स्टूडेंट्स (छात्रों) के लिए फायदेमंद 7 योगासन, जिनसे बढ़ेगी याददाश्त, एकाग्रता और एनर्जी

इन सात योगासन को कर स्टूडेंट्स बढ़ा सकते है मैमोरी पावर, लंबाई। जानें एक्सपर्ट की राय।

Satish Singh
Written by: Satish SinghUpdated at: Aug 11, 2021 14:54 IST
स्टूडेंट्स (छात्रों) के लिए फायदेमंद 7 योगासन, जिनसे बढ़ेगी याददाश्त, एकाग्रता और एनर्जी

बच्चों से लेकर बड़े सभी योगासन कर लाभ उठा सकते हैं। बच्चों की उम्र में यदि योगासन किया जाए तो याददाश्त बढ़ाने के साथ एकाग्रता और एनर्जी हासिल की जा सकती है। आज के दौर में बच्चों को योगासन करना बहुत जरूरी हो गया है। क्योंकि उनके सामने भी कई चुनौतियां हैं, जैसे इग्जाम का प्रेशर, होम वर्क समय पर पूरा करने का प्रेशर, स्कूल-ट्यूशन की टाइमिंग के साथ खेलने के लिए समय निकलना आदि। ऐसे में बच्चों का दिन भी काफी तनावभरा हो सकता है। लेकिन यह बच्चे पर निर्भर करता है कि वो इन चुनौतियों को कैसे स्वीकार कर आगे बढ़े। देश के जाने माने व टाटा स्टील के जेआरडी में योग प्रशिक्षक अरविंद कुमार ने इस पर विस्तार में जानकारी दी। अरविंद ने विभिन्न योगासन के बारे में विस्तृत रूप से बताया जो बच्चों के लिए फायदेमंद होते हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि बच्चों को शुरुआती समय में ही योगा के महत्व को बताया जाए तो जीवन भर वो इसे अपनी जीवनशैली में शामिल रख स्वस्थ्य रह सकते हैं। तो आइए इस आर्टिकल में हम ऐसे योगाभ्यास की बात करेंगे जो स्टूडेंट्स के लिए काफी महत्तवपूर्ण हैं। जिनको कर याददाश्त बढ़ाने के साथ एकाग्रता और एनर्जी हासिल किया जा सकता है।

बच्चों को धीरे-धीरे कराएं योग

योग प्रशिक्षक अरविंद ने कहा- बच्चों को एकाएक सारे योगाभ्यास नहीं कराना चाहिए। धीरे-धीरे बच्चों में योगा की आदत डालनी चाहिए। जिस तरह शरीर के लिए व्यायाम जरूरी होता है। उसी तरह मस्तिष्क के विकास के लिए भी व्यायाम-योग की जरूरत होती है। बच्चों का मस्तिष्क उम्र के साथ विकसित होता है। इसलिए मस्तिष्क का स्वस्थ्य होना बहुत जरूरी है। बच्चों में प्रतिक्रिया की क्षमता, समझने की क्षमता, महसूस करने की क्षमता और फिर अच्छे से काम कर पाना, ये सब आपके मस्तिष्क की सेहत जुड़े हुए हैं।

बच्चों के मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी' ) को सीधा रखना बेहद जरूरी

योग प्रशिक्षक ने बताया कि मेरुदंड का सीधा रखना बच्चों के लिए बेहद लाभकारी होता है। घर में कभी बच्चे बैठते हैं तो उसे सीधे बैठने को कहे। यह भी एक तरह का योग ही है। मेरुदंड को सीधा नहीं रखने से बच्चों को बौद्धिक ज्ञान कम हो जाता है। मेमोरी पावर कम होती है। मेरुदंड के झुके रहने का मुख्य कारण बच्चों का भारी बैग को उठाकर स्कूल जाना है। यह बच्चों को काफी नुकसान पहुंचाता है। इसके लिए हमें बच्चों को हमेशा सीधा बैठाने की सलाह देनी चाहिए। आजकल के बच्चे सीधा नहीं बैठते हैं। झुककर बैठने या सोकर कोई काम करने की आदत उनमें रहती है। इसलिए हमें इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए और बच्चों को हमेशा सीधा ही बैठाना चाहिए। बच्चों को जमीन बैठना चाहिए। पद्मासन करके बैठाए तो वो ज्यादा फायदेमंद रहेगा। पैरेंट्स के साथ शिक्षकों को इस बात का विशेष तौर पर ख्याल देना चाहिए। यदि बचपन में ही उनमें यह आदत विकसित न की जाए तो आगे चलकर उन्हें काफी मुश्किल होती है। वहीं इसका काफी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

पांच से छह बार ओम का उच्चारण करें

योग प्रशिक्षक बताते हैं कि सुबह उठकर बच्चों को पांच से छह बार ओम का उच्चारण करना चाहिए, इससे दिमाग फ्रेश रहता है और ताजगी महसूस होती है। गायत्री मंत्र का भी आप उच्चारण कर सकते हैं। इसे जोर से जोर से नहीं करना है।  ओम और गायत्री मंत्र उच्चारण आराम से और धीमे-धीमे करना चाहिए। स्टूडेंट्स से लेकर बड़ी उम्र के लोग भी इसे सुबह-सुबह आजमाएं तो उन्हें अच्छा महसूस होगा। 

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दो से तीन मिनट तक करें अनुलोम विलोम प्राणायाम

योग प्रशिक्षक ने कहा- बच्चों का भविष्य में अच्छा करने के लिए उसका संकल्पित होना काफी महत्वपूर्ण होता है। बच्चों को संकल्पित रखने के लिए अनुलोम विलोम दो से तीन मिनट कराना चाहिए। इसे करने के लिए नाक के बाएं छिद्र से सांस लेना है उसे छोड़ने से शरीर के गलत प्रवृतियां बच्चों की निकल जाती हैं, इससे बच्चा जो ठान लेता है वो करता है। दाएं छिद्र से सांस लेने और छोड़ने से शरीर को उत्साह मिलता है। शरीर ठंडा रहता है। मेमोरी पावर भी बढ़ता है।  ऐसे में स्कूल व कॉलेज जाने वाले बच्चों को नियमित तौर पर अनुलोम-विलोम को अपनाना चाहिए।

स्टूडेंट्स के लिए ब्रह्मचर्यासन है सबसे जरूरी

ज्यादातर योगासन भोजन के बाद नहीं किए जाते हैं परंतु कुछ ऐसे आसन हैं जो भोजन के बाद भी किए जाते हैं ।  एक्सपर्ट योग प्रशिक्षक अरविंद बताते हैं कि उन्हीं आसनों में से एक है ‘ब्रह्मचर्यासन’। यह आसन रात के भोजन के बाद, सोने से पहले करने से विशेष लाभ मिलता है। बच्चों में स्वप्नदोष को कम करता है। ब्रह्मचर्यासन से बुरे विचार दूर होते हैं। मस्तिष्क का तनाव मुक्त होता है। शरीर में रक्त का संचार सुचारू रूप से करता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि इस आसन को करने के लिए सबसे पहले वज्रासन की तरह जमीन पर बैठ जाएं। इसमें पलथी मारने की बजाय दोनों पैर को नीचे की ओर मोड़कर उसपर बैठना होता है। इसके बाद दोनों पैर को फैला दें व जमीन पर बैठें। इसके बाद हाथों को घुटने पर रख शांति महसूस करें। इसे करने से तनाव भी दूर होता है।

स्कूली बच्चों के लिए जरूरी है ताड़ासन

योग प्रशिक्षक बताते हैं कि ताड़ासन स्कूली बच्चों के लिए काफी जरूरी आसनों में से एक है। इस आसन को करने से बच्चों की लंबाई बढ़ाती है। इससे शरीर की मांसपेशियों स्ट्रेचिंग होती है। ये बच्चों में फिटनेस बना रहता है। योग प्रशिक्षक बताते हैं कि इस आसन को करने के लिए आप खड़े हो जाएं और हाथ को शरीर के आजू-बाजू में रखें। अब गहरी सांस भरे हुए हाथों को सिर के ऊपर वे जाएं व ऊपर ले जाकर अंगुलियों को आपस में बांध लें। अब हाथ को सीधा रखकर स्ट्रेचिंग करें। इसके बाद एड़ी उठाते हुए पैर की अंगुलियों पर खड़े हो जाएं। ऐसे में आप स्ट्रेचिंग महसूस करेंगे। चंद सेकेंड तक इस पॉश्चर में रहें व सांस लेते रहें। इसके बाद शुरुआती अवस्था में आ जाएं। इस आसन को रोजाना 10 बार स्टूडेंट्स करें तो उन्हें काफी फायदा मिलेगा।

पश्चिमोत्तानासन स्टूडेंट्स के लिए है बेस्ट

पश्चिमोत्तानासन करने से बच्चों की लंबाई बढ़ती है। यह आसन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही ज़्यादा लाभदायक आसन है। योग प्रशिक्षक बताते हैं कि विभिन्न प्रकार की बीमारियों को दूर करने में मदद मिलती है। यह आसन दो शब्दों से मिलकर बना है -‘पश्चिम’ का अर्थ होता है पीछे और ‘उत्तांन’ का अर्थ होता है तानना। इस आसन के दौरान रीढ़ की हड्डी के साथ शरीर का पिछला भाग तन जाता है जिसके कारण इसका नाम पश्चिमोत्तानासन दिया गया है। इससे रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है। स्कूल जाने वाले बच्चों के अक्सर बस्ते के बोझ से पीठ झुक जाती है। इस आसन के करने से पीठ हमेशा सीधी रहेगी। पीठ सीधा रहने से एकाग्रता बढ़ेगी। मानसिक विकास होगा। चीजों को आसानी से समझ पाएंगे। इसलिए यह आसन बच्चों के लिए बेस्ट है।

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सूर्य नमस्कार करने से दिमाग होता है तेज

एक्सपर्ट बताते हैं कि सूर्य नमस्कार करने से मस्तिष्क स्वस्थ रहता है। इससे बच्चों का दिमाग तेज होता है। 10 मिनट सूर्य नमस्कार करना चाहिए। सूर्य नमस्कार कुल 12 योासन को मिलाकर बना है। इसे करने के लिए आप एक्सपर्ट की सलाह लें। सबसे पहले उनके मार्गदर्शन में करें जिसके बाद आप इसे घर पर भी या अकेले में कर सकते हैं। योगो की शुरुआत हमेशा एक्सपर्ट के निर्देशन में ही करना चाहिए। संभव है कि शरीर में किसी प्रकार की समस्या होने पर एक्सपर्ट योग करने की सलाह न दें। जब आप एक्सपर्ट के सामने योग करेंगे तो जहां भी आप गलत परफॉर्म कर रहे होंगे एक्सपर्ट उसे सही करवाएंगे। इससे योगासन का लाभ होगा। क्योंकि यदि इसे अच्छे से परफॉर्म न किया गया तो नुकसान भी हो सकता है।

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बालासन करने से मस्तिष्क रहता है स्वस्थ

एक्सपर्ट बताते हैं कि इस आसन को करने से मन शांत रहता है। मस्तिष्क स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का काम करता है। इसे करने के लिए सबसे पहले जमीन पर बैठ जाएं। घुटने को टेकते हुए दोनों पैर के अंगूठे को नजदीक लाएं। फिर आप एड़ी पर बैठें व गहरी सांस लें। फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें व हाथों को आगे की ओर बढ़ाएं। जितना हो सकता है हाथों को आगे बढ़ाएं, अपने कंधे को रिलेक्स पोज पर ले जाएं। फिर शरीर को उठाकर नॉर्मल पोज में आएं व दोहराएं।

सुखासन कर बढ़ाएं एकाग्र शक्ति

यह बच्चों को मानसिक और शारीरिक रूप से फुर्तीला बनाता है। इससे एकाग्रता बढ़ती है। योग प्रशिक्षक अरविंद ने कहा कि सुखासन करने के लिए सबसे पहले जमीन पर बैठ जाएं, पलथी मारे। बैकबोन को सीधा रखें। कंधों को ढीला न छोड़ें। फिर ज्ञान मुद्रा में आर हाथों की अंगुलियों को दोनों पैर पर रखें। अब आंख बंद कर लें और टेंशन लिए बिना सांस पर ध्यान केंद्रित करें। इसे 5-10 मिनटों तक करें।

बिना एक्सपर्ट की सलाह के न करें योग

हमेशा एक्सपर्ट की सलाह लेकर ही योग करना चाहिए। बिना एक्सपर्ट की सलाह के योग करना आपको स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। एक बार जब आप अच्छे से योग करने लगे तो फिर आप अकेले कर सकते हैं। यही वजह भी है कि आज के समय में स्कूलों में योग प्रशिक्षक सेवाएं दे रहे हैं।

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