Wed Sep 30, 2026 | 05:16 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

बुखार में भी पी सकते हैं आप नीम गिलोय काढ़ा, जानें बनाने का तरीका और फायदे

नीम और गिलोय, दोनों मिलकर एक ज्वरनाशक कपांउड तैयार करते हैं। इसके अलावा इन दोनों से बना काढ़ा स्किन की कई समस्याओं को भी दूर करने में मददगार है। आइए, जानते हैं इस बारे में क्या है एक्सपर्ट की राय।
बुखार में भी पी सकते हैं आप नीम गिलोय काढ़ा, जानें बनाने का तरीका और फायदेबुखार में भी पी सकते हैं आप नीम गिलोय काढ़ा, जानें बनाने का तरीका और फायदे

नीम और गिलोय को उबालकर इसका पानी पीना सर्दियों में लोगों का इम्यूनिटी बूस्टर नुस्खा रहा है-यह हम नहीं, बल्कि Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana का कहना है। आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा कहते हैं कि नीम और गिलोय का काढ़ा अब प्रचलन में आ गया है लेकिन यह पहले से हमारे बीच रहा है। पहले जब लोगों को बुखार आता था या सर्दी-जुकाम के साथ बुखार की समस्या होती थी तो नीम गिलोय काढ़ा बेहद कारगर माना जाता है। इसके अलावा इस काढ़े को पीने के कई फायदे हैं। जानते हैं इस बारे में विस्तार से। साथ ही जानेंगे इस काढ़े को सही तरीके से घर पर कैसे बनाएं?

क्या बुखार में नीम गिलोय काढ़ा पीना सुरक्षित है?

इस सवाल में डॉ. श्रेय शर्मा कहते हैं कि हां, बुखार में नीम गिलोय काढ़ा पीना सुरक्षित है। दरअसल, नीम गिलोय काढ़ा पीने का सबसे मेन बेनिफिट तो यह है कि यह बहुत अच्छा ज्वर हर है यानी इसका सेवन बुखार कम करने में मदद कर सकता है।

साल 2024 में Heliyon जर्नल में प्रकाशित यह स्टडी बताती है कि गिलोय की पत्तियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ाने, एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करने और प्रतिरक्षा कोशिकाओं इम्यून सेल्स को नियंत्रित करने जैसे कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ हैं। डॉ. श्रेय शर्मा का कहना है कि जब भी बुखार होता है तो शरीर को एक बेहतरीन इम्यून मैकेनिज्म की जरूरत होती है और इस प्रकार से ये बुखार ठीक करने में मदद करता है।

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बुखार और इन्फेक्शन को दूर करने में नीम गिलोय काढ़ा कैसे काम करता है?

आगे डॉ. श्रेय कहते हैं जिस तरह से आपने स्टडी की मदद से गिलोय के ज्वरनाशक गुण के बारे में समझा। ठीक इसी स्टडी में यह भी बताया गया है कि गिलोय में एल्कलॉइड, पॉलीसेकेराइड, फ्लेवोनोइड और टेरपीन जैसे सक्रिय यौगिक होते हैं। ये मैक्रोफेज और बी-सेल्स जैसी कोशिकाओं को एक्टिव करते हैं, जो शरीर में सेल डैमेज को रोकते हैं और सूजन को कम करते हैं और इंफेक्शन के दौरान शरीर की सूजन से लड़ना जरूरी होता है।

Evidence-Based Complementary and Alternative Medicine में प्रकाशित साल 2016 की यह स्टडी बताती है कि नीम की पत्तियों के इथेनॉल और मेथनॉल वाले एक्सट्रैक्ट, मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट (MDR) पैथोजन्स जैसे स्टैफिलोकोकस ऑरियस, एस्चेरिचिया कोलाई और स्यूडोमोनास एरुगिनोसा को रोकते हैं। निम्बोलाइड जैसे एक्टिव कंपाउंड और अलग-अलग फाइटोकेमिकल्स बैक्टीरिया की सेल वॉल और DNA रेप्लिकेशन को खराब कर देते हैं। इससे आप मौसमी इंफेक्शन से बच सकते हैं।

