सीने में दर्द का कारण हार्ट अटैक है या पेट की गैस? डॉक्टर से जानें कैसे पहचानें दोनों में अंतर

छाती में टिपिकल चेस्ट पेन को पहनचानना आसान है, लेकिन एटिपिकल चेस्ट पेन को पहचानना मुश्किल है। लेकिन इनके लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है।

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiPublished at: Jul 22, 2021Updated at: Jul 22, 2021
सीने में दर्द का कारण हार्ट अटैक है या पेट की गैस? डॉक्टर से जानें कैसे पहचानें दोनों में अंतर

अक्सर लोग यह पहचानने में गलती कर देते हैं कि छाती का दर्द हार्ट अटैक है या गैस का। अमूमन देखा गया है कि छाती के दर्द या जलन को लोग गैस का दर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में हृदय संबंधी परेशानियों के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। राजकीय हृदय रोग संस्थान, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, में कार्यरत वरिष्ठ प्रोफेसर ऑफ कार्डियोलॉजी डॉ. अवधेश शर्मा का कहना है कि किसी मरीज को अगर छाती में 15-20 मिनट तक लगातार दर्द हो, तो उसे तुरंत कार्डियोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए। हर बार सीने के दर्द को नजरअंदान न करें। छाती का दर्द का हार्ट अटैक का लक्षण है या गैस का, इसको कैसे पहचानें, इस विषय में डॉ. अवधेश शर्मा ने विस्तार से जानकारी दी।

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सीने में दर्द के प्रकार

डॉ. अवधेश शर्मा का कहना है कि छाती के दर्द को टिपिकल चेस्ट पेन और एटिपिकल चेस्ट पेन दो हिस्सों में बांटकर देखा जा सकता है। इन दोनों प्रकार के दर्द के लक्षणों को निम्न प्रकार से समझ सकते हैं-

टिपिकल चेस्ट पेन (Typical Chest Pain)

टिपिकल चेस्ट पेन को एंजाइना के नाम से भी जाना जाता है। हृदय की मांसपेशियों तक जब पूरी तर ऑक्सीजनयुक्त रक्त नहीं पहुंच पाता है तब छाती में असहजता महसूस होती है और छाती में दर्द होता है। ऐसी ही असहजता आपको कंधे, गर्दन, जबड़ा आदि में हो सकती है। एंजाइना कोरोनरी आर्टरी डिजीज का लक्षण है। कोरोनरी आर्टरी डिजीज तब होती है, जब कोई एक या उससे अधिक धमनियों में ब्लॉकेज हो जाता है। कोरोनरी माइक्रोवास्क्युलर डिजीज में भी चेस्ट पेन होता है। आमतौर पर छाती में दर्द को हृदय की बीमारी का लक्षण माना जाता है। इसलिए सीने के दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 

टिपिकल चेस्ट पेन के लक्षण

  • सीन के बीचों-बीच तेज दर्द होना
  • दर्द के साथ पसीना आना
  • पेशेंट को ऐसा लगता है कि उसकी जान निकल जाएगी
  • दर्द का बाएं हाथ, उंगली और जबड़े की तरफ रेडिएट होना।
  • चलने फिरने पर तेज दर्द होना
  • आराम करने पर आराम मिलना
  • सांस लेने में दिक्कत होना
  • मतली, उल्टी
  • सांस लेने में दिक्कत
  • चक्कर 
  • थकान

यह सभी लक्षण हार्ट अटैक की पहचान के लक्षण हैं।

एटिपिकल चेस्ट पेन (Atypical chest pain)

एटिपिकल चेस्ट पेन टिपिकल चेस्ट पेन से बिल्कुल अलग होता है। एटिपिकल चेस्ट पेन को साइलेंट हार्ट अटैक कहा जाता है। ऐसे मरीज छाती के दर्द को गैस या कमजोरी समझकर नजरअंदाज करते हैं। धीरे-धीरे जब दिक्कत बढ़ती है, तब वह डॉक्टर से बात करता है। डॉक्टर ईसीजी करके देखता है कि उसे गैस की दिक्कत है, या हार्ट की प्रॉब्लम है।

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एटिपिकल चेस्ट पेन के लक्षण

डॉ. अवधेश शर्मा का कहना है कि अमूमन एटिपिकल चेस्ट पेन को पहचानना मुश्किल होता है। सीने में दर्द वैसा नहीं होता जैसा टिपिकल में होता है। इसे साइलेंट हार्ट अटैक भी कहा जाता है। एटिपिकल चेस्ट पेन में पेशेंट को दर्द नहीं होता लेकिन फिर भी अटैक आ जाता है। एटिपिकल लक्षण ज्यादा खतरनाक होते हैं बशर्ते टिपिकल सिंपटकम के। आमतौर पर इसके निम्न लक्षण दिखाई देते हैं-

गैस बनना

ऐसे मरीजों को सीने में दर्द नहीं होगा बल्कि गैस बनेगी। इनको पेट में भारीपन होगा। खट्टी डकारें आएंगी। अपच होगी। पेट में अजीब सी सेंसेशन होगी। पेट के ऊपर का हिस्से में बेचैनी होती है या जलन होती है। नाभि के ऊपर रिब्स के बीच वाला हिस्से में ये लक्षण महसूस होते हैं। 

