उम्र बढ़ने के साथ हमारे शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं, लेकिन अक्सर यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कौन सा बदलाव नॉर्मल है और कौन-सा किसी गंभीर बीमारी का संकेत है। खासकर पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर को लेकर जानकारी की कमी के कारण लोग इसके लक्षणों की सही तरह से पहचान नहीं कर पाते हैं। प्रोस्टेट कैंसर की समय पर पहचान करना इसे फैलने से रोकने और समय पर सही इलाज के लिए बहुत जरूरी है। ऐसे में लोगों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि आखिर प्रोस्टेट कैंसर क्या है और यह शरीर के किस हिस्से को नुकसान पहुंचाता है? इतना ही नहीं, लोग इसके लक्षण, कारणों और इलाज के बारे में भी कंफ्यूज रहते हैं। इसलिए, आइए इस लेख में हम Dr. Mandeep Singh Malhotra, Delhi-based Oncologist and Founder of Art of Healing Cancer से प्रोस्टेट कैंसर के बारे में जानते हैं।
प्रोस्टेट कैंसर क्या है और यह कैसे विकसित होता है?
डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा ने बताया कि प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला एक सामान्य लेकिन गंभीर बीमारी है, जो प्रोस्टेट ग्लैंड में विकसित होता है। प्रोस्टेट एक छोटी ग्लैंड होती है, जो मूत्राशय के नीचे होती है और सीमन लिक्विड को बनाने में मदद करती है। जब इस ग्लैंड के सेल्स असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और अनियंत्रित तरीके से बंटने लगती है तो प्रोस्टेट कैंसर विकसित हो सकता है। यह कैंसर धीरे-धीरे बढ़ सकता है, लेकिन कुछ मामलों में यह तेजी से फैलकर शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है।
प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में तब विकसित होता है, जब प्रोस्टेट ग्लैंड के हेल्दी सेल्स के DNA में असामान्य बदलाव या म्यूटेशन होने लगते हैं। इससे ये सेल्स नेचुरल तरीके से मरने के बजाय अनियंत्रित तरीके से बढ़ने और विभाजित होने लगते हैं। धीरे-धीरे ये असामान्य सेल्स इकट्ठा होकर एक ट्यूमर का रूप ले लेती हैं, जो समय के साथ ग्लैंड के अंदर फैलता है और गंभीर स्थिति में शरीर के अन्य हिस्सों जैसे हड्डियों या लिम्फ नोड्स तक भी पहुंच सकता है।
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प्रोस्टेट कैंसर के मुख्य कारण
डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा का कहना है कि प्रोस्टेट कैंसर होने के सही कारणों का अभी तक पूरी तरह पता नहीं चल पाया है। हालांकि, कुछ जोखिम कारक इसे बढ़ा सकते हैं, जिनमें शामिल हैं-
- बढ़ती उम्र प्रोस्टेट कैंसर होने का सबसे बड़ा कारण है, क्योंकि 50 साल की उम्र के बाद इसका खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है।
- जेनेटिक जैसे परिवार में पिता, भाई या किसी करीबी रिश्तेदार को यह कैंसर रहा है तो भी इसके होने की संभावना ज्यादा होती है।
- पुरुषों के शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का लेवल बहुत ज्यादा होना भी इस कैंसर के विकास में अहम भूमिका निभा सकता है।
- ज्यादा फैट वाले फूड्स, रेड मीट का सेवन और फल-सब्जियों को कम खाने के कारण भी प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।
- मोटापा और ज्यादा वजन होने के कारण भी यह कैंसर हो सकता है। साथ ही इसके ज्यादा आक्रामक होने का जोखिम भी बढ़ सकता है।
- शारीरिक गतिविधियां न करना और खराब लाइफस्टाइल भी प्रोस्टेट कैंसर का एक बड़ा कारण हो सकता है।
Mayo Clinic के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसर होने के कारणों का साफ पता नहीं है, लेकिन कुछ ऐसी चीजें पाई गई हैं जिनसे इस कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। इनमें ज्यादा उम्र, मोटापा और प्रोस्टेट कैंसर की फैमिली हिस्ट्री शामिल हैं। प्रोस्टेट कैंसर का असल कारण अक्सर पता नहीं चल पाता है।
किन पुरुषों को प्रोस्टेट कैंसर का सबसे ज्यादा खतरा है?
डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा बताते हैं कि प्रोस्टेट कैंसर का खतरा कुछ पुरुषों में दूसरों के मुकाबले थोड़ा ज्यादा होता है। खासकर उन पुरुषों को इसका जोखिम ज्यादा होता है, जिनकी उम्र ज्यादा है, परिवार में पहले से प्रोस्टेट कैंसर रहा हो या जिनका वजन बहुत ज्यादा है। इसके अलावा, रहन-सहन ठीक न होना, खराब डाइट और सिगरेट या बहुत ज्यादा शराब का सेवन भी पुरुषों में इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा सकता है।
American Cancer Society के अनुसार, 40 साल से कम उम्र के पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम बहुत कम होता है, लेकिन 50 साल की उम्र के बाद प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। प्रोस्टेट कैंसर के लगभग 60% मामले 65 साल से ज्यादा उम्र के पुरुषों में पाए जाते हैं।

प्रोस्टेट कैंसर का पता कैसे लगाएं?
2024 में StatPearls मेडिकल रिसोर्स में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसर का निदान मुख्य रूप से प्रोस्टेट-विशिष्ट एंटीजन टेस्टिंग, मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग स्कैन और प्रोस्टेट टिश्यूू बायोप्सी पर बेस्ड होता है, हालांकि स्क्रीनिंग के लिए प्रोस्टेट-विशिष्ट एंटीजन टेस्ट अभी भी विवाद का कारण बना हुआ है। डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा का कहना है कि, प्रोस्टेट कैंसर के बारे में इन तरीकों से पता लगाया जा सकता है, जिसमें-
- डिजिटल रेक्टल एग्जाम (DRE)- प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआती जांच में डॉक्टर DRE फिजिकल टेस्ट के जरिए प्रोस्टेट की स्थिति के बारे में पता लगाते हैं।
- प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन (PSA) टेस्ट- प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन, एक ब्लड टेस्ट है, जिससे प्रोस्टेट में किसी भी तरह की असामान्यता का पता लगाया जा सकता है।
- बायोप्सी- अगर प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती टेस्ट में कोई समस्या नजर आती है तो प्रोस्टेट टिशू का सैंपल लेकर कैंसर की जांच की जाती है।
- इमेजिंग तकनीक- बीमारी की गंभीरता को समझने के लिए कभी-कभी MRI या CT स्कैन का भी इस्तेमाल किया जाता है।
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शुरुआती लक्षण और चेतावनी के संकेत
डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा ने बताया कि, प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण शुरुआती स्टेज में अक्सर दिखाई नहीं देते, लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, कुछ संकेत सामने आ सकते हैं। जैसे-
- पेशाब से जुड़ी समस्याएं होना, जिसमें पेशाब करने में मुश्किल या पेशाब बहुत कम होना।
- रात के समय में बार-बार पेशाब महसूस होना और टॉयलेट जाने की जरूरत पड़ना।
- पेशाब करते समय दर्द या जलन बहुत ज्यादा महसूस होना।
- पेशाब या सीमन में खून का नजर आना।
- पीठ के निचले हिस्से, हिप्स या जांघों की हड्डियों में लगातार दर्द महसूस होना।
- पेशाब करने के बाद भी ऐसा महसूस होना कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ है।
इलाज के ऑप्शन और रिकवरी की संभावनाएं
डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा का कहना है कि, प्रोस्टेट कैंसर का इलाज बीमारी की अवस्था, मरीज की उम्र और उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। शुरुआती स्टेज में डॉक्टर ‘एक्टिव सर्विलांस’ या नियमित निगरानी की सलाह दे सकते हैं। अगर कैंसर बहुत शुरुआती स्टेज में है और धीरे बढ़ रहा है तो डॉक्टर तुरंत इलाज के स्थान पर नियमित जांच और निगरानी की सलाह देते हैं। इसके अलावा इसके ट्रीटमेंट ऑप्शन में शामिल हैं-
- सर्जरी की मदद से कैंसर से प्रभावित प्रोस्टेट ग्लैंड को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
- रेडिएशन थेरेपी में हाई-एनर्जी रेज का इस्तेमाल करके कैंसर सेल्स को खत्म किया जाता है।
- हार्मोन थेरेपी का मकसद शरीर में उन हार्मोन्स को रोकना होता है, जो कैंसर सेल्स को बढ़ने में मदद करते हैं।
- अगर कैंसर फैल चुका है तो कीमोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है ताकि कैंसर सेल्स को मारा जा सके।
- अगर कैंसर का पता पहली या दूसरी स्टेज में चल जाए तो ठीक होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है। सही समय पर इलाज से मरीज एक नॉर्मल और हेल्दी लाइफ जी सकता है।
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डॉक्टर से कब मिलें?
अक्सर लोग लक्षणों को बढ़ती उम्र का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर रात में कई बार पेशाब के लिए उठना पड़े और यह आपकी नींद खराब कर रहा हो, पेशाब शुरू करने में बहुत जोर लगाना पड़े, पेशाब में खून के लक्षण नजर आएं, बिना किसी चोट के पीठ के निचले हिस्से, हिप्स और जांघों में लगातार दर्द हो या फिर अचानक वजन बहुत कम होने के साथ कमजोरी महसूस होने लगे तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस स्थिति में आपको बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
निष्कर्ष
प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाली एक गंभीर बीमारी है, लेकिन इसका इलाज संभव है। अगर समय पर प्रोस्टेट कैंसर के बारे में पता चल जाए तो सही इलाज की मदद से इसे ठीक किया जा सकता है। खासकर लाइफस्टाइल में सुधार जैसे हेल्दी वजन बनाए रखना, हेल्दी डाइट लेना और नियमित रूप से एक्सरसाइज करने से भी प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि, यह बहुत जरूरी है कि हर पुरुष में प्रोस्टेट कैंसर को लेकर सही जागरूकता रहे। अगर बीमारी का पता शुरुआती स्टेज में चल जाए तो रिकवरी की संभावना ज्यादा होती है और मरीज को जल्दी ठीक किया ज सकता है या कैंसर को शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने से रोका जा सकता है।
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FAQ
प्रोस्टेट कैंसर की क्या पहचान है?
प्रोस्टेट कैंसर की पहचान मुख्य रूप से प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन ब्लड टेस्ट और डिजिटल रेक्टल एग्जामिनेशन के जरिए की जाती है। शुरुआती स्टेज में लक्षण नजर नहीं आते हैं, लेकिन पेशाब में बदलाव, दर्द या कमर दर्द जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।क्या प्रोस्टेट कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है?
हां, प्रोस्टेट कैंसर का इलाज हो सकता है। खासकर जब इसका पता शुरुआती स्टेज में चल जाए।। शुरुआती स्टेज में सर्जरी या रेडिएशन के जरिए इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।प्रोस्टेट कैंसर को रोकने के लिए क्या खाना चाहिए?
प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए टमाटर, ब्रोकली, गोभी, खट्टे फल, मछली, नट्स, बीन्स और ग्रीन टी जैसे प्लांट-बेस्ड फूड्स का सेवन कर सकते हैं।प्रोस्टेट का दर्द कहां होता है?
प्रोस्टेट का दर्द आमतौर पर पेट के निचले हिस्से, पेल्विक, अंडकोष और रेक्टम के बीच के हिस्से में महसूस हो सकता है। यह दर्द कमर के निचले हिस्से, जांघों या लिंग में भी फैल सकता है और अक्सर पेशाब करते समय या उसके बाद जलन महसूस हो सकती है।प्रोस्टेट कैंसर कितनी उम्र में होता है?
प्रोस्टेट कैंसर आमतौर पर 50 साल से ज्यादा उम्र के पुरुषों में सबसे आम होती है और उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम बढ़ता है। ज्यादातर मामलों में 60 साल के बाद ये समस्या सामने आ सकते हैं और 50 साल के बाद नियमित जांच करवाने की सलाह दी जाती है।
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Apr 23, 2026 20:04 IST
Modified By : Katyayani Tiwari Apr 23, 2026 20:04 IST
Modified By : Katyayani TiwariApr 23, 2026 20:04 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Mandeep Singh Malhotra