Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Kapil Sharma , Group Director - Gastroenterology & Advanced Endoscopy

दस्त और पेट में मरोड़ हो सकते हैं गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन के संकेत, डॉक्टर से जानें किन्हें है ज्यादा खतरा

दूष‍ित भोजन, पानी, बैक्‍टीर‍िया या वायरस की चपेट में आने के कारण गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्‍शन हो सकता है। इस इंफेक्‍शन से पेट, आंत और पाचन तंत्र प्रभाव‍ित होता है। जानें क‍िन लोगों को इसका ज्‍यादा खतरा होता है और इससे कैसे बचें?

कई शहरों में मॉनसून दस्‍तक दे चुका है। जहां एक तरफ बारिश में गर्मी से राहत म‍िलती है, तो वहीं दूसरी तरफ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्‍शन का खतरा बढ़ जाता है। यह इंफेक्‍शन पाचन तंत्र में होने वाली एक तरह की सूजन है जो वायरस, बैक्‍टीर‍िया और पैरासाइट के कारण होता है। वैसे तो व्‍यक्‍त‍ि कभी भी इसकी चपेट में आ सकता है, लेक‍िन बार‍िश और नमी वाले मौसम में इसका प्रकोप ज्‍यादा तेज होता है। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन होने पर व्‍यक्‍त‍ि को डायर‍िया, पेट दर्द, ऐंठन, मतली, उल्‍टी, जी म‍िचलाना, बुखार, भूख कम लगना, ड‍िहाइड्रेशन जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। जानते हैं ये इंफेक्‍शन क‍िन लोगों को ज्‍यादा प्रभाव‍ित करता है। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Kapil Sharma, Gastroenterologist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्‍शन क‍िसे ज्‍यादा प्रभाव‍ित करता है?

gastrointestinal-infection

  1. बच्‍चों की इम्‍यून‍िटी कमजोर होती है, ऐसे में लोग वायरस और बैक्‍टीर‍िया में होने वाले इंफेक्‍शन की चपेट में जल्‍दी आ सकते हैं। एक साल से कम आयु के श‍िशुओं में भी यह इंफेक्‍शन फैल सकता है। श‍िशुओं में रोटावायरस के कारण इस इंफेक्‍शन का खतरा बढ़ जाता है।
  2. ज‍िन लोगों की इम्‍यून‍िटी कमजोर होती है, उनमें इंफेक्‍शन जल्‍दी हो सकता है। ऐसे में र‍िकवरी में ज्‍यादा समय लग सकता है। यह खतरा बुजुर्गों और गर्भवती मह‍िलाओं में ज्‍यादा देखा जाता है।
  3. एचआईवी, कैंसर, डायब‍िटीज और लंबे समय तक स्‍टेरॉयड दवाओं का सेवन करने वाले लोगों की इम्‍यून‍िटी भी कमजोर हो सकती है और इंफेक्‍शन हो सकता है।
  4. जो लोग स्‍ट्रीट फूड्स, ठीक से न पका हुआ खाना या कच्‍ची चीजों का सेवन करते हैं उन्‍हें इंफेक्‍शन का खतरा हाे सकता है खासतौर पर मॉनसून के द‍िनों में लोग पेट के इंफेक्‍शन की चपेट में जल्‍दी आ जाते हैं।
  5. गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्‍शन क‍िन लोगों को हो सकता है, यह उसके र‍िस्‍क फैक्‍टर्स पर न‍िर्भर करता है जैसे दूष‍ित पानी वाली जगहों पर रहना, टॉयलेट साफ न होना, आसपास स्‍वच्‍छता न होने के कारण इंफेक्‍शन हो सकता है।

यह भी पढ़ें- मानसून में डायरिया से बचना है, तो अपनाएं ये 5 फूड सेफ्टी टिप्स

क्‍या कहती है स्‍टडी?

साल 2026 में Epidemiology And Infection नामक जर्नल में प्रकाशि‍त एक स्‍टडी के मुताब‍िक, यात्रा करने वाले लोगों में भी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्‍शन का खतरा ज्‍यादा होता है क्‍योंक‍ि यात्रा के दौरान घर से बाहर खाना पड़ता है ज‍िसके कारण अक्‍सर लोगों की तबीयत ब‍िगड़ जाती है। साथ ही स्‍टडी में दूष‍ित पानी के सेवन और होटलों के बुफे में खाने को भी सेहत के ल‍िए हान‍िकारक बताया गया है।

यह भी पढ़ें- तंबाकू और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर के बीच क्या कनेक्शन है? डॉक्टर से जानें

\

क्‍या गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन एक गंभीर इंफेक्‍शन है?

हां, यह एक गंभीर इंफेक्‍शन है। इसे नजरअंदाज करने पर गंभीर ड‍िहाइड्रेशन या डायर‍िया की समस्‍या हो सकती है और मरीज को हॉस्‍पि‍टल में भर्ती करने की नौबत आ सकती है। अगर समय पर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन का इलाज न क‍िया जाए, तो पाचन की अन्‍य समस्‍याएं और क‍िडनी फेल‍ियर का खतरा बढ़ सकता है।

यह भी पढ़ें- दवा खाते ही शुरू हो जाते हैं दस्त? एक्सपर्ट से जानें इसका कारण और पेट खराब होने से बचाने के तरीके

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्‍शन की पुष्टि होने पर डॉक्‍टर क्‍या करते हैं?

अगर जांच के जर‍िए यह पता चलता है क‍ि व्‍यक्‍त‍ि को गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्‍शन है, तो पहले कारण का पता लगाया जाता है। अगर बैक्‍टीर‍िया के कारण इंफेक्‍शन हुआ है, तो एंटीबायोट‍िक दी जाती है। वायरल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्‍शन में एंटीवायरल दवाएं दी जाती हैं। दवाओं की मदद से इंफेक्‍शन का इलाज संभव है। हालांक‍ि कुछ गंभीर मामलों में मरीज को स्‍टूल और यूर‍िन में ब्‍लड, तेज बुखार या अध‍िक ड‍िहाइड्रेशन जैसे लक्षण नजर आते हैं ज‍िसके ल‍िए मरीज को हॉस्‍प‍िटल में भर्ती होना पड़ सकता है और इलाज लंबा चलता है।

यह भी पढ़ें- पेट की कौन-सी बीमारियां बनती हैं एनीमिया का कारण? जानें डॉक्टर की सलाह

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • अगर दस्‍त या उल्‍टी दो से तीन द‍िनों से ज्‍यादा बनी रहे।
  • स्‍टूल या यूर‍िन में ब्‍लड नजर आए।
  • तेज बुखार होने पर।
  • गंभीर ड‍िहाइड्रेशन होने पर।

न‍िष्‍कर्ष:

श‍िशु, बच्‍चे, गर्भवती म‍ह‍िलाएं और बुजुर्गों को इस इंफेक्‍शन का खतरा ज्‍यादा होता है क्‍योंक‍ि उनकी इम्‍यून‍िटी सामान्‍य लोगों की तुलना में ज्‍यादा कमजोर होती है। एचआईवी, कैंसर, डायब‍िटीज, स्‍टेरॉयड दवाओं के मरीजों में भी इसका खतरा अध‍िक होता है। जो लोग अक्‍सर यात्रा करते हैं, साफ-सफाई का ख्‍याल नहीं रखते, बाहर का खाना ज्‍यादा खाते हैं उन्‍हें गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्‍शन हो सकता है।

FAQ

  • गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन क‍ितने द‍िनों तक रहता है?

    यह इंफेक्‍शन कुछ द‍िनों से लेकर एक या दो हफ्तों तक रह सकता है। ज्‍यादातर लोग हफ्तेभर में बेहतर महसूस करते हैं। अगर लक्षण गंभीर हैं, तो अध‍िक समय भी लग सकता है।
  • गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन से कैसे बचें?

    इस इंफेक्‍शन से बचने के ल‍िए साफ पानी प‍िएं, भोजन को अच्‍छी तरह से पकाकर खाएं, बाहर के खाने से परहेज करें खासकर मॉनसून या नमी वाले मौसम में, अपने आसपास साफ-सफाई रखें और ड‍िहाइड्रेशन से बचें। 

Read Next

क्या नॉर्मल वजन वाले लोगों को भी मेटाबोलिक समस्याएं हो सकती हैं?

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jul 08, 2026 09:41 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jul 08, 2026 09:41 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jul 08, 2026 09:41 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Kapil Sharma

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content