History of Cardamom: इलायची भारत से निकली और पूरी दुनिया में घूम आई, इतना कि एक कंफ्यूजन की स्थिति हो गई कि आखिरकार इलायची है किस देश की? उस समय अलग-अलग देशों ने इसकी खोज पर अपना दावा किया लेकिन घूमते फिरते ये भारत लौट आई। इस मसाले की कहानी बेहद दिलचस्प है और हर मोड़ पर इसकी खुशबू vs दुनिया को पागल किया है। कैसे, जानते हैं मसाले की रानी इलायची का इतिहास और आम घरों में इसकी पैठ का पूरा सफर।
कैसे हुई इलायची की खोज?
इलायची की पैदाइश दक्षिण भारत के वर्षावनों (Rain forest) में हुई। जिन पहाड़ियों की झाड़ियों में जहां ये मिली उन्हें आज इलायची की पहाड़ियां (Cardamom Hills) कहा जाता है जो मुख्ततौर पर केरल में है। केरल में कुमिली और कोथमंगलम कस्बों में रहने वाले घीवरगीस (Geevarghese) लोगों ने ही इलायची की खोज की थी और बाद में इसकी खेती करते थे। घीवरगीस (Geevarghese) ईसाई समुदाय विशेषकर सीरियन क्रिश्चियन में इस्तेमाल किया जाने वाला एक पारंपरिक और ऐतिहासिक नाम है।
यह बारहमासी झाड़ी अदरक परिवार की है। यह पौधा दक्षिण भारत के पहाड़ी इलाकों में 800 से 1,500 मीटर की ऊंचाई पर, जंगल के पेड़ों के नीचे एक 'अंडर-क्रॉप' यानी मुख्य फसल के नीचे उगाई जाने वाली फसल के तौर पर बड़े पैमाने पर उगता है। इलायची का पौधा छाया और ठंडी जलवायु में सबसे अच्छी तरह पनपत है। तब से केरल इसका व्यापारिक केंद्र बन गय, और उसके बाद से इसका व्यापार और प्रसार बढ़ता ही गया।
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भारतीय इलायची पर सबसे पहले किसकी नजर पड़ी?
20 मई, 1498 को मालाबार तट पर वास्को डी गामा (Vasco da Gama) के आने के बाद, इलायची और दूसरे मसालों का यूरोप में बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाने लगा लेकिन बाद में काली मिर्च और अदरक ने इसकी जगह ले ली, क्योंकि यूरोप के लोग उन्हें ज्यादा पसंद करते थे। फिर भी, इसके औषधीय गुणों की वजह से इसे महत्व दिया जाता रहा। आज, नए तरह के खान-पान और मसालों की नई खोजों के कारण यह फिर से चर्चा में है।

शवों को सुरक्षित रखने के लिए करते थे इलायची का इस्तेमाल
1400-1600 BC के बीच, यानी वैदिक काल के बाद लिखे गए प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों जैसे चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में भी इलायची का जिक्र मिलता है, जिसे 'एला' कहा गया है। दरअसल, प्राचीन मिस्र के लोग इलायची का इस्तेमाल दवा के तौर पर, धार्मिक रीति-रिवाजों में और शवों को सुरक्षित रखने (एम्बामिंग) के लिए करते थे। बेबीलोन के प्राचीन राजा मेरोडाच-बालादान II (721-702 BC) ने अपने शाही बगीचे में दूसरी जड़ी-बूटियों के साथ इलायची भी उगाई थी।
इलायची का दवा के रूप में इस्तेमाल कैसे शुरू हुआ?
इलायची का मेडिसिनल उपयोग भारत के प्राचीन वैद्यों और ऋषियों ने पाचन तंत्र को ठीक करने और उस समय के राज-महाराजाओं में बदहजमी की समस्या को ठीक करने के लिए किया। जहां यूनानी डॉक्टर डायोस्कोराइड्स ने इलायची के औषधीय गुणों के बारे में लिखा और इसे मुख्य रूप से पाचन में मदद करने वाली चीज बताया तो वहीं, मिस्र के लोग करीब 1500 साल पहले इलायची का उपयोग सांसों की ताजगी बढ़ाने के लिए किया। वे मुंह की बदबू दूर करने और दांत साफ रखने के लिए इसे चबाते थे।
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देवताओं से संपर्क साधने का जरिया बनी इलायची
पुराने समय में माना जाता था कि इलायची की खुशबू से देवता खुश होते हैं और खींचे चले आते हैं। उन दिनों देवताओं की मूर्तियों पर इलायची का पाउडर चढ़ाया जाता था। इसे देवताओं से बातचीत करने का एक जरिया माना जाता था और जादुई कामों में इसका इस्तेमाल होता था।
इलायची का इतिहास:
समय-अवधि या युग |
मुख्य घटना |
विवरण |
1500 ईसा पूर्व, शुरुआती भारतीय समाज में इस्तेमाल किया जाता था |
प्राचीन उत्पत्ति और रीति-रिवाज में इस्तेमाल |
इसका जिक्र प्राचीन संस्कृत ग्रंथों, जैसे अथर्ववेद में मिलता है; इसका इस्तेमाल शुरुआती भारतीय समाज और धार्मिक त्योहारों में, तथा जादुई अगरबत्ती के तौर पर किया जाता था। |
चौथी सदी ईसा पूर्व |
दवाओं में इस्तेमाल | चरक संहिता में पाचन में मदद करने, सांस की समस्याओं से राहत दिलाने और सांस को ताजा रखने के लिए इसकी तारीफ की गई है। |