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घर पर नीम गिलोय काढ़ा बनाने की आसान और सही विधि

घर पर नीम गिलोय काढ़ा बनाना बेहद आसान है और डॉ. श्रेय का सुझाव है कि आप हमेशा इसे ताजी नीम और गिलोय की पत्तियों से बनाएं। इसके लिए

  • सबसे पहले तो आपको करना यह है कि गिलोय और नीम की पत्तियों को धोकर रख लें।
  • अब जो कप पानी में इन्हें ऐसे उबालें कि यह 1 कप रह जाए।
  • अब इसे छान लें और स्वाद के लिए हल्का सा काला नमक या शहद मिला लें।
  • अब इस काढ़े का सेवन करें।

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बुखार के अलावा नीम गिलोय काढ़ा पीने के 3 फायदे

डॉ. श्रेय कहते हैं नीम गिलोय काढ़ा पीने का दूसरा बड़ा फायदा यह है कि ये दोनों सूरजरोधी हैं। जैसे
2010 में Genes And Nutrition जर्नल में प्रकाशित यह शोध बताती है कि नीम की पत्तियों का अर्क NF-κB जैसे प्रो-इंफ्लेमेटरी सिग्नलिंग पाथवे को रोककर और TNF-α व IL-6 जैसे साइटोकाइन्स के स्तर को कम करके सूजन को काफी हद तक कम करते हैं। इसके अलावा गिलोय तो एंटी इंफ्लेमेटरी है ही, इस प्रकार से यह दोनों मिलकर शरीर की सूजन दूर करते हैं।

  1. यह दोनों जड़ी-बूटियां शरीर के इम्यून सेल्स को मजबूत करने में मदद करती हैं जिससे इम्यूनिटी बढ़ती है।
  2. ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए भी नीम गिलोय काढ़ा पी सकते हैं। दरअसल, नीम इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाने में मदद करता है, जबकि गिलोय ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को सही करता है जिस कारण यह दोनों मिलकर डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद हो जाते हैं।
  3. डॉ. श्रेय कहते हैं स्किन के लिए यह काढ़ा बहुत फायदेमंद है। खासतौर पर एक्जिमा और खून को साफ करने जैसी त्वाच संबंधी समस्याओं में।

काढ़ा पीते समय रखें इन जरूरी सावधानियों का ध्यान

डॉ. श्रेय कहते हैं नीम गिलोय काढ़ा गर्म भी होता है इसलिए ज्यादा मात्रा में इसके सेवन से बचें। लंबे समय तक सेवन करने से पेट की समस्या और लिवर को नुकसान हो सकता है। इसके अलावा डायबिटीज के मरीज इस बात का ध्यान रखें कि ज्यादा पीने से आपका शुगर लेवल लो हो सकता है।

निष्कर्ष:

अंत में डॉ. श्रेय कहते हैं घरेलू उपाय सिर्फ सहायक होते हैं लेकिन लगातार, तेज या बिगड़ते हुए बुखार के लिए इन्हें प्रोफेशनल मेडिकल इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए। आपको अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए क्योंकि सही कारण जानकर ही बीमारी का सही इलाज किया जा सकता है।

FAQ

  • क्या हम डेंगू के बुखार में नीम गिलोय का काढ़ा पी सकते हैं?

    जी हां, आप डेंगू के बुखार में नीम गिलोय का काढ़ा पी सकते हैं। इसस बुखार जल्दी ठीक करने में मदद मिल सकती है।
  • क्या नीम गिलोय का काढ़ा पीने से खून साफ होता है?

    हां, नीम और गिलोय का काढ़ा पीने से खून साफ करने में मदद मिलती है। इससे स्किन से जुड़ी समस्याएं जैसे एक्ने में कमी आती है।

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Pallavi Kumari

चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 30, 2026 16:35 IST

    Published By : Pallavi Kumari
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma