पीलिया (जॉन्डिस) क्या है? जानें कारण, लक्षण और उपचार

पीलिया से बचाव के लिए जरूरी है उसके लक्षणों और कारण को समझा जाए। ऐसे में इस लेख के माध्यम से जानें लक्षण, कारण औऱ बचाव।

 

Garima Garg
Written by: Garima GargPublished at: Dec 23, 2020Updated at: Dec 23, 2020
पीलिया (जॉन्डिस) क्या है? जानें कारण, लक्षण और उपचार

चेहरे का रंग उड़ जाना, आंखों का पीला पड़ जाना पीलिया के प्रमुख लक्षणों में से एक है। यह बीमारी ज्यादातर नवजात शिशुओं में देखी जाती है पर अब इसके शिकार व्यस्क भी हो रहे हैं। ऐसे में लक्षणों के साथ-साथ कारण और बचाव के बारे में पता होना भी बेहद जरूरी है। आज हम इस लेख के माध्यम से आपको बताएंगे कि पीलिया क्या है? पीलिया के प्रमुख लक्षण क्या हैं? इसकी जांच और इलाज किस प्रकार किया जाता है और बचाव क्या हैं? पढ़ते हैं आगे...

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पीलिया क्या है?

शरीर के ब्लड और ऊतको में बिलीरुबिन नामक पदार्थ होता है यह पदार्थ तब बनता है जब रक्त कोशिकाएं टूट जाती हैं। कुछ परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि यह पदार्थ रक्त के माध्यम से लिवर की ओर और लीवर से शरीर के बाहर नहीं निकल पाता और पीलिया का रूप ले लेता है। ध्यान दें कि जब बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है तब यह रोग पैदा होता है। नवजात शिशुओं को पीलिया हो जाए तो खून चढ़ाने या फोटोथेरेपी के माध्यम से ठीक किया जा सकता है। लेकिन व्यस्कों में इस स्थिति का इलाज अलग तरीके से किया जाता है और अगर इसका इलाज ना किया जाए तो यह मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है, जिसके कारण शरीर में नकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं।

पीलिया कितने प्रकार का होता है?

ध्यान दें कि पीलिया तीन प्रकार- हैपेटॉसेल्यूलर, हेमॉलिटिक और पोस्ट हैपेटिक का होता है। 

सबसे पहले बात करते हैं हेमॉलिटिक जॉन्डिस की। इस स्थिति में रक्त कोशिकाएं समय से पहले टूट जाती हैं, जिसके कारण बिलीरुबिन पदार्थ बनने लगता है और यह पदार्थ लीवर के फिल्टर के माध्यम से शरीर से बाहर नहीं आ पाता और इसकी मात्रा शरीर में बढ़ने लगती है, जिसकी वजह से आंखों और त्वचा का रंग पीला नजर आता है। इस अवस्था को हेमॉलिटिक पीलिया कहते हैं।

अब बात करते हैं हैपेटॉसेल्यूलर जॉन्डिस की। तो लीवर की कोशिकाओं में पैदा हुई समस्या के कारण भी पीलिया होता है। जहां नवजात शिशु में लिवर पूरी तरह से विकसित नहीं होता, जिससे बिलीरुबिन पर अपने लगता है और अस्थाई पीलिया हो जाता है वही बड़ों में गलत खान-पान जैसे दवाएं, शराब आदि के सेवन से लीवर को नुकसान पहुंचता है और हैपेटॉसेल्यूलर पीलिया हो सकता है।

अगर पोस्ट हैपेटिक जॉन्डिस की बात करें तो जब रक्त प्रणालिका में रुकावट आ जाती है तो बिलीरुबिन पदार्थ बढ़ने लगता है और यह मुफ्त में फैल जाता है, जिसकी वजह से पोस्ट हैपेटिक पीलिया हो जाता है।

पीलिया के लक्षण क्या हैं?

