30 देशों में फैल चुका कोरोना का लैंब्डा वैरिएंट बताया जा रहा है डेल्टा से अधिक घातक, WHO ने कही ये बात

कोरोनावायरस का नया स्ट्रेन लैंब्डा वैरिएंट 30 से अधिक देशों में फैल चुका है, WHO ने इसे डेल्टा वैरिएंट से अधिक खतरनाक बताया है।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Jul 07, 2021Updated at: Jul 07, 2021
30 देशों में फैल चुका कोरोना का लैंब्डा वैरिएंट बताया जा रहा है डेल्टा से अधिक घातक, WHO ने कही ये बात

कोरोनावायरस (Coronavirus) संक्रमण की दूसरी लहर भले ही धीरे-धीरे अपनी रफ्तार कम करती नजर आ रही है लेकिन इसका खतरा अभी भी टला नहीं है। देश में इस खतरनाक संक्रमण के खिलाफ टीकाकरण अभियान तेजी से चल रहा है। वैज्ञानिक कोरोना की तीसरी लहर को लेकर लगातार जानकारी दे रहे हैं और इन सबके बीच कोरोना अपने वैरिएंट भी लगातार बदल रहा है। कुछ दिनों पहले कोरोना के नए वैरिएंट डेल्टा प्लस की चर्चा जोरों पर थी। कहा जा रहा था कि इस नए वैरिएंट की संक्रमण क्षमता पुराने वायरस की अपेक्षा कुछ ज्यादा है।  लेकिन अब, डेल्टा प्लस वैरिएंट से भी ज्यादा घातक माने जाने वाले लैंब्डा वैरिएंट (Lambda Variant) का पता लगाया गया है। एक्सपर्ट्स और वैज्ञानिकों के मुताबिक यह नया लैंब्डा वैरिएंट, कोरोना के दूसरे अन्य स्ट्रेन की तुलना में अधिक घातक और तेजी से फैलने वाला है। वैज्ञानिकों ने इस नए वैरिएंट को C.37 नाम दिया है। आइये विस्तार से जानते हैं कोरोना के नए लैंब्डा वैरिएंट के बारे में। 

कहां पर आया लैंब्डा वैरिएंट का पहला मामला? (Covid Lambda Variant Fist Case)

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डेल्टा वैरिएंट की तरह ही लैंब्डा वैरिएंट ही दुनियाभर के 30 देशों में फैल चुका है। वैज्ञानिक इस नए स्ट्रेन को पहले आये सभी स्ट्रेन से अधिक खतरनाक मान रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कोरोना के नए लैंब्डा वैरिएंट का सबसे पहला मामला पेरू में आया था जिसके बाद अब यह स्ट्रेन दुनिया में तेजी से फैल रहा है। ब्रिटेन, पेरू समेत दुनिया के तमाम देशों में यह वायरस तेजी से फैल चुका है।  यूके के स्वास्थ्य मंत्रालय ने लैंब्डा वैरिएंट पर चिंता जताते हुए कहा है कि, "कोरोना का आया स्ट्रेन जिसे लैंब्डा वैरिएंट कहा जा रहा है, देल्ट वैरिएंट की तुलना में अधिक खतरनाक है और यह चार हफ्ते में ही दुनिया के 30 से अधिक देशों में फैल चुका है। जानकारी के मुताबिक दक्षिणी अमेरिका में यह वायरस तेजी से फैल रहा है और वहां पर लगभग 80 प्रतिशत से अधिक नए मामले लैंब्डा वैरिएंट के ही दर्ज किये गए हैं।

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लैंब्डा वैरिएंट को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कही ये बात (WHO on Covid Lambda Variant)

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना के नए लैंब्डा वैरिएंट को 'वैरिएंट ऑफ कंसर्न' घोषित किया है। डब्ल्यूएचओ ने अपने साप्ताहिक बुलेटिन में कहा है कि, "कोरोना का नया लैंब्डा वैरिएंट कई देशों में तेजी से फैल रहा है और समय के साथ-साथ नए मामलों में लैंब्डा वैरिएंट का प्रतिशत भी बढ़ रहा है।" डब्ल्यूएचओ की बुलेटिन में कहा गया है, "लैंब्डा वैरिएंट में संदिग्ध फेनोटाइपिक प्रभाव के साथ कई उत्परिवर्तन होते हैं, जैसे ट्रांसमिसिबिलिटी या एंटीबॉडी के असर को कम करने की इसकी क्षमता।" विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे वैरिएंट ऑफ कंसर्न घोषित करते हुए कहा है कि दक्षिणी अमेरिका, पेरू, इक्वाडोर, अर्जेंटीना और ब्रिटेन जैसे देशों में इसका प्रसार तेजी से हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना के नए लैंब्डा वैरिएंट को लेकर सलाह (WHO Recommendation on Lambda Variant) देते हुए कहा है कि, "वायरस के इस नए स्ट्रेन का संक्रमण तेजी से फैलने की उम्मीद है, इससे बचने के लिए दुनियाभर के देशों को वैश्विक रणनीति बनाने की जरुरत है।"

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लैंब्डा वैरिएंट है डेल्टा से अधिक खतरनाक (Lambda Variant is More Dangerous Than Delta)

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, कोरोना के नए लैंब्डा वैरिएंट में डेल्टा वैरिएंट की तुलना में अधिक म्युटेशन होता है। डेल्टा प्लस वैरिएंट में कुल तीन म्युटेशन होते थे लेकिन लैंब्डा वैरिएंट में कुल 7 म्युटेशन होते हैं। इसलिए यह स्ट्रेन एंटीबाडी के प्रभाव और इलाज के असर को कम करने में पहले के वैरिएंट की तुलना में अधिक सक्षम है। लैंब्डा वैरिएंट को लेकर चिली में हाल ही में हुए एक रिसर्च के मुताबिक लैंब्डा वैरिएंट में अल्फा और गामा वैरिएंट की तुलना में संक्रमण की क्षमता अधिक है। चूंकि इस नए स्ट्रेन का म्युटेशन अन्य स्ट्रेन की तुलना में अधिक है इसलिए वैज्ञानिक इसे ज्यादा खतरनाक मान रहे हैं। हलांकि अभी इसको लेकर और जानकारी मिलनी बाकी है।

लैंब्डा वैरिएंट पर वैक्सीन का असर (Covid Vaccine Efficacy on Lambda Variant)

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में वैक्सीन और बचाव के उपाय ही सबसे बड़े हथियार हैं। दुनियाभर के देशों में इसके कहर से बचने के लिए टीकाकरण अभियान चलाये जा रहे हैं। भारत में कोरोना के खिलाफ तेजी से वैक्सीन लगाने का अभियान चल रहा है। लेकिन इन सबके बीच लैंब्डा वैरिएंट ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। पहले यह कहा जा रहा था कि डेल्टा प्लस वैरिएंट पर वैक्सीन का कुछ कम असर हो रहा है लेकिन अब वैज्ञानिक लैंब्डा वैरिएंट पर वैक्सीन के असर को लेकर शोध कर रहे हैं। कोरोना के नए लैंब्डा वैरिएंट पर वैक्सीन के असर को लेकर नयी-नयी जानकारी सामने आ रही है। अमेरिका में हुए एक अध्ययन के मुताबिक कोरोना के नए लैंब्डा वैरिएंट पर वैक्सीन का असर तो है लेकिन इस वायरस में वैक्सीन के असर को कम करने की क्षमता भी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि लैंब्डा वैरिएंट पर वैक्सीन का असर होगा लेकिन कितनी मात्रा में इसका असर हो रहा है इस बारे में सटीक जानकारी अभी तक नहीं मिल पायी है। कारों के लगातार बदल रहे स्वरुप की वजह से वैक्सीन का असर भी इन पर कम हो रहा है, इसके पीछे सबसे प्रमुख कारण नए स्ट्रेन की म्युटेशन क्षमता मानी जा रही है।

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लैंब्डा वैरिएंट को लेकर भारत की स्थिति (Where Does India Stand?)

कोरोना का नया लैंब्डा वैरिएंट अभी तक भारत या भारत के पड़ोसी देशों में नहीं पाया गया है। पूरे एशिया में अब तक केवल इजराइल में इस नए स्ट्रेन से संक्रमित मरीज की पुष्टि हुई है। लेकिन चिंता की बात यह है कि भारत से यूरोप समेत कई ऐसे देशों में यात्राएं हो रही हैं जहां पर लैंब्डा वैरिएंट तेजी से फैल रहा है। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय यात्रा करने वाले लोगों से इस संक्रमण के फैलने की आशंका हर देश में जताई जा रही है। भारत में सरकारी सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि कोरोना के नए स्ट्रेन लैंब्डा वैरिएंट का कोई भी केस देश में नही है।

लैंब्डा वैरिएंट के लक्षण (Covid Lambda Variant Symptoms)

वैज्ञानिकों के मुताबिक दुनिया के 30 देशों में फैल चुके कोरोना के नए लैंब्डा वैरिएंट की संक्रमण क्षमता पहले से अधिक है। इसके म्युटेशन की वजह से इस पर वैक्सीन का असर भी कम हो सकता है। कोरोना के अन्य वैरिएंट की तरह इस नए वैरिएंट के लक्षण भी एक समान ही हैं। लैंब्डा वैरिएंट के कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार से हैं।

  • हाई फीवर
  • लगातार खांसी
  • गंध या स्वाद का चले जाना
  • सांस लेने में तकलीफ
  • छाती में दर्द 
  • अत्यधिक थकान
  • गले में खराश
  • डायरिया
  • लगातार सिरदर्द
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वैज्ञानिकों और एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस नए स्ट्रेन के लक्षण डेल्टा वैरिएंट के समान ही है लेकिन इसका प्रभाव पहले के वैरिएंट की तुलना में ज्यादा है। आपको बता दें कि कोरोना के नए-नए वैरिएंट के नाम उनके संक्रमण क्षमता और अन्य कारणों के आधार पर बदले जाते हैं। लेकिन कोरोनावायरस का वैज्ञानिक नाम SARS-CoV-2 ही है। वायरस के म्युटेशन, उसकी बदलती संक्रमण क्षमता के आधार पर दवा, जांच और इलाज का तरीका भी बदलता है।

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