चौथी सदी ईसा पूर्व |
शुरुआती वैश्विक निर्यात |
भारत से मिस्र, ग्रीस और रोम को बड़ी मात्रा में इसका निर्यात किया जाता था, जिसका इस्तेमाल दांतों की सफाई, शव-संरक्षण, परफ्यूम और सुगंधित तेलों में होता था। |
मध्य युग में |
द स्पाइस रूट की खोज |
अरब व्यापारियों ने हिंद महासागर और सिल्क रोड के जरिए इलायची को पश्चिम की ओर पहुंचाया और इसे मध्य-पूर्वी संस्कृति और मेहमाननवाजी का हिस्सा बना दिया। |
| 1498 में | सीधे यूरोपीय व्यापार की शुरुआत |
वास्को डी गामा केरल के मालाबार तट पर पहुंचा, जिससे यूरोप में बड़े पैमाने पर निर्यात शुरू हुआ और यह स्कैंडिनेवियाई पेस्ट्री में एक जरूरी चीज बन गई। |
19 वीं सदी में |
व्यावसायिक खेती की शुरुआत हुई |
ब्रिटिश उपनिवेशवादियों ने दुनिया भर में भारी मांग को पूरा करने के लिए भारत में औपचारिक व्यावसायिक बागान स्थापित किए और जंगल से इसे इकट्ठा करने के तरीके से हट गए। |
सांप और बिच्छू के काटने पर इलायची का पाउडर लगाते थे
मध्य युग में, इलायची का इस्तेमाल सांप और बिच्छू के काटने के इलाज के तौर पर किया जाता था। माना जाता था कि ये फरिश्तों का बीज है। इसमें अलौकिक शक्तियां हैं और इसके पाउडर को लगाने से सांप और बिच्छू का असर बेअसर हो जाता है।
थके हुए प्रेमियों को पिलाई जाती थी इलायची वाली वाइन
इलायची का इस्तेमाल, कामोत्तेजक ड्रिंक के रूप में किया जाने लगा। लोककथाओं के अनुसार, बेबीलोन के हैंगिंग गार्डन्स की रानी सेमिरामिस अपने थके हुए प्रेमियों को इलायची वाली वाइन देती थीं। इसी तरह, क्लियोपेट्रा ने अपने प्रेमी मार्क एंटनी के आने पर अपने महल को खुशबूदार बनाया था।
क्यों तिजोरियों बंद करके रखते थे इलायची?
इलायची के इन तमाम प्रकार के इस्तेमाल की चर्चा दुनिया में फैली तो इसकी मांग बढ़ गई जैसे पहली सदी की रोमन कुकबुक 'एपिसियस' में व्यंजनों को बनाने के लिए काफी मात्रा में इलायची का इस्तेमाल किया गया था और रोम में इसकी मांग बढ़ गई। उसी तरह अरब व्यापारी इलायची और दूसरे मसालों को भूमध्यसागरीय इलाकों में लाए और उन्हें नेपल्स, वेनिस और कोर्सिका में बेचा। मध्य युग में जब अरब का दबदबा था तो इलायची दुनिया के सबसे महंगे मसालों में से एक बन गई थी। इसकी इतनी ज्यादा मांग थी कि कभी-कभी इसका इस्तेमाल टैक्स और किराया चुकाने के लिए मुद्रा के तौर पर भी किया जाता था। मक्का, दमिश्क और बगदाद जैसे शहर इस व्यापार से अमीर हो गए।
भारत में भी उस दौर में कुछ ऐसा ही हाल था। लोग इलायची को तिजोरियों में बंद करके रखते थे और जब भी पैसे की जरूरत पड़ती तो इसे बेच देते। इतना ही नहीं, उस जमाने में इलायची की चोरी सोना चोरी करने जैसा था यानी जिसके पास जितनी इलायची वो उतना अमीर।
अंत में लोगों की चाय तक पहुंची इलायची
धीमे-धीमे इलायची लोगों की चाय तक पहुंच गई। भारत में इलायची की खेती बढ़ गई और व्यापार के लिए इसका प्रोडक्शन बढ़ा दिया गया। धीमे-धीमे ये भारत के हर हिस्से में पहुंच गई और इसकी लागत थोड़ी समस्ती हुई लोग इसे अपनी चाय में खुशबू और स्वाद के लिए शामिल करने लगे और इस तरह से ये आम लोगों के जीवन का हिस्सा बन गई।
निष्कर्ष:
इलायची का इतिहास काफी भव्य रहा है और पूरी दुनिया में ये अलग-अलग डिश की जान हैं। इलायची की खुशबू किसी भी डिश को क्लासिक बना देती है। इसके अलावा सेहत के लिए भी ये मसाला काफी फायदेमंद है। आप इसे मुंह की दुर्गंध हटाने के लिए और पाचन क्रिया को सही करने के लिए खा सकते हैं। ये डाइजेस्टिव एंजाइम्स को बढ़ावा देने के साथ एसिड रिफ्लक्स और एसिडिटी की समस्या को कम करने में मददगार है।
FAQ
इलायची खाने से कौन सी बीमारी दूर होती है?
इलायची खाने से मुंह की बदबू दूर होती है। ये पाचन क्रिया को सही करने के साथ डाइजेस्टिव एंजाइम्स को बढ़ावा देती है जिससे ब्लोटिंग जैसी समस्याएं नहीं होती।पुरुषों को इलायची खाने से क्या फायदा होता है?
इलायची का इस्तेमाल, कामोत्तेजक फूड के रूप में होता रहा है। ये हार्मोनल हेल्थ को बेहतर बनाने के साथ स्पर्म काउंट को सही करने में मददगार है।
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Current Version
Aug 31, 2026 13:44 IST
Published By : Pallavi Kumari