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दुनिया की पहली नेचुरल एंटीबायोटिक की खोज कैसे हुई? जानें कैसे फफूंद ने बदल लिया मेडिकल इतिहास

वैज्ञान‍िकों की एक गलती से दुन‍िया को एंटीबायोट‍िक दी ज‍िसकी खोज एक फफूंद के जर‍िए हुई थी। जानें इस दवा से जुड़ी रोचक जानकारी और इत‍िहास। 
दुनिया की पहली नेचुरल एंटीबायोटिक की खोज कैसे हुई? जानें कैसे फफूंद ने बदल लिया मेडिकल इतिहासदुनिया की पहली नेचुरल एंटीबायोटिक की खोज कैसे हुई? जानें कैसे फफूंद ने बदल लिया मेडिकल इतिहास

क्‍या आपको पता है बैक्‍टीर‍ियल इंफेक्‍शन को रोकने वाली दवा एंटीबायोट‍िक की खोज आख‍िर कैसे हुई? द‍िलचस्‍त बात यह है क‍ि एंटीबायोट‍िक की खोज करने के ल‍िए वैज्ञान‍िकों ने पहले से तैयारी नहीं की थी, खोज अचानक हुई या यूं कहें क‍ि एक तरह का चमत्‍कार हुआ। 6 अगस्‍त 1881 को स्‍कॉटलेंड के अलेक्जेंडर फ्लेमि‍ंग ने एंटीबायोट‍िक्‍स की खोज की। 28 स‍ितंबर 1928 को दुन‍िया की पहली एंटीबायोट‍िक म‍िली। इसे 20वीं सदी की सबसे बड़ी खोज कहा जाता है।

फफूंद से बैक्‍टीर‍िया खत्‍म करके बनी पहली एंटीबायोट‍िक

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बात 1928 की है जब एक द‍िन स्‍कॉटलेंट के साइंट‍िस्‍ट अलेक्जेंडर फ्लेमि‍ंग अपनी लैब में शोध कर रहे थे। इसी दौरान उन्‍हें पेट्री ड‍िश (पारदर्शी ड‍िश) पर एक फंगस नजर आया। फंगस का बनना एक गलती थी क्‍योंक‍ि पेट्री ड‍िश पूरी तरह से साफ नहीं थी। फंगस को जब माइक्रोस्‍कोप में देखा गया, तो पाया क‍ि जहां भी फंगस मौजूद थे, वहां के बैक्‍टीरि‍या खत्‍म हो चुके थे। उस फंगस का नाम था पेन‍िस‍िल‍िन।

पेल‍िसि‍ल‍िन बनी द‍ुन‍िया की पहली एंटीबायोट‍िक

अलेक्जेंडर ने इस गलती को फ‍िर से शोध के रूप में दोहराया। शोध में पता चला क‍ि अगर फफूंद के एक क‍िस्‍म रस का इस्‍तेमाल का इस्‍तेमाल बैक्‍टीरिया पर करें, तो वह खत्‍म हो जाता है। उस फंगस से दुन‍िया की पहली एंटीबायोट‍िक तैयार हुई और उसका नाम पेन‍िस‍िल‍िन रखा गया। इसका इस्‍तेमाल कई तरह के इंफेक्‍शन फैलाने वाले बैक्‍टीरिया को खत्‍म करने के ल‍िए क‍िया गया।

युद्ध ने पेनिसिलिन की जरूरत बढ़ा दी

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जब द्वितीय विश्व युद्ध 1939 में शुरू हुआ, तब युद्ध में बड़ी संख्या में सैनिक गोलियों, बमों और विस्फोटों से घायल हो रहे थे। खुले घावों में बैक्टीरियल संक्रमण होने का खतरा बहुत ज्यादा था। उस समय संक्रमण कई बार चोट से भी ज्यादा खतरनाक साबित होता था। घाव में बैक्टीरिया बढ़ने पर सेप्‍स‍िस और गैंग्रीन जैसे गंभीर संक्रमण हो सकते थे इसलिए ऐसी दवा की जरूरत थी जो बैक्टीरिया को कंट्रोल कर सके। यहीं से पेनिसिलिन को विकसित करने की कोशिशों में तेजी आई।

