ज्यादा सफर करने वाले लोगों के लिए 5 योगासन: दूर होंगी कब्ज, मतली, सिर दर्द जैसी सभी समस्याएं

जो लोग ज्यादा सफर करते हैं वो कुछ योगासन को अपनाकर कब्जियत, पेट की समस्या, उल्टी सहित कई समस्या से निजात पा सकते हैं। जानें योगा एक्सपर्ट की सलाह।

Satish Singh
Written by: Satish SinghPublished at: Aug 13, 2021Updated at: Aug 13, 2021
ज्यादा सफर करने वाले लोगों के लिए 5 योगासन: दूर होंगी कब्ज, मतली, सिर दर्द जैसी सभी समस्याएं

सफर करना हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा है, लेकिन ज्यादा सफर करने से लोगों को कई समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। इससे बचाव का उपाय करना भी बहुत जरूरी है। ज्यादा सफर करने से उल्टी, अनपच और गैस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। योग करके हम इन समस्याओं से निजात पा सकते हैं। जमशेदपुर में सीआरपीएफ के अधिकारियों व जवानों को योग का प्रशिक्षण देने वाले योग प्रशिक्षक मगन लाल शर्मा हमें बता रहे हैं कि योग करे कैसे ज्यादा सफर करने से होने वाली समस्याओं से निजात पा सकते हैं।

पांच योगासन से समस्याओं से पा सकते हैं मुक्ति 

मगल लाल शर्मा ने पांच योगासन के बारे में बाताया जो सफर के दौरान होने वाली समस्याओं से मुक्ति दिला सकती है। उन्होंने ने बताया कि सफर के दौरान ज्यादातर लोगों को उल्टी की समस्या होती है। चक्कर आने की समस्या होती है। इसके लिए हमें अनुलोम- विलोम और कपालभारती प्राणायाम करना चाहिए। गैस बनने के कारण उल्टी होती है। कपालभारती और अनुलोम-विलोम की समस्या कम होती है। इससे उल्टी बंद हो जाती है। वहीं, अनुलोम-विलोम प्रणायाम करने से हमारे पेट के ब्लॉकेज खुल जाते हैं। साथ ही पेट के अंदर के नस-नाड़ी भी खुल जाते हैं, जिससे उल्टी नहीं होती है। वहीं, कपालभारती से पाचन शक्ति मजबूत होती है। अगर पाचन शक्ति अच्छी रहेगी, तो हमारे शरीर का सारा सिस्टम ठीक रहेगा। प्रशिक्षक मगन ने कहा कि हर प्राणायाम जो शरीर के अनुकुल हो उसी को करना चाहिए। अगर आप कोई प्राणायाम कर रहे हैं, तो अपनी बीमारी के बारे में प्रशिक्षक को बता दें। इससे प्रशिक्षक आपको वो प्राणायाम करने बोलेंगे, जो आपके शरीर के अनुकुल है। जिससे आपको लाभ हो। जैसे कपालभारती सर्वाइकल के मरीज को झटके के साथ नहीं करनी चाहिए। भस्त्रिका प्राणायाम अस्थमा, हाइपरटेंशन व हार्ट के मरीजों को नहीं करना चाहिए।

अनुलोम-विलोम के फायदे

अगर आपको सफर में आपक चक्कर आता है, तो अनुलोम-विलोम आसन करना चाहिए। अनुलोम-विलोम पेट के गैस को निकालता है। इससे सफर के दौरान उल्टी नहीं होती है। प्राणायाम करने से हमारे पेट में जितने ब्लॉकेज होते हैं, वह खुल जाते हैं, जितने भी नस-नाड़ी होते हैं पेट के अंदर वह भी खुल जाते हैं, जिससे उल्टी की समस्या नहीं होती।

कैसे करें आसन

  • सबसे पहले चौकड़ी मार कर बैठें।
  • नाक के बाएं छिद्र से सांस लें और दाएं से छोड़ें।    
  • कुछ देर सांस अंदर रखें।
  • अगर हम नाक के बाएं छिद्र से 10 सेकेंड में सांस ले रहे हैं, तो चार सेकेंड तक सांस को अंदर रखेंगे। 12 से 14 सेकेंड में सांस छोड़ेंगे।
  • इस प्रकार से दाएं छिद्र से भी करना है।
  • अगर सिर्फ यह एक छिद्र से करेंगे, तो यह पूरा एक साइकल होगा।
  • यह नाक के नोजल को ठीक कर देगा।
Bhrastika Prayanayam

भस्त्रिका प्राणायाम पाचन शक्ति को बढ़ता है 

यह प्राणायाम पेट और इसके अंग को मजबूत करता है। इससे हमारी पाचन शक्ति भी बढ़ती है। सफर में उल्टी का कारण खाना का नहीं पचना होता है। इसलिए हमें सफर करने से पहले इस प्राणायाम को करना चाहिए। तेजी से सांस लेने और छोड़ने से हम ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन लेते हैं और कॉर्बन डायऑक्साइड छोड़ते हैं, जो फेफड़ों की कार्य क्षमता को बढ़ाता है। यह हृदय में रक्त नलिकाओं को भी शुद्ध व मजबूत बनाए रखता है।

इन्हें नहीं करना चाहिए भस्त्रिका :  अस्थमा, हाइपरटेंशन व हार्ट के मरीजों को भस्त्रिका आसन नहीं करना चाहिए। भस्त्रिका प्राणायाम में फेफड़े पर प्रेशर पड़ता है।

इस प्राणायाम को कैसे करें

  • सबसे पहले चौकड़ी मार कर बैठें।
  • कमर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें।
  • शरीर और मन को स्थिर रखें, आंखें बंद कर दें।
  • नाक के दोनों छिद्र से सांस लें और दोनों छिद्र से सांस छोड़े।  
  • बल का प्रयोग कर सांस नहीं लें।
  • सांस लेने के समय आवाज नहीं करें।
  • सांस भरने में हम जितना समय लेंगे, उससे ज्यादा समय में सांस छोड़ें जैसे हम सांस भरने में 10 सेकेंड लेते हैं, तो छोड़ने में 11 से 12 सेकेंड का समय लेना होगा।
  • सांस को कुछ देर तक अंदर रखें।

पवनमुक्त आसान से गैस और कब्ज से मिलता है छुटकारा 

इस आसन को करने से पेट स्वस्थ रहता है। पेट स्वस्थ रहता है, तो हमें सफर में कोई तकलीफ नहीं होती है। यह हमारे पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। पेट की समस्याओं जैसे गैस और कब्ज से छुटकारा पाने के लिए हमें पवनमुक्तासन करना चाहिए।

कैसे करें आसान

  • पवनमुक्त आसन करने के लिए पहले एक साफ दरी लें।
  • दरी पर लेट जाएं।
  • लेटने के बाद घुटने को मोड़ कर उसे सीने से लगा लें।
  • सीने से लगाने के बाद दोनों हाथ को लॉक करके घुटने के ऊपर रख लें।
  • नाक को घुटने में सटा का सांस छोड़ें।
Kapalbhati Prayanam

सफर करने से पहले करें कपालभाति 

सफर करने वाले लोगों को इस आसन को करना चाहिए। इससे पाचन शक्ति मजबूत होता है। पाचन शक्ति के मजबूत रहने से सफर के दौरान गैस और उल्टी की समस्या नहीं होती है। कपालभाति महिलाओं के लिए खतरनाक है। इससे शरीर के इंटरनल अंगों पर प्रेशर बनता है और महिलाओं के यूट्रस पर असर होता है। सर्वाइकल के पेसेंट को झटके के साथ कपालभारती नहीं करना चाहिए।

कैसे करें कपालभाति

  • सबसे पहले पालथी मार के बैठ जाएं।
  • दोनों हाथों से चित्त मुद्रा बनाएं और इसे अपने दोनों घुटनों पर रखें।
  • इस आसन में नाक से सांस को छोड़ना नहीं है, सांस को तेजी से फेंकना( तेजी से छोड़ना इसे कह सकते हैं ) है।
  • इस आसान को करते समय बहुत लोग सांस फेंकते समय छाती में झटका देते हैं। छाती में झटका नहीं देना है।
  • कपालभाति में कंधा, छाती नहीं हिलना चाहिए। पेट बस अंदर बाहर होगा।
  • ऐसा कुछ मिनट तक लगातार करते रहें। इसे सात से 10 मिनट तक करना चाहिए।

त्रिबंद आसन करने से नहीं होती हैं उल्टी और अनपच जैसी समस्याएं

इस आसन को करने से पेट की सभी बीमारी के का रोकथाम किया जा सकता है। इसे करने से सफर के दौरान उल्टी या अनपच जैसी समस्याएं नहीं होती हैं। त्रिबंध मुद्रा मूलबंध, जालंधर बंद और उड्डियान बंध को लगाने से होती है। मूलबंध का मतलब होता है, गुदा मार्ग का सिकुड़ना। उड्डियान बंध का मतलब होता है कि सांस को धीरे-धीरे बाहर छोड़ना और जालंधर बंध में ठोड़ी को गर्दन से सटाकर रखा जाता है। हाई ब्लड प्रेशर, गर्दन दर्द, कमर दर्द , हर्निया से पीड़ित व्यक्ति इस आसन को नहीं करें।

कैसे करें आसन

  • पद्मासन के पॉजिशन में कमर व गर्दन को सीधा रखते हुए बैठ जाएं
  • हाथों से घुटनों को पकड़कर ज्यादा सांस भरें और उसे निकाल दें
  • अब गुदा द्वार को ऊपर खींचकर मूलबंध लगा लें
  • पेट और ज्यादा अंदर खींचकर उड्डियान बंध लगा लें
  • इसके बाद सिर आगे की ओर झुका के ठोढ़ी को गले से लगाकर जालंधर बंध लगा लिजिए
  • सांस को नहीं रोके रख सकते हैं, तो गर्दन को सीधा करके सांस लें, पेट को ढीला छोड़ें
  • इस योग को तीन बार करें

इन योगासन को करने के पहले योग प्रशिक्षक से लें ट्रेंनिंग

इन तमाम योगासन को करने के पहले जरूरी है कि योग प्रशिक्षक से ट्रेनिंग ले लिया जाए। क्योंकि हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, कई लोगों को बीमारी होती है तो कई निरोग रहते हैं। आप अच्छे से योग करें इसके लिए पहले एक्सपर्ट के निर्देशन में योग करना सही रहता है। ताकि जहां भी आप गलती कर रहे हों योग प्रशिक्षक आपकी गलतियों को सुधारें।

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