टेस्टोस्टेरोन के संदर्भ में लोग तरह-तरह की चीजें सोचते हैं। जैसे टेस्टोस्टेरोन मूड को प्रभावित करता है, तो कुछ लोगों को लगता है कि सिर्फ अधिक उम्र के पुरुषों में ही टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है। ऐसे और भी कई मिथक आज भी मौजूद हैं, जिन पर लोग आंख मूंदकर यकीन करते हैं। इस लेख में हम टेस्टोस्टेरोन से संबंधित कुछ मिथक और उनकी सच्चाई के बारे में जानेंगे। इन मिथकों की पुष्टि करने के लिए हमने नवी मुंबई स्थित मेडिकवर अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट और सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. विजय दहिफले से बात की।
टेस्टोस्टेरोन से जुड़े बड़े मिथक और उनकी सच्चाई
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मिथकः टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने पर सिर्फ सेक्स ड्राइव प्रभावित होती है
सच्चाईः इसमें कोई दो राय नहीं है कि सेक्स की इच्छा में कमी आना लो टेस्टोस्टेरोन का सबसे बड़ा संकेत है। लेकिन, टेस्टोस्टेरोन को सिर्फ सेक्स डिजायर तक सीमित रखना सही नहीं है। टेस्टोस्टेरोन कई मायनों में शरीर को प्रभावित करता है। Urology Care Foundation की मानें, तो टेस्टोस्टेरोन में कमी आने पर लगातार थकान महसूस होना, दिमाग का सही से काम न करना, बार-बार मूड में परिवर्तन होना, मांसपेशियां कमजोर होना और डिप्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
मिथकः टेस्टोस्टेरोन थेरेपी सिर्फ पुरुषों के लिए होती है
सच्चाईः टेस्टोस्टेरोन थेरेपी का जिक्र छेड़ते ही हम इसे पुरुषों तक सीमित कर देते हैं। हकीकत यह है कि टेस्टोस्टेरोन सिर्फ पुरुषों के लिए जरूरी हार्मोन नहीं है, बल्कि महिलाओं के लिए इसकी अहम भूमिका है। साल 2025 में European Society of Medicine में प्रकाशित एक समीक्षा पत्र के अनुसार, टेस्टोस्टेरोन केवल पुरुषों के लिए ही नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। आपको जानकर हैरानी होगी कि महिलाओं के शरीर में एस्ट्रैडियोल (महिला सेक्स हार्मोन) की तुलना में टेस्टोस्टेरोन का स्तर 10 से 20 गुना अधिक होता है।
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अध्ययन में आगे बताया गया है कि सही खुराक में दी जाने वाली टेस्टोस्टेरोन थेरेपी महिलाओं में मूड, ऊर्जा का स्तर, याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता, हड्डियों के स्वास्थ्य और सेक्स ड्राइव में महत्वपूर्ण सुधार करती है।
मिथकः सिर्फ बढ़ती उम्र के कारण टेस्टोस्टेरोन के स्तर में गिरावट आती है
सच्चाईः सामान्यतः हम टेस्टोस्टेरोन को मेल हार्मोन से जानते हैं और इसे सेक्स की इच्छा तक ही सीमित कर देते हैं। इसलिए, जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, इसके स्तर में आ रही गिरावट को हम सामान्य समझने लगते हैं। साल 2014 में Canadian Urological Association जर्नल में प्रकाशित समीक्षा पत्र के अनुसार पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन ओवरऑल हेल्थ, बोन डेंसिटी, टाइप 2 डायबिटीज और मेटाबोलिक सिंड्रोम जैसी गंभीर बीमारियों से सीधे जुड़ी हुई है। किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या होने पर पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर गिर सकता है।
मिथकः टेस्टोस्टेरोन थेरेपी से प्रोस्टेट कैंसर हो सकता है
