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कोलेस्ट्रॉल कितने दिन में चेक करना चाहिए? एक्सपर्ट से जानें

आज के समय में ज्यादातर लोग हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या से परेशान रहते हैं, जिसके कारण लोगों को कई तरह की परेशानियां होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि कोलेस्ट्रॉल कितने दिन में चेक करना चाहिए? आइए लेख में जानें -
कोलेस्ट्रॉल कितने दिन में चेक करना चाहिए? एक्सपर्ट से जानेंकोलेस्ट्रॉल कितने दिन में चेक करना चाहिए? एक्सपर्ट से जानें

How Often Should Cholesterol Be Checked In Hindi: आज के समय में ज्यादातर लोग हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या से परेशान रहते हैं। इसके कारण अक्सर लोगों को थकान होने, कमजोरी होने, सीने में दर्द होने, शरीर में ब्लड फ्लो ठीक से न होने, हाथों-पैरों में ऐंठन होने और आंखों के पास पीले धब्बे बनने की समस्या होती है। ऐसे में अक्सर स्वस्थ लोगों को भी नियमित रूप से कोलेस्ट्रॉल का स्तर चेक कराने की सलाह दी जाती है, जिससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने के कारण होने वाली परेशानियों से बचा जा सके। इस स्थिति में अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि कोलेस्ट्रॉल कितनी बार और कब चेक कराना चाहिए? ऐसे में आइए गुरुग्राम के पारस हेल्थ के कार्डियोलॉजी विभाग के डायरेक्टर और यूनिट हेड डॉ. अमित भूषण शर्मा (Dr. Amit Bhushan Sharma, Director And Unit Head - Cardiology, Paras Health Gurugram) से जानें कोलेस्ट्रॉल कितने दिन में चेक करना चाहिए?

कोलेस्ट्रॉल कितने दिन में चेक करना चाहिए?

डॉ. अमित भूषण शर्मा के अनुसार, आज के समय में ज्यादातर लोग कोलेस्ट्रॉल की समस्या से परेशान हैं और शरीर में इसका स्तर अधिक बढ़ने के कारण हार्ट से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में इससे बचने के लिए स्वस्थ लोगों को हर 4 से 6 साल में कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जांच करानी चाहिए। वहीं, अगर किसी व्यक्ति के घर में माता-पिता को पहले से ब्लड शुगर या हार्ट से जुड़ी समस्याएं है, तो इन लोगों को जेनेटिक समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में इन लोगों को हर 1 से 2 साल में डॉक्टर की सलाह अनुसार, कोलेस्ट्रॉल की जांच जरूर करानी चाहिए। इसके अलावा, 45 की उम्र के बाद व्यक्ति को हर साल कोलेस्ट्रॉल या लिपिड प्रोफाइल की जांच करानी चाहिए।

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CDC के अध्ययन के अनुसार, हाई कोलेस्ट्रॉल के लिए जांच (लिपिड प्रोफाइल) कराना जरूरी है। स्वस्थ वयस्कों को हर 4-6 साल में जांच करानी चाहिए। इसमें LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर मापा जाता है। हार्ट की बीमारियों या ब्लड शुगर की जेनेटिक हिस्ट्री होने वाले लोगों को इससे ज्यादा बार जांच की जरूरत होती है।

कोलेस्ट्रॉल चेक कराने से पहले क्या करना चाहिए?

डॉ. अमित भूषण शर्मा कहते हैं कि, कोलेस्ट्रॉल की जांच कराने से पहले व्यक्ति को 8-12 घंटे पहले खाली पेट रहना चाहिए। इस टेस्ट को करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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हाई कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए क्या करें?

हाई कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए आदतों में कुछ सुधार किया जा सकता है, जिससे स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है।

  • इसके लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज करें और योग करें।
  • फाइबर से युक्त सब्जियों, फलों, लहसून, दलिया, ड्राई फ्रूट्स और सीड्स खाएं।
  • वजन कम करें
  • स्ट्रेस को कम करने के लिए मेडिटेशन करें, वॉक करें और नेचर के साथ समय बिताएं।
  • स्मोकिंग और अल्कोहल का सेवन करने से बचें।

निष्कर्ष

स्वस्थ व्यक्ति को हर 4-6 साल में कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए। वहीं, अगर किसी व्यक्ति के घर में ब्लड शुगर या हार्ट से जुड़ी जेनेटिक समस्याएं हैं, तो इन लोगों को 1 से 2 साल में जांच कराएं और 45 की उम्र के बाद भी व्यक्ति को हर साल 45 साल की उम्र के बाद नियमित जांच करानी चाहिए। इसके अलावा, कोलेस्ट्रॉल के कारण अधिक परेशानी महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

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FAQ

  • कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से शरीर में क्या लक्षण दिखाई देते हैं?

    कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने के कारण व्यक्ति को सांस फूलने की समस्या होने, थकान होने, पैरों में दर्द होने, ऐंठन होने, आंखों के आस-पास पीले धब्बे होने, सीने में दर्द होने, कमजोरी होने, पैरों और हाथों में सुन्नपन होने, जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे में शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने पर इसके लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
  • कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए सुबह क्या खाना चाहिए?

    शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम या नियंत्रित रखने के लिए व्यक्ति को डाइट में अखरोट, फल, ग्रीन टी, अलसी, चिया सीड्स, ओटमील, साबुत अनाज, सब्जियां, ऑलिव ऑयल, सोयाबीन, दालें और बीन्स जैसे फूड्स को डाइट में शामिल करें। इनसे स्वास्थ्य में सुधार करने और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ने से रोकने में मदद मिलती है।
  • सबसे खतरनाक कोलेस्ट्रॉल कौन सा है?

    स्वास्थ्य के लिए बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (LDL - Low-Density Lipoprotein) जोखिम बढ़ जाता है। इसके कारण व्यक्ति को सीने में दर्द होने, धमनियों के हार्ड होने या संकरी होने, ब्लड फ्लो ठीक से न हो पाने, पैरों में दर्द होने, हार्ट स्ट्रोक या हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में इससे राहत और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने के लिए डाइट में साबुत अनाज, फलों, सब्जियों, ड्राई फ्रूट्स और सीड्स जैसे फूड्स को डाइट में शामिल करें।

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Priyanka Sharma

Health & Lifestyle Journalist

प्रियंका शर्मा पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 2 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर हैं। वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, प्रेगनेंसी, स्किनकेयर, हेयरकेयर, आयुर्वेद, योग और हार्ट हेल्थ जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखती हैं और जटिल स्वास्थ्य जानकारी को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञों की राय और भरोसेमंद मेडिकल स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह Grehlakshmi (महिला केंद्रित हिंदी पत्रिका) और Noida Khabar के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Mar 05, 2026 14:12 IST

    Modified By : Priyanka Sharma
  • Mar 05, 2026 14:12 IST

    Published By : Priyanka Sharma