Sat Oct 31, 2026 | 10:10 PM IST

Medically Reviewed by Dr Ujjawal Kumar , Senior Consultant - Cardiology at the Sarvodaya Hospital, Faridabad

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से आपकी धमनियों पर कैसा असर होता है? डॉक्टर से जानें

अगर आपकी डाइट में नॉनवेज ज्यादा है या आप तली-भूनी चीजों का सेवन ज्यादा करते हैं, तो आपका कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है। आइए, जानते हैं धमनियों पर इसका असर कैसे होता है और क्या हैं इनके नुकसान?
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से आपकी धमनियों पर कैसा असर होता है? डॉक्टर से जानेंकोलेस्ट्रॉल बढ़ने से आपकी धमनियों पर कैसा असर होता है? डॉक्टर से जानें

अगर आपके शरीर का कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ा रहता है, तो आपको इसे कंट्रोल करने की जरूरत है। दरअसल, बढ़ा हुआ कोलेस्टॉल आपकी धमनियों को नुकसान पहुंचाने के साथ दिल की बीमारियों का कारण बन सकता है। Dr. Ujjawal Kumar, Senior Consultant - Cardiology, Sarvodaya Hospital, Sector-8, Faridabad कहते हैं कि कोलेस्ट्रॉस जब बढ़ता है, तो बैड फैट लिपिड्स धमनियों में जाकर जमा होने लगते हैं, इससे न सिर्फ ब्लड सर्कुलेशन पर असर पड़ता है बल्कि, इसकी वजह से आपके दिल पर भी गहरा असर हो सकता है कैसे? समझते हैं डॉक्टर से कि कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना धमनियों की सेहत कैसे बिगाड़ सकता है।

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से क्या होता है?

Dr. Ujjawal Kumar कहते हैं कि जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है खास कि बैड कोलेस्ट्रॉल तो बैड फैट लिपिड के कण रक्त वाहिकाओं की दीवारों से चिपक जाते हैं और अपनी एक सख्त परत बना लेते हैं जिन्हें आम भाषा में प्लाक' (plaque) कहा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को मेडिकल भाषा में 'एथेरोस्क्लेरोसिस' (atherosclerosis) कहते हैं जिसमें धमनियां बहुत ज्यादा प्रभावित होती हैं।

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से धमनियों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

डॉ. कुमार कहते हैं कि कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से धमनियों पर गहरा प्रभाव पड़ता है और लगभग इनकी पूरी बनावट प्रभावित हो जाती है जैसे-

1. धमनियों का रास्ता संकरा होना

डॉ. कुमार कहते हैं कि LDL कोलेस्ट्रॉल रक्त में मौजूद अन्य पदार्थों के साथ मिलकर धमनियों की दीवारों के अंदर मोटी और सख्त परतें बना लेते हैं और जैसे-जैसे प्लाक जमा होता जाता है धमनियों का रास्ता संकरा हो जाता है। जैसे-जैसे प्लाक बढ़ता है, यह धमनियों के अंदर की जगह को सिकोड़ देता है, जिससे खून का गुजरना मुश्किल हो जाता है।

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2. धमनियां सख्त हो जाती हैं

प्लाक बढ़ने की वजह से धमनियां अपना स्वाभाविक लचीलापन खो देती हैं और सख्त हो जाती हैं। आगे डॉ. कुमार कहते हैं कि ब्लड सर्कुलेट करने के लिए दिल पर प्रेशर पड़ता है क्योंकि खून को आगे बढ़ाने के लिए दिल को बार-बार इसे धकेलना पड़ता है जिससे दिल का काम बढ़ जाता है।

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3. हाई बीपी की दिक्कत हो जाती है

डॉ. कुमार कहते हैं कि हाई बीपी की दिक्कत का एक मुख्य कारण यही है क्योंकि जब कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और धमनियों का प्रेशर बढ़ता है ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और ऐसे लोगों को हाई बीपी की समस्या हो जाती है। इससे खून का सामान्य प्रवाह रुक जाता है और हार्ट अटैक, स्ट्रोक तथा अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

इसके अलावा पैरो में रक्त का प्रवाह कम होने से ऐंठन हो सकती है, चलने पर दर्द हो सकता है या ऐसे घाव हो सकते हैं जो देर से भरते हैं। साथ ही पित्ताशय में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल जमा हो सकता है और सख्त होकर पथरी का रूप ले सकता है।

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धमनियों को स्वस्थ रखें?

