Fri Oct 9, 2026 | 02:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr V Rajasekhar , Senior Consultant – Interventional Cardiology & Electrophysiology | Certified TAVR Operator | Clinical Director

क्‍या कम पानी पीने से ब‍िगड़ सकती है हार्ट की सेहत? कार्डि‍योलॉज‍िस्‍ट से जानें

क्‍या आप भी कम पानी पीते हैं? अगर हां, तो यह आदत आपके हार्ट के ल‍िए नुकसानदायक साब‍ित हो सकती है और भव‍िष्‍य में हार्ट ड‍िजीज का कारण बन सकती है। डॉक्‍टर से जानें कारण।
क्‍या कम पानी पीने से ब‍िगड़ सकती है हार्ट की सेहत? कार्डि‍योलॉज‍िस्‍ट से जानेंक्‍या कम पानी पीने से ब‍िगड़ सकती है हार्ट की सेहत? कार्डि‍योलॉज‍िस्‍ट से जानें

अगर आप कम पानी पीते हैं, तो यह शरीर के बाक‍ि अंगों के साथ-साथ हार्ट के ल‍िए एक बड़ा र‍िस्‍क है। पानी की कमी से हार्ट रेट बढ़ जाता है ज‍िससे अनियमित दिल की धड़कन (Arrhythmia) और हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्‍थि‍त‍ि भी आ सकती है। जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो ब्‍लड की मात्रा भी कम हो जाती है। इस वजह से हार्ट पर लोड बढ़ जाता है और हार्ट को अध‍िक स्‍पीड से काम करना पड़ता है। जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, ब्‍लड गाढ़ा हो जाता है और ब्‍लड क्‍लॉट बनने की संभावना बढ़ जाती है। ब्‍लड क्‍लॉट बनने से ब्‍लड फ्लो कम हो जाता है और हार्ट अटैक आ सकता है। जब शरीर में इलेक्‍ट्रोलाइट असंतुलन होता है यानी शरीर में सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम की कमी होती है, तो इससे हार्ट की स्‍पीड बढ़ सकती है और इस दौरान कार्ड‍ियक अरेस्‍ट की संभावना बढ़ सकती है। आइए जानते हैं शरीर में पानी की कमी से कैसे बचें ताक‍ि हार्ट और अन्‍य अंगों को ड‍िहाइड्रेशन से नुकसान न हो। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. V Rajasekhar, Cardiologist At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।

शरीर में पानी की कमी से हार्ट को क्‍या नुकसान होता है?

ड‍िहाइड्रेशन से होने वाली हार्ट की समस्‍याएं   कारण
कार्ड‍ियक अरेस्‍ट      इलेक्‍ट्रोलाइट असंतुलन 
हार्ट अटैक  ब्‍लड क्‍लॉट बनना 
अनियमित दिल की धड़कन      हार्ट रेट बढ़ना 

शरीर में पानी की कमी हार्ट के ल‍िए नुकसानदायक है। American Heart Association के मुताब‍िक, पर्याप्त पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है, जिससे हार्ट को पूरे शरीर के ल‍िए ब्‍लड पंप करने में आसानी होती है। यह मांसपेशियों को भी बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। जब शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा होती है, तो हार्ट को ब्‍लड पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है। वहीं दूसरा पक्ष देखें, तो जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो हार्ट अटैक, कार्ड‍ियक अरेस्‍ट और अनियमित दिल की धड़कन जैसी समस्‍याएं हो सकती है।

Mayo Clinic के मुताब‍िक, शरीर में ब्‍लड प्रेशर को मेंटेन करने के लिए ब्‍लड वेसल्‍स सिकुड़ जाती हैं और पूरे शरीर में ब्‍लड फ्लो को बनाए रखने के लिए हार्ट तेजी से धड़कने लगता है, यानी डि‍हाइड्रेशन से दबाव बढ़ सकता है।

यह भी पढ़ें- हार्ट को हेल्दी कैसे रखें? डॉक्टर बता रहे हैं लाइफस्टाइल में किए जाने वाले 7 बदलाव

शरीर में पानी की कमी कब होती है?

  • जब हम कम पानी पीते हैं।
  • जब बहुत गर्मी होती है, तो भी शरीर से ज्‍यादा पानी न‍िकल सकता है।
  • डायर‍िया में हो सकता है।
  • उल्‍टी में भी हो सकता है।
  • डाययुरेटिक (मूत्रवर्धक) दवाएं लेने के कारण भी शरीर में पानी की कमी हो जाती है।
  • ज्‍यादा पसीना न‍िकलने से भी ड‍िहाइड्रेशन हो सकता है।

क‍िन लोगों को ड‍िहाइड्रेशन से हार्ट ड‍िजीज का खतरा ज्‍यादा होता है?