पेट में दर्द होना, बुखार आ जाना, कमजोरी आ जाना, थकान महसूस करना, भूख की कमी होना, वजन में कमी होना, सिर दर्द होना, शरीर में जलन का महसूस करना, खुजली महसूस करना, उल्टी आना आदि पीलिया के लक्षण हैं। प्रमुख लक्षणों की बात करें तो हमने पहले भी बताया था आंखों के सफेद हिस्से का पीला हो जाना या त्वचा का पीला होना इसके प्रमुख लक्षणों में से एक है।

पीलिया से बचाव क्या है?

एक्सपर्ट कहते हैं कि शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से लीवर एक है। यह भोजन पचाने में काम आता है। साथ ही शरीर को फिल्टर कर गंदगी को बाहर निकालने का काम भी यही करता है। ऐसे में इसकी सुरक्षा बहुत जरूरी है। इसके लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज करना, पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करना, शराब का सेवन ना करना, असुरक्षित यौन संबंध बनाना, अपनी डाइट को संतुलित करना आदि का ध्यान रखकर अपने लीवर को सुरक्षित रखा जा सकता है।

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पीलिया की जांच कैसे होती है?

पीलिया के लिए लिवर की जांच की जाती है। सबसे पहले एक्सपर्ट बिलीरुबिन टेस्ट के माध्यम से हेमॉलिसिस के स्तर की जांच करते हैं। कंपलीट ब्लड काउंट टेस्ट से रक्त कोशिकाओं की गणना की जाती है। अगर लिवर में खराबी आती है तो हेपेटाइटिस ए बी और सी का परीक्षण होता है। इसके अलावा इमेजिंग टेस्ट जैसे एमआरआई स्कैन, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, इआरसीपी यानी एंडोस्कोपी रेट्रोग्रेड कोलैंजियोपैनक्रीटोग्राफी के माध्यम से लिवर की खराबी की जांच की जाती है। ध्यान दें कि सूजन, कैंसर, फैटी लिवर, सिरोसिस आदि के लिए लिवर बायोप्सी की मदद ली जाती है। 

पीलिया से बचने के लिए क्या खाएं और क्या नहीं?

इस बीमारी से उबरने के लिए अच्छी डाइट होना बेहद जरूरी है। ऐसे में एक दिन में थोड़ा थोड़ा करके चार से पांच बार खाएं। साथ ही पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें। अगर की कमी ना हो तो लिवर भली-भांति काम करता है। अब सवाल यह है कि क्या खाएं तो एक्सपर्ट हरी सब्जियां और खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह देते हैं। पीलिया रोगियों को उन चीजों का सेवन करना चाहिए जो स्वाद में कड़वा हो उदाहरण के तौर पर करेला। करेला पीलिया रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद है। इसके अलावा आप नींबू का रस, मूली, टमाटर को भी अपनी डाइट में जुड़ सकते हैं। नारियल का पानी, किशमिश, गेहूं, अंगूर, बदाम, इलायची आदि को भी अपनी डाइट में जोड़ सकते हैं। अब सवाल यह है कि क्या ना खाएं? ज्यादा नमकीन, मसालेदार, तेल युक्त भोजन की मात्रा सीमित करने साथ ही शराब का सेवन बिल्कुल भी ना करें। ऐसा करने से पीलिया की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा कार्बोहाइड्रेट समृद्ध भोजन को भी अपनी डाइट से दूर रखें।

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पीलिया से शरीर को होने वाले नुकसान क्या हैं?

अगर पीलिया की बीमारी बढ़ जाए तो व्यक्ति को एनीमिया, लिवर का फेल हो जाना, रक्त स्राव, क्रॉनिक हेपिटाइटिस, हैपेटिक, एन्सेफेलोपैथी आदि समस्या देखने को मिलती है।

योग के माध्यम से पीलिया हो दूर

पीलिया के मरीज को आराम करने की सलाह दी जाती है। ऐसे समय में उन्हें मेहनत करने की सलाह नहीं देते हैं। दिन में सोने से बचें। साथ ही मृत्यासन से पीलिया के रोग से व्यक्ति को उबरने में मदद मिलेगी। पीड़ित प्राणायाम, शवासन, भुजंगासन, उत्तानपादासन आदि को भी कर सकते हैं। 

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