'COVID 19 आपके सवालों के स्पष्ट जवाब'। इस सीरीज में हम आप तक कोविड-19 और इससे जुड़ी हर एक समस्या से जुड़ी जानकारी सही और आसान तरीके से बताने का प्रयास कर रहे हैं। सीरीज के इस वीडियो में आज हम बात करेंगे ब्लैक फंगस की, यह एक ऐसा इंफेक्शन है जो कोविड के उन मरीजों में ज्यादा देखने को मिल रहा है, जो संक्रमण के बाद हॉस्पिटल में भर्ती हुए और ठीक हो चुके हैं।

नए नहीं हैं ब्लैक फंगस के मामले

कोविड-19 की पहली लहर में भी ब्लैक फंगस के मामले सामने आए थे, लेकिन इस बार ऐसे मामलों की संख्या अधिक है। गुजरात, महाराष्ट्र, बेंगलुरु, दिल्ली, हरियाणा और पुणे में ब्लैक फंगस के मामले देखे जा रहे हैं। इन राज्यों में लगातार ब्लैक फंगस की संख्या बढ़ती जा रही है। ब्लैक फंगस को मेडिकल भाषा में म्यूकोरमायकोसिस कहा जाता है। यह एक गंभीर और खतरनाक बीमारी है। 

ब्लैक फंगस के लिए एक विशेष प्रकार के माउल्ड यानि फफूंद जिम्मेदार है, जो हमारे वातावरण में सभी जगह पाए जाते हैं। हवा में मौजूद ये माउल्ड्स सांस के जरिए हमारे शरीर में पहुंचते हैं। इससे साइनस और फेफड़ों पर सीधा असर पड़ता है। इससे हमारी आंखों को भी नुकसान पहुंच सकता है और कई बार दिमाग पर भी असर पड़ता है। वहीं, अगर आपकी स्किन पर कटने, जलने या फिर किसी तरह की चोट है, तो ये इंफेक्शन स्किन पर भी असर डाल सकता है।

सबसे जरूरी बात ये है कि फंगस इंफेक्शन संक्रामक नहीं है। यह कोविड की तरह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के शरीर में नहीं फैलता है। अगर इसका सही समय पर इलाज न किया गया, तो मरीज को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। 

ब्लैक फंगस का है इलाज (Treatment of Black Fungus)

मेडिकल साइंस के पास ब्लैक फंगस इंफेक्शन का इलाज सन् 1953 से मौजूद है। हमारे पास ब्लैक फंगस की विशेषज्ञता, इंजेक्शन और एंटी-फंगल की दवाएं मौजूद हैं। लेकिन ध्यान रहे कि ब्लैक फंगस का इलाज समय पर करना जरूरी होता है। अगर आप इसके लक्षणों को नजरअंदाज करते हैं, तो यह आपके लिए गंभीर साबित हो सकता है।

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कब होता है ब्लैक फंगस का खतरा? 

आमतौर पर जिन लोगों का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, उन्हें ब्लैक फंगस इंफेक्शन का खतरा कम होता है। ब्लैक फंगस का खतरा उन लोगों को अधिक होता है, जिन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य समस्याएं होती हैं और अन्य कई तरह की दवाइयां खाते हैं जिससे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है। इस दोनों बातों से आप समझ गए होंगे कि कोविड-19 से ठीक हुए मरीजों को ब्लैक फंगस क्यों अपनी चपेट में ले रहा है। इसके अलावा डायबिटीज, कैंसर रोगी और इम्यूनिटी वीक लोगों को ब्लैक फंगस होने का खतरा ज्यादा रहता है।

इसके अलावा अगर आप लंबे समय से आईसीयू में रह रहे है, जहां आपके इलाज में immunosuppressant steroids का इस्तेमाल किया गया हो या फिर हाल ही में ऑर्गन ट्रांसप्लांट कराया हो, तो ऐसी स्थिति में आपको ब्लैक इंफेक्शन होने का खतरा ज्यादा रहता है।