dehydration-and-heart-problemsdehydration-and-heart-problems

  • ज‍िन बुजुर्गों की उम्र 60 साल या उससे ज्‍यादा है उनमें पानी की कमी से हार्ट ड‍िजीज होने का खतरा अध‍िक होता है क्‍योंक‍ि इस उम्र में थ्रस्‍ट सेंसेशन कम हो जाती है और क‍िडनी फंक्‍शन भी कमजोर हो जाता है ज‍िससे ड‍िहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।
  • ऐसे लोग जो क‍िसी स्‍पोर्ट्स में शाम‍िल हैं, वे अध‍िक गर्मी में खेलने या ज्‍यादा पसीना न‍िकलने के कारण अक्‍सर ड‍िहाइड्रेशन का श‍िकार हो जाते हैं और हार्ट ड‍िजीज का खतरा हो सकता है।
  • ऐसे वर्कर्स जो धूप में काम करते हैं उनमें भी ड‍िहाइड्रेशन का खतरा हो सकता है।
  • ज‍िन लोगों को डायब‍िटीज, कि‍डनी की बीमारी या हाई बीपी की समस्‍या हो, उनमें भी ड‍िहाइड्रेशन और हार्ट र‍िस्‍क का खतरा ज्‍यादा हो सकता है।

यह भी पढ़ें- बीपी नॉर्मल है फिर भी हो सकता है Heart Attack? डॉक्टर से जानें दिल के छिपे जोखिम

शरीर में पानी की कमी के लक्षण क्‍या हैं?

  • मुंह सूख जाना।
  • ड्राई स्‍क‍िन।
  • चक्‍कर और कमजोरी।
  • यूर‍िन का रंग अध‍िक पीला होना।
  • पेशाब की मात्रा कम हो जाना।
  • हार्ट की स्‍पीड बढ़ने के कारण हार्ट पल्पिटेशन की समस्‍या होना।
  • पेशाब करते समय जलन होना।

ड‍िहाइड्रेशन से कैसे बचें?

  • शरीर में पानी की कमी से बचने के ल‍िए पानी पीना सबसे अच्‍छा व‍िकल्‍प है।
  • ताजे फल और सब्‍ज‍ियों में भी पानी होता है जो शरीर में पानी की कमी को दूर करने में मदद कर सकता है।
  • इलेक्‍ट्रोलाइट्स वाली स्‍पोर्ट्स ड्र‍िंक्‍स का सेवन कर सकते हैं। हालांक‍ि, इसमें चीनी और कैलोरी ज्‍यादा हो सकती है इसल‍िए इसे लेने से पहले डॉक्‍टर की सलाह लेना जरूरी है।
  • डि‍हाइड्रेशन से बचने के ल‍िए फलों का जूस, कैफीन और सोडा लेने से बचें।

न‍िष्‍कर्ष:

अगर शरीर में पानी की कमी होगी, तो हार्ट की सेहत खराब हो सकती है। जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो ब्‍लड की मात्रा भी शरीर में कम हो जाती है। इससे ब्‍लड गाढ़ा हो जाता है और क्‍लॉट बनने की संभावना होती है। ब्‍लड क्‍लॉट बनने से ब्‍लड फ्लो प्रभाव‍ित होता है और हार्ट तक पर्याप्‍त ब्‍लड न पहुंचने से हार्ट अटैक आ सकता है। इसी तरह शरीर में पानी की कमी से इलेक्‍ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है और कार्ड‍ियक अरेक्‍ट की संभावना बढ़ सकती है। शरीर में पानी की कमी से ब्‍लड की मात्रा कम हो जाती है और हार्ट रेट के बढ़ने से अनियमित दिल की धड़कन (Arrhythmia) जैसी समस्‍या भी हो सकती है। 60 साल से अध‍िक उम्र के बुजुर्ग, स्‍पोर्ट्स खेलने वाले लोग, धूप में काम करने वाले वर्कर्स, डायब‍िटीज, कि‍डनी या हाई बीपी के मरीजों को ड‍िहाइड्रेशन से हार्ट ड‍िजीज होने का खतरा ज्‍यादा होता है। शरीर को पानी की कमी से बचाने के ल‍िए पर्याप्‍त पानी प‍िएंं, फल और सब्‍ज‍ियों का सेवन करें, डॉक्‍टर की सलाह पर इलेक्‍ट्रोलाइट ड्र‍िंक ले सकते हैं। ड‍िहाइड्रेशन से बचने के ल‍िए फलों का जूस, कैफीन, सोडा से परहेज करें।

image credit: magnific

FAQ

  • क्या डिहाइड्रेशन से बीपी प्रभाव‍ित हो सकता है?

    हां, गंभीर ड‍िहाइड्रेशन से लो बीपी की समस्‍या हो सकती है। इससे चक्‍कर या कमजोरी भी हो सकती है।
  • क्या डिहाइड्रेशन से किडनी पर असर पड़ता है?

    हां, गंभीर डिहाइड्रेशन किडनी तक पहुंचने वाले ब्‍लड फ्लो को कम कर सकती है। इससे क‍िडनी फंक्‍शन प्रभाव‍ित होता है।

Read Next

→ मांसपेशियों में अचानक ऐंठन होने के पीछे हो सकते हैं ये 5 कारण, न करें नजरअंदाज

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Health Journalist

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Oct 09, 2026 13:00 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr V Rajasekhar