Fri Sep 11, 2026 | 09:17 PM IST

Medically Reviewed by Dr Abhishek Chopra , Pediatrician and Neonatologist

बच्चों में High BP क्यों बढ़ रहा है? जानें डॉक्टर से मैनेज करने के तरीके

Childhood High BP: बच्चों में हाई बीपी की समस्या बहुत गंभीर होती है। बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर होने की वजह और उसे मैनेज करने के तरीकों के बारे में डॉक्टर ने विस्तार से इस लेख में बताया है।

Childhood High BP: हाई ब्लड प्रेशर की समस्या व्यस्कों में आम है। स्ट्रेस, नींद पूरी न होना, खराब लाइफस्टाइल और रेगुलर एक्सरसाइज न करने से आर्टरी वॉल पर ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा होता है। लगातार ब्लड प्रेशर बढ़ने से सिर्फ हार्ट ही नहीं, बल्कि किडनी और आंखों पर भी असर पड़ता है। पहले हाई ब्लड प्रेशर (high blood pressure) की समस्या सिर्फ व्यस्कों की ही बीमारी मानी जाती थी, लेकिन अब हाई बीपी की समस्या बच्चों में तेजी से बढ़ रही है। हाई बीपी की समस्या बच्चों में क्यों बढ़ रही है? इस बारे में हमने दिल्ली के क्लाउडनाइन ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के नियोनेटोलॉजिस्ट और पीडियाट्रिक विभाग के कंसल्टेंट डॉ. अभिषेक चोपड़ा (Dr Abhishek Chopra, Consultant Pediatrician and Neonatologist, Cloudnine Group of Hospitals, New Delhi Punjabi Bagh) से बात की। उन्होंने हाई बीपी के कारणों के साथ बच्चों में इसे मैनेज करने के तरीके भी बताए हैं।

बच्चों में हाई BP क्यों होता है? - Why Kids Have High Blood Pressure?

डॉ. अभिषेक कहते हैं, “पैरेंट्स को बच्चों के खानपान और एक्सरसाइज पर ध्यान देना बहुत जरूरी है क्योंकि बचपन में हाई बीपी की समस्या आगे चलकर हार्ट से जुड़ी गंभीर बीमारियों को बढ़ा सकता है। इसलिए हाई बीपी के कारणों पर ध्यान देना जरूरी है।”

  • मोटापा - अगर बच्चों का वजन बढ़ता है, तो उनका बीपी बढ़ना भी तय है। इससे शरीर में जमा फैट ब्लड वैसेल्स पर दबाव बढ़ा देता है।
  • ज्यादा नमक वाली डाइट - चिप्स, फ्राइज, पिज्जा, इंस्टैंट नूडल्स, सॉसेस बहुत खाते हैं। इनमें नमक बहुत ज्यादा होता है और यह बच्चों में हाई BP का बड़ा कारण है।
  • फिजिकल एक्टिविटी की कमी - आजकल बच्चों का स्क्रीन टाइम बहुत ज्यादा हो गया है और इससे उनकी एक्टिविटी कम भी कम हो गई है। इस वजह से बच्चों में हाई बीपी की समस्या बढ़ रही है।

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  • स्ट्रेस - बच्चों को एग्जाम्स, दोस्त बनाने से लेकर सोशल मीडिया का प्रेशर बहुत ज्यादा रहता है। इन वजहों से नींद पूरी नहीं होती और स्ट्रेस बढ़ जाता है। इन कारणों से बच्चों में बीपी बढ़ना आम हो गया है।
  • फैमिली हिस्ट्री - अगर परिवार में पैरेंट्स या दादा-दादी को हाई बीपी की समस्या है, तो इसका रिस्क बच्चों में भी हो सकता है।
  • किडनी की बीमारी - अगर किसी बच्चे को जन्म या इंफेक्शन के कारण किडनी की समस्या है, तो उन्हें सेकेंडरी हाई BP हो सकता है।
  • हार्मोनल समस्या - थायरॉयड, एड्रिनल ग्लैंड की बीमारी या कुछ दवाइयां भी BP पर असर डाल सकती हैं। 

बच्चों के हाई बीपी को कैसे करें मैनेज? - How to Manage High Blood Pressure in Kids

डॉ. अभिषेक चोपड़ा ने पैरेंट्स को कुछ टिप्स दिए हैं, जिससे बच्चों के हाई ब्लड प्रेशर को मैनेज किया जा सकता है।

  1. रेगुलर बीपी मॉनिटरिंग - 6 साल से ज्यादा उम्र के मोटापे से ग्रस्त बच्चों का साल में कम से कम दो बार बीपी चेक कराएं।
  2. वजन कंट्रोल - बच्चों का उम्र के हिसाब से BMI सही रखें। अगर 5–10% वजन कम होने लग जाए, तो भी बीपी में सुधार आने लगता है।
  3. नमक कम करें - रोजाना 1500–2000 mg से ज्यादा नमक न दें। बच्चों को चिप्स, पापड़, अचार, नूडल्स, रेडी-टू-ईट फूड कम से कम दें।
  4. फिजिकल एक्टिविटी - बच्चों को रोजाना कम से कम एक घंटा फिजिकल एक्टिविटी जरूर कराएं। इसमें दौड़, स्विमिंग, रस्सी कूदना या कोई भी आउटडोर गेम जरूर खेलने दें।
  5. हेल्दी डाइट - बच्चों को ताजी और मौसमी फल और सब्जियां, मिलेट्स, दलिया, दालें खिलाएं। साथ ही हाइड्रेशन का ध्यान रखें। तला-भुना खाना बच्चों को कम से कम दें।
  6. स्क्रीन टाइम कम करना - बच्चों को रोजाना एक से दो घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम बिल्कुल न दें। इससे बीपी और वजन दोनों बढ़ता है।
  7. नींद पूरी होना - 6 से 12 साल के बच्चों के लिए 9 से 11 घंटे और टीनएजर्स को 8 से 10 घंटे की नींद पूरी करना जरूरी है।
  8. स्ट्रेस कम करें - बच्चों को खेल, म्यूजिक, परिवार के साथ समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करें। ये बच्चे का मूड हल्का करते हैं और बीपी कंट्रोल करने में मदद करते हैं।

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निष्कर्ष

डॉ. अभिषेक कहते हैं कि अगर लाइफस्टाइल सुधारने के बाद भी बीपी कंट्रोल न हो, तो डॉक्टर से जरूर मिलें और जो दवाइयां या ट्रीटमेंट डॉक्टर सलाह दे, उसे जरूर फॉलो करें। अगर बच्चों के हाई बीपी को गंभीरता से नहीं लिया, तो यह आगे चलकर गंभीर समस्याओं में बदल सकता है।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Nov 26, 2025 07:05 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Nov 26, 2025 07:05 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Abhishek Chopra

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