सच्चाईः Mayo Clinic के अनुसार टेस्टोस्टेरोन थेरेपी से प्रोस्टेट कैंसर का आपस में कोई कनेक्शन स्पष्ट नहीं हुआ है। हालांकि, एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि जब तक शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम न हो जाए, तो टेस्टोस्टेरोन थेरेपी नहीं लेनी चाहिए। वहीं, प्रोस्टेट कैंसर सेल टेस्टोस्टेरोन के प्रति काफी ज्यादा सेंसिटिव हो जाते हैं और यह थेरेपी कैंसर सेल्स को तेजी से ग्रो करने में मदद करती है। इसलिए, जब तक जरूरत न हो, तब तक टेस्टोस्टेरोन थेरेपी नहीं लेनी चाहिए।
मिथकः टेस्टोस्टेरोन की वजह से गंजेपन की समस्या हो सकती है
सच्चाईः किसी व्यक्ति में गंजेपन के विभिन्न कारण हो सकते हैं। साल 2023 में Nature Communication में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार बालों के झड़ने के लिए सीधे तौर पर टेस्टोस्टेरोन को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है। हालांकि, इनका आपस में कनेक्शन है, लेकिन इसे और स्पष्ट तरीके से समझने की जरूरत है। इस बारे में डॉ. विजय दहिफले कहते हैं, "शरीर में मौजूद एक एंजाइम (5-alpha reductase) टेस्टोस्टेरोन को डायहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन (DHT) नाम के एक मजबूत बाय-प्रोडक्ट में बदल देता है। एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया (पुरुषों का पैटर्न वाला गंजापन) के लिए सीधे तौर पर DHT जिम्मेदार होता है, न कि सामान्य टेस्टोस्टेरोन।" डॉ. विजय दहिफले आगे कहते हैं, "जिन पुरुषों में आनुवंशिक रूप से गंजेपन की प्रवृत्ति होती है, उनके सिर के बालों की जड़ें DHT के प्रति बहुत अधिक संवेदनशील होती हैं।"
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निष्कर्ष
टेस्टोस्टेरोन से संबंधित कई ऐसे मिथक हैं, जिन पर लोग आज भी यकीन करते हैं। असल बात यह है कि टेस्टोस्टेरोन सिर्फ पुरुष हार्मोन नहीं है। महिलाओं में भी सीमित मात्रा में यह हार्मोन पाया जाता है। इसकी कमी के कारण उसमें कमजोरी, थकान जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं। यही नहीं, टेस्टोस्टेरोन को सिर्फ सेक्स हार्मोन के रूप में समझना सही नहीं है।
हालांकि, इसकी कमी के कारण पुरुषों में सेक्स डिजायर कम हो सकती है। वहीं, इसकी कमी से उनके शरीर में अन्य परेशानियां भी ट्रिगर हो सकती हैं। इसलिए, जरूरी है कि पुरुष इससे संबंधित मिथकों पर यकीन न करें। अगर इसकी कमी के लक्षण शरीर में नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर अपना इलाज करवाएं।
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FAQ
क्या प्राकृतिक तरीकों से टेस्टोस्टेरोन को बढ़ाया जा सकता है?
हां, जीवनशैली में अच्छे बदलाव करके, रेगुलर वर्कआउट, पर्याप्त नींद लेना, तनाव कम करना और जिंक व विटामिन-डी से भरपूर आहार लेने से शरीर में प्राकृतिक रूप से टेस्टोस्टेरोन का स्तर बेहतर होता है।क्या बिना डॉक्टर की सलाह के टेस्टोस्टेरोन सप्लीमेंट्स लेना सही है?
नहीं। जब आप बाहर से टेस्टोस्टेरोन सप्लीमेंट्स लेते हैं, तो दिमाग सिग्नल देकर अंडकोष में प्राकृतिक टेस्टोस्टेरोन और स्पर्म का प्रोडक्शन को बंद कर देता है। ऐसे में पुरुषों में इनफर्टिलिटी की समस्या हो सकती है।
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Sep 17, 2026 13:14 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Vijay S Dahiphale