त्योहारों के दौरान मिलावटी मिठाइयां खाने से सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। मिठाइयों में हानिकारक रंग, केमिकल और खराब गुणवत्ता वाली सामग्रियों का इस्तेमाल होने के कारण सेहत को नुकसान हो सकता है। दूषित मिठाई खाने से फूड पॉइजनिंग हो सकती है, पाचन समस्याएं जैसे पेट दर्द, उल्टी, गैस हो सकती है। मिठाई में खराब क्वॉलिटी वाले रंगों के इस्तेमाल से एलर्जी हो सकती है। कुछ हानिकारक केमिकल्स ऐसे भी होते हैं जिससे लिवर और किडनी को नुकसान पहुंच सकता है। आइए जानते हैं मिलावटी मिठाई से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है? बेहतर जानकारी के लिए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की गाइडलाइन्स में अलग-अलग मिठाइयों की अनुमानित शेल्फ लाइफ बताई गई है-
| मिठाई | खाने की अवधि |
| कलाकंद | उसी दिन खाने के लिए |
| रसगुल्ला, रसमलाई और रबड़ी | निर्माण की तारीख से 2 दिन |
| मावा बर्फी, मिल्क केक और बूंदी लड्डू | निर्माण की तारीख से 4 दिन |
| काजू कतली और ड्राई फ्रूट लड्डू | निर्माण की तारीख से 7 दिन |
| गजक, चिक्की और सोहन हलवा | लगभग 30 दिन |
मिठाई की वास्तविक सुरक्षित अवधि उसकी सामग्री, बनाने की प्रक्रिया और पैकेजिंग पर निर्भर करती है। पैकेट पर लिखी जानकारी भी देखें।
मिठाई खरीदते समय इन 5 बातों का रखें विशेष ध्यान
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1. मिठाई की गंध और बनावट चेक करें
मिठाई खरीदने से पहले उसकी गंध और बनावट पर ध्यान दें। अगर उसमें खट्टी, बासी या अजीब गंध आ रही है, तो उसे खरीदने से बचें। इसी तरह, मिठाई पर फफूंद दिखाई देने, असामान्य चिपचिपाहट या बनावट में बदलाव जैसे संकेतों को नजरअंदाज न करें। मिठाई खरीदने से पहले उस पर लगे वर्क पर गौर करें। मिठाई पर लगा वर्क नकली भी हो सकता है।
2. बहुत सस्ती मिठाई खरीदने से पहले सोचें
त्योहार पर कई दुकानों में मिठाइयों के आकर्षक ऑफर मिलते हैं, लेकिन अगर किसी मिठाई की कीमत दूसरी दुकानों की तुलना में कम है, तो उसकी गुणवत्ता और सामग्री के बारे में जानकारी लें। कम कीमत का मतलब हमेशा मिलावट नहीं होता, क्योंकि कीमत में अंतर सामग्री, दुकान और मिठाई के प्रकार के कारण भी हो सकता है। फिर भी, केवल सस्ते दाम या आकर्षक पैकेजिंग के कारण मिठाई न खरीदें।
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3. काजू कतली जैसी चांदी के वर्क वाली मिठाई पर गौर करें
काजू कतली जैसी कई मिठाइयां हैं जिन पर चांदी का वर्क लगाया जाता है। इन्हें खरीदते समय गौर करें कि मिठाई पर लगा चांदी का वर्क शुद्ध है या नहीं। कई बार दुकानों पर नकली वर्क वाली मिठाइयां बेची जाती हैं जिनका सेवन करने से सेहत खराब हो सकती है और पाचन समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे वर्क वाली मिठाई न खरीदें जिस पर चांदी के अलावा कोई अन्य धातु लगा हो।
4. पैक्ड मिठाई के लेबल पर सामग्री की जानकारी पढ़ें
अगर आप डिब्बाबंद मिठाई खरीद रहे हैं, तो उसके पैकेट पर लिखी सामग्री की सूची जरूर पढ़ें। इसमें इस्तेमाल किए गए पदार्थों, रंगों और दूसरी जरूरी जानकारी को देखें। पैकेट पर FSSAI का लोगो और लाइसेंस नंबर, निर्माण तिथि, और अंतिम तारीख जैसी जानकारियां भी चेक करें।
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5. खुली मिठाई खरीदते समय स्टोर करने का तरीका देखें
खुली मिठाइयां खरीदते समय देखें कि उसे साफ ट्रे में रखा गया है या नहीं। मिठाइयों को मक्खियों, धूल और दूसरी गंदगी से बचाकर रखना जरूरी है। दुकानदार मिठाई निकालने के लिए साफ चिमटे या दूसरे साफ उपकरणों का इस्तेमाल कर रहा है या नहीं, इस पर भी गौर दें।
असली मावा और पनीर को कैसे पहचानें?