महामारी से पहले भी लोगों को होता था ब्लैक फंगस

ये समस्या कोविड-19 महामारी से पहले भी लोगों को होती थी। लेकिन डॉक्टर्स का कहना है कि कोविड के गंभीर मामलों में मरीजों को स्टेरॉयड दिया जाता है, इसलिए ब्लैक फंगल का खतरा बढ़ जाता है। स्टेरॉयड शरीर की इम्यूनिटी को कमजोर करता है और ब्लड शुगर को बढ़ा देता है इसलिए शुगर के मरीजों में इसका खतरा ज्यादा होता है।

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ब्लैक फंगस से कैसे करें बचाव (Prevention of Black Fungus)

  • ऐसे स्थानों पर न जाएं जहां पर बहुत धूल हो, जैसे कंड्रक्शन साइट, अगर आपको आपको धूल वाले स्थान पर जाना ही पड़े, तो N95 मास्क का इस्तेमाल करें।
  • ऐसी गतिविधियों में हिस्सा न लें, जिसमें आपको धूल या मिट्टी के संपर्क में आने की आशंका हो। अगर बहुत ही जरूरी काम है, तो खुद को अच्छे से कवर करें। इस दौरान मौजे पहनें, लंबी पैंट पहनें, फुल बाजू की शर्ट पहनें और गलब्स का इस्तेमाल करें। 
  • अगर आपके शरीर पर किसी भी प्रकार की चोट हो तो उसे साबुन और पानी से साफ करें। खासतौर पर तब, जब आपका शरीर मिट्टी में सना हुआ हो। कोशिश करें कि साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
  • अगर आप शुगर मरीज हैं, तो नियमित रूप से अपना ब्लड ग्लूकोज लेवल चेक करते रहें। खासतौर पर कोविड-19 से ठीक होने के बाद ऐसा करना आपके लिए बेहद जरूरी है। अपने शुगर लेवल को कंट्रोल करने की कोशिश करें।
  • अगर आप घर पर ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर या फिर ह्यूमडिफायर का इस्तेमाल करते हैं, तो साफ पानी का इस्तेमाल करें और सुनिश्चित करें कि पानी लीक न हो। 
  • हमेशा ध्यान रखें कि एंटीबयोटिक (Antibiotics), एंटी फंगल (Anti Fungal) और स्टेरॉयड का इस्तेमाल कम से कम करें और डॉक्टर की सलाह पर ही करें।

कैसे करें ब्लैक फंगस की पहचान (Sign of Black Fungus)

ब्लैक फंगस इंफेक्शन के लक्षणों की पहचान के लिए निम्न बातों का ध्यान रखें।

  • खून की उल्टी होना या फिर मानसिक का संतुलन अस्थिर होना।
  • नाक भरी लगना या फिर नाक से खून आना।
  • आंख और नाक के पास दर्द, सूजन या फिर स्किन का लाल होना।
  • पलकों का गिरना
  • आंखों के सामने धुंधलापन महसूस होना।
  • नाक के पास की स्किन पर काले चकत्ते पड़ जाना।
  • दांत में दर्द होना या दांतों का टूटना
  • अगर फेफड़ों में ब्लैक फंगस का अटैक हुआ है, तो आपको बुखार, खांसी, सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

यदि आप कोविड-19 से रिकवर हो रहे हैं और आपको इनमें से कोई भी लक्षण नजर आए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इंफेक्शन की पहचान के लिए डॉक्टर आपको सही टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।

ध्यान रहे कि हमारे पास ब्लैक फंगस के गंभीर और हल्के मामलों का इलाज उपलब्ध है। इसलिए समय पर इनके लक्षणों को पहचानकर अपना टेस्ट जरूर कराएं। ताकि आपका इलाज सही समय पर हो सके।

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