Sat Oct 31, 2026 | 06:14 PM IST

Medically Reviewed by Dr. Aravinda S N , Lead Consultant – Internal Medicine

कब्ज के साथ पेट फूलता है लेकिन दर्द नहीं होता? जानें कब डॉक्टर से मिलें

बिना पेट दर्द के कब्ज और ब्लोटिंग आम पाचन समस्याएं हैं, जो अक्सर खराब लाइफस्टाइल और फाइबर की कमी से होती हैं। हालांकि, अगर ये लक्षण दो-तीन हफ्ते से अधिक रहें या गंभीर चेतावनी संकेत दिखें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
कब्ज के साथ पेट फूलता है लेकिन दर्द नहीं होता? जानें कब डॉक्टर से मिलेंकब्ज के साथ पेट फूलता है लेकिन दर्द नहीं होता? जानें कब डॉक्टर से मिलें

आज के समय में अनहेल्दी लाइफस्टाइल और खराब खान-पान के कारण ज्यादातर लोग कब्ज और ब्लोटिंग जैसी पाचन से जुड़ी समस्याओं से परेशान रहते हैं। इसके कारण कई स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में कई बार लोगों को कब्ज के साथ ब्लोटिंग की समस्या होती है। ऐसे में कई बार लोग यह नहीं समझ पाते हैं कि ये समस्या कब गंभीर है और कब इसके लिए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए? आइए इस बारे में Dr. Aravinda S N, Lead Consultant - Internal Medicine, Aster RV Hospital, Bengaluru से जानें।

बिना पेट दर्द के कब्ज और ब्लोटिंग आम है?

डॉ. अरविंद के अनुसार, बिना पेट दर्द के कब्ज और पेट फूलना, पाचन से जुड़ी एक आम समस्या है। ऐसा तब हो सकता है, जब मल त्याग (bowel movements) कम हो जाए, मल सख्त हो जाए या उसे पास करने में परेशानी हो या व्यक्ति को ऐसा महसूस हो कि उसका पेट पूरी तरह साफ नहीं हुआ है। हालांकि, अक्सर ऐसा लाइफस्टाइल से जुड़े कारणों से होता है, लेकिन अगर ये लक्षण लगातार बने रहें या नए सिरे से दिखाई दें, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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कब्ज और ब्लोटिंग की समस्या के क्या कारण हैं?

डॉ. अरविंद का कहना है, बिना पेट दर्द के कब्ज और ब्लोटिंग की समस्या कई सामान्य कारणों से हो सकती है। जैसे-

  • फाइबर की कमी
  • पर्याप्त लिक्विड का सेवन न करने
  • शारीरिक रूप से एक्टिव न रहने
  • लाइफस्टाइल में बदलाव
  • बार-बार मल त्याग की इच्छा को टालना
  • कुछ दवाएं, जैसे आयरन सप्लीमेंट, कुछ एंटासिड और ओपिओइड पेनकिलर (दर्द निवारक दवाएं) भी कब्ज का कारण बन सकती हैं।

डॉ. अरविंद बताते हैं, जब मल सामान्य से अधिक समय तक आंतों में रहता है, तो पेट फूलने की समस्या हो सकती है, जिससे गैस बनती है और पेट भरा-भरा सा महसूस होता है।

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क्या कहती है स्टडी?

साल 2023 में Internal Medicine में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, कब्ज और पेट फूलने की समस्या में अगर मल में खून आने, बिना कारण वजन कम होने, अचानक तेज कब्ज होने या पेट में गांठ महसूस होने जैसे गंभीर लक्षण दिखें या फिर ये परेशानी लंबे समय तक बनी रहने और लाइफस्टाइल व फाइबर युक्त डाइट में बदलाव करने के बाद भी ठीक न हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेनी जरूरी है, जो लक्षणों की गंभीरता के आधार पर शारीरिक जांच और खास टेस्ट करके सही कारण का पता लगाते हैं।

कब्ज की समस्या से बचने के लिए क्या करें?

डॉ. अरविंद का कहना है, कभी-कभार होने वाली कब्ज में, फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और दालों के जरिए डाइट में फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाकर सुधार किया जा सकता है। पर्याप्त मात्रा में लिक्विड पीना, नियमित फिजिकल एक्टिविटी करना और मल त्याग के लिए एक फिक्स लाइफस्टाइल बनाए रखना भी मददगार हो सकता है।

ध्यान रहे, फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ानी चाहिए, क्योंकि अचानक इसे बढ़ाने से कुछ लोगों में पेट फूलने (ब्लोटिंग) की समस्या और बिगड़ सकती है।

डॉक्टर से सलाह कब लें?

