जब किसी का वजन संतुलित होता है, तो उन्हें यही लगता है कि वे पूरी तरह फिट हैं और उन्हें मोटापे से होने वाली समस्याएं नहीं होंगी। यहां तक कि भविष्य में गंभीर बीमारियों का जोखिम भी कम हो जाता है। हालांकि, ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो यह मानते हैं कि संतुलित वजन होने के बावजूद मेटाबोलिक समस्याएं हो सकती हैं। यहां सवाल उठता है कि इस बात में कितनी सच्चाई है या यह महज एक भ्रम है? आइए, जानते हैं एक्सपर्ट से इनकी राय।
क्या संतुलित वजन के बावजूद मेटाबोलिक समस्या होती है?
इसमें कोई दो राय नहीं है कि मोटापा कई गंभीर बीमारियों का कारण होता है। मोटापे के कारण क्राॅनिक इंफ्लेमेशन बढ़ता है, जिससे हार्मोन्स का स्तर प्रभावित होता है, जो कि मेटाबोलिक समस्याओं का कारण बन सकता है। सामान्य तौर पर हम मोटापे को इतनी बीमारियों से जोड़कर देखते हैं कि अक्सर सामान्य वजन वाले खुद को पूरी तरह फिट मानते हैं। American Institute for Cancer Research के अनुसार, नाॅर्मल वेट वालों को भी मेटाबोलिक समस्याएं हो सकती हैं। इसे मेटाबोलिकली अनहेल्दी नाॅर्मल वेट कहते हैं। इस संबंध में डाॅक्टर समझाते हैं, "कुछ लोग बाहर से दिखने में पूरी तरह स्वस्थ नजर आ सकते हैं, लेकिन उनके अंदरूनी अंग बीमारियों से घिरे हो सकते हैं। जैसे किसी का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) सामान्य हो सकता है, लेकिन उसके महत्वपूर्ण अंगों जैसे लिवर और पैनक्रियाज के आसपास विसरल फैट जमा हो सकता है। इस तरह का फैट बाहर से नजर नहीं आता है, लेकिन ये अंदरूनी अंगों की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है और इंसुलिन हार्मोन भी ठीक से काम करना बंद कर सकता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या हो सकती है और मेटाबोलिक रेट धीमा हो सकता है। साथ ही ब्लड प्रेशर बढ़ना या खून में खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बिगड़ने जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो जाती हैं।"
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संतुलित वजन के बावजूद मेटाबोलिक समस्या हो तो क्या करें?
फिजिकली एक्टिव रहें
अगर सामान्य वजन होने के बावजूद मेटाबोलिक समस्याएं हैं, तो उसे इग्नोर न करें। कई बार बीएमआई सामान्य होने के बाद भी अंदरूनी अंगों के आसपास विसरल फैट हो सकता है या मांसपेशियों की कमी हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि आप मांसपेशियों को मजबूत बनाने तथा इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारने पर जोर दें। इसके लिए नियमित रूप से एरोबिक एक्सरसाइज जैसे दौड़ना या साइकिल चलाना और रेजिस्टेंस ट्रेनिंग यानी वेट लिफ्टिंग आदि करें।
लो-ग्लाइसेमिक डाइट अपनाएं
संतुलित वजन होने के बावजूद मेटाबोलिक समस्या हो, तो लो-ग्लाइसेमिक डाइट अपनाना फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए, अपने खाने में सब्जियों, लीन प्रोटीन (जैसे दालें, अंडा या चिकन) और हेल्दी फैट्स जैसी नेचुरल चीजों को शामिल करें। इसके साथ-साथ चीनी और मैदे से बनी चीजों का सेवन पूरी तरह बंद कर दें।
तनाव और कोर्टिसोल को कंट्रोल करें
मौजूदा समय में हर व्यक्ति किसी न किसी बात को लेकर तनाव में है। तनाव की वजह से कुछ लोगों का वजन बढ़ जाता है, तो कुछ लोगों का वजन घटा जाता है। तनाव का स्तर बढ़ते ही शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन भी बढ़ने लगता है। ऐसे में बिना खाना खाए भी पेट के आसपास चर्बी जमा होने लगती है, जो कि मेटबाॅलिज्म को खराब कर देता है। इसलिए, कोशिश करें कि तनाव के स्तर को मैनेज करने की कोशिश करें।
अच्छी नींद जरूर लें
देर रात तक जगना और मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताना सही नहीं है। इससे नींद पूरी नहीं होती है, जिससे ब्लड शुगर और इंसुलिन का स्तर प्रभावित होने लगता है। ऐसा आपके साथ न हो, इसके लिए जरूरी है कि आप रात को कम से कम 7-8 घंटे की नींद जरूर लें। इससे मेटाबाॅलिज्म में भी सुधार होता है।
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डाॅक्टर से कब मिलें?
अगर वजन संतुलित होने के बावजूद मेटाबाॅलिज्म की समस्या हो, तो इसे इग्नोर न करें। शरीर में नजर आ रहे इन लक्षणों पर जरूर गौर करें-
- अगर अचानक जीवनशैली में बिना बदलाव किए वजन कम होने लगे या बढ़ने लगे, तो इसे स्थिति को हल्के में न लें। ऐसा होने पर तुरंत डाॅक्टर के पास जाएं।
- मेटाबाॅलिज्म से जुड़ी समस्या होने के साथ-साथ यह नोटिस करें कि क्या दिल की धड़कन तेज हो रही है, घबराहट महसूस हो रही है, हाथों-पैरों में कंपन हो रहा है, पीरियड्स अनियमित हो गए हैं। अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो डाॅक्टर से अपनी जांच करवाएं।
- लगातार सही खान-पान और नियमित एक्सरसाइज करने के बावजूद भी वजन कम करने या बढ़ाने में दिक्कत हो, तो यह भी सही संकेत नहीं है।
मेटाबोलिक सिंड्रोम के लिए कौन सी जांच करवाएं?
मेटाबोलिक सिंड्रोम की जांच के लिए ब्लड टेस्ट जैसे फास्टिंग ग्लूकोज, ट्राइग्लिसराइड्स, एचडीएल कोलेस्ट्रॉल करवाएं। अगर सिर्फ लाइफस्टाइल बदलने से आपके टेस्ट रिजल्ट्स ठीक नहीं होते हैं, तो डॉक्टर आपको जरूर दवाएं दे सकते हैं। इनकी मदद से आराम मिल सकता है।
निष्कर्ष
अगर वजन संतुलित हो, तो भी मेटाबोलिक समस्या हो सकती है। इसलिए इसे हल्के में न लें। ध्यान रखें कि कई बार पतले और स्वस्थ दिखने वाले लोगों के पेट के पास चर्बी जमा होती है। ये चर्बी अंदरूनी अंगों को प्रभावित करती है, जिससे पैनक्रियाज और अन्य जरूरी अंगों का काम प्रभावित होता है। ऐसे में मेटाबाॅलिज्म की समस्या ट्रिगर हो सकती है। ऐसा हो, तो सबसे पहले डाॅक्टर के पास जाएं और अपनी जांच करवाएं।
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FAQ
क्या बिना पेट बाहर निकले भी अंदरूनी अंगों के आसपास चर्बी जमा हो सकती है?
हां, आनुवंशिकी और खराब डाइट के कारण पतले लोगों के लिवर और पैनक्रियाज के आसपास भी चर्बी जमा हो सकती है। इसे विसरल फैट कहते हैं।क्या सामान्य वजन होने के बावजूद इंसुलिन रेजिस्टेंस होने से महिलाओं में बांझपन का खतरा रहता है?
हां, इसे Lean PCOS कहा जाता है। हालांकि ऐसी किसी समस्या की आशंका होने पर डॉक्टर से जांच करवाएं।
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Jul 07, 2026 20:05 IST
Modified By : Meera Tagore Jul 07, 2026 20:05 IST
Modified By : Meera TagoreJul 07, 2026 20:05 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Neeraj Dhamija