अमेरिका ने पेनिसिलिन का उत्पादन बढ़ाया

युद्ध के दौरान सबसे बड़ी चुनौती थी कि पेनिसिलिन को प्रयोगशाला से निकालकर लाखों लोगों के इलाज के लिए कैसे इस्‍तेमाल क‍िया जाए? ब्रिटेन युद्ध में व्यस्त था और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए संसाधन सीमित थे। इसलिए ब्रिटिश और अमेरिकी वैज्ञानिकों के बीच सहयोग बढ़ा। अमेरिका में वैज्ञानिकों ने फंगस स्‍ट्रेन खोजने और तकनीक विकसित करने पर काम किया, जिससे ज्यादा मात्रा में पेनिसिलिन बनाया जा सके।

पेनिसिलिन की खोज से म‍िला नोबल पुरस्‍कार

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1945 में अलेक्जेंडर फ्लेमिंग, हॉवर्ड फ्लोरी और अर्न्स्ट चेन को पेनिसिलिन से जुड़े योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया। फ्लेमिंग ने 1928 में पेनिसिलिन की खोज की थी, जब उन्होंने देखा कि एक खास फंगस के आसपास बैक्टीरिया बढ़ नहीं पा रहे थे। इसके बाद फ्लोरी और अर्न्स्ट चेन ने अपनी टीम के साथ पेनिसिलिन को शुद्ध करने, उसका प्रभाव साबित करने और इसे उपचार में इस्तेमाल करने योग्य बनाने पर काम किया। इन तीनों के संयुक्त योगदान ने पेनिसिलिन को बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज की असरदार दवा बनाने में अहम भूमिका निभाई।

एंटीबायोट‍िक रेज‍िस्‍टेंस है आज की बड़ी चुनौती

आज लोग एंटीबायोट‍िक का तेजी से इस्‍तेमाल कर रहे हैं ज‍िससे एंटीबायोट‍िक रेज‍िस्‍टेंस का खतरा बढ़ रहा है यानी बैक्‍टीर‍िया को खत्‍म करने वाली यह दवा बेअसर साब‍ित हो रही है। ज‍िन सूक्ष्‍म जीवों पर एंटीबायोट‍िक बेअसर साब‍ित हुई है उसे सुपरबग कहा जाता है। एक अनुमान के मुताब‍िक, हर साल सुपरबग से फैलने वाली बीमार‍ियों से 13 लाख से ज्‍यादा लोगों की जान चली जाती है। इसल‍िए आज के समय में एंटीबायोट‍िक रेजि‍स्‍टेंस, वैज्ञान‍िकों के ल‍िए एक बड़ी चुनौती है ज‍िस पर लगातर शोध क‍िए जा रहे हैं।

न‍िष्‍कर्ष:

28 स‍ितंबर 1928 को दुन‍िया की पहली एंटीबायोट‍िक म‍िली। इसे 20वीं सदी की सबसे बड़ी खोज कहा जाता है, लेक‍िन यह जानना बेहद द‍िलचस्‍प है क‍ि इसे खोजा नहीं गया बल्‍क‍ि एक गलती के कारण एंटीबायोटि‍क की खोज हो गई। स्‍कॉटलेंड के वैज्ञान‍िक अलेक्जेंडर फ्लेमि‍ंग जब एक द‍िन लैब में काम कर रहे थे, तो उन्‍होंने देखा क‍ि पारदर्शी ड‍िश पर फंगस मौजूद है। उस फंगस को जब माइक्रोस्‍कोप में देखा गया, तो पता चला क‍ि जहां-जहां फंगस मौजूद थे, वहां बैक्‍टीरिया खत्‍म हो गए थे। उस फंगस से दुन‍िया की पहली एंटीबायोट‍िक तैयार हुई और उसका नाम पेन‍िस‍िल‍िन रखा गया। इसका इस्‍तेमाल बैक्‍टीर‍ियल इंफेक्‍शन के ख‍िलाफ क‍िया जाता है। आज एंटीबायोट‍िक रेज‍िस्‍टेंस वैज्ञान‍िकों के ल‍िए एक बड़ी चुनौती है ज‍िसे हल करने के ल‍िए लगातार शोध क‍िए जा रहे हैं।

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  • Current Version

    Aug 26, 2026 19:36 IST

    Published By : Yashaswi Mathur