Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr M Sheetal Kumar , Consultant Physician & Diabetologist

गर्मियों में शरीर की बैटरी क्‍यों हो जाती है डाउन? एक्‍सपर्ट से जानें ज्‍यादा थकान के कारण

भीषण गर्मी का असर शारीर‍िक और मानस‍िक सेहत पर होता है। गर्मि‍यों में ज्‍यादा काम क‍िए बगैर ही थकान महसूस होती है और हर समय सुस्‍ती आती है। जानें इसके पीछे के कारण।

द‍िल्‍ली, नोएडा, गाज‍ियाबाद समेत देश के कई शहरोंं में गर्मी का कहर जारी है। कई शहरोंं में तापमान 40 के पार जा रहा है। ज्‍यादा तापमान में अक्‍सर आपने नोट‍िस क‍िया होगा, ज्‍यादा थकान का एहसास होता है। क‍िसी काम में मन नहीं लगता और जरूरत से ज्‍यादा थकान महसूस होती है। सर्द‍ियोंं के मुकाबले गर्मि‍यों में यह समस्‍या ज्‍यादा होती है। हर वक्‍त सोने का मन करता है, सुस्‍ती आती है और पसीने के कारण च‍िड़च‍िड़ापन भी महसूस होता है, लेक‍िन क्‍या कभी आपने सोचा इसके पीछे क्‍या कारण हो सकता है? ये समस्‍याएं गर्मि‍योंं में ही क्‍यों ज्‍यादा होती हैं? इसका जवाब जानने के ल‍िए हमने Dr. M. Sheetal Kumar, Consultant Physician & Diabetologist, Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।

1. ड‍िहाइड्रेशन

गर्मि‍योंं में ज्‍यादा पसीना आता है ज‍िसके कारण शरीर में ड‍िहाइड्रेशन के लक्षण नजर आते हैं। जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो थकान और कमजोरी महसूस होती है।

यह भी पढ़ें- सुबह उठने के बाद कमजोरी का कारण कहीं रात का खाना तो नहीं? जानें कनेक्शन

2. इलेक्‍ट्रोलाइट लॉस

गर्मि‍योंं में पसीने के कारण सोड‍ियम, पोटैश‍ियम, मैग्नीशियम जैसे म‍िनरल्‍स की कमी हो जाती है। ये इलेक्‍ट्रोलाइट्स मसल फंक्‍शन के ल‍िए जरूरी होते हैं। इन म‍िनरल्‍स की कमी से क्रैंप्स और थकान महसूस होती है।

यह भी पढ़ें- शाम होते-होते क्यों बढ़ जाता है आलस? एक्सपर्ट ने बताए 5 तरीके जो रखेंगे आपको एक्‍ट‍िव

3. हीट स्‍ट्रेस

tiredness-in-summer

जब बहुत ज्‍यादा गर्मी होती है, तो शरीर को बॉडी का तापमान कंट्रोल करने के ल‍िए अत‍िर‍िक्‍त ऊर्जा का इस्‍तेमाल करना पड़ता है। इस वजह से थकान ज्‍यादा महसूस होती है क्‍योंक‍ि शरीर बाकी काम के ल‍िए एनर्जी नहीं बचा पाता और सारी ऊर्जा शरीर में स्‍वैट कंंट्रोल और तापमान न‍ियंत्रण में लग जाती है।

यह भी पढ़ें- सुबह उठने के बाद भी रहती है थकान? जानें 'Deep Sleep' कैसे कर सकती है मदद

4. मेंटल फटीग

गर्मी के कारण शारीर‍िक ही नहीं बल्‍क‍ि मानस‍िक सेहत पर भी बुरा असर होता है। लगातार हीट एक्‍सपोजर के कारण व्‍यक्‍त‍ि को इर‍िटेशन महसूस होता है। इससे नींंद भी ड‍िस्‍टर्ब होती है और र‍िकवरी स्‍लो हो जाती है। 2015 में Behavioural Brain Research नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, गर्मी के कारण मेंटल फटीग बढ़ता है। इससे ध्‍यान क्षमता कमजोर भी हो सकती है।

यह भी पढ़ें- क्या रात को नींद पूरी न होने पर चेहरा डल हो सकता है? जानें इसे दूर करने के उपाय

5. फ‍िजि‍कल एक्‍ट‍िव‍िटी कम होना

गर्मी के द‍िनोंं में लोग बाहर न‍िकलना और एक्‍सरसाइज करना कम कर देते हैं। इससे मसल्‍स स्‍ट्रेंथ और स्‍टैम‍िना धीरे-धीरे कम होने लगता है। इस वजह से गर्मि‍योंं में थोड़ी भी एक्‍ट‍िव‍िटी करने पर ज्‍यादा थकान होने लगती है।

न‍िष्‍कर्ष:

ड‍िहाइड्रेशन, इलेक्‍ट्रोलाइट लॉस, हीट स्‍ट्रेस, मेंटल फटीग, फि‍ज‍िकल एक्‍ट‍िव‍िटी कम होना जैसे कारण गर्मि‍यों में थकान का कारण बनते हैं। इससे बचने के ल‍िए हाइड्रेशन का ख्‍याल रखें, हेल्‍दी डाइट लें, तेज धूप से बचें और रोज एक्‍सरसाइज करें।

FAQ

  • मेंटल फटीग क्‍या होता है?

    मेंटल फटीग का मतलब है द‍िमाग की थकान। इसमें फोकस कम हो जाता है, ध्‍यान भटकने लगता है और न‍िर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
  • गर्म‍ियों में ड‍िहाइड्रेशन से कैसे बचें?

    पर्याप्‍त मात्रा में पानी प‍िएंं। इसके अलावा नार‍ियल पानी, छाछ, नींबू पानी जैसी ड्र‍िंक्‍स का भी सेवन करें ताक‍ि शरीर को इलेक्‍ट्रोलाइट्स म‍िलते रहें। ज्‍यादा धूप में बाहर जाने से बचें और ताजे फल एवंं सब्‍ज‍ियों का सेवन करें।

Read Next

वीकेंड के बाद भी बनी हुई है सुस्ती? शरीर को ऐसे करें री-बूट

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Apr 27, 2026 20:31 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Apr 27, 2026 20:31 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr M Sheetal Kumar

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content