छुईमुई या लाजवंती का पौधा है कई रोगों का कारगर आयुर्वेदिक इलाज, जानें इसके इस्तेमाल के तरीके

आप सभी ने छुईमुई या लाजवंती के पौधे के बारे में जरूर सुना होगा, छुईमुई के इस्तेमाल से आप कई बीमारियों को ठीक कर सकते हैं।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Aug 06, 2021Updated at: Aug 06, 2021
छुईमुई या लाजवंती का पौधा है कई रोगों का कारगर आयुर्वेदिक इलाज, जानें इसके इस्तेमाल के तरीके

आप सभी ने छुईमुई या लाजवंती (Chui Mui Plant) के पौधे के बारे में जरूर सुना होगा। एक ऐसा पौधा जिसे छूने से उसकी पत्तियां सिकुड़ जाती हैं। यह एक संवेदनशील पौधा होता है जिसे कई नामों से जाना जाता है। छुईमुई या लाजवंती और शर्मीली इन नामों से जानें जाना वाला पौधा आयुर्वेद के मुताबिक कई औषधीय गुणों का भंडार है। छुईमुई का वानस्पतिक नाम माईमोसा पुदिका है। आदिवासी इलाके में इस पौधे का इतेमाल पारंपरिक चिकित्सा के लिए काफी समय से किया जाता रहा है। चुमुई या लाजवंती एक बारहमासी पौधा है जिसका इस्तेमाल आप आयुर्वेदिक तरीकों से तमाम बीमारियों के इलाज के लिए कर सकते हैं। छुईमुई की पत्तियों में एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं। आयुर्वेद में इसके इस्तेमाल के बारे में विस्तार से बताया गया है। लोग प्राचीन काल से ही इसका इस्तेमाल बवासीर, कब्ज, मधुमेह (डायबिटीज) जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए करते आ रहे हैं। आइये जानते हैं छुईमुई या लाजवंती के पौधे के औषधीय लाभ के बारे में।

छुईमुई या लाजवंती का औषधीय इस्तेमाल (Health Benefits Of Chui Mui Plant as Per Ayurveda)

छुईमुई एक संवेदनशील पौधा है जिसकी पत्तियों को छूने पर वह सिकुड़ जाती हैं। छुईमुई आयुर्वेद में जड़ी बूटी के रूप में प्रयोग में लाया जाता है। इसके पौधे कांटेदार और जमीन से 2 से तीन फीट ऊपर तक उठने वाले होते है। छुईमुई की पत्तियां गहरे हरे रंग की होती हैं और यह इमली की पत्तियों के समान दिखती हैं। इस पौधे में फूल और फल भी लगते हैं। आयुर्वेदिक तरीकों से इसका इस्तेमाल करने पर आप कई बीमारियों से छुटकारा पा सकते हैं। बवासीर, डायबिटीज की समस्या समेत कई बीमारियों के इलाज में इसका इस्तेमाल किया जाता है, आइये जानते हैं छुईमुई के इस्तेमाल से होने वाले फायदे के बारे में।

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1. एंटी डिप्रेसेंट, एंटी एंग्जायटी और मेमोरी के लिए फायदेमंद (Anti Depressant, Anti Anxiety and Memory Booster)

आयुर्वेद के मुताबिक छुईमुई के पौधे के इस्तेमाल से तनाव, अवसाद और डिप्रेशन की समस्या को खत्म किया जा सकता है। याददाश्त में सुधार के लिए भी छुईमुई या लाजवंती का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसके पौधे (पत्ती समेत) का अर्क बनाकर उसका सेवन करने से आपको मानसिक समस्याओं में फायदा मिलेगा। आप तनाव, डिप्रेशन, चिंता और अवसाद जैसी मानसिक बीमारियों के इलाज के लिए छुईमुई के पौधे का अर्क बना लें। अब इस अर्क का रोजाना सुबह-शाम एक चम्मच सेवन करें। ऐसा कुछ दिनों तक करने से इन बीमारियों में फायदा मिलेगा।

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2. डायबिटीज की समस्या में छुईमुई का इस्तेमाल (Chui Mui Plant for Diabetes)

मधुमेह (डायबिटीज) की समस्या में छुईमुई की पत्तियों का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसकी पत्तियां शरीर में बढे हुए ब्लड शुगर के स्तर को कम करने में बहुत फायदेमंद मानी जाती है। इसका नियमित सेवन करने से आपके खून में बढ़ा हुआ ब्लड शुगर का स्तर संतुलित होता है। डायबिटीज की समस्या की वजह से शरीर में कई अन्य दिक्कतें भी पैदा होने लगी हैं जिसकी वजह से इंसान को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अगर आप भी डायबिटीज की समस्या से जूझ रहे हैं तो छुईमुई की पत्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ब्लड शुगर के स्तर को कम करने के लिए छुईमुई की 100 ग्राम पत्तियों को 300 मिलीलीटर पानी में डालें। अब इसे तेज आंच पर उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े का सेवन करने से मधुमेह की समस्या में फायदा मिलता है।