डॉ. अरविंद आगे कहते हैं, हालांकि, अगर लाइफस्टाइल में बदलाव के बाद भी कब्ज दो से तीन हफ्ते से ज्यादा समय तक बनी रहती है, बार-बार होती है या आपकी सामान्य मल त्याग की आदतों में कोई बड़ा बदलाव दिखता है, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

45 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों को, जिन्हें नई या लगातार कब्ज हो रही हो, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। खासकर तब, जब उन्हें कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग करानी हो या उनमें अन्य रिस्क फैक्टर्स (risk factors) मौजूद हों।

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चेतावनी संकेतों को न करें नजरअंदाज

डॉ. अरविंद का कहना है, व्यक्ति को ऐसी स्थिति में कुछ चेतावनी के संकेतों पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है।

  • मल में खून आना
  • बिना किसी साफ कारण के वजन कम होना
  • लगातार थकान महसूस होना
  • एनीमिया (खून की कमी)
  • पेट की सूजन का लगातार बढ़ना
  • मल त्याग के तरीके में बड़ा बदलाव आना

अगर परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर या इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (आंतों की सूजन से जुड़ी बीमारी) का इतिहास रहा है, तो भी डॉक्टर से बात करना जरूरी है।

डॉ. अरविंद के अनुसार, अगर कब्ज के साथ पेट में तेज दर्द, उल्टी, पेट का बहुत ज्यादा फूलना, या मल और गैस पास करने में असमर्थता जैसी समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। ये लक्षण आंतों में रुकावट (bowel obstruction) का संकेत हो सकते हैं।

डॉक्टर जांच कराने की दे सकते हैं सलाह

डॉ. अरविंद का कहना है, डॉक्टर आपके खान-पान की आदतों, दवाओं और मल त्याग के पैटर्न को समझते हैं, शारीरिक जांच करा सकते हैं या जरूरत पड़ने पर कुछ टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। कब्ज से पीड़ित हर व्यक्ति को स्कैन या कोलोनोस्कोपी की जरूरत नहीं होती है। जांच लक्षणों, उम्र और रिस्क फैक्टर्स पर निर्भर करती है।

कुछ मामलों में दर्द का न होना राहत की बात है, लेकिन इससे किसी मेडिकल कंडीशन की संभावना समाप्त नहीं होती है। अगर कब्ज के साथ पेट फूलना बना रहता है और स्थिति में सुधार नहीं होता है या इसके साथ चेतावनी के लक्षण दिखाई देते हैं, तो इस पर ध्यान देना जरूरी है।

निष्कर्ष

कब्ज और ब्लोटिंग आम समस्याएं हैं, जो मुख्य रूप से फाइबर और पानी की कमी, सुस्त लाइफास्टाइल या कुछ दवाओं के सेवन से होती हैं और हालांकि बिना पेट दर्द के होने वाली यह स्थिति अक्सर सामान्य होती है, लेकिन अगर यह दो से तीन हफ्ते से अधिक बनी रहे या 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में अचानक दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इस समस्या से बचने के लिए अपनी डाइट में धीरे-धीरे फाइबर बढ़ाना, पर्याप्त पानी पीना और नियमित रूप से शारीरिक रूप से एक्टिव रहना फायदेमंद होता है। इसके अलावा, अगर कब्ज के साथ मल में खून आना, बिना कारण वजन कम होने, लगातार थकान या आंतों में रुकावट जैसे गंभीर चेतावनी संकेत दिखें, तो स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

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FAQ

  • गंभीर कब्ज के लक्षण क्या हैं?

    गंभीर कब्ज की स्थिति में व्यक्ति को कम मल त्याग, कठोर मल, जोर लगाने, पेट दर्द, ब्लोटिंग, पेट में भारीपन, गैस और ऐंठन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • ब्लोटिंग के क्या कारण हैं?

    ब्लोटिंग की समस्या व्यक्ति को गलत खान-पान की आदतों, गैस बनाने वाले फूड्स, कब्ज, फूड इंटॉलरेंस, स्ट्रेस, खराब लाइफस्टाइल, हार्मोनल बदलाव और पाचन से जुड़ी समस्याओं से परेशान रहते हैं। 

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Priyanka Sharma

Health & Lifestyle Journalist

प्रियंका शर्मा पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 2 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर हैं। वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, प्रेगनेंसी, स्किनकेयर, हेयरकेयर, आयुर्वेद, योग और हार्ट हेल्थ जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखती हैं और जटिल स्वास्थ्य जानकारी को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञों की राय और भरोसेमंद मेडिकल स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह Grehlakshmi (महिला केंद्रित हिंदी पत्रिका) और Noida Khabar के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 31, 2026 16:38 IST

    Published By : Priyanka Sharma
    Reviewed By : Dr. Aravinda S N