Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr V Rajasekhar , Senior Consultant – Interventional Cardiology & Electrophysiology | Certified TAVR Operator | Clinical Director

क्या दुबले और फिट द‍िखने वाले लोगों को भी हाई कोलेस्ट्रॉल हो सकता है? डॉक्‍टर से जानें सच

कुछ लोगों को लगता है क‍ि हाई कोलेस्‍ट्रॉल केवल उन लोगोंं को होती है ज‍िनका पेट न‍िकला होता है या जो मोटापे का श‍िकार होते हैं। वहीं कुछ को यह भी लगता है क‍ि कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ने की समस्‍या दुबले और फ‍िट द‍िखने वाले लोगों में नहीं होती है। डॉक्‍टर से जानें क्‍या है सच?

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कोलेस्‍ट्रॉल एक फैट जैसा पदार्थ है जो हमारे ब्‍लड में पाया जाता है। इसे ल‍िवर बनाता है। जब ब्‍लड में कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल नॉर्मल से ज्‍यादा हो जाता है, तो इसे हाई कोलेस्‍ट्रॉल कहा जाता है। जब भी हाई कोलेस्‍ट्रॉल की बात होती है, तो आंखों के सामने मोटापा या अनहेल्‍दी लाइफस्‍टाइल की तस्‍वीर आती है। इसल‍िए लोगों को लगता है क‍ि फि‍ट या दुबले शरीर वाले लोगोंं को हाई कोलेस्‍ट्रॉल की च‍िंता करने की जरूरत नहींं है। क्‍या वाकई यह केवल मोटे शरीर वाले लोगों की समस्‍या है या यह क‍िसी को भी हो सकती है? ऐसे सवालों के जवाब जानने के ल‍िए हमने Dr. V. Rajasekhar, Cardiologist At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।

दुबले और फिट लोगों को भी हाई कोलेस्ट्रॉल हो सकता है

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Cardiologist Dr. V. Rajasekhar ने बताया क‍ि शारीर‍िक बनावट कैसी भी हो, हाई कोलेस्‍ट्रॉल कि‍सी को भी हो सकता है यानी दुबले और फ‍िट लोगों को भी हाई कोलेस्‍ट्रॉल हो सकता है। ज्‍यादा वजन होने के कारण हाई कोलेस्‍ट्रॉल का खतरा ज्‍यादा बढ़ जाता है, लेक‍िन पतले-दुबले या फिट द‍िखने वाले लोगों में भी इसका खतरा कम नहीं होता है। इसल‍िए वजन, डाइट और फिज‍िकल एक्‍ट‍िव‍िटी चाहे ज‍ितनी भी हो, समय-समय पर कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को जरूर चेक कराएंं।

साल 2025 में International Journal of Nutrology में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी में बताया गया क‍ि 33 साल की उम्र में 22.7 BMI के साथ भी मह‍िला में हाई कोलेस्‍ट्रॉल देखा गया। स्‍टडी में बताया गया क‍ि मह‍िला में टोटल कोलेस्ट्रॉल 301 mg/dL और LDL कोलेस्ट्रॉल 215 mg/dL था। साथ ही म‍ह‍िला को मोटापा, डायब‍िटीज या अन्‍य कोई बीमारी भी नहीं थी।

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HDL ज्‍यादा होगा तो घटेगा हार्ट र‍िस्‍क

2018 में Frontiers In Endocrinology में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, शरीर में वजन और ब्‍लड में मौजूद लिपोप्रोटीन (जैसे HDL और LDL) के बीच कि‍तना संबंध है इस पर स्पष्टता नहीं है। हालांकि‍, ज‍िन लोगों के ब्‍लड में HDL की मात्रा ज्‍यादा होती है उनमें कोरोनरी आर्टरी ड‍िजीज का खतरा कम होता है।

पतले लोगों में हाई कोलेस्‍ट्रॉल के क्‍या कारण हो सकते हैं?

  • पर‍िवार में हाई कोलेस्‍ट्रॉल का इति‍हास रहा हो।
  • हाइपोथायराइड और इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्‍थ‍ित‍ि भी हाई कोलेस्‍ट्रॉल का कारण बन सकती है।
  • जो लोग एक्‍सरसाइज न करते हों।
  • खराब लाइफस्‍टाइल या प्रोसेस्‍ड फूड्स का अध‍िक सेवन करने से भी हाई कोलेस्‍ट्रॉल की समस्‍या हो सकती है।

हाई कोलेस्‍ट्रॉल का खतरा क‍िसे ज्‍यादा होता है?

  • American Heart Association के मुताब‍िक, पुरुषों और मह‍िलाओं दोनों को ही अपने कोलेस्‍ट्रॉल पर ध्‍यान देना चाह‍िए क्‍योंक‍ि उम्र बढ़ने के साथ यह समस्‍या क‍िसी को भी हो सकती है।
  • महिलाओं में प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज के दौरान हाई कोलेस्‍ट्रॉल की समस्‍या हो सकती है।
  • इसके अलावा, 19 साल और उससे अध‍िक उम्र के सभी वयस्‍कों को हर पांच साल में कम से कम एक बार कोलेस्‍ट्रॉल टेस्‍ट कराना चाहि‍ए।

कोलेस्‍ट्रॉल लेवल क‍िस-क‍िस उम्र में चेक कराना चाह‍िए?

