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क्या सच में प्रेग्नेंसी में मुल्तानी मिट्टी खाने से बच्चा गोरा होता है? डॉक्टर से जानें इसके पीछे की सच्चाई

कई लोगों का मानना है कि प्रेग्नेंसी के दौरान मुल्तानी मिट्टी खाने से होने वाले बच्चे का रंग गोरा होता है। लेकिन, इस बात में कितनी सच्चाई है आइए जानते हैं- 

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाएं अपने खानपान का खास ध्यान रखती हैं। ऐसा माना जाता है कि प्रेग्नेंसी में महिलाएं जो भी खाती या पीती हैं उसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है। बता दें कि प्रेग्नेंसी के दौरान ऐसी कई चीज है, जिसे महिलाएं खाना पसंद करती हैं या फिर खाने से परहेज करती हैं, जिसका सबसे बड़ा कारण है कि लोग उन चीजों को बच्चे के रंग से जोड़ते हैं। जैसे कुछ लोगों का कहना है कि प्रेग्नेंसी में केसर खाने से बच्चे का रंग गोरा होता है, जबकि बैंगन खाने से बच्चे का रंग डल हो सकता है। इसी तरह कई लोगों का मानना है कि प्रेग्नेंसी में मुल्तानी मिट्टी खाने से बच्चे का रंग गोरा होता है। आइए दिल्ली के आनंद निकेतन में स्थित गायनिका: एवरी वुमन मैटर क्लीनिक की सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. (कर्नल) गुंजन मल्होत्रा सरीन (Dr. (Col.) Gunjan Malhotra Sareen, Senior Consultant, Obstetrics and Gynecologist, Gynecology: Every Woman Matters Clinic, located in Anand Niketan, Delhi) से जानते हैं क्या है इसकी सच्चाई और प्रेग्नेंसी में मुल्तानी मिट्टी खाने की क्रेविंग क्यों होती है? 

क्या सच में प्रेग्नेंसी में मुल्तानी मिट्टी खाने से बच्चे का रंग गोरा होता है?

प्रेग्नेंसी के दौरान कई महिलाओं को मुल्तानी मिट्टी खाने की क्रेविंग होती है। कुछ महिलाएं तो मुल्तानी मिट्टी को टॉफी की तरह खाती हैं। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि गर्भावस्था में मुल्तानी मिट्टी खाने से होने वाले बच्चे का रंग गोरा होता है। लेकिन, आपको बता दें कि ये बात पूरी तरह अंधविश्वास है और वास्तविकता से इसका कोई लेना देना है। बच्चे का रंग मां और पिता के रंग पर निर्भर करता है, जो पूरी तरह जेनेटिक होता है। इसलिए, आप प्रेग्नेंसी में क्या खा रहे हैं और क्या नहीं इससे बच्चे के रंग पर कोई असर नहीं पड़ता है।

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प्रेग्नेंसी में मुल्तानी मिट्टी खाने की क्रेविंग क्यों होती है?

डॉ. (कर्नल) गुंजन मल्होत्रा सरीन के अनुसार, "प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में आयरन, कैल्शियम और जिंक जैसे पोषक तत्वों की जरुरते बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं। इनकी कमी से शरीर में पिका की क्रेविंग बढ़ जाती है, यानि महिलाओं को मिट्टी या चॉक या बर्फ खाने की क्रेविंग बढ़ जाती है।" इसलिए, कई महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान मुल्तानी मिट्टी खाने की बहुत ज्यादा क्रेविंग होती है। इतना ही नहीं, कई महिलाओं को मुल्तानी मिट्टी की खुशबू और स्वाद बहुत ज्यादा पसंद होता है, जिस कारण वे इसे खाना पंसद करती है।

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मुल्तानी मिट्टी खाने के नुकसान - Multani Mitti Khane Ke Nuksan in Hindi

मुल्तानी मिट्टी खाने से आपके सेहत को नुकसान हो सकता है-

  1. पाचन से जुड़ी समस्या: मिट्टी को पचाना काफी मुश्किल होता है, जिस कारण इसे खाने से पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इस कारण उन्हें कब्ज, पेट में दर्द और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है।
  2. टॉक्सिक पदार्थों से भरपूर: मुल्तानी मिट्टी में आर्सेनिक, पारा जैसे केमिकल और मेटल हो सकते हैं, जिसका सेवन आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
  3. पोषक तत्वों के अवशोषण में बाधा: मुल्तानी मिट्टी खाने की क्रेविंग अक्सर शरीर में आयरन और कैल्शियम की कमी के कारण होता है। लेकिन, इसका सेवन आपके शरीर में इन पोषक तत्वों के अवशोषण में बाधा डाल सकता है, जिससे आपके शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
  4. दांतों को नुकसान: मुल्तानी मिट्टी का सेवन आपके दांतों को भी नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे सेंसिटिविटी और कैविटी की समस्या बढ़ सकती है।
  5. इंफेक्शन का जोखिम: मुल्तानी मिट्टी में बैक्टीरिया, और कीटाणु हो सकते हैं, जिसे खाने से इंफेक्शन, गैस्ट्रिक समस्याएं और सांस से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती है।

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प्रेग्नेंसी में मुल्तानी मिट्टी खाने से कैसे बचें?

प्रेग्नेंसी के दौरान मुल्तानी मिट्टी खाने की क्रेविंग अक्सर आयरन और कैल्शियम की कमी के कारण होता है। इसलिए, इसे खाने से बचने के लिए आप सबसे पहले अपना CBC, आयरन, जिंक, कैल्शियम और विटामिन डी का टेस्ट करवाएं। इससे आपको शरीर में होने वाले पोषक तत्व की कमी के बारे में पता चलेगा और आप सही सप्लीमेंट ले पाएंगे। इसके साथ ही आप अपनी डाइट में पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार शामिल करें।

निष्कर्ष

प्रेग्नेंसी के दौरान मुल्तानी मिट्टी खाने से बच्चे के रंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, बल्कि ये सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इतना ही नहीं मुल्तानी मिट्टी का सेवन शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण भी हो सकता है।
Image Credit: Freepik

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jul 30, 2025 17:57 IST

    Published By : Katyayani Tiwari

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