ऑस्टियोअर्थराइटिस के इलाज में कारगर माने जाते हैं ये 5 आयुर्वेदिक नुस्खे, जानें इस्तेमाल का तरीका

ऑस्टियोआर्थराइटिस जोड़ों में होने वाली एक गंभीर बीमारी है, ऑस्टियोआर्थराइटिस के इलाज के लिए आयुर्वेदिक नुस्खों का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद माना जाता है। 

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghUpdated at: Aug 12, 2021 14:05 IST
ऑस्टियोअर्थराइटिस के इलाज में कारगर माने जाते हैं ये 5 आयुर्वेदिक नुस्खे, जानें इस्तेमाल का तरीका

ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) जोड़ों में होने वाली गंभीर बीमारी है। यह बीमारी गठिया का सबसे आम रूप है जिससे दुनियाभर में लाखों लोग पीड़ित हैं। ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या में मामूली दर्द से लेकर गंभीर दर्द और चलने फिरने में परेशानियां होती हैं। शरीर की हड्डियों को सपोर्ट देने के लिए मौजूद कार्टिलेज और कोमल ऊतकों में दिक्कतें आने पर ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या होती है। इस समस्या में जोड़ों में सूजन, दर्द और अकड़न जैसी समस्या आ जाती है। हालांकि इस बीमारी का कोई सटीक इलाज नहीं मिल पाया है लेकिन कुछ दवाएं और उपचार हैं जो इस पर मध्यम रूप से प्रभावी माने जाते हैं। लेकिन इन उपचारों का साइड इफेक्ट भी देखने को मिलता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या का अंतिम और एकमात्र सटीक उपचार घुटनों को ट्रांसप्लांट करना ही होता है। लेकिन यह उपचार बहुत ही महंगा और जोखिम भरा होता है। आयुर्वेद में प्राचीन काल से ही गठिया और ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी समस्याओं के इलाज (Ayurvedic Treatment for Osteoarthritis) के लिए तमाम जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या में कुछ जड़ी बूटियों का इस्तेमाल बहुत ही फायदेमंद माना जाता है, आइये जानते हैं इनके बारे में। 

क्यों होती है ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या? (Osteoarthritis Causes)

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शरीर में ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या जोड़ों में हड्डियों को सपोर्ट देने वाले कार्टिलेज के खराब होने की वजह से होती है। कार्टिलेज और कोमल ऊतक हड्डियों को घिसने और रगड़ने से बचाने का काम करते हैं। इसके अलावा कुछ बायोकेमिकल असंतुलन भी इस समस्या का कारण बनते हैं। ऑस्टियोआर्थराइटिस मुख्यतः जोड़ों में हड्डियों के अंदर मौजूद कार्टिलेज के टूटने या खराब होने की वजह से होता है और यह प्रमुख रूप से शरीर इन जोड़ों में होता है। 

  • घुटने
  • हाथ
  • उंगलियां
  • कुल्हे
  • रीढ़ की हड्डी, गर्दन और पीठ का निचला हिस्सा

ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या के प्रमुख कारण और रिस्क फैक्टर्स इस प्रकार से हैं।

  • कार्टिलेज में खराबी की वजह से।
  • बढ़ती उम्र के कारण।
  • पुरानी चोट या मोच आदि की वजह से।
  • मोटापे की समस्या में।
  • आनुवंशिक कारणों से।
  • जन्म से ही हड्डियों से जुड़े रोग के कारण।
  • डायबिटीज की समस्या या दूसरी मेटाबोलिक समस्याओं के कारण।

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ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षण (Ostioartritis Symptoms)

ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या में मुख्य रूप से ये लक्षण दिखते हैं।

  • जोड़ों में दर्द की समस्या।
  • जोड़ों का निष्क्रिय होना या अकड़ जाना।
  • जोड़ों का अधिक लचीला होना।
  • पॉपिंग या क्रैकिंग की आवाज आना।
  • जोड़ों में सूजन
  • चलने फिरने में दिक्कत आना।

ऑस्टियोआर्थराइटिस का आयुर्वेदिक इलाज (Ayurvedic Remedies for Osteoarthritis)

जोड़ों की बीमारी ऑस्टियोआर्थराइटिस को जड़ से खत्म करने का कोई सफल और सटीक इलाज अभी तक नहीं मिल पाया है। लेकिन आयुर्वेद में प्राचीन काल से इस्तेमाल किये जाने वाले कुछ नुस्खे इस समस्या को काफी हद तक ठीक करने में बहुत फायदेमंद माने जाते हैं। बिना किसी साइड इफेक्ट्स के आयुर्वेदिक उपचार ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या और इसकी वजह से होने वाली दिक्कतों को दूर करने में कारगर हैं। आइये जानते हैं इनके इस्तेमाल के बारे में।

1. ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या में अश्वगंधा का इस्तेमाल (Ashwagandha for Ostioarthritis)

