Wed Sep 30, 2026 | 08:01 PM IST

Medically Reviewed by Prof Dr S M Fayaz

बुखार उतरने के बाद भी खांसी नहीं जा रही है? डॉक्टर से जानें इसके कारण और क्या करें

Cough After Fever: बुखार उतरने के बाद भी खांसी नहीं जा रही है, तो इसे लेकर परेशान न हों। यह रिकवरी प्रक्रिया का एक हिस्सा है। आमतौर पर जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, उनकी खांसी कई दिनों तक चलती है।
बुखार उतरने के बाद भी खांसी नहीं जा रही है? डॉक्टर से जानें इसके कारण और क्या करेंबुखार उतरने के बाद भी खांसी नहीं जा रही है? डॉक्टर से जानें इसके कारण और क्या करें

मौसम बदल रहा है। जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर है, उन्हें आसानी से बुखार हो जाता है। आपने देखा होगा कि कुछ लोगों में बुखार ठीक होने के बाद भी कई दिनों या हफ्तों तक खांसी बनी रहती है। लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि ऐसा क्यों होता है? आपको बता दें कि बुखार के बाद खांसी बने रहने की स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में पोस्ट-वायरल कफ कहा जाता है।

KIMS हॉस्पिटल्स, महादेवपुरा बेंगलुरु के लीड और सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज बताते हैं, "आमतौर पर बुखार उतरने के बाद लोगों को लगता है कि बीमारी पूरी तरह खत्म हो गई है। जबकि, ऐसा नहीं होता है। बीमार पड़ने के बाद संक्रमण को पूरी तरह ठीक होने में समय लगता है। यही कारण है कि जिन लोगों की इम्यूनिटी काफी कमजोर होती है, उन्हें बुखार ठीक होने के बाद भी कई दिनों तक खांसी होती रहती है।"

बुखार ठीक होने पर भी खांसी क्यों नहीं जा रही?

Reasons And Remedies For Persistent Cough After FeverReasons And Remedies For Persistent Cough After Fever

CHEST Journal में प्रकाशित एक प्रसिद्ध मेडिकल क्लिनिकल गाइडलाइन के अनुसार, सर्दी-जुकाम या फ्लू से ठीक होने के बाद के ठीक होने के बाद भी खांसी 3 से 8 सप्ताह तक बनी रहती है, तो उसे Postinfectious Cough कहते हैं। ऐसा आमतौर पर फेफड़ों के सांस नलियों में सूजन और नलियों के ओवर सेंसिटिव होने के कारण होता है।

इसे भी पढ़ें: मौसम बदलने पर जुकाम क्यों होता है? डॉक्टर से जानें कारण

बुखार उतरने के बाद भी खांसी जारी रहने के 3 मुख्य कारण- Post-viral Cough Causes

1. सांस नली में सूजन

सबसे पहले यह समझें कि आपको बुखार क्यों हुआ था? वायरल इंफेक्शन के कारण या बैक्टीरियल इंफेक्शन के। इस तरह की वजहों से सांस नलियों में अंदरूनी परत में सूजन आ जाती है। नतीजतन, बुखार ठीक होने के बाद भी सूजन के कारण खांसी बनी रहती है।

2. सेंसिटिविटी का बढ़ना

प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज कहते हैं, "इंफेक्शन के बाद सांस की नलियां बहुत ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं। हल्की सी ठंडी हवा, धूल, धुंआ या तेज गंध भी नलियों में जलन या इरिटेशन पैदा कर सकती है। वहीं, अगर किसी को एलर्जी या अस्थमा जैसी समस्या है, तो बुखार से रिकवरी के बाद भी उनमें लंबे समय तक खांसी की दिक्कत बनी रहती है।"

3. बलगम बनना

प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज की मानें, "इंफेक्शन के कारण फेफड़े और सांस की नलियों में बलगम बनने लगता है। कई बार इसे निकालना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया बलगम बनने की शुरुआत से ही इसे साफ करने की जद्दोजहद में जुट जाती है। लेकिन कमजोर इम्यूनिटी के कारण रिकवरी मुश्किल हो जाती है। ऐसे में शरीर प्राकृतिक रूप से खांसकर इस अतिरिक्त म्यूकस को बाहर फेंकता है।"