FSSAI गाइडलाइन्स के मुताबिक,
जांच कैसे करें?
- थोड़े से सैंपल को पानी के साथ उबालें।
- ठंडा होने पर आयोडीन सॉल्यूशन की कुछ बूंदें डालें।
- नमूना नीला हो जाए, तो उसमें स्टार्च होने का संकेत मिलता है। हालांकि, बेहतर नतीजे लैब टेस्ट से ही मिल सकते हैं क्योंकि कई चीजों में स्टार्च का मौजूद होना गलत नहीं माना जाता है।
- मावा या पनीर अगर ताजा है, तो हल्के पके दूध जैसी गंध होगी, एकसमान बनावट होगी और रंग हल्का पीला होगा।
- खट्टी या बासी गंध आने पर उसे न खरीदें।
- ताजा पनीर आमतौर पर मुलायम होता है। बहुत ज्यादा चिपचिपा पनीर या असामान्य गंध वाला पनीर खरीदने से बचें।
निष्कर्ष:
मिठाई खरीदते समय मिठाई की गंध और बनावट पर गौर करें। मिठाई से खट्टी, बासी या अजीब गंध आ रही है, तो उसे न खरीदें। केवल सस्ते दाम या आकर्षक पैकेजिंग के कारण मिठाई न खरीदें क्योंकि ऐसी मिठाई की क्वॉलिटी खराब हो सकती है। डिब्बाबंद मिठाई खरीद रहे हैं, तो उसके पैकेट पर लिखी सामग्री की सूची जरूर पढ़ें। इसमें इस्तेमाल किए गए पदार्थों, रंगों और दूसरी जरूरी जानकारी को देखें। FSSAI का लोगो और लाइसेंस नंबर, निर्माण तिथि और अंतिम तारीख जैसी जानकारी को भी नोट करें। खुली मिठाई खरीदते समय मिठाई के रख-रखाव पर गौर करें। ऐसी मिठाई न खरीदें जिस पर मक्खियां, धूल या दूसरी गंदगी हो। त्योहार पर नकली मावा और पनीर भी खूब बिकता है। अगर मावे या पनीर की गंध सामान्य दूध जैसी है और बनावट मुलायम है, तो वह असली होगा। ज्यादा चिपचिपा पनीर या असामान्य गंध वाला पनीर खरीदने से बचें।
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FAQ
घी में मिलावट कैसे की जाती है?
घी में दूसरे तेलों या फैट की मिलावट की जा सकती है। केवल रंग, खुशबू या जमने के तरीके से घी की शुद्धता की पुष्टि नहीं की जा सकती।शहद में किस तरह की मिलावट की जाती है?
शहद में गन्ने की चाशनी, दूसरे शुगर सिरप या अन्य मीठे पदार्थ मिलाए जा सकते हैं। अगर शहद गाढ़ा है, तो उसकी बनावट देखकर उसे शुद्ध समझने की भूल न करें।
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Oct 27, 2026 17:23 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Oct 27, 2026 17:23 IST
Modified By : Yashaswi MathurOct 27, 2026 17:23 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Smita Singh