अश्वगंधा को आयुर्वेद में बहुत कारगर औषधि माना जाता है। इसका इस्तेमाल तमाम बीमारियों के इलाज में किया जाता है। अश्वगंधा में सूजन को दूर करने और दर्द से राहत देने के गुण पाए जाते हैं। कई शोध और अध्ययन भी इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि अश्वगंधा का इस्तेमाल इन समस्याओं में बहुत उपयोगी हो सकता है। आप ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या में रोजाना दूध के साथ एक चम्मच अश्वगंधा के चूर्ण का सेवन करें। नियमित रूप से ऐसा करने पर आपको इस समस्या से छुटकारा मिलेगा। अश्वगंधा का इस्तेमाल करने से शरीर में किसी भी प्रकार का साइड इफेक्ट भी नहीं होता है।

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2. ऑस्टियोआर्थराइटिस में हल्दी का इस्तेमाल (Turmeric for Osteoarthritis)

हल्दी का ज्यादातर इस्तेमाल भोजन को पकाने में मसाले के रूप में किया जाता है। लेकिन यह कई बीमारियों के इलाज के लिए प्राचीन काल से एक कारगर आयुर्वेदिक औषधि के रूप में भी जाना जाता है। बीमारियों के इलाज में हल्दी का इस्तेमाल खाने और लगाने दोनों के लिए किया जाता है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन, सूजन पैदा करने वाले एंजाइम, लाइपो-ऑक्सीजनेज, साइक्लो-ऑक्सीजनेज और फॉस्फोलिपेज़ आदि को खत्म करने का काम करता है। हल्दी का इस्तेमाल करने से नॉन-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी (एनएसएआईडी) जैसी समस्या में भी फायदा मिलता है। आप ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या में हल्दी को पीसकर इसके पाउडर को गुनगुने तेल में मिलाएं और फिर इसके लेप को किसी कपड़े की सहायता से दर्द वाले जोड़ पर बांध दें। इससे ऑस्टियोआर्थराइटिस की वजह से होने वाले दर्द और सूजन से राहत मिलती है। आप दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर रोजाना इसका सेवन भी कर सकते हैं।

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3. ऑस्टियोआर्थराइटिस में शतावरी का इस्तेमाल (Shatavari for Osteoarthritis)

शतावरी एक बहुत कारगर आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसका इस्तेमाल हजारों साल से पारंपरिक चिकित्सा में किया जा रहा है। इसके सितेमाल से शरीर में सूजन पैदा करने वाले रसायन नष्ट होते हैं। गठिया और ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या में शतावरी का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है। आयुर्वेद में शतावर या शतावरी की जड़ का इस्तेमाल औषधि के रूप में किया जाता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या में शतावरी के चूर्ण के साथ अश्वगंधा और आमलकी के चूर्ण समान मात्रा में मिलाकर रोजाना सुबह पानी के साथ सेवन करें। ऐसा करने से आपके जोड़ मजबूत होंगे और ऑस्टियोआर्थराइटिस की वजह से होने वाले जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलेगी।

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4. ऑस्टियोआर्थराइटिस में लहसुन का इस्तेमाल (Garlic for Osteoarthritis)

ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या में लहसुन का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद माना जाता है। आमतौर पर भोजन में मसाले के रूप में इस्तेमाल में लाया जाने वाला लहसुन आयुर्वेद के मुताबिक एक कारगर औषधि है। लहसुन का इस्तेमाल कई गंभीर बीमारियों के इलाज में फायदेमंद माना जाता है। आप गठिया या ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या से छुटकारा पाने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। ऑस्टियोआर्थराइटिस में लहसुन को अपनी डाइट में शामिल करना बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा लहसुन की दो कलियों को पीसकर उसे दूध में डालकर रोजाना पिएं।

5. त्रिफला का उपयोग (Triphala for Osteoarthritis)

त्रिफला एक बहुत फायदेमंद जड़ी बूटी है जिसका इस्तेमाल पुराने से पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस के इलाज के लिए भारत में प्राचीन काल से ही किया जा रहा है। त्रिफला को तीन जड़ी बूटियों को मिलाकर बनाया जाता है। इसमें आंवला, हरड़ और बहेरा शामिल होता है। त्रिफला के चूर्ण का इस्तेमाल पेट से लेकर हड्डियों से जुड़ी तमाम समस्याओं में बहुत उपयोगी माना जाता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या में त्रिफला के चूर्ण का एक चम्मच सेवन रोजाना सुबह करने से फायदा मिलता है।

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ऊपर बताये गए सभी आयुर्वेदिक नुस्खों का इस्तेमाल ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या में बहुत फायदेमंद माना जाता है। जोड़ों के दर्द और ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या से बचने के लिए आप स्वस्थ और संतुलित खानपान और अच्छी जीवनशैली का पालन करें। इन आयुर्वेदिक नुस्खों का इस्तेमाल करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक या वैद्य से सलाह जरूर लें।

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