Fri Oct 9, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Prof Dr S M Fayaz

बार-बार बुखार आने का कारण हो सकती हैं ये 7 बीमार‍ियां, डॉक्टर से जानें

बार-बार बुखार आना हमेशा नॉर्मल नहीं होता है। यहां डॉक्टर से जानिए, इसके पीछे इंफेक्शन समेत कौन सी बीमारियां हो सकती हैं और बुखार आने पर क्या करें?
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बार-बार बुखार आना कुछ लोगों को आम लग सकता है लेकिन अगर आपको कुछ दिनों के अंतर पर बुखार हो रहा है या बुखार ठीक होने के बाद दोबारा लौट आता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। KIMS हॉस्पिटल्स, महादेवपुरा बेंगलुरु के लीड और सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज के अनुसार, आमतौर पर बुखार शरीर में किसी इंफेक्शन या सूजन के कारण होता है।

हालांकि, इसके पीछे वायरल इंफेक्शन से लेकर मलेरिया, टाइफाइड और टीबी जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं। कुछ मामलों में शरीर के इम्यून सिस्टम से जुड़ी समस्याएं भी बार-बार बुखार आने का कारण बन सकती हैं। आइए डॉक्टर गोपाल जी शर्मा से समझते हैं कि बार-बार बुखार आने के पीछे कौन-सी बीमारियां हो सकती हैं और किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

बार-बार बुखार आने के पीछे छिपी 7 प्रमुख बीमारियां

डॉ. एस.एम. फयाज के अनुसार, बार-बार बुखार का लौटना इस बात का संकेत हो सकता है कि बीमारी का कारण अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुआ है या शरीर में कोई नया इंफेक्शन हो गया है। कुछ मामलों में मलेरिया, टाइफाइड, डेंगू और टीबी जैसी बीमारियों के कारण भी बुखार आ सकता है।

1. मलेरिया

डॉ. एस.एम. फयाज के अनुसार, मलेरिया मच्छर के काटने से होता है और इसमें कुछ लोगों को ठंड लगने, कंपकंपी और तेज बुखार हो सकता है। इसके बाद पसीना आने और थकान महसूस होने की समस्या भी हो सकती है। बुखार का एक ही समय पर लौटना मलेरिया में देखा जा सकता है, लेकिन केवल इस लक्षण के आधार पर बीमारी की पहचान नहीं की जा सकती। इसके लिए चेकअप जरूरी होता है।

2. वायरल इंफेक्शन

वायरल इंफेक्शन बार-बार बुखार आने के कारणों में से एक है। सर्दी-जुकाम, इंफ्लूएंजा और अन्य वायरल इंफेक्शन के कारण शरीर का तापमान बढ़ सकता है। इसके साथ गले में खराश, खांसी, नाक बहना, सिरदर्द और शरीर में दर्द जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। अगर इंफेक्शन ठीक होने के बाद दोबारा बुखार आता है, तो इसका कारण नया इंफेक्शन या कोई दूसरी समस्या हो सकती है।

3. टाइफाइड

डॉ. एस.एम. फयाज बताते हैं कि टाइफाइड दूषित भोजन या पानी के जरिए फैलने वाले बैक्टीरिया से होता है। इसमें लगातार बुखार, कमजोरी, सिरदर्द, भूख कम लगना और कभी-कभी दस्त या कब्ज की समस्या हो सकती है। अगर बुखार लंबे समय तक बना रहता है या इलाज के बाद फिर आ जाता है, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेने से बचें।

Recurrent Fever causesRecurrent Fever causes

4. डेंगू

डॉ. एस.एम. फयाज के अनुसार, डेंगू में अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, मसल्स और जोड़ों में दर्द तथा स्किन पर चकत्ते हो सकते हैं। कभी-कभी डेंगू का बुखार कम होने के बाद भी मरीज की हालत बिगड़ सकती है। पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, खून आने जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

साल 2019 में European Journal of Cardiovascular Medicine में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, डेंगू बुखार मुख्य रूप से 26-35 वर्ष के युवाओं और पुरुषों में ज्यादा पाया गया। खून की जांच से यह स्पष्ट हुआ कि अस्पताल में भर्ती होने के समय प्लेटलेट्स बहुत कम थीं, जो इलाज के बाद डिस्चार्ज के समय काफी बेहतर हो गईं।