डॉ. कुमार कहते हैं कि अपनी धमनियों को स्वस्थ और लचीला बनाए रखने के लिए, सबसे पहले तो नियमित कार्डियोवैस्कुलर और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक्सरसाइज करें। धमनियों को लचीला रखने के लिए नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को बढ़ाने और रक्त वाहिकाओं को फैलाने के लिए तेज चलना, साइकिल चलाना या तैरना जैसी चीजों को करें। इसके अलावा डाइट में ओमेगा-3, एंटीऑक्सीडेंट और डाइटरी नाइट्रेट से भरपूर चीजों को शामिल करें और आर्टरी फ्रेंडली फूड्स खाएं जैसे-

  • पालक, केल और मेथी में नाइट्रेट होते हैं जो नाइट्रिक ऑक्साइड में परिवर्तित होकर धमनियों की दीवारों को आराम पहुंचाते हैं।
  • एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल और एवोकाडो सूजन को कम करने और रक्त वाहिकाओं की परत की रक्षा करने में मदद करते हैं।
  • लहसुन में एलिसिन होता है जो रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है
  • रोजाना मुट्ठी भर बादाम या अखरोट खाने से एंडोथेलियल कार्यप्रणाली और कोलेस्ट्रॉल संतुलन में सुधार होता है।

साथ ही तंबाकू से बचें और तनाव को नियंत्रित रखें। साथ ही पैरों और पूरे शरीर में रक्त संचार बनाए रखने के लिए, हर 30 मिनट में कुछ देर के लिए खड़े हो जाएं या थोड़ा टहल लें। साल 2025 में प्रकाशित NIH की स्टडी बताती है कि बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से आर्टेरियोस्क्लेरोसिस (arteriosclerosis) की समस्या बढ़ती है जिसमें कि धमनियां कड़ी हो जाती हैं और संकरी हो जाती हैं। धूम्रपान (Smoking) भी इसके एक कारणों में से एक है।

निष्कर्ष:

अंत में डॉ. कुमार कहते हैं कि पहले माना जाता था कि HDL कोलेस्ट्रॉल हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन हाल के अध्ययनों ने इसके किसी भी निवारक या सुरक्षात्मक प्रभाव की पुष्टि नहीं की है। सिर्फ कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार करना ही स्वस्थ रहने की गारंटी नहीं है। कुछ दवाएं जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को ठीक करती हैं, वे जरूरी नहीं कि दिल के दौरे के जोखिम को कम करें। धमनियां की सेहत सिर्फ हाई कोलेस्ट्रॉल से प्रभावित नहीं होती बल्कि, हाई बीपी, डायबिटीज और मोटापा जैसे अन्य कारक भी धमनियों को नुकसान पहुंचाते हैं।

अंतिम सलाह यही है कि दिल के दौरे या स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों से बचने और इलाज के लिए केवल कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट देखने के बजाय समग्र स्वास्थ्य और अन्य जोखिम कारकों पर भी ध्यान दें।

FAQ

  • कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर क्या न खाएं?

    कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर सबसे पहले तो हाई प्रोसेस्ड फूड्स के सेवन से बचें। इसके अलावा ज्यादा फैटी फूड्स के सेवन से भी बचें।
  • गर्म पानी पीने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है क्या?

    गर्म पानी पीने से सीधे तौर पर कोलस्ट्रॉल कम नहीं होता बल्कि, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है और डिहाइड्रेशन से बचाव होता है जो कि कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की वजह बन सकता है।

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Pallavi Kumari

चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 31, 2026 20:42 IST

    Published By : Pallavi Kumari
    Reviewed By : Dr Ujjawal Kumar