एनल फिशर से छुटकारा पाने के ल‍िए अपनाएं ये 4 आयुर्वेद‍िक उपाय

Ayurvedic Treatment For Fissure: फिशर की समस्या में आयुर्वेदिक उपचार काफी प्रभावी माना जाता है। जानें फिशर से राहत पाने के आयुर्वेदिक उपाय - 

Priya Mishra
Written by: Priya MishraUpdated at: Jan 14, 2023 09:00 IST
एनल फिशर से छुटकारा पाने के ल‍िए अपनाएं ये 4 आयुर्वेद‍िक उपाय

Ayurvedic Treatment For Fissure In Hindi: फिशर गुदा से जुड़ी एक समस्या है, जिसके लक्षण काफी हद तक बवासीर जैसे ही होते हैं। यही वजह है कि अक्सर लोग बवासीर और फिशर को एक ही मान लेते हैं। लेकिन फिशर वास्तव में गुदा के अंदर छोटे टिश्यू होते हैं, जो एनल कैनल में स्थित होते हैं। जब गुदा मार्ग में किसी तरह का कट या दरार बन जाती है, तो उसे एनल फिशर या फिशर कहते हैं। फिशर की समस्या में मरीज को मलत्याग के दौरान गंभीर दर्द और ब्लीडिंग का सामना करना पड़ता है। आयुर्वेदिक डॉक्टर्स के मुताबिक, फिशर की समस्या कब्ज के कारण होती है। गलत खानपान, अस्वस्थ जीनवशैली और एक ही जगह पर लंबे समय तक बैठे रहने के कारण भी फिशर हो सकता है। इस समस्या का सही समय पर इलाज न लेने से आपकी परेशानी काफी बढ़ सकती है। आप आयुर्वेद की मदद से फिशर की समस्या को ठीक कर सकते हैं। आयुर्वेदिक डॉक्टर मिहिर खत्री ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए फिशर के आयुर्वेदिक इलाज (Fissure Ka Ayurvedic Ilaj) के बारे में जानकारी शेयर की है। आइए जानते हैं इन आयुर्वेदिक उपायों के बारे में विस्तार से -

फिशर का आयुर्वेदिक इलाज - Ayurvedic Remedies For Anal Fissure In Hindi

आयुर्वेद डॉक्टर के मुताबिक फिशर का मुख्य कारण कब्ज होता है। कब्ज को रोकने के लिए इसका जड़ से इलाज करने की जरूरत होती है। फिशर के इलाज के लिए कई दवाइयां उपलब्ध हैं, लेकिन इस समस्या में आयुर्वेदिक इलाज बहुत प्रभावी माना जाता है। आप अपने खानपान में बदलाव करके इस समस्या से निजात पा सकते हैं। 

पपीता 

फिशर की समस्या में पपीता का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। डॉक्टर मिहिर खत्री के अनुसार, पपीते में पैपिन नामक एंजाइम पाया जाता है, जो पाचन में सुधार करता है। पपीते का सेवन करने से कब्ज और मलाशय से जुड़ी समस्याओं से रात मिलती है। पपीता खाने से मल त्यागने में भी आसानी होती है। आप पपीते का सेवन सुबह के स्नैक या सलाद के रूप में कर सकते हैं।

Fissure-Ka-Ayurvedic-Ilaj

मुनक्का 

फिशर की समस्या में मुनक्का का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। डॉक्टर मिहिर खत्री के मुताबिक मुनक्का फाइबर से भरपूर होते हैं। इसे खाने से कब्ज और पाचन से संबंधित समस्याएं दूर होती हैं। इसके लिए रात को 20-30 मुनक्के को पानी में भिगोकर रख दें। अगली सुबह मुनक्के को खा लें और फिर इस पानी को पी लें। इससे आंतों की सफाई होगी और कब्ज से छुटकारा मिलेगा। ऐसा नियमित रूप से करने से फिशर की समस्या से राहत मिलेगी।

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वेजिटेबल सूप

वेजिटेबल सूप का सेवन करने से सेहत को कई फायदे मिलते हैं। वेजिटबल सूप विटामिन, प्रोटीन, मिनरल और फाइबर समेत कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है। यह पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और मलत्याग को आसान बनाता है। इसके लिए आप रोजाना सब्जियों से भरपूर वेजिटेबल सूप का सेवन करें। 

दूध और देसी घी 

गाय का देसी घी फिशर से निजात दिलाने में काफी प्रभावी माना जाता है। गाय के घी में मौजूद तत्व पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। कब्ज और फिशर की समस्या से राहत पाने के लिए गर्म दूध में एक चम्मच देसी घी डालकर पिएं। इससे पाचन क्रिया बेहतर बनती है और मल त्यागने में आसानी होती है। दूध में देसी घी डालकर पीने से पेट भी सही से साफ होता है। 

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इन आयुर्वेदिक उपायों की मदद से फिशर की समस्या में काफी राहत मिलती है। पपीता, किशमिश, वेजिटेबल सूप और देसी घी जैसे खाद्य पदार्थ मल को मुलायम बनाते हैं। इससे मल त्यागने के दौरान ज्यादा जोर नहीं लगाना पड़ता है और कब्ज की समस्या से भी राहत मिलती है।

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