Mon Nov 2, 2026 | 06:35 PM IST

Medically Reviewed by Dr Sunil Kumar K , Pulmonology

Diwali 2026 Health Tips: दिवाली में इन 5 गलतियों से ट्रिगर कर सकता है अस्थमा और ब्रोंकाइटिस

Diwali 2026 Health Tips: दिवाली की तैयारियों से लेकर इस त्योहार के 5 दिन बाद तक, लोग इतने व्यस्त रहते हैं कि उन्हें अपनी सेहत का भी ख्याल नहीं रहता। जबकि, इस त्योहार में ब्रोंकाइटिस और अस्थमा के मरीजों को ज्यादा सतर्क होना चाहिए।
Diwali 2026 Health Tips: दिवाली में इन 5 गलतियों से ट्रिगर कर सकता है अस्थमा और ब्रोंकाइटिसDiwali 2026 Health Tips: दिवाली में इन 5 गलतियों से ट्रिगर कर सकता है अस्थमा और ब्रोंकाइटिस

Diwali 2026 Health Tips: दिवाली खुशियों का त्योहार है जिसकी तैयारियों लोग काफी साफ-सफाई और सजावट के साथ करते हैं। ऐसे में कई बार त्योहार में हम अपनी सेहत को भी नजरअंदाज कर देते हैं जो कि सेहत से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है जैसे कि दिवाली की सफाई के बीच बहुत से लोग बीमार पड़ जाते हैं। आज हम बात ऐसे ही लोगों की करेंगे, जिन्हें दिवाली में कुछ गलतियों के कारण अस्थमा और ब्रोंकाइटिस की दिक्कत हो जाती है, जिसके बारे में हमें Dr. Sunil Kumar K, Lead Consultant - Interventional Pulmonology, Aster CMI Hospital, Bengaluru ने बताया।

इन 5 गलतियों से ट्रिगर कर सकता है अस्थमा और ब्रोंकाइटिस

Dr. Sunil Kumar K कहते हैं कि दिवाली के त्योहार में लोग बहुत जोश में रहते हैं और इसी जोश में कुछ ऐसी गलतियां कर जाते हैं जिससे ब्रोंकाइटिस और अस्थमा की दिक्कत हो जाती है। खास बात यह है कि एक बार यह दिक्कत ट्रिगर कर जाती है तो मौसम की वजह से पूरी सर्दी परेशान करती है इसलिए हमें इन गलतियों से बचना चाहिए जैसे-

1. घर की सफाई के दौरान धूल के संपर्क में आना

डॉ. सुनील कहते हैं कि दिवाली में घर की सफाई के दौरान अक्सर लोग धूल के संपर्क में आ जाते हैं। धूल के कण नाक के जरिए फेफड़ों में पहुंच जाते हैं और यह ब्रोंकाइटिस और अस्थमा को ट्रिगर कर सकते हैं। American Lung Association की मानें, तो डस्ट माइट्स काटते या डंक नहीं मारते हैं। इसके बजाय, वे बहुत सूक्ष्म अपशिष्ट (मल) और शरीर के छोटे-छोटे टुकड़े छोड़ते हैं, जो बिस्तर ठीक करने, कालीन पर चलने या वैक्यूम करने जैसी गतिविधियों के दौरान हवा में फैल जाते हैं। जब आप सांस लेते हैं, तो ये कण आपके श्वसन मार्ग में चले जाते हैं।

साफ-सफाई के दौरान घर में लगातार डस्ट माइट्स यानी धूल के कणों के संपर्क में रहने से अस्थमा के मरीजों और ऐसे लोगों की सेहत पर असर पड़ सकता है जिन्हें इन कणों से एलर्जी है और अस्थमा अटैक आ सकता है।

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2. पटाखों के धुएं के संपर्क में आना

डॉ. सुनील कहते हैं कि दिवाली के दौरान, पटाखों के धुएं, धूल कणों और अन्य वायु प्रदूषकों के संपर्क में आने से श्वसन तंत्र में जलन हो सकती है और अस्थमा के लक्षण या इससे भी बदतर, ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। एक आम गलती है पटाखे फोड़ना या ऐसे क्षेत्रों में बाहर रहना जहां धुआं जमा होता है, खासकर जब हवा का संचार कम हो। पटाखों के उत्सर्जन में PM2.5 सहित महीन कण होते हैं, जो फेफड़ों में गहराई तक प्रवेश कर सकते हैं और सूजन, खांसी, घरघराहट, सीने में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ पैदा कर सकते हैं।

