क्या फैटी लिवर के कारण बढ़ता है डायबिटीज का खतरा? जानें कैसे जुड़ी हैं दोनों बीमारियां

डायबिटीज एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है। क्या सच में फैटी लिवर की समस्या हाेने पर डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। चलिए जानते हैं इसके बारे में

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Jul 06, 2021Updated at: Jul 06, 2021
क्या फैटी लिवर के कारण बढ़ता है डायबिटीज का खतरा? जानें कैसे जुड़ी हैं दोनों बीमारियां

क्या फैटी लिवर और डायबिटीज में काेई संबंध है (Fatty Liver and Diabetes)? खराब लाइफस्टाइल, खान-पान और तनाव के कारण डायबिटीज एक सामान्य समस्या बन गई है। डायबिटीज एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है, ताे वही फैटी लिवर की समस्या हाेने पर व्यक्ति का मेटाबॉलिज्म कमजाेर पड़ जाता है। डायबिटीज दाे तरह की हाेती है, टाइप 1 और टाइप 2 ( Type1 diabetes and Type 2 Diabetes)। इनमें से टाइप 2 डायबिटीज ज्यादा जाेखिम वाली हाेती है। देश में लाखाें-कराेड़ाें लाेग इस बीमारी से पीड़ित हैं। वॉकहार्ट अस्पताल, मुंबई सेंट्रल डायबेटोलॉजिस्ट और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉक्टर अल्तमश शेख (Dr Altamash Shaikh, Diabetologist and Endocrinologist, Wockhardt Hospital, Mumbai Central) से जानते हैं फैटी लिवर और डायबिटीज में संबंध के बारे में- 

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दरअसल, माेटापा कई गंभीर बीमारियाें का कारण बनता है, उन्हीं में से एक डायबिटीज है। माेटापा बढ़ने के कारण लिवर में भी अधिक मात्रा में फैट जमा हाेने लगता है और जिन लाेगाें के लिवर में अधिक फैट या वसा हाेता है, उनमें डायबिटीज हाेने का खतरा काफी बढ़ जाता है। फैटी लिवर हाेने पर खासकर टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ता है। इसलिए अगर आपकाे फैटी लिवर की समस्या है, ताे आपकाे अपने ब्लड शुगर लेवल की समय-समय पर जांच जरूर करनी चाहिए। डॉक्टर अल्तमश शेख बताते हैं कि 70-80 प्रतिशत डायबिटीज पेशेंट में फैटी लिवर की समस्या देखने काे मिलती है। इसे एमएएलडी (Metabolic Associated Liver Disease) कहा जाता है, ये नॉन एल्काेहॉलिक हाेता है। चलिए जानते हैं फैटी लीवर और डायबिटीज कैसे एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। 

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क्या है फैटी लिवर (Fatty Liver)

जब लिवर के भीतर करीब 5-10 प्रतिशत तक फैट मौजूद हाेता है, ताे इस स्थिति काे फैटी लिवर कहा जाता है। यह समस्या ज्यादातर एल्काेहल या नशीले चीजाें का सेवन करने वाले लाेगाें काे हाेती है। साथ ही माेटापे से ग्रसित लाेग भी फैटी लिवर की समस्या से परेशान रहते हैं।

फैटी लिवर और डायबिटीज में संबंध (Fatty Liver and Type 2 Diabetes)

फैटी लिवर और डायबिटीज में सीधा संबंध है। यह कई शाेधाें में भी साबित हाे चुका है। लिवर की काेशिकाओं में फैट हाेना टाइप 2 डायबिटीज के रिस्क काे बढ़ा सकता है (Fatty Liver Can Increase Type 2 Diabetes Risk)। ऐसे आपकाे अधिक सतर्क हाेने की जरूरत हाेती है। अगर आपकाे डायबिटीज है या फैटी लिवर की समस्या है, ताे आपकाे अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हाेने की जरूरत हाेती है।

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1. माेटापा बढ़ने से लिवर में भी फैट की मात्रा ज्यादा हाेने लगती है। एक माेटे व्यक्ति के लिवर में अधिक मात्रा में फैट या वसा हाेता है। अगर व्यक्ति का वजन बढ़ता है, ताे उसके लिवर में भी फैट बढ़ते जाता है। जिससे डायबिटीज या मधुमेह का जाेखिम भी बढ़ता जाता है। माेटापा शरीर में ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) बढ़ने के मुख्य कारणाें में शामिल है।

2. फैटी लीवर और टाइप 2 डायबिटीज में एक संबंध इस तरह से भी है कि डायबिटीज ज्यादातर कमजाेर इम्यूनिटी वाले लाेगाें काे हाेता है। डायबिटीज काे मेटाबॉलिक डिसऑर्डर (Metabolic Disorder) भी कहा जाता है और फैटी लिवर हाेने पर मेटाबॉलिज्म कमजाेर (Weak Metabolism) पड़ जाता है। ऐसे में जब फैटी लिवर की वजह से मेटाबॉलिज्म कमजाेर पड़ता है, ताे टाइप 2 डायबिटीज का रिस्क बढ़ जाता है।

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अगर आप भी माेटापे या फैटी लिवर के शिकार हैं, ताे आपकाे समय-समय पर अपने शुगर लेवल की जांच करते रहना चाहिए। साथ ही अगर आपकाे फैटी लिवर के कारण डायबिटीज के संकेत नजर आ रहे हैं, ताे आपकाे अपनी डाइट और लाइफस्टाइल पर खास ध्यान देने की जरूरत हाेती है। फैटी लिवर का कम करने के लिए आप ऐसी डाइट लें, जिससे इसमें राहत मिलें। आपकाे अपने ब्लड शुगर लेवल काे भी कंट्राेल में रखना जरूरी हाेता है। साथ ही माेटापा या फैटी लिवर हाेने पर आपकाे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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