स्ट्रेस टेस्ट क्या है? डॉक्टर से जानें किन परिस्थितियों में पड़ती है इस टेस्ट की जरूरत

स्ट्रेस टेस्ट हृदय संबंधी एक जांच है। यहां डॉक्टर से जानें इससे जुड़ी सभी जरूरी बातें। 

 
Kunal Mishra
Written by: Kunal MishraUpdated at: Jul 23, 2021 16:37 IST
स्ट्रेस टेस्ट क्या है? डॉक्टर से जानें किन परिस्थितियों में पड़ती है इस टेस्ट की जरूरत

आजकल के खराब लाइफस्टाइल और असंतुलित खान-पान के कारण हृदय संबंधित समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। हृदय रोगों में पिछले कुछ समय से लगातार इजाफा देखा जा रहा है। हालांकि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। क्या आप स्ट्रेस टेस्ट के बारे में कुछ जानते हैं? अगर नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम आपको स्ट्रेस टेस्ट से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियों के बारे में बताएंगे। दरअसल, स्ट्रेस टेस्ट हृदय से संबंधित एक जांच है, जिसे हृदय की कार्यक्षमता का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसे टेडमील टेस्ट और एक्सरसाइज टेस्ट के नाम से भी जाना जाता है। यह टेस्ट आपके हार्ट की आर्टरीज में हो रही ब्लड सप्लाई का पता लगाने के लिए भी किया जाता है। इसी विषय पर अधिक जानकारी लेने के लिए हमने मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर संतोष कुमार डोरा (Dr. Santosh Kumar Dora, Senior Cardiologist, Asian Heart Institute, Mumbai) से बातचीत की। चलिए जानते हैं स्ट्रेस टेस्ट के बारे में। 

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क्या होता है स्ट्रेस टेस्ट (What Is Stress Test)

एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संतोष कुमार डोरा ने बताया कि स्ट्रेस टेस्ट एक प्रकार की जांच है, जो मुख्य रूप से हृदय की कार्यक्षमता को मोनिटर करने के लिए की जाती है। इस टेस्ट के जरिए चिकित्सक यह आसानी से पता लगा सकते हैं कि आपकी हार्ट बीट सुचारू है या नहीं या फिर हार्ट में जाने वाली आर्टरीज में रक्त का संचार प्रॉपर तरीके से है या फिर नहीं। हार्ट की सर्जरी से पहले भी कई बार इस टेस्ट की सलाह दी जाती है। 

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कैसे होता है स्ट्रेस टेस्ट (How Is Stress Test Done)

डॉ. संतोष कुमार डोरा ने बताया कि बहुत से लोग स्ट्रेस के नाम से इसे तनाव से जोड़ने लगते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। यह टेस्ट मुख्य रूप से हृदय के लिए ही होता है। इसे कार्डियो या ट्रेडमील टेस्ट के नाम से भी जाना जाता है। यह टेस्ट मरीज को ट्रेडमील पर चलवाकर किया जाता है। इस दौरान मरीज की बॉडी में ईसीजी केबल और ब्लड प्रेशर केबल लगा दी जाती है। इस दौरान ट्रेडमील की गति सामान्य ही रहती है। चलने के दौरान मरीज के हृदय में जो भी गतिविधियां होती हैं, जिसपर इलेक्ट्रोग्राम के जरिए चिकित्सक नजर बनाए रखते हैं। इस दौरान मरीज को धीरे-धीरे चलने की सलाह दी जाती है और फिर चिकित्सक द्वारा इसकी स्पीड बढ़ा दी जाती है। 

कितनी रहती है स्पीड (What Is The Speed)

डॉ. संतोष कुमार डोरा ने बताया कि स्ट्रेस टेस्ट के दौरान ट्रेडमिल पर मरीज की स्पीड पहले स्टेज में 10 डिग्री इंक्लेशन के साथ 1.7 मील प्रति घंटा रहती है। इस प्रकिया में 3 स्टेज होते हैं और तीनों की टाइम लिमिट 3 मिनट होती है। वहीं दूसरे स्टेज में 12 डिग्री इंक्लेशन के साथ 2.5 मील प्रति घंटे की स्पीड कर दी जाती है। वहीं तीसरे स्टेज में 14 डिग्री इंक्लेशन के साथ ही स्पीड को बढ़ाकर 3 मील प्रति घंटा कर दी जाती है। डॉ. डोरा ने बताया कि स्ट्रेस टेस्ट के दौरान अगर मरीज का ब्लड प्रेशर बढ़ना या फिर ईसीजी में किसी प्रकार का बदलाव होने लगे तो मरीज में कोरोनरी आर्टरी डिजीज का भी खतरा हो सकता है। 

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कब पड़ती है स्ट्रेस टेस्ट की जरूरत (When Stress Test is Needed)

  • स्ट्रेस हृदय से संबंधित जटिलताओं का पता लगाने के लिए किया जाता है। 
  • डॉ. संतोष ने बताया कि कई बार स्ट्रेस टेस्ट की जरूरत अर्दमिया और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का पता लगाने के लिए किया जाता है। 
  • यह टेस्ट कार्डियक डिजीज डायग्नॉस करने के लिए किया जाता है। 
  • स्लीप साइकिल में किसी तरह का बदलाव आना या फि घबराहट होने पर भी यह टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। 
  • कई बार सांस लेने में तकलीफ होना या फिर ज्यादा चक्कर आने की परिस्थिती में भी स्ट्रेस टेस्ट किया जाता है। 
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स्ट्रेस ईको टेस्ट क्या है (What is Stress Eccho Test) 

स्ट्रेस ईको टेस्ट एक तरह का इमेज टेस्ट है। जिसमें मुख्यरूप से स्ट्रेस टेस्ट के दौरान ईकोकार्डियोग्राफी की मदद ली जाती है। इसमें चिकित्सक आपकी हार्ट रिदम और ब्लड वेसेल्स का पता लगाते हैं। इसी प्रकार कई बार चिकित्सक समस्या तक पहुंचने के लिए न्यूक्लियर स्ट्रेस टेस्ट का भी सहारा लेते हैं। जिसमें गामा कैमरे का इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें हार्ट मसल्स में आई किसी प्रकार की असमानता का पता लगाया जाता है। 

यह लेख चिकित्सक द्वारा प्रमाणित है। इस लेख के जरिए आप स्ट्रेस टेस्ट से जुड़ी सभी बातें आसानी से समझ सकते हैं। 

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