कोरोना वैक्सीन की Efficacy और Effectiveness में क्या अंतर है? कैसे तय किया जाता है कौन सी वैक्सीन है बेस्ट

अगर आपके मन में भी वैक्‍सीन को लेकर डर है तो आज हम आपको बताएंगे कि वैक्‍सीन की सेफ्टी कैसे सुन‍िश्‍च‍ित क‍ी जाती है

Yashaswi Mathur
Written by: Yashaswi MathurPublished at: May 03, 2021Updated at: May 03, 2021
कोरोना वैक्सीन की Efficacy और Effectiveness में क्या अंतर है? कैसे तय किया जाता है कौन सी वैक्सीन है बेस्ट

ये कैसे तय क‍िया जाता है क‍ि कौनसी वैक्‍सीन बेस्‍ट है? कोव‍िड के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों में कोरोना को लेकर डर है। 18 उम्र से ऊपर वालों को वैक्‍सीन लगना शुरू हो गई है पर कुछ लोगों के मन में अब भी वैक्‍सीन को लेकर डर है। इसे देखते हुए आज हम आपको बताएंगे क‍ि वैक्‍सीन की गुणवत्‍ता कैसे मापी जाती है और वैक्‍सीन लगाने से पहले र‍िसर्च्स ये कैसे सुन‍िश्‍च‍ित करते हैं क‍ि लोगों को लगाई जा रही वैक्‍सीन उनके ल‍िए सेफ है। इसके साथ ही हम आपको ये भी बताएंगे क‍ि भारत में लगाई जाने वाली वैक्‍सीन की प्रभावशीलता और क्षमता क‍ितनी है। इसे जानकर आपके मन में वैक्‍सीन के प्रत‍ि डर कुछ हद तक कम हो जाएगा। ज्‍यादा जानकारी के ल‍िए हमने लखनऊ के केयर इंस्‍टिट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज की एमडी फ‍िजिश‍ियन डॉ सीमा यादव से बात की। 

vaccine safety

वैक्‍सीन की सेफ्टी कैसे सुन‍िश्‍च‍ित करते हैं? (How Trials make sure that the Vaccine is safe)

क‍िसी भी वैक्‍सीन को लोगों को लगाने से पहले कई क्‍लीन‍िकल ट्रायल होते हैं। इसके ल‍िए वैक्‍सीन की क्षमता 50 प्रत‍िशत से ज्‍यादा होनी चाह‍िए। वैक्‍सीन को अप्रूव होने से पहले तीन क्‍लीन‍िकल ट्रायल से गुजरना होता है। पहले फेस में कम लोगों को वैक्‍सीन लगाई जाती है। दूसरे फेस में वैक्‍सीन का लोगों पर असर देखते हुए क्‍लीन‍िकल स्‍टडी की जाती है और तीसरे फेस में कई हजार लोगों को वैक्‍सीन लगाई जाती है। कभी-कभी वैक्‍सीन चौथे चरण से पास होकर अप्रूव की जाती है। 

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वैक्‍सीन की एफ‍िकेसी क्‍या होती है? (What is Efficacy of Vaccine) 

वैक्‍सीन लगवाने के बाद बीमार पड़ने वाले लोग और वैक्‍सीन के बि‍ना बीमार पड़ने वाले लोगों के बीच का अंतर को हम एफ‍िकेसी efficacy कहते हैं। ये फेस 3 के दौरान मापी जाती है जब र‍िसर्च्स कुछ लोगों को वैक्‍सीन लगाते हैं और कुछ लोगों को प्‍लास‍िबो placebo लगाते हैं। प्‍लास‍िबो का मतलब होता है फेक ट्रीटमेंट। यानी ट्रायल में वॉल‍ींट‍ियर को लगाए जाने वाला इंएक्‍ट‍िव सब्‍सटेंस जो क‍ि प‍िल, वैक्‍सीन कुछ भी हो सकता है। इसकी मदद से क‍िसी नए ड्रग को ट्राय क‍िया जाता है। कुछ लोगों को र‍ियल वैक्‍सीन दी जाती है वहीं कुछ को प्‍लास‍िबो द‍िया जाता है और फिर दोनों के असर में अंतर को देखा जाता है। उसके बाद ये ट्रायल में ये देखा जाता है क‍ि जि‍न लोगों को वैक्‍सीन दी गई उनमें प्‍लास‍िबो लगवाने वाले लोगों के मुकाबले इंफेक्‍शन का रेट कम है या नहीं। इसे ऐसे समझ‍िए क‍ि मान लें अगर वैक्‍सीन की एफ‍िकेसी 75 प्रत‍िशत है। इस केस में अगर 100 लोगों को वैक्‍सीन लगाई गई है ज‍िन्‍हें कोरोना नहीं था तो उनमें से 75 लोगों को आगे कोरोना नहीं होगा। वैक्‍सीन की एफ‍िकेसी जि‍तनी ज्‍यादा होगी वो इंफेक्‍शन को कम करने में उतना ही प्रभावी होगी। 

