कई बार लोगों को ठीक महसूस होने के बाद भी बार-बार बुखार होने और अपने आप बुखार कम होने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में लोग समझ नहीं पाते हैं कि ऐसा हो क्यों रहा है और कब इसकी जांच डॉक्टर से कराने की जरूरत होती है? आइए इस बारे में Dr. Aravinda S N, Lead Consultant - Internal Medicine, Aster RV Hospital, Bengaluru से जानें।
बार-बार हल्का बुखार क्यों होता है?
डॉ. अरविंद के अनुसार, हल्का बुखार, जो बिना किसी दवा के ठीक हो जाता है, हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता है, लेकिन अगर बुखार बार-बार आता है, भले ही वह अपने आप ठीक हो जाए, तो इसे एक आम समस्या मानकर नजरअंदाज करने के बजाय, इसके असली कारण को समझना जरूरी है।
डॉ. अरविंद आगे कहते हैं, बुखार आमतौर पर तब माना जाता है, जब शरीर का तापमान 38°C (100.4°F) या इससे ज्यादा हो जाता है। हालांकि, शरीर का सामान्य तापमान हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि दिन का कौन सा समय है और तापमान मापने का तरीका क्या है।
क्या कहती है स्टडी?
साल 2026 में Clinics में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, बार-बार आने वाले बुखार (रिकरेंट फीवर) का सही कारण पता लगाना डॉक्टरों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि इसके पीछे इंफेक्शन, ऑटोइम्यून बीमारियां या इम्यूनिटी से जुड़ी दुर्लभ जेनेटिक समस्याएं हो सकती हैं। इसके सटीक निदान के लिए मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री, क्लिनिकल जांच और एडवांस टेस्ट (जैसे पीईटी स्कैन, बायोप्सी या जेनेटिक टेस्टिंग) की जरूरत पड़ती है।
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बुखार आने के अन्य कारण
डॉ. अरविंद का कहना है, बार-बार बुखार आने का कारण बार-बार होने वाला वायरल इंफेक्शन हो सकता है, खासकर उन लोगों में जो अक्सर भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाते हैं। भारत में, डेंगू, मलेरिया, टीबी (तपेदिक) और यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) जैसे इंफेक्शन भी बुखार का कारण बन सकते हैं। यह लक्षणों, इंफेक्शन के संपर्क में आने के हिस्ट्री और उस इलाके में फैलने वाली बीमारियों पर निर्भर करता है। शरीर में सूजन (इंफ्लेमेशन) से जुड़ी कुछ स्थितियां और दवाओं के रिएक्शन के कारण भी बार-बार बुखार आ सकता है।
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लक्षणों के आधार पर की जाती है जांच
डॉ. अरविंद बताते हैं, बुखार आने का पैटर्न इसके कारणों का पता लगाने में मददगार हो सकता है। हो सकता है कि किसी व्यक्ति को एक-दो दिन बुखार रहे, फिर कुछ दिनों तक वह बिल्कुल ठीक महसूस करे और उसके बाद फिर से बुखार आ जाए या फिर, ऐसा भी हो सकता है कि तापमान मुख्य रूप से शाम के समय बढ़े। सिर्फ इन पैटर्न के आधार पर ही बुखार के कारण का पता नहीं लगाया जा सकता है। इसके साथ आने वाले अन्य लक्षण, जैसे।
- ठंड लगना
- रात में पसीना आना
- बिना किसी साफ कारण के वजन कम होना
- लगातार खांसी रहना
- पेशाब करते समय परेशानी होना
- जोड़ों में दर्द
- बहुत ज्यादा थकान महसूस होना
डॉक्टर को यह तय करने में मदद कर सकते हैं कि कौन सी जांच (टेस्ट) करानी जरूरी है।
बुखार आने पर कब जांच है जरूरी?
डॉ. अरविंद बताते हैं, अगर बुखार कई दिनों या हफ्तों तक बार-बार आता है, तीन दिन से ज्यादा रहता है या इसके साथ बिना किसी साफ कारण के कमजोरी या अन्य लगातार बने रहने वाले लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। जिन लोगों की इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कमजोर है, जो कैंसर का इलाज करा रहे हैं, बुजुर्ग लोग, या जिन्हें पहले से ही कोई गंभीर बीमारी है, उन्हें जल्द से जल्द डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
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डॉक्टर से सलाह कब लें?
डॉ. अरविंद का कहना है, अगर बुखार के साथ भ्रम की स्थिति (confusion), सांस लेने में परेशानी, गर्दन में अकड़न के साथ तेज सिरदर्द, दौरे पड़ना, पेट में तेज दर्द या डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) के लक्षण दिखें, तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए। कीमोथेरेपी के दौरान या ऐसे व्यक्ति को, जिसकी इम्यूनिटी बहुत कमजोर है, बुखार आने पर तुरंत जांच की जरूरत हो सकती है।
डॉक्टर ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट या अन्य जांच की सलाह देने से पहले तापमान का रिकॉर्ड, मेडिकल हिस्ट्री, हाल ही में की गई यात्रा, ली जा रही दवाएं और बुखार के साथ दिखने वाले अन्य लक्षणों की समीक्षा कर सकते हैं। जांच बिना सोचे-समझे नहीं, बल्कि क्लिनिकल निष्कर्षों (clinical findings) के आधार पर की जानी चाहिए।
भले ही बुखार बिना इलाज के ठीक हो जाए, लेकिन इसके दोबारा आने पर ध्यान देना जरूरी है। तापमान की निगरानी करना, हर बार बुखार कितने समय तक रहा यह नोट करना और साथ दिखने वाले अन्य लक्षणों को रिकॉर्ड करने से, बुखार के पैटर्न को समझने और समय रहते सही निदान (diagnosis) करने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष
बार-बार आने वाला हल्का बुखार हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता है, लेकिन इसे नजरअंदाज करने के बजाय इसके कारणों को समझना जरूरी है, जो वायरल इंफेक्शन, मलेरिया, डेंगू, टीबी या ऑटोइम्यून समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं। सही कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, क्लिनिकल जांच और एडवांस टेस्ट (जैसे ब्लड, यूरिन या पीईटी स्कैन) की सलाह देते हैं।
ध्यान रहे, अगर बुखार 3 दिन से ज्यादा रहे, बार-बार आए या इसके साथ कमजोरी, वजन कम होने, सांस लेने में परेशानी और भ्रम जैसी गंभीर समस्याएं दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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FAQ
बार-बार बुखार आने के क्या कारण हैं?
वायरल इंफेक्शन, बैक्टीरियल इंफेक्शन, मच्छरों से होने वाली समस्याएं, सूजन से जुड़ी समस्या, ऑटोइम्यून बीमारियां, कमजोर इम्यूनिटी, हार्मोनल बदलाव और थायराइड की समस्या के कारण बार-बार बुखार होने की समस्या हो सकती है।बुखार के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
बुखार आने पर व्यक्ति को सिरदर्द, मांसपेशियों और जोडों में दर्द, ठंड लगने, कंपकंपी चढ़ने, थकान, कमजोरी, पसीना आने, भूख कम लगने, गले में खराश और नाक बहने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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Oct 31, 2026 14:32 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr. Aravinda S N