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3. बवासीर (पाइल्स) की समस्या में छुईमुई का इस्तेमाल (Chui Mui Plant for Piles)

बवासीर की समस्या बहुत ही कष्टदायक समस्या होती है। अधि मसालेदार और तीखा भोजन करने की वजह से बवासीर की समस्या का खतरा रहता है। आप बवासीर की समस्या से राहत पाने के लिए छुईमुई या लाजवंती के पौधे का इस्तेमाल कर सकते हैं। आयुर्वेद के मुताबिक बवासीर के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल प्राचीन काल से ही होता आ रहा है। कुछ लोगों को बवासीर की समस्या होने पर उन्हें मल के साथ खून आने की समस्या भी होती है। इसे खूनी बवासीर की समस्या कहते हैं। इस स्थिति में लाजवंती या छुईमुई के पौधे का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है। बवासीर की समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप छुईमुई के पत्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

  • बवासीर से राहत पाने के लिए छुईमुई के पत्तों को लेकर उन्हें छाए में सुखा लें।
  • अब इनका चूर्ण बनाकर तैयार कर लें।
  • अब इसके एक चम्मच चूर्ण को एक गिलास दूध में मिलकर सुबह शाम सेवन करें।
  • ऐसा नियमित रूप से करने पर आपको बवासीर और अर्श की समस्या में फायदा मिलेगा।

4. डायरिया की समस्या में छुईमुई का इस्तेमाल (Chui Mui Plant for Diarrhea) 

सामान्य और खूनी दस्त की समस्या में छुईमुई या लाजवंती की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। दस्त के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल सैकड़ों सालों से किया जाता है। दस्त और पेचिश आदि की समस्या में में छुईमुई की पत्तियों का अर्क बनाकर पिलाने से फायदा मिलता है। इसके अलावा आप खूनी दस्त की समस्या में छुईमुई के पौधे की जड़ का चूर्ण बनाकर मरीज को लगभग 3 ग्राम चूर्ण दही के साथ खिलाएं। एक से दो बार खिलाने से खूनी दस्त की समस्या तुरंत खत्म हो जाती है। आदिवासी इलाके में इसकी जड़ों का काढ़ा बनाकर खूनी दस्त की समस्या में देते हैं।

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5. अस्थमा में छुईमुई का इस्तेमाल (Chui Mui Plant for Asthama)

अस्थमा की समस्या में छुईमुई को असरदार आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है। अस्थमा में इसका इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है। लाजवंती या छुईमुई में कफ को खत्म करने के गुण पाए जाते हैं इसलिए इसके इस्तेमाल से अस्थमा की समस्या में कफ बनने से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके पौधे के अर्क का सेवन करने से अस्थमा की समस्या में फायदा मिलता है। लेकिन इसका उपयोग करने से पहले आप किसी वैद्य या आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।

6. पीलिया के इलाज में छुईमुई का इस्तेमाल (Chui Mui Plant for Jaundice)

पीलिया एक गंभीर बीमारी है जिसका समय पर इलाज न किये जाने की स्थिति में मरीज की जान भी जा सकती है। पीलिया की समस्या में मरीज के शरीर में खून की कमी और कमजोरी हो जाती है। पीलिया के इलाज के लिए आयुर्वेद में छुईमुई के इस्तेमाल का वर्णन किया गया है। आप छुईमुई के पौधों के इस्तेमाल से पीलिया की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। इसके लिए आप छुईमुई की पत्तियों का रस निकाल लें। इस रस को नियमित रूप से मरीज को दें। लगभग एक हफ्ते में इसका असर देखने को मिलेगा। पीलिया को खत्म करने के लिए छुईमुई की पत्तियों रस रोजाना सुबह 15 दिन के लिए जरूर दिया जाना चाहिए।

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इसके अलावा छुईमुई या लाजवंती का इस्तेमाल कई बीमारियों जैसे ब्लड प्रेशर, बालों से जुड़ी समस्याएं, शारीरिक कमजोरी आदि में किया जाता है। छुईमुई जंगली और पहाड़ी इलाकों में आसानी से उगने वाला पौधा है। इसके चिकित्सकीय इस्तेमाल से पहले किसी वैद्य या आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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