घुटने के दर्द के ये 5 कारण जरूर जानें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 09, 2015
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Quick Bites

  • अधिक उम्र में घुटने के दर्द की शिकायत ज्‍यादा होती है।
  • घुटने में कार्टिलेज के क्षीण होन पर होती है समस्‍या।
  • बर्साइटिस बर्सा की सूजन और जलन की समस्‍या है।

आज घुटने के दर्द की शिकायत करने वाले लोगों में बड़ी उम्र के साथ-साथ सामान्‍य आयु के लोग भी शामिल हैं। लेकिन अधिक उम्र में ऐसे लोगों की तादाद ज्‍यादा हो जाती है। क्‍या घुटने में दर्द होना सामान्‍य है। क्‍या वजह है कि उम्र के साथ-साथ हमारे घुटनों में दर्द की समस्‍या बढ़ने लगती है। इन सब सवालों के जवाब आप इस लेख द्वारा पा सकते हैं।

ब्रिटेन में जर्नल अर्थराइटिस एंड रहेयूमेटिज्‍म में प्रकाशित एक शोध के अनुसार 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में घुटने का दर्द सामान्‍य है। 50 वर्ष की आयु से ऊपर की करीब दो तिहाई महिलाओं को किसी न किसी रूप से घुटने में दर्द की शिकायत होती है।  


मानव शरीर में पैरों के साथ बीच में बने घुटने भी बहुत महत्‍वपूर्ण है। घुटनों से ही पैरों को मुड़ने की क्षमता मिलती है। लेकिन कई कारणों से घुटनों में दर्द होने लगता है। वैसे तो चोटों, उम्र, मोटापा, संरचनात्मक असामान्यताएं, मांसपेशियों में लचीलेपन की कमी आदि जिम्‍मेदार कारक होते हैं। लेकिन कुछ बीमारियों गठिया, बर्साइटिस और मांसपेशियों के दर्द आदि भी जोड़ों के दर्द का कारण होते हैं। आइए ऐसी ही कुछ कारणों के बारे में जानते हैं।


इसे भी पढ़ें : घुटनों के गठिया रोग का उपचार


घुटने का अर्थराइटिस

घुटने का दर्द वह दर्द है जो घुटने के विशेष हिस्‍सों खासकर सामने और बीच में होता है। घुटने में कार्टिलेज के धीरे-धीरे क्षीण होने से यह समस्‍या होती है। कार्टिलेज चिकना और फिसलन पदार्थ है, जो घुटने को आगे झुकते और सीधा करते समय हड्डियों को कुशन और रक्षा देता है। लेकिन कार्टिलेज पर असर होने से घुटनों में फिसलन अनुभव नहीं होती और घुटने की हड्डियां आपस में रगड़कर घर्षण का अनुभव करती है। इसके कारण घुटने आसानी से मूव नहीं कर पाते और उनमें कठोरता, सूजन और दर्द का अनुभव होता है।

 

टेन्टीनाइटिस

घुटने में सामने की ओर दर्द जो सीढ़ियों अथवा चढ़ाई पर चढ़ते या उतरते समय बढ़ जाने के कारण टेन्‍टीनाइटिस की समस्‍या होती है। यह समस्‍या धावकों, स्कॉयर और साइकिल चलाने वालों में अधिक पाई जाती है।


बर्साइटिस

बर्साइटिस बर्सा की सूजन और जलन है। बर्सा तरल पदार्थ से भरी थैली है जो मांसपेशियों, नसों और हड्डियों के बीच एक तकिया के रूप में कार्य करती है। बर्साइटिस अक्‍सर अति प्रयोग का परिणाम होता है। यह गतिविधि के स्तर में बदलाव जैसे मैराथन के लिए प्रशिक्षण ओर अधिक वजन के कारण हो सकता है। बर्साइटिस सामान्यतः अत्यधिक दबाव के कारण होता है। कंधा, कोहनी, कूल्‍हा और घुटना सबसे अधिक प्रभावित होता है। इस समस्‍या के होने पर स्थानीय जोड़ों में दर्द और कठोरता बनी रहती है और साथ ही बर्सा के चारों ओर घेरे में जोड़ों के आसपास सूजन रहती है।

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ऑस्टियो अर्थराइटिस

यह सबसे आम प्रकार का अर्थराइटिस है। यह बढ़ती उम्र के साथ होता है। इस समस्‍या के होने पर घुटनों में सूजन और चलते समय घुटने में तेज दर्द होता है। घुटने की नर्म कार्टिलेज, हड्डी को मुलायम तकिये की तरह सहारा देती है, पर उम्र बढ़ने के साथ-साथ वह घिसती जाती है और कम हो जाती है, जिस कारण हड्डियां एक-दूसरे से रगड़ खाने लगती हैं। वैसे तो यह बीमारी किसी भी महिला या पुरुष को हो सकती है, पर 50 की उम्र पार कर चुकी रजोनिवृत्ति वाली ज्यादातर महिलाओं में हार्मोन स्तर में बदलाव के कारण अधिक पाई जाती है।   


इसे भी पढ़ें : ऑस्टियो आर्थराइटिस से कैसे करें बचाव


पोस्ट-ट्रॉमेटिक अर्थराइटिस

पोस्ट-ट्रॉमेटिक अर्थराइटिस गंभीर घुटने की चोट के कारण होता है, जिसमें बोन फैक्‍चर और हेयर लाइन फैक्‍चर शामिल है। यह चोटें घुटने को नुकसान पहुंचाकर दर्द, सूजन और कठोरता का नेतृत्‍व करती हैं।   

घुटने की समस्‍या से बचने के लिए आराम करें और ऐसे कार्यों से बचे जो दर्द बढ़ा देते हैं, विशेष रूप से वजन उठाने वाले कार्यों से बचें। इसके अलावा वजन को कम करने करने वाली एक्‍सरसाइज को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। सामान्य हल्के व्यायाम अर्थाराइटिस या फाइब्रोमाइल्जिया के रोगियों में जोड़ों की गतिशीलता बढाने, दर्द घटाने औऱ दुखती, कड़ी मांसपेशियों को आराम पहुंचाने में मदद करते हैं। अगर ये उपाय आपको राहत नहीं दे पाते तो डॉक्टर से मिलें।

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Image Courtesy : Getty Images
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