त्वचा में बढ़ रहे पिगमेंटेशन को ना करें नजरअंदाज, जानें पिगमेंटेशन के प्रकार और इनका कारण

पिगमेंटेशन कई प्रकार के होते हैं, जो कि उम्र बढ़ने के साथ बदल भी सकते हैं। तो, आइए जानते हैं पिगमेंटेशन कब और कैसे होता है।

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त्‍वचा की देखभालWritten by: सम्‍पादकीय विभागPublished at: Aug 13, 2013Updated at: Jun 25, 2021
त्वचा में बढ़ रहे पिगमेंटेशन को ना करें नजरअंदाज, जानें पिगमेंटेशन के प्रकार और इनका कारण

बेदाग खूबसूरत त्‍वचा कौन नहीं चाहता पर आज कल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल में ये काम करना थोड़ा मुश्किल है। दरअसल, खराब लाइफस्टाइल, अनहेल्दी आदतों और बढ़ते प्रदूषण के चलते हमारी त्वचा दिन पर दिन खराब हो रही है। इसके चलते हमें स्किन से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पिगमेंटेशन  (pigmentation on face) एक ऐसी ही समस्‍या है, जिसमें त्वचा असान रंगत वाली दिखने लगती है। इसे पिगमेंटेशन या हायपरपिगमेंटेशन भी कहा जाता है। इस समस्‍या में त्‍वचा का कुछ हिस्‍सा सामान्‍य से गहरा रंग का हो जाता है। इसके अलावा कई बार त्‍वचा पर धब्‍बे भी पड़ जाते हैं। आमतौर पर यह समस्‍या कोई हान‍ि नहीं पहुंचाती। पिगमेंटेशन की सबसे बड़ी वजह त्‍वचा में मेलानिन का स्‍तर बढ़ना होती है। पूरी दुनिया के लोगों को त्‍वचा संबंधी इस समस्‍या का सामना करना पड़ता है। पर आज हम बात पिगमेंटेशन के प्रकार (Types of pigmentation) और उनके विभिन्न कारणों की करेंगे। 

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पिगमेंटेशन के प्रकार-Types of Pigmentation

1. मेलेसमा (Melasma)

त्‍वचा की यह समस्‍या अधिकतर व्‍यस्‍कों में देखने को मिलती है। इसमें चेहरे पर भूरे रंग के धब्‍बे उभर आते हैं। चेहरे के दोनों ओर इस तरह के निशान आ जाते हैं। चेहरे के जिस हिस्‍से पर मेलेसमा के निशान सबसे अधिक नजर आते हैं, उनमें गाल, नाक, माथा और ऊपरी होंठ शामिल होता है। यह समस्‍या महिलाओं में अधिक सामान्‍य है। इस समस्‍या से पीड़ि‍त होने वाले लोगों में पुरुषों की संख्‍या केवल दस फीसदी होती है। गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने वाली महिलाओं में यह समस्‍या सबसे अधिक देखी जाती है। अगर वे महिलायें सूर्य की रोशनी में अधिक वक्‍त बितायें तो उनकी समस्‍या बढ़ जाती है। गर्मियों के दिनों में यह समस्‍या काफी अधिक होती है।

2. पुल्टिस (Plutus)

कुछ गर्भवती महिलाओं की त्‍वचा में मेलानिन का उत्‍पादन काफी अधिक होने लगता है। इस स्थिति को च्‍लोसमा (पुल्टिस) कहा जाता है। कुछ लोग इसे 'माक्‍स ऑफ प्रेग्‍नेंसी' भी कहते हैं। यह निशान आमतौर पर महिलाओं के चेहरे और उनके पेट के आसपास नजर आते हैं। यह निशान काफी बड़े क्षेत्र में फैल सकते हैं और सूर्य की रोशनी में अधिक वक्‍त बिताने से यह समस्‍या बढ़ सकती है।

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3. सन डैमेज (Sun damage)

ढलती उम्र के निशानों को कई बार 'लिवर स्‍पॉट' भी कहा जाता है। यह भी पिगमेंटेशन का ही एक प्रकार है। सूर्य की हानिकारक अल्‍ट्रा वायलेट किरणों से त्‍वचा को काफी नुकसान होता है। इस समस्‍या का सबसे बड़ा कारण सूर्य की रोशनी में अधिक वक्‍त बिताना भी होता है। छोटे लेकिन गहरे धब्‍बे इस समस्‍या का सबसे आम लक्षण होते हैं। ये निशान आमतौर पर हाथों और चेहरों पर नजर आते हैं। लेकिन, शरीर का कोई भी हिस्‍सा जो काफी देर तक सूर्य की किरणों के संपर्क में रहता है वहां ऐसी समस्‍या हो सकती है।

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4. झाइयां (freckles)

यह भी त्‍वचा से जुड़ी एक सामान्‍य समस्‍या है। इसमें त्‍वचा पर कुछ निशान पड़ जाते हैं। त्‍वचा की इस समस्‍या को वंशानुगत भी माना जाता है। हालांकि, कुछ लोग झाइयों को आकर्षक मानते हैं, लेकिन अधिकतर की नजर में यह खूबसूरती पर छाए बादल ही हैं, जिनसे जल्‍द से जल्‍द निजात पायी जानी चाहिए।

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5. पीआईएच (Post-Inflammatory Hyperpigmentation)

पीआईएच यानी पोस्‍ट इंफ्लेमेटरी हायपरपिगमेंटशन की समस्‍या आमतौर पर त्‍वचा पर किसी प्रकार की चोट के बाद ही नजर आती है। यह समस्‍या एक्‍ने के निशानों और त्‍वचा पर अन्‍य किसी प्रकार के घावों के बाद अधिक मुखर हो जाती है। इसके साथ ही लेजर थेरेपी से होने वाले नुकसान के चलते भी यह समस्‍या सामने आ सकती है। इसके साथ ही कुछ सौंदर्य उत्‍पादों में भी हानिकारक केमिकल होते हैं, जो त्‍वचा के लिए फायदेमंद नहीं होते। ऐसे उत्‍पादों का अधिक इस्‍तेमाल भी यह समस्‍या पैदा कर सकता है।

तो, ये थे पिगमेंटेशन के प्रकार और इन सभी से बचने का एक उपाय ये है कि पहले तो आप अपनी लाइफस्टाइल सही करें, सही डाइट लें, एक्सरसाइज करें और फिर अपने स्किन केयर रूटीन में कुछ जरूरी बदलाव लाएं, ताकि आपको पिगमेंटेशन की दिक्कत न हो।

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