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3. अगरबत्ती, धूप और खुशबूदार मोमबत्ती

डॉ. सुनील कहते हैं कि दिवाली में लोग अगरबत्ती, धूप, मोमबत्ती और तेल के दीयों से होने वाले आंतरिक प्रदूषण के प्रभावों को भी नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कुछ लोगों में यही चीजें अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसे समस्याओं को ट्रिगर करने का कारण बन सकते हैं। ऐसे में कोशिश करें कि जितना हो सके उतनी नेचुरल चीजों का इस्तेमाल करें। अगरबत्ती, धूप और खुशबूदार मोमबत्ती खुली हवादार जगहों पर जलाएं।

4. तेज खुशबू वाले रूम फ्रेशनर और एरोसोल स्प्रे

तेज खुशबू वाले रूम फ्रेशनर या एरोसोल स्प्रे का इस्तेमाल करने से संवेदनशील वायुमार्ग में और अधिक जलन हो सकती है। कुछ लोगों में यह अस्थमा और ब्रोंकाइटिस की समस्या को ट्रिगर कर सकते हैं और यह लंबे समय तक रहने वाली खांसी दे सकते हैं इसलिए तेज खुशबू वाले रूम फ्रेशनर और एरोसोल स्प्रे के इस्तेमाल से बचें।

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5. दिवाली पार्टी में स्मोकिंग और मिलावटी मिठाइयों का सेवन

स्मोकिंग और मिलावटी मिठाइयों का सेवन, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस की वजह बन सकता है। डॉ. सुनील कहते हैं कि दिवाली पार्टी के दौरान लोग ज्यादा स्मोक कर लेते हैं, जिससे फेफड़े काफी हद तक प्रभावित हो जाते हैं। इसके अलावा मिलावटी मिठाइयों का सेवन भी फेफड़ों की सेहत को प्रभावित कर सकती है, सूजन और कफ पैदा कर सकती है, जिससे अस्थमा या ब्रोंकाइटिस के मरीजों को दिक्कत हो सकती है।

निष्कर्ष:

अंत में डॉ. सुनील कहते हैं कि धूम्रपान, दूसरों के धुएं के संपर्क में आना या बारीक कणों वाले प्रदूषण से बचने के लिए केवल कपड़े या सर्जिकल मास्क पहनना ही काफी नहीं है। जब बाहर जाना अनिवार्य हो, तो अच्छी तरह से फिट होने वाला N95 रेस्पिरेटर सांस के जरिए अंदर जाने वाले कणों को कम करने में मदद कर सकता है, हालांकि यह हवा में मौजूद सभी तरह के गैसीय प्रदूषकों से सुरक्षा नहीं देता।

अस्थमा, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस या COPD से पीड़ित लोगों, बुजुर्गों और बच्चों को खराब हवा की गुणवत्ता के दौरान बाहर जाने से बचना चाहिए। बाहर प्रदूषण ज्यादा होने पर खिड़कियां बंद रखें और अगर संभव हो, तो घर के अंदर HEPA एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं नियमित रूप से लेते रहें और अस्थमा एक्शन प्लान का पालन करें। अगर सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ हो, बोलने में दिक्कत हो, होंठ नीले पड़ जाएं, या दी गई आपातकालीन दवाओं से भी कोई सुधार न दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। दिवाली के दौरान बचाव करना, प्रदूषण के संपर्क में कम आना और समय पर इलाज कराना बहुत जरूरी है।

FAQ

  • ब्रोंकाइटिस रोग से क्या होता है?

    ब्रोंकाइटिस रोग में फेफड़ों तक हवा पहुंचाने वाली ब्रोन्कियल ट्यूब्स में सूजन आ जाती है जिस वजह से लंबे समय तक परेशान करने वाली खांसी होती है।
  • अस्थमा के लिए सबसे खराब भोजन कौन सा है?

    अस्थमा के लिए सबसे खराब भोजन है आपका प्रोसेस्ड फूड और ऑयली फूड्स का सेवन जो कि इस समस्या से रिकवर होने में देरी पैदा कर सकते हैं।

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Pallavi Kumari

चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Nov 02, 2026 17:25 IST

    Published By : Pallavi Kumari
    Reviewed By : Dr Sunil Kumar K