दिवाली से पहले और बाद में लगातार पटाखों से होने वाले प्रदूषण और बदलते मौसम के चलते लोगों को खांसी की समस्या हो सकती है। कई बार लोग इसे सर्दी-जुकाम मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार खांसी और जुकाम वायरल इंफेक्शन का भी हो सकता है। अस्थमा या सांस से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को ज्यादा परेशानी हो सकती है। इसलिए Dr. Neetu Jain, Senior Consultant in Pulmonary, Critical Care and Sleep Medicine, PSRI Hospital, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि दिवाली में कुछ लोगों को सूखी खांसी, गले में खराश, सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। इसका कारण प्रदूषण या वायरल-बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है। परेशानी तब बढ़ जाती है, जब दोनों के लक्षण काफी हद तक एक जैसे नजर आते हैं। ऐसे में कुछ लक्षणों पर ध्यान देकर दोनों कंडीशन में फर्क महसूस किया जा सकता है।
प्रदूषण से होने वाली खांसी या वायरल-इंफेक्शन खांसी में अंतर
Dr. Neetu Jain ने मुताबिक, प्रदूषण और वायरल से होने वाली खांसी के अंतर को समझना जरूरी है, ताकि समय पर इलाज कराया जा सकें।
वायु प्रदूषण से होने वाली खांसी (Air Pollution Cough) |
वायरल संक्रमण से होने वाली खांसी (Viral Infection Cough) |
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कारण |
स्मॉग, धूल, धुआं और PM2.5 कण |
वायरस (सर्दी-जुकाम, फ्लू) |
बुखार |
नहीं होता |
अक्सर बुखार रहता है |
बलगम |
सूखी या गले में खराश वाली खांसी |
शुरुआत सूखी खांसी से हो सकती है, बाद में बलगम आ सकता है |
स्थान का प्रभाव |
बाहर निकलने पर स्थिति बिगड़ती है, घर के अंदर आराम मिलता है |
अंदर या बाहर रहने से फर्क नहीं पड़ता, लगातार बनी रहती है |
फैलाव |
संक्रामक नहीं है, इसलिए एक से दूसरे में नहीं फैलता |
संक्रामक है, इसलिए लोगों को एक व्यक्ति से दूसरे में फैलती है |
दिवाली के बाद खांसी क्यों बढ़ जाती है?
Environmental Research में 1250 अध्ययनों की समीक्षा की गई है, जिसमें पाया गया है कि PM 2.5 के कारण क्रोनिक कफ का रिस्क लगभग 10% बढ़ा पाया गया और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के संपर्क में आने से 4% रिस्क ज्यादा देखा गया है।
Dr. Neetu Jain कहती हैं, “दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है। इससे शरीर में सूजन और फेफड़ों में जलन हो सकती है, जो खांसी, गले में खराश या सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है। जिन लोगों को पहले से अस्थमा या एलर्जी की समस्या है, उनके लिए प्रदूषित हवा ज्यादा परेशानी पैदा कर सकती है।”
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प्रदूषण से होने वाली खांसी के लक्षण
Dr. Neetu Jain ने कहा कि प्रदूषण के कारण होने वाली खांसी के ये लक्षण हो सकते हैं।
- गले में जलन
- सूखी खांसी
- नाक में जलन
- सांस लेने में परेशानी
- गले में कुछ अटका हुआ महसूस होना
- बाहर निकलने पर खांसी बहुत ज्यादा बढ़ जाना
इंफेक्शन से होने वाली खांसी के लक्षण
Dr. Neetu Jain ने बताया कि इंफेक्शन या वायरल से होने वाली खांसी में लोगों को इन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।
- बुखार
- नाक बहना
- छींकें आना
- गले में दर्द
- शरीर में दर्द
- थकान
खांसी से बचने के लिए क्या करें?
Dr. Neetu Jain ने लोगों को सलाह दी है कि खांसी चाहे बलगम वाली हो या फिर प्रदूषण से, इससे बचाव बहुत जरूरी है और समय पर इलाज कराना जरूरी है।
- अगर आपके इलाके में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI खराब है, तो बाहर की एक्टिविटीज सीमित रखें।
- प्रदूषण के दौरान बाहर निकलना जरूरी हो, तो फिटिंग वाला N95 मास्क इस्तेमाल करें।
- घर में अगरबत्ती, धूप या मच्छर मारने वाली कॉइल न जलाएं।
- घर के अंदर स्मोकिंग न करें।
- दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- खांसी होने पर खुद से एंटीबायोटिक दवाएं न लें।
- खांसी या अन्य लक्षण दिखने पर डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
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निष्कर्ष
दिवाली के समय प्रदूषण बढ़ने के कारण अगर लगातार खांसी हो रही हो, तो वायरल इंफेक्शन या प्रदूषण को जानने के लिए डॉक्टर को जरूर दिखाएं। अगर प्रदूषण की वजह से खांसी हो रही हो, तो बाहर निकलते ही तेज खांसी होने लगती है और वहीं बुखार, शरीर में दर्द, नाक बहना और थकान जैसे लक्षण इंफेक्शन की वजह से हो सकते हैं। इसलिए खांसी लंबे समय तक बनी रहने या सांस लेने में परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
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FAQ
दिवाली के बाद की खांसी में एंटीबायोटिक दवा लेना क्यों खतरनाक है?
आमतौर पर पोस्ट-दिवाली खांसी धुएं के केमिकल्स इरिटेशन या मौसमी वायरल के कारण होती है। एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरिया पर काम करते हैं, प्रदूषण के असर या वायरस पर नहीं। बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के एंटीबायोटिक खाने से पेट खराब होता है, लिवर पर असर पड़ता है।क्या प्रदूषण की वजह से फेफड़ों में बाद में इंफेक्शन भी हो सकता है?
पटाखों के धुएं में मौजूद केमिकल गैसें और PM2.5 सांस नली की को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है और फेफड़ों में इंफेक्शन होने का रिस्क बढ़ सकता है।
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Nov 06, 2026 16:46 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Neetu Jain