  • Mayo Clinic के मुताब‍िक, अमेर‍िकन हार्ट एसोस‍िएशन यह सलाह देता है क‍ि अगर पर‍ि‍वार में क‍िसी को हाई कोलेस्‍ट्रॉल, हार्ट अटैक या स्‍ट्रोक की समस्‍या है, तो स्‍क्रीन‍िंंग पहले भी शुरू की जा सकती है। इसल‍िए 9 से 11 साल की उम्र के बच्‍चोंं का कोलेस्‍ट्रॉल टेस्‍ट होना चाह‍िए।
  • अगली जांच 17 से 21 साल के बीच होनी चाह‍िए।
  • ज‍िन लोगों को हार्ट, डायब‍िटीज जैसी समस्‍याएं हैं उन्‍हें न‍ियम‍ित तौर पर जांच कराते रहना चाह‍िए।
  • 60 साल के बाद हर साल कोलेस्‍ट्रॉल लेवल चेक कराना चाह‍िए।

हाई कोलेस्‍ट्रॉल का इलाज क्‍या है?

  • Dr. V. Rajasekhar ने बताया क‍ि हाई कोलेस्‍ट्रॉल के इलाज के ल‍िए दवाओं में Statins की मदद ली जाती है। इससे कोलेस्‍ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है।
  • कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने के ल‍िए डॉक्‍टर मेडिटेरेनियन या डैश डाइट फॉलो करने की सलाह देते हैं।
  • मेड‍िटेरेन‍ियन डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, नट्स को प्राथम‍िकता दी जाती है और प्रोसेस्‍ड फूड्स से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
  • डैश डाइट हार्ट के मरीजों के ल‍िए बेस्‍ट मानी जाती है। इसमें लो सोड‍ियम फूड्स को खाने की सलाह दी जाती है। साथ ही फल, सब्‍ज‍ियां, लो फैट डेयरी या साबुत अनाज को भी शाम‍िल कर सकते हैं।

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हाई कोलेस्‍ट्रॉल से कैसे बचें?

  • ओट्स, नट्स को अपनी डाइट में शाम‍िल करें।
  • शुगर की मात्रा कंट्रोल करें।
  • योग करें और रोजाना कम से कम 30 म‍िनट वॉक करें।
  • ट्रांस फैट्स और अल्‍कोहल से परहेज करें।
  • धूम्रपान न करें।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

अगर टोटल कोलेस्‍ट्रॉल 240 mg/dL से ज्‍यादा है और आपको ये लक्षण नजर आएं, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें-

  • सीने में दर्द
  • सांस फूलना
  • चक्कर आना
  • स्‍वस्‍थ वयस्‍कों को हर 4 से 5 साल में एक बार लि‍प‍िड प्रोफाइल टेस्‍ट कराना चाह‍िए खासतौर पर अगर पर‍िवार में हाई कोलेस्‍ट्रॉल का इत‍िहास हो।

न‍िष्‍कर्ष:

पतले लोगों में भी हाई कोलेस्‍ट्रॉल लेवल हो सकता है। ज्‍यादा वजन से इसका खतरा बढ़ जाता है, लेक‍िन फ‍िट द‍िखने का यह मतलब नहीं है क‍ि आपको हाई कोलेस्‍ट्रॉल नहीं हो सकता। पर‍िवार में कोलेस्‍ट्रॉल का इत‍िहास, एक्‍सरसाइज की कमी, हेल्‍दी डाइट न लेना, खराब लाइफस्‍टाइल, क‍िडनी या हार्ट की समस्‍या, इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस या हाइपोथायराइड के कारण भी कोलेस्‍ट्रॉल सामान्‍य से ज्‍यादा हो सकता है। प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज के दौरान मह‍िलाओं में भी हाई कोलेस्‍ट्रॉल का र‍िस्‍क हो सकता है।

FAQ

  • ज्‍यादा चीनी खाने से कोलेस्‍ट्रॉल लेवल बढ़ सकता है?

    ज्यादा चीनी खाने से ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल बढ़ सकता है और हार्ट ड‍िजीज का खतरा ज्‍यादा हो सकता है इसल‍िए डायब‍िट‍िक मरीजों को शुगर लेवल कंट्रोल करने की सलाह दी जाती है।
  • बच्‍चों को हाई कोलेस्‍ट्रॉल का खतरा होता है?

    बच्‍चों को भी हाई कोलेस्‍ट्रॉल का खतरा हो सकता है। बच्‍चोंं को हाई कोलेस्‍ट्रॉल जेनेट‍िक कारण या खराब आदतों के कारण होता है। 9 से 11 साल की उम्र के उन सभी बच्‍चों को डॉक्‍टर जांच की सलाह देते हैं ज‍िनकी पहले जांच नहींं हुई होती है। 

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 31, 2026 13:35 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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    Published By : Yashaswi Mathur
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