दिन पर दिन और संक्रामक होता जा रहा है कोरोना का वायरस, दिसंबर में डरा सकता है महामारी का डेडलिएस्ट रूप

रिकवरी के मामले में भारत दुनिया में टॉप पर है, पर हाल ही में आया शोध कोरोना के डेडलिएस्ट रूप की ओर संकेत करता है।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariUpdated at: Nov 03, 2020 10:12 IST
दिन पर दिन और संक्रामक होता जा रहा है कोरोना का वायरस, दिसंबर में डरा सकता है महामारी का डेडलिएस्ट रूप

विश्व में कोरोना वायरस (Timeline of the COVID-19 pandemic) महामारी से संक्रमितों की संख्या 4.68 करोड़ के पार हो गई है और इस महामारी से अब तक 12 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। बात अगर भारत की (Coronavirus in India)करें, तो यहां एक्टिव केस लगातार चौथे दिन 6 लाख से नीचे आए हैं, जिसे देखते हुए रिकवरी के मामले में भारत दुनिया में टॉप पोजीशन पर है। पर हाल ही, में आया शोध कोरोना वायरस को लेकर एक डरावना खुलासा करता है। दरअसल mBIO जर्नल में प्रकाशित इस शोध की मानें, तो कोरोना का वायरस दिन पर दिन और संक्रामक होता जा रहा है। इसे देखते हुए शोधकर्ता आगामी दिसंबर महीने को अब तक का डेडलिएस्ट महीने  (deadliest month in the pandemic) के रूप में देख रहे हैं। वहीं ये शोध कोरोना के बदलते रूप और म्यूटेशन के बारे में भी काफी कुछ कहता है, आइए जानते हैं विस्तार से।

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संक्रामक होता जा रहा है कोरोना का वायरस

mBIO जर्नल में प्रकाशित इस शोध में शोधकर्ताओं ने कोरोना के एक ऐसे जेनेटिक म्यूटेशन (genetic mutations in coronavirus) का उल्लेख किया है, जो कि तेजी से म्यूटेट होकर हाइली कॉन्टेजियस (contagious) होता जा रहा है। यानी कि कोरोना वायरस का ये नया रूप बहुत ज्यादा संक्रामक है और आसानी से फैल सकता है। शोधकर्ताओं ने इस म्यूटेशन को डी 614जी (D614G)का नाम दिया है। ये कोरोना के स्पाइक प्रोटीन में स्थित है, जो कि वायरल के प्रवेश के लिए हमारी कोशिकाओं को खोलता है।

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दिसंबर में क्यों दिख सकता है कोरोना का डेडलिएस्ट रूप ?

यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूट्रल ड्रिफ्ट के संयोजन में किए गए इस शोध में कोरोना म्यूटेशन को लेकर सबसे बड़ी बात ये कही गई है ये जेनेटिक म्यूटेशन अब लोगों के इम्यून सिस्टम पर ज्यादा दबाव बना रहा है। शोधकर्ताओं ने उल्लेख किया कि महामारी की प्रारंभिक लहर के दौरान, रोगियों में पहचाने जाने वाले कोरोना के वायरस के 71 प्रतिशत हिस्से में ही ये म्यूटेशन दिखा था। पर जब गर्मियों के दौरान कोरोना की दूसरी लहर चली, तो यह म्यूटेशन  99.9 प्रतिशत तक फैल गया था और अब जब दिसंबर में कोरोना की तीसरी लहर की बात कही जा रही है, तो शोधकर्ताओं लग रहा है कि ये कोरोना का वायरस महामारी के दौरान का सबसे डेडलिएस्ट रूप दिखा सकता है।

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शोधकर्ताओं के अनुसार यह दुनिया भर में देखी जाने वाली वायरस की एक बड़ी प्रवृत्ति है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस D614G म्यूटेशन में ज्यादा स्ट्रेस होता है, जो कि वायरस के हर रूप को और संक्रामक बना सकता है। इससे वायरस का वैरिएंट हमारे इम्यून सिस्टम को आसानी से खत्म कर सकता है। इस तरह इससे इम्यून सिस्टम और शरीर के एंटीबॉडी पर खासा असर पड़ सकता है। COVID-19 के विकास पर की गई ये रिपोर्ट, बीमारी के लिए विशेष रूप से जिम्मेदार कोरोना वायरस के आरएनए वायरस पर ज्यादा फोकस कर रहा है, जिसमें कि तेजी से बदलाव हो रहा है शोध में बताया गया है कि हर बार जब यह आरएनए जेनेटिक मटेरियलकी नकल करता है, तो ये ट्रांसमिटिटिविटी को और बढ़ावा देता है।

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गौरतलब है इस परिदृश्य में, D614G का ये जेनेटिक म्यूटेशन अभी तक यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लोगों में भी ज्यादा देखा गया है, जो कि बाकी देशों में भी दिख सकता है। हालांकि, कुछ वैज्ञानिकों का कहना है फिलहाल हम इन चीजों को लेकर एक अंदेशा ही जता रहे हैं , अभी इस पर और शोध करना बाकी है। ऐसे में अब हर किसी को कोरोनावायरस के वैक्सीन और इलाज का इंतजार है। 

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