बहुत ज्यादा थकान

कुछ मरीजों में बहुत अधिक महसूस होती है।

सांस लेने में दिक्कत

कुछ मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें केवल सांस लेने में दिक्कत होती है, उनकी सांस फूलती है।

बहुत ज्यादा पसीना आना

कई बार ऐसे मरीजों को सीने में दर्द भी नहीं होता है, लेकिन फिर भी पसीना बहुत ज्यादा आता है। बेचैनी होती है।

चक्कर आना

कुछ मरीजों को बिना वजह चक्कर भी आते हैं।

उपरोक्त लक्षण किसी भी क्षण हो सकते हैं और 15-20 मिनट से ज्यादा रह सकते हैं। यह गैर-हृदय संबंधी परेशानियों के भी हो सकते हैं। इसलिए अगर आप ऐेसे लक्षणों को महसूस कर रहे हैं तो बिना देर किए डॉक्टर से बात करें। एटिपिकल में मरीज गैस के लक्षण समझकर नजरअंदाज करते हैं। रोजाना वाली गैसी की दिक्कत होगी तो दवा से ठीक हो जाएगी। लेकिन हार्ट अटैक के लक्षणों में पेट में जलन, ऐंठन, अपच हो सकती है। ये गैस की गोली लेने से भी ठीक नहीं होती। जैसे ही कोई व्यक्ति काम करेगा तो ये परेशानी बढ़ जाएगी। धुम्रपान वाले मरीजों में ऐसे लक्षण ज्यादा खतरनाक साबित होते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। 

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असामान्य छाती का दर्द निम्न कारणों से हो सकता है-

  • गैस की समस्या
  • फेफड़ों से संबंधी परेशानियां
  • एसिड रिफ्लक्स
  • तनाव
  • मस्कुलोस्केलेटल बीमारी (musculoskeletal Disease)
  • कोस्टोकॉन्ड्राइटिस (Costochondritis)

एटिपिकल चेस्ट पेन के लक्षण किन लोगों में ज्यादा दिखते हैं?

इस सवाल के जवाब में डॉक्टर अवधेश शर्मा ने निम्न परिस्थितियां बताईं-

कमजोर इम्युनिटी

डॉ. अवधेश शर्मा का कहना है कि जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है, वे एटिपिकल चेस्ट पेन के ज्यादा प्रोन होते हैं। कमजोर इम्युनिटी में यह चेस्ट पेन ज्यादा दिखाई देता है।

अनियंत्रित डायबिटिज

ऐसे मरीज जिन्हें डायबिटीज या अनियंत्रित डायबिटीज है, वे लोग एटिपिकल चेस्ट पेन के ज्यादा भोगी हो सकते हैं। तो वहीं, कैंसर जैसी बीमारियों में भी एटिपिकल चेस्ट पेन होता है। यह सभी गंभीर बीमारियां हैं, इनमें व्यक्ति की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। 

बुजुर्ग व महिलाएं

बुजुर्गों की उम्र बढ़ने की वजह से इम्युनिटी तो कमजोर होती ही है साथ ही उनमें बीमारियां भी बढ़ती हैं, यही वजह है कि इन लोगों में हार्ट की बीमारियां भी बढ़ती हैं। इस समय तक हृदय की मांसपेशियां भी सिकुड़ने लगती हैं। इसलिए रक्त का प्रवाह भी प्रभावित होता है। तो वहीं, वे महिलाएं जिनका मेनोपॉज वाला पीरियड है या खत्म हो गया है, वे हृजय रोगों के लिए अधिक प्रोन हो जाती हैं। बुजुर्ग और महिलाओँ में भी एटिपिकल चेस्ट पेन दिखाई देता है। 

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क्या है बचाव?

डॉक्टर अवधेश शर्मा का कहना है कि जैसे ही आपको लक्षण दिखाई देते हैं तो डॉक्टर से मिलें। डॉक्टर कारणों के अनुसार परेशानी का समाधान ढूंढ़ते हैं। इसके अलावा हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर हार्ट को स्वस्थ रखा जा सकता है। अभी तक देखा गया है कि दिल की ज्यादातर बीमारियां एक्सरसाइज की कमी, बिगड़ता खानपान आदि के कारण होती हैं, अगर हम नियमित तौर पर एक्सरसाइज करें और हेल्दी डाइट को फॉलो करें तो हार्ट की बीमारियों से भी सकते हैं। 

कुछ मामलों में छाती में दर्द होना आम है, लेकिन अगर यह दर्द लगातार हो रहा है साथ ही दर्द के साथ पसीना, सांस लेने में दिक्कत, बहुत अधिक थकान, खुल्टी, खांसी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो बिना देर किए डॉक्टर से बात करें। सीने में जलन को नजरअंदाज करके दिल की बीमारी को न्योता न दें। जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से बात करें। टिपिकल चेस्ट पेन को पहनचानना आसान है, लेकिन एटिपिकल चेस्ट पेन को पहचानना मुश्किल है।

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