स्टडी में यह भी सामने आया कि जिन मरीजों में ब्लड यूरिन, क्रिएटिनिन, बिलीरुबिन और लिवर एंजाइम्स (SGOT/SGPT) का लेवल बढ़ गया था, उनमें गंभीर समस्याएं और मृत्यु का खतरा ज्यादा देखा गया। सही समय पर लक्षणों की पहचान और उचित इलाज से डेंगू से होने वाले खतरों को काफी हद तक टाला जा सकता है।

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5. यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन

डॉ. एस.एम. फयाज बताते हैं कि यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) यानी मूत्र मार्ग में इंफेक्शन होने पर भी बुखार आ सकता है। इसके साथ पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आने और पेट के निचले हिस्से में दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। अगर इंफेक्शन किडनी तक पहुंच जाए, तो तेज बुखार, ठंड लगना, उल्टी और कमर या पीठ के एक तरफ दर्द भी हो सकता है। ऐसे लक्षणों में जल्द डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

साल 2020 में Journal of Clinical Medicine में प्रकाशित स्टडी के अनुसार-

  • यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) के सभी मरीजों में बुखार होना जरूरी नहीं है। बिना बुखार वाले या देर से बुखार आने वाले मरीजों में एक्यूट किडनी इंजरी यानी किडनी खराब होने का खतरा काफी ज्यादा होता है।
  • इस स्टडी में पाया गया कि जिन मरीजों को शुरुआत में बुखार नहीं था लेकिन बाद में लक्षण उभरे, उनमें किडनी की समस्या, ऊपरी ट्रैक्ट का इंफेक्शन और अस्पताल में रहने का समय ज्यादा देखा गया।
  • इसलिए, डॉक्टरों और मरीजों को यह ध्यान रखना चाहिए कि बिना बुखार के भी UTI गंभीर रूप ले सकता है और किडनी पर असर डाल सकता है।

6. ऑटोइम्यून बीमारियां

कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही हेल्दी टिश्यू पर हमला करने लगता है। ल्यूपस और रूमेटॉइड अर्थराइटिस जैसी स्थितियों में बुखार, जोड़ों में दर्द और सूजन जैसे लक्षण हो सकते हैं। हालांकि, बार-बार बुखार आने का मतलब यह नहीं है कि आपको ऑटोइम्यून बीमारी है।

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7. टीबी

टीबी एक फैलने वाली यानी संक्रामक बीमारी है, जो शरीर के अलग-अलग अंगों को प्रभावित कर सकती है। फेफड़ों की टीबी में लंबे समय तक खांसी, वजन कम होना और हल्का बुखार रहना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अगर बुखार कई हफ्तों से आ रहा है और इसके साथ लगातार खांसी या वजन घटने की समस्या है, तो डॉक्टर से जांच जरूरी है।

बार-बार बुखार आने पर कौन से मेडिकल टेस्ट करवाएं?

डॉ. एस.एम. फयाज सलाह देते हैं कि अगर बुखार बार-बार आ रहा है, कई दिनों तक बना हुआ है या उसके साथ नए लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लें। अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं लेने से बचें। डॉक्टर जरूरत के अनुसार खून, पेशाब या इंफेक्शन से संबंधित अन्य चेकअप कराने की सलाह दे सकते हैं।

निष्कर्ष

बार-बार बुखार आना वायरल इंफेक्शन जैसी सामान्य समस्या से लेकर टीबी, मलेरिया और अन्य गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है। इसलिए सिर्फ बुखार की दवा लेकर लक्षणों को दबाने के बजाय उसके सही कारण का पता लगाना जरूरी है। खासकर अगर बुखार के साथ वजन कम होना, रात में पसीना आना, सांस लेने में परेशानी या ज्यादा कमजोरी हो, तो जांच में देरी न करें।

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FAQ

  • बुखार आने पर कौन से टेस्ट कराएं?

    डॉक्टर लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, मलेरिया या डेंगू की जांच और जरूरत पड़ने पर अन्य हेल्थ चेकअप कराने की सलाह दे सकते हैं।
  • बुखार आने पर किस डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

    सबसे पहले जनरल फिजिशियन या इंटरनल मेडिसिन से संपर्क किया जा सकता है। लक्षणों के अनुसार डॉक्टर दूसरे एक्सपर्ट डॉक्टर के पास भेज सकते हैं।
  • बुखार में कमजोरी होना नॉर्मल है?

    बुखार होने के बाद कुछ दिनों तक थकान और कमजोरी रह सकती है लेकिन अगर कमजोरी बढ़ रही है, लंबे समय तक बनी हुई है या बुखार दोबारा आ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लें।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 09, 2026 17:22 IST

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