डॉक्टर से सलाह कब लें?- Red Flag Signs

प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज सलाह देते हैं, "बुखार से रिकवरी के बाद कुछ ही दिनों में खांसी ठीक हो जानी चाहिए। हालांकि, आपको अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखना चाहिए और समय-समय डॉक्टर की दी हुई दवा लेनी चाहिए। हालांकि, बुखार से रिकवरी के बाद हो रही खांसी के संबंध में डॉक्टर के पास जाना है या नहीं, यह जान लेना भी जरूरी है।" प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज आगे बताते हैं कि एक्यूट कफ (3 सप्ताह से कम समय तक रहने वाली खांसी) सब-एक्यूट कफ (3 से 8 सप्ताह तक रहने वाली खांसी) और क्रॉनिक कफ (8 सप्ताह से अधिक समय तक चलने वाली खांसी)। डॉक्टर के अनुसार, अगर आपकी खांसी बुखार उतरने के बाद 3 से 4 हफ्तों तक धीरे-धीरे कम हो रही है, तो यह सामान्य पोस्ट-वायरल रिकवरी का हिस्सा है। लेकिन अगर यह बिना किसी सुधार के बनी हुई है और  सांस फूलना, सीने में दर्द या 3 हफ्ते से ज्यादा खांसी बनी हुई है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

इसे भी पढ़ें: बार-बार बीमार पड़ते हैं, तो तुलसी और गिलोय से बढ़ाएं इम्यूनिटी, जानें तरीका

खांसी से राहत पाने के लिए अपनाएं घरेलू उपाय

खांसी से जल्द राहत पाने के लिए आप यहां बताए गए कुछ घरेलू उपायों को अपना सकते हैं-

  • एक चम्मच शहद में थोड़ा सा अदरक का रस मिलाकर रात को सोने से पहले इस मिश्रण का सेवन करें। गले को आराम मिलेगा और खांसी में कमी आएगी।
  • गले की खराश और सूजन कम करने के लिए तुलसी और मुलेठी को पानी में उबालकर काढ़ा या चाय बनाकर पिएं।
  • रात को सोने से पहले एक हल्दी वाला दूध पीना भी फायदेमंद है। हल्दी में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर की सूजन को कम करते हैं और इम्यूनिटी को बूस्ट करके खांसी से राहत पहुंचाते हैं।

डॉक्टर की सलाह और इलाज

बुखार के बाद हो रही खांसी से छुटकारा पाने के लिए जीवनशैली से जुड़े बदलाव भी आवश्यक हैं, जैसे-

  1. एलर्जी ट्रिगर करने वाली चीजों से दूर रहें। जैसे धूल, धुएं, सिगरेट के धुएं और ठंडी हवा के सीधे संपर्क में आने से बचें। 
  2. अगर खांसी काफी ज्यादा है, तो घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें।
  3. रिकवरी के लिए शरीर को आराम देने की जरूरत है। रोज अच्छी और गहरी नींद लें।
  4. कमरे की हवा में नमी बनाए रखें। कई बार कमरे में ड्राईनेस के कारण भी खांसी ट्रिगर हो सकती है।
  5. समय पर डॉक्टर की दी हुई दवा लें और खुद को हाइड्रेटेड रखें।

निष्कर्ष

इस बात को समझें कि बुखार के बाद खांसी का बने रहना शरीर की रिकवरी प्रक्रिया का ही एक हिस्सा है। इसे ठीक होने में कुछ समय लग सकता है। कुछ लोगों की खांसी कुछ दिनों में ठीक हो जाती है, वहीं ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें 2 से 4 सप्ताह का समय लग सकता है। लगातार हो रही खांसी को लेकर पैनिक न हों। हां, अगर कई सप्ताह तक खांसी बनी हुई, तो बेहतर है कि डॉक्टर से अपना इलाज करवाएं।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • पोस्ट-वायरल कफ के दौरान एंटीबायोटिक्स क्यों नहीं लेनी चाहिए?

    एक्सपर्ट बताते हैं कि पोस्ट-वायरल कफ बैक्टीरिया के कारण नहीं, बल्कि संक्रमण के बाद सांस नलियों में आई सूजन के कारण होती है। इस पर एंटीबायोटिक्स असर नहीं करती हैं।
  • रात में लेटने पर ही बुखार के बाद वाली खांसी ज्यादा तेज क्यों हो जाती है?

    सीधे लेटने पर नाक और साइनस का म्यूकस गले के पीछे की तरफ बहने लगता है जिसे पोस्ट-नेजल ड्रिप कहा जाता है। इसी बलगम की वजह से खांसी की दिक्कत होने लगती है।

Read Next

→ बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम से कैसे बचें? डॉक्टर से लें ये खास टिप्स

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Sep 30, 2026 18:40 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Prof Dr S M Fayaz