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क्या खाने-पीने की खराब आदत आपकी प्रजनन क्षमता पर असर डालती है? जानें एक्सपर्ट की राय

Eating Disorder Impact On Ovulation In Hindi : ईटिंग डिसऑर्डर महिलाओं के ओव्यूलेशन को कई तरह से प्रभावित कर सकता है, जानें इसके बारे में विस्तार से।

Vineet Kumar
Written by: Vineet KumarPublished at: Apr 28, 2022Updated at: Apr 28, 2022
क्या खाने-पीने की खराब आदत आपकी प्रजनन क्षमता पर असर डालती है? जानें एक्सपर्ट की राय

अक्सर कुछ लोगों बहुत ज्यादा या कम भूख लगती है। साथ ही उनका वजन अचानक बढ़ने या कम होने लगता है। इसके पीछे एक बड़ा कारण गलत तरीके से खाने की आदतें या ईटिंग डिसऑर्डर हो सकता है। ईटिंग डिसऑर्डर एक बेहद गंभीर समस्या है। यह एक तरह से आपके दिमाग से जुड़ा रोग है। अगर किसी व्यक्ति को यह रोग हो जाता है तो वह बहुत कम या ज्यादा खाने लगता है। जिससे उनके शरीर का वजन कम  होने लगता है और बॉडी मास घटने लगता है। वैसे तो ईटिंग डिसऑर्डर पुरुष और महिलाओं दोनों के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकता है, लेकिन यह कुछ मामलों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यह महिलाओं के ओव्यूलेशन को भी प्रभावित कर सकता है। जी हां, आपने बिल्कुल सही पढ़ा! 

ईटिंग डिसऑर्डर महिलाओं के ओव्यूलेशन को कैसे प्रभावित कर सकता है (Eating Disorder Impact On Ovulation In Hindi) इसके बारे में अधिक जानने के लिए हमने फोर्टिस अस्पताल, बैंगलोर की वरिष्ठ सलाहकार (प्रसूति एवं स्त्री रोग) डॉ. अनु श्रीधर से बात की। इस लेख में हम आपको इसके बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

 

आइए पहले जानते हैं कुछ आम ईटिंग डिसऑर्डर के बारे में (Eating Disorder Impact On Ovulation In Hindi)

  • बुलिमिया : इस स्थिति में लोग अक्सर बहुत ज्यादा खाते हैं और उनका खाने पर कोई नियंत्रण नहीं होता है। वे वजन बढ़ने से बचने के लिए व्यायाम अधिक करते हैं।
  • एनोरेक्सिया नर्वोसा: जिन लोगों को एनोरेक्सिया होता है वह पतले रहने की कोशिश करते हैं और बहुत कम खाते हैं। उन्हें हमेशा वजन बढ़ने का डर सताता है जिसके चलते वे बार-बार एक्सरसाइज करते हैं।
  • बिंज ईटिंग: बिंज ईटिंग काफी हद तक बुलिमिया की तरह ही है, बस इस स्थिति में वयक्ति का ध्यान वजन बढ़ने पर नहीं होता है।

ईटिंग डिसऑर्डर ओव्यूलेशन को कैसे प्रभावित करता है? (Eating Disorder Impact On Ovulation In Hindi)

1. हार्मोनल असंतुलन का कारण बनता है

डॉ. अनु श्रीधर के अनुसार ईटिंग डिसऑर्डर उन लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है जो पौष्टिक भोजन नहीं करते हैं और गतिहीन जीवनशैली को फॉलो करते हैं। उनके भोजन में पोषक तत्व कम होते हैं, साथ ही वे बार-बार अलग-अलग तरह का भोजन करते हैं। जिसके कारण उनका वजन कम या ज्यादा हो जाता है, जो  हार्मोनल असंतुलन का कारण बन सकता है। इस तरह यह आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल और ओव्यूलेशन को बाधित कर सकता है।

2. अंडे की गुणवत्ता को कम करता है

यह महिलाओं में अंडे की गुणवत्ता को कम करना है। इससे अनियमित पीरियड्स की समस्या हो सकती है और किसी महिला को गर्भधारण करने में दिक्कत आ सकती है। ईटिंग डिसऑर्डर में पीरियड्स के दौरान महिलाओं के हार्मोन्स में बहुत उतार-चढ़ाव होते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं कई बार ईटिंग डिसऑर्डर के चलते 40 से ज्यादा उम्र वाली महिलाओं में ओवेरियन फेलियर की समस्या भी हो सकती है।

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3. गर्भ में बच्चे के विकास के लिए जरूरी पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं

ईटिंग डिसऑर्डर का एक गंभीर दुष्प्रभाव यह भी है कि इससे महिलाओं में गर्भ में बच्चे के विकास के लिए जरूरी विटामिन और मिनरल खत्म हो जाते हैं। साथ ही उन्हें अनियमित पीरियड्स के कारण यह समझने में दिक्कत हो सकती है कि गर्भधारण की कोशिश करने के लिए सही समय कब है। इससे अनियोजित गर्भधारण की समस्या बढ़ जाती है।

All Image Source : Freepik

(With Inputs: Dr. Anu Sridhar, Senior Consultant - Obstetrics And Gynaecology, Fortis Hospital, Bannerghatta Road, Bangalore)

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