खांसी से लेकर बुखार तक ठीक करता है काकोदुंबर (Gular Tree), जानें इसके फायदे और उपयोग

गूलर के पेड़ के अनेक फायदे हैं। इस मौसम में इस पेड़ पर खूब फल आते हैं। इसकी जड़, फल, पत्ते सभी काम आते हैं।

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiPublished at: Apr 26, 2021Updated at: Apr 26, 2021
खांसी से लेकर बुखार तक ठीक करता है काकोदुंबर (Gular Tree), जानें इसके फायदे और उपयोग

भारत के आयुर्वेद में कई बीमारियों का इलाज है। कोरोनाकाल में आयुर्वेदिक औषधियों का महत्त्व लोगों को समझ आ रहा है। तमाम आयुर्वेदिक उपायों से लोग कोरोना से ठीक होने की कोशिश कर रहे हैं या उसके लक्षण दिखने पर घर पर ही इलाज कर रहे हैं। ऐसे वक्त में काकोदुंबर पर बात करने का सही समय है। इस फल के कई फायदे हैं।  इसके सेवन से घेंघा, खांसी, पीलिया जैसे रोग खत्म होते हैं। भारत में नदी किनारे मिलने वाले काकोदुंबर के कई आयुर्वेदिक फायदे हैं। यह गूलर की तरह दिखने वाला फल होता है। काकोदुंबर गूलर की ही एक किस्म है। काकोदुंबर बहुत लंबा नहीं होता है। यह 5-8 मीटर लंबा होता है। यह पेड़ गूलर के पेड़ के समान ही होता है। इसके किसी भी अंगों को तोड़ने पर दूध निकलता है। इसके फल सूखने पर अंजीर जैसे दिखते हैं। जब यह पेड़ पुराना होने लगता है तब इसकी छाल गांठदार हो जाती है। काकोंदुबर को गूलर ट्री भी कहा जाता है। राष्ट्रीय धर्मार्थ समाज सेवा संस्थान के आयुर्वेदिक डॉक्टर राहुल चतुर्वेदी से जानते हैं कि इस गूलर ट्री के सेवन से कौन से फायदे मिलते हैं। शरीर के कौन से रोग खत्म होते हैं।

काकोदुंबर के विभिन्न नाम

काकोदुंबर का फल, जड़, पत्ता और तना सभी औषधी के रूप में काम में आते हैं। इसे अलग-अलग राज्यों में अलग नामों से जाना जाता है। काकोदुंबर का वैज्ञानिक नाम Ficus hispida Linn. f. (फाइकस हिस्पिडा) Syn-Ficus oppositifolia Willd है।  इसे अंग्रेजी में वाइल्ड पैंग (Wild fig) कहते हैं। आइए जानते हैं कि इसे किस भाषा में किस नाम से जाना जाता है। कोकोदुंबर को हिंदी में कठ गुलरिया, कठूमर, दादूरी आदि नामों से जाना जाता है। तो वहीं, संस्कृत में मलयू, काष्ठोदुंबर नामों से जाना जाता है। अंग्रेजी में इसे क्रो पैंग (Crow fig), हेयरी पैंग (Hairy fig) नाम से जाना जाता है। इसमें विटामिन ए होता है। इसके फल को ध्यान से खाना चाहिए।

काकोदुंबर को खाने के फायदे (Benefits of gular tree in hindi)

खांसी में फायदा

कोरोना के मौसम में काकोदुंबर का प्रयोग किया जा सकता है। इसके सेवन से खांसी की परेशानी भी दूर होती है। खांसी को दूर करने के अलावा सांस संबंधी अन्य रोग भी इससे ठीक होते हैं। गूलर के पत्तों को पीसकर दूध में उबालकर पीने से खांसी में फायदा मिलता है। हर खांसी कोरोना की खांसी नहीं होती, इसलिए अगर आपको कोरोना के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत टेस्ट करवाएं। बाकी अगर आपको नॉर्मल खांसी है तो काकोदुंबर का प्रयोग किया जा सकता है। 

घेंघा रोग में काकोदुंबर 

आयोडीन की कमी की वजह से घेंघा रोग होता है। इस रोग में गला फूल जाता है। गर्दन के पास एक बड़ा सा उभार दिखाई देने लगता है। काकोदुंबर के फल का सेवन करने से इस रोग में भी फायदा मिलता है। 

दस्त में काकोदुंबर का प्रयोग

दस्त की समस्या बहुत आम है। इस परेशानी के होने से शरीर से सारा पानी निकल जाता है। शरीर में पानी की कमी हो जाती है। ऐसे में काकोदुंबर यानी क्रो फिग के दूध को बताशे में डालकर खिलाने से दस्त की परेशानी से आराम मिलता है। ऐसे अनगिनत आयुर्वेदिक औषधियां हैं, जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं है, लेकिन अगर इनकी जानकारी हो जाए शरीर के कई रोग हम घर बैठे ही ठीक कर सकते हैं। काकोदंबर के उपयोग से कई रोग खत्म होते हैं। 

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लीवर को करे ठीक

लीवर में अगर कोई दिक्कत हो जाए तो बड़ी परेशानी देती है। हालांकि लीवर के लिए अगर आप काकोदुंबर का प्रयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से करें। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का मानना है कि काकोदुंबर के फल का सेवन करने से यह लीवर की परेशानियों में आराम मिलता है। 

मस्सा को हटाए काकोदुंबर

काकोदुंबर का पेड़ बहुत लाभकारी है। इसके पत्तों को पीसकर मस्सों पर लगाने से परेशानी में फायदा मिलता है। काकोदुंबर के कई औषधिय गुण हैं, हमें बस इनका सही प्रयोग जानना है।

आंखों के लिए फायदेमंद

इसके फल को खाली पेट खाने से आंखों में फायदा मिलता है। इसमें विटामिन ए पाया जाता है। जिस वजह से आंखों की समस्या दूर रहती हैं। यह आंतों के लिए भी अच्छा होता है।

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गांठ को करे ठीक

शरीर में कई बार गांठ निकल आती हैं। इन गांठों को बैठाने में भी गूलर का इस्तेमाल किया जाता है। कई बार किसी वजह से ग्रंथियों में सूजन की वजह से गांठें निकल आती हैं। इन गांठों को ठीक करने में गूलर की छाल को पीसकर गांठ पर लगाने से गांठ बैठ जाती है। इसके सही प्रयोग के बारे में ज्यादा जानकारी लेने के लिए नजदीकी चिकित्सक की सलाह लें।

बुखार में फायदेमंद

बुखार आने पर देसी दवाएं बहुत फायदेमंद होती हैं। इनके सही इस्तेमाल से बुखार जैसी परेशानियां खत्म हो जाती हैं। गूलर (Kakodumbar benefits in hindi) की जड़ का काढ़ा बनाकर पीने से बुखार में फायदा मिलता है। यही नहीं, ब्लीडिंग की परेशानी से भी आराम मिलता है। 

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सफेद पानी की परेशानी करे दूर

महिलाओं को अक्सर सफेद पानी की परेशानी होती है, काकोदुंबर यानी गूलर का प्रयोग इस परेशानी से भी आराम दिलाता है। इसके अलावा यह डायबिटिज और पीलिया में भी सहायक है। यह परेशानियां होने पर गूलर की जड़ का काढ़ा बनाकर पीना होता है। इन रोगों में फायदा मिलता है। आप चाहें तो किसी अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह पर भी इसका प्रयोग कर सकते हैं। सफेद पानी की परेशानी में काकोदुंबर के फल के चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करने से भी परेशानी में आराम मिलता है।

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रिंगवर्म में गूलर का प्रयोग

जब हम ज्यादा देर पानी में काम करते हैं तब रिंगवर्म की परेशानी होने लगती है। जिन लोगों को रिंगवर्म की समस्या हो रही है वे काकोदुंबर के दूध का रिंगवर्म पर लगाएं। इससे परेशानी में आराम मिलता है। 

खूनी बवासीर में गूलर के फायदे

खूनी बवासीर एक कष्टकारी परेशानी है। इसमें बहुत बार मस्सों से खून निकलने लगता है। खूनी बवासीर की परेशानी में गूलर की जड़ का काढ़ा पीने से परेशानी में आराम मिलता है। खूनी बवासीर होने पर जीवन कष्टकारी लगने लगता है। इसलिए गूलर का प्रयोग इस परेशानी में जल्द ही आराम दिलाता है। 

गंजापन दूर करे गूलर

काकोदुंबर का प्रयोग गंजापन को दूर करता है। आजकल के बदलते लाइफस्टाइल में गंजापन एक जवान बीमारी बन गई है। यह गंजापन अब उम्र देखकर नहीं आता है, किसी भी उम्र में होने लगता है। तो अगर आप भी गंजेपन की परेशानी से जूझ रहे हैं तो इसके कच्चों का फलों का सेवन करें। इससे आपको परेशानी में आराम मिलेगा।

काकोदुंबर एक औषधिय पेड़ है। इसकी जड़, पत्ती, तना, फल सभी प्रयोग में लाए जाते हैं। इसके औषधिय गुण ही इस पेड़ को खास बनाते हैं। इसके सही इस्तेमाल के बारे में अधिक जानकारी लेने के लिए आप नजदीकी आयुर्वेदिक चिकित्सक के संपर्क करें।

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