वैक्‍सीन की प्रभावशीलता क्‍या होती है? (What is Effectiveness of Vaccine)

vaccine efficacy 

जैसे एफ‍िकेसी efficacy को क्‍लीन‍िकल ट्रायल में माप ल‍िया जाता है वैसे वैक्‍सीन की प्रभावशीलता effectiveness तब मापी जाती है जब वैक्‍सीन को आम लोगों को लगाने का अप्रूवल म‍िलता है। वैक्‍सीन की प्रभावशीलता बहुत से फैक्‍टर्स से मापी जाती है जैसे वायरस के फैलने का रेट, क‍ितने प्रत‍िशत लोग वैक्‍सीन लगवा रहे हैं, वैक्‍सीन का स्‍टोरोज तापमान आदि। कुछ और पैरामीटर्स हैं ज‍िससे वैक्‍सीन की प्रभावशीलता मापी जाती है जैसे क‍िस उम्र के लोगों को वैक्‍सीन लगाई गई, वैक्‍सीन का प्रोटेक्‍शन टाइम। वैसे तो कोई भी वैक्‍सीन 100 प्रतिशत प्रभावशाली नहीं है। इसकी आशंका हमेशा रहेगी क‍ि कुछ लोगों पर वैक्‍सीन का कोई असर न हो। ऐसा भी हो सकता है क‍ि जि‍न लोगों को वैक्‍सीन लगाई गई है उन पर इसका असर कुछ समय बाद खत्‍म हो जाए। 

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भारत‍ियों को लगने वाली वैक्‍सीन क‍ितनी असरदार है? (How safe the vaccines are for Indians)

इस समय दो वैक्‍सीन भारत में लगाई जा रही है पहली कोव‍िशील्‍ड और दूसरी कोवाक्‍सीन। कोव‍िशील्‍ड की बात करें तो इंटरनेशनल क्लीन‍िकल ट्रायल में जब लोगों को हार्फ और फ‍िर फुल डोज दी गई तो वैक्‍सीन की प्रभावशीलता 90 प्रत‍िशत थी। वैसे डॉक्‍टर्स ये मानते हैं क‍ि कोव‍िशील्‍ड की पहली डोज 70 प्रति‍शत इफेक्‍ट‍िव या प्रभावशाली है। वहीं अगर बात करें कोवाक्‍सीन की तो फेस 3 ट्रायल के मुताब‍िक वैक्‍सीन की एफ‍िकेसी यानी क्षमता 78 से 91 प्रत‍िशत के बीच है। इसके अलावा भारत में स्‍पूतन‍िक-वी वैक्‍सीन की पहली खेप भी आ चुकी है। अगर इस वैक्‍सीन की बात करें तो लैंसेट की र‍िपोर्ट की मुताब‍िक स्‍पूतन‍िक-वी वैक्‍सीन को लगवाने से कोरोना वायरस के ख‍िलाफ 92 प्रत‍िशत सुरक्षा म‍िलती है।

आपको जो वैक्‍सीन लगाई जा रही है वो पूरी तरह से सेफ है इसल‍िए डरें नहीं, माइल्‍ड स‍िम्‍टम्‍स वैक्‍सीन लगने की न‍िशानी है उससे डरें नहीं। कोई भी शंका होने पर अपने डॉक्‍टर से संपर